सूरए हूद मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी एक सौ तेईस (123) आयते हैं
(मैं) उस ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है
अलिफ़ लाम रा - ये (क़़ुरान) वह किताब है जिसकी आयते एक वाकिफ़कार हकीम की तरफ से (दलाएल से) खूब मुस्तहकिम (मज़बूत) कर दी गयीं (1)
फिर तफ़सीलदार बयान कर दी गयी हैं ये कि ख़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मै तो उसकी तरफ से तुम्हें (अज़ाब से) डराने वाला और (बहिश्त) ख़ुशख़बरी देने वाला (रसूल) हूँ (2)
और ये भी कि अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ माँगों फिर उसकी बारगाह में (गुनाहों से) तौबा करो वही तुम्हें एक मुकर्रर मुद्दत तक अच्छे नुत्फ के फायदे उठाने देगा और वही हर साहबे बुज़ुर्ग को उसकी बुज़ुर्गी (की दाद) अता फरमाएगा और अगर तुमने (उसके हुक्म से) मुँह मोड़ा तो मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े (ख़ौफनाक) दिन के अज़ाब का डर है (3)
(याद रखो) तुम सब को (आखि़रकार) ख़़ुदा ही की तरफ लौटना है और वह हर चीज़ पर (अच्छी तरह) क़ादिर है (4)
(ऐ रसूल) देखो ये कुफ्फ़ार (तुम्हारी अदावत में) अपने सीनों को (गोया) दोहरा किए डालते हैं ताकि ख़़ुदा से (अपनी बातों को) छिपाए रहें (मगर) देखो जब ये लोग अपने कपड़े ख़ूब लपेटते हैं (तब भी तो) ख़़ुदा (उनकी बातों को) जानता है जो छिपाकर करते हैं और खुल्लम खुल्ला करते हैं इसमें शक नहीं कि वह सीनों के भेद तक को खूब जानता है (5)
और ज़मीन पर चलने वालों में कोई ऐसा नहीं जिसकी रोज़ी ख़ुदा के जि़म्मे न हो और ख़ुदा उनके ठिकाने और (मरने के बाद) उनके सौपे जाने की जगह (क़ब्र) को भी जानता है सब कुछ रौशन किताब (लौहे महफूज़) में मौजूद है (6)
और वह तो वही (क़ादिरे मुतलक़) है जिसने आसमानों और ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया और (उस वक़्त) उसका अर्श (फलक नहुम) पानी पर था (उसने आसमान व ज़मीन) इस ग़रज़ से बनाया ताकि तुम लोगों को आज़माए कि तुममे ज़्यादा अच्छी कार गुज़ारी वाला कौन है और (ऐ रसूल) अगर तुम (उनसे) कहोगे कि मरने के बाद तुम सबके सब दोबारा (क़ब्रों से) उठाए जाओगे तो काफि़र लोग ज़रुर कह बैठेगें कि ये तो बस खुला हुआ जादू है (7)
और अगर हम गिनती के चन्द रोज़ो तक उन पर अज़ाब करने में देर भी करें तो ये लोग (अपनी शरारत से) बेताम्मुल ज़रुर कहने लगेगें कि (हाए) अज़ाब को कौन सी चीज़ रोक रही है सुन रखो जिस दिन इन पर अज़ाब आ पडे़ तो (फिर) उनके टाले न टलेगा और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाया करते थे वह उनको हर तरह से घेर लेगा (8)
और अगर हम इन्सान को अपनी रहमत का मज़ा चखायें फिर उसको हम उससे छीन लें तो (उस वक़्त) यक़ीनन बड़ा बेआस और नाशुक्रा हो जाता है (9)
(और हमारी शिकायत करने लगता है) और अगर हम तकलीफ के बाद जो उसे पहुँचती थी राहत व आराम का जाएक़ा चखाए तो ज़रुर कहने लगता है कि अब तो सब सख़्तियाँ मुझसे दफा हो गई इसमें शक नहीं कि वह बड़ा (जल्दी खुश होने शेख़ी बाज़ है (10)
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
31 अक्टूबर 2026
अलिफ़ लाम रा - ये (क़़ुरान) वह किताब है जिसकी आयते एक वाकिफ़कार हकीम की तरफ से (दलाएल से) खूब मुस्तहकिम (मज़बूत) कर दी गयीं (1) फिर तफ़सीलदार बयान कर दी गयी हैं ये कि ख़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मै तो उसकी तरफ से तुम्हें (अज़ाब से) डराने वाला और (बहिश्त) ख़ुशख़बरी देने वाला (रसूल) हूँ
30 अक्टूबर 2026
शाइन इंडिया के पायलेट प्रोजेक्ट मिशन सबल भारत की शुरुआत, विद्यार्थियों की नि:शुल्क जांच शुरू
शाइन इंडिया के पायलेट प्रोजेक्ट मिशन सबल भारत की शुरुआत, विद्यार्थियों की नि:शुल्क जांच शुरू
2. चिकित्सा शिविर में आँख और दांतों की समस्या से ग्रसित मिले विद्यार्थी
"मुस्कान भी तब ही अच्छी ,जब दाँत हो साफ़ और आँखों में रोशनी अच्छी..."
स्वस्थ,समृद्ध भारत व अंधत्व निवारण के केंद्र सरकार के अभियान में सहयोग देने के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा, कोटा शहर के राजकीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की आंखों की नि:शुल्क जांच एवं नि:शुल्क चश्मा वितरण के साथ-साथ उनका नि:शुल्क दंत परीक्षण किया गया।
संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ में बताया कि, शाइन इंडिया फाउंडेशन के दो माह के पायलट प्रोजेक्ट, मिशन सबल भारत के तहत आगामी दो माह में, संस्था के द्वारा राजकीय विद्यालयों में कक्षा 8 से 12 के छात्र-छात्राओं का नि:शुल्क नेत्र एवं दंत चिकित्सा परीक्षण किया गया,साथ ही दृष्टि दोष युक्त चयनित बच्चों को नि:शुल्क चश्मा का वितरण भी किया गया।
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत विज्ञान नगर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में ऑप्टोमेट्रिस्ट जी डी गुप्ता के सहयोग से बच्चों में दृष्टि दोष की जांच की गई,और दंत चिकित्सक डॉ ज्योति चौरसिया ने बच्चों के दांतों की जाँच की, और बच्चों को सही तरह से दांतों की देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।
प्रधानाचार्य अनीता शर्मा ने अंत में संस्था सदस्यों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि,सही उम्र में सही इलाज मिलने से, काफी हद तक कम उम्र में होने वाली अंधता को रोका जा सकता है। अच्छे आत्मविश्वास और अच्छी लीडरशिप के लिए, जीवन में आगे बढ़ने के लिए मन और शरीर दोनों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है।
डॉ ज्योति ने कहा कि,जब चेहरे पर अच्छी मुस्कान रहेगी और आँखों में अच्छी रोशनी रहेगी, तो बच्चे में अपने आप ही एक अच्छा कॉन्फिडेंस दिखेगा। ऐसा बच्चा न सिर्फ स्कूल में अच्छा स्कोर करेगा, बल्कि जीवन में भी बहुत अच्छे कार्य कर सकेगा।
(ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं
(ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं (101)
तो ये लोग भी उन्हें सज़ाओं के मुन्तिज़र (इन्तजार में) हैं जो उनसे क़ब्ल (पहले) वालो पर गुज़र चुकी हैं (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अच्छा तुम भी इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ यक़ीनन इन्तज़ार करता हूँ (102)
फिर (नुज़ूले अज़ाब के वक़्त) हम अपने रसूलों को और जो लोग ईमान लाए उनको (अज़ाब से) तलूउ बचा लेते हैं यूँ ही हम पर लाजि़म है कि हम इमान लाने वालों को भी बचा लें (103)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर तुम लोग मेरे दीन के बारे में शक में पड़े हो तो (मैं भी तुमसे साफ कहें देता हूँ) ख़़ुदा के सिवा तुम भी जिन लेागों की परसतिश करते हो मै तो उनकी परसतिश नहीं करने का मगर (हाँ) मै उस ख़ुदा की इबादत करता हूँ जो तुम्हें (अपनी कुदरत से दुनिया से) उठा लेगा और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मोमिन हूँ (104)
और (मुझे) ये भी (हुक्म है) कि (बातिल) से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ कायम रख और मुशरेकीन से हरगिज़ न होना (105)
और ख़ुदा को छोड़ ऐसी चीज़ को पुकारना जो न तुझे नफा ही पहुँचा सकती हैं न नुक़सान ही पहुँचा सकती है तो अगर तुमने (कहीं ऐसा) किया तो उस वक़्त तुम भी ज़ालिमों में (षुमार) होगें (106)
और (याद रखो कि) अगर ख़ुदा की तरफ से तुम्हें कोई बुराई छू भी गई तो फिर उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं होगा और अगर तुम्हारे साथ भलाई का इरादा करे तो फिर उसके फज़ल व करम का लपेटने वाला भी कोई नहीं वह अपने बन्दों में से जिसको चाहे फायदा पहुँचाएँ और वह बड़ा बख़्षने वाला मेहरबान है (107)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ लोगों तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) आ चुका फिर जो शख़्स सीधी राह पर चलेगा तो वह सिर्फ अपने ही दम के लिए हिदायत एख़्तेयार करेगा और जो गुमराही एख़्तेयार करेगा वह तो भटक कर कुछ अपना ही खोएगा और मैं कुछ तुम्हारा जि़म्मेदार तो हूँ नहीं (108)
और (ऐ रसूल) तुम्हारे पास जो ‘वही’ भेजी जाती है तुम बस उसी की पैरवी करो और सब्र करो यहाँ तक कि ख़ुदा तुम्हारे और काफिरों के दरम्यिान फैसला फरमाए और वह तो तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है (109)
29 अक्टूबर 2026
चिकित्सा मंत्री जी जनता की सुनो भीमगंजमंडी CHC की बदहाली! डॉक्टरों की कमी, एक्स-रे मशीन बंद और स्टील के पाइपों के पीछे से मरीजों का इलाज!
सोगरिया-रोटेदा ROB निर्माण में मनमानी - उमा शंकर नागर
फ़र्ज़ी लोगों की फ़र्ज़ी बातें,
अब (मरने) के वक़्त ईमान लाता है हालाकि इससे पहले तो नाफ़रमानी कर चुका और तू तो फ़सादियों में से था
अब (मरने) के वक़्त ईमान लाता है हालाकि इससे पहले तो नाफ़रमानी कर चुका और तू तो फ़सादियों में से था (91)
तो हम आज तेरी रुह को तो नहीं (मगर) तेरे बदन को (तह नशीं होने से) बचाएँगें ताकि तू अपने बाद वालों के लिए इबरत का (बाइस) हो और इसमें तो शक नहीं कि तेरे लोग हमारी निशानियों से यक़ीनन बेख़बर हैं (92)
और हमने बनी इसराइल को (मालिक शयाम में) बहुत अच्छी जगह बसाया और उन्हं अच्छी अच्छी चीज़ें खाने को दी तो उन लोगों के पास जब तक इल्म (न) आ चुका उन लोगों ने एख़्तेलाफ़ नहीं किया इसमें तो शासक ही नहीं जिन बातों में ये (दुनिया में) बाहम झगड़े रहे है क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार इसमें फैसला कर देगा (93)
पस जो कु़रान हमने तुम्हारी तरफ नाजि़ल किया है अगर उसके बारे में तुम को कुछ शक हो तो जो लोग तुम से पहले से किताब (ख़़ुदा) पढ़ा करते हैं उन से पूछ के देखों तुम्हारे पास यक़ीनन तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ किताब आ चुकी तो तू न हरगिज़ शक करने वालों से होना (94)
न उन लोगों से होना जिन्होंने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया (वरना) तुम भी घाटा उठाने वालों से हो जाओगे (95)
(ऐ रसूल) इसमें शक नहीं कि जिन लोगों के बारे में तुम्हारे परवरदिगार को बातें पूरी उतर चुकी हैं (कि ये मुस्तहके़ अज़ाब हैं) (96)
वह लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब देख (न) लेगें इमान न लाएगें अगरचे इनके सामने सारी (ख़ुदाई के) मौजिज़े आ मौजूद हो (97)
कोई बस्ती ऐसी क्यों न हुयी कि इमान क़ुबूल करती तो उसको उसका इमान फायदे मन्द होता हाँ यूनूस की क़ौम जब (अज़ाब देख कर) इमान लाई तो हमने दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी में उनसे रुसवाई का अज़ाब दफा कर दिया और हमने उन्हें एक ख़ास वक़्त तक चैन करने दिया (98)
और (ऐ पैग़म्बर) अगर तेरा परवरदिगार चाहता तो जितने लोग रुए ज़मीन पर हैं सबके सब इमान ले आते तो क्या तुम लोगों पर ज़बरदस्ती करना चाहते हो ताकि सबके सब इमानदार हो जाएँ हालाकि किसी शख़्स को ये एख़्तेयार नहीं (99)
कि बगै़र ख़़ुदा की इजाज़त ईमान ले आए और जो लोग (उसूले दीन में) अक़ल से काम नहीं लेते उन्हीं लेागें पर ख़़ुदा (कुफ्ऱ) की गन्दगी डाल देता है (100)
28 अक्टूबर 2026
*शरद पूर्णिमा पर,रोशनी का दान,कोटा से 120 किलोमीटर दूर से लिया नेत्रदान*
और ख़़ुदा सच्ची बात को अपने कलाम की बरकत से साबित कर दिखाता है अगरचे गुनाहगारों को ना गॅवार हो
फिर जब वह लोग (रस्सियों को साँप बनाकर) डाल चुके तू मूसा ने कहा जो कुछ तुम (बनाकर) लाए हो (वह तो सब) जादू है-इसमें तो ्यक ही नहीं कि ख़़ुदा उसे फौरन मिटियामेट कर देगा (क्योंकर) ख़ुदा तो हरगिज़ मफ़सिदों (फसाद करने वालों) का काम दुरुस्त नहीं होने देता (81)
और ख़़ुदा सच्ची बात को अपने कलाम की बरकत से साबित कर दिखाता है अगरचे गुनाहगारों को ना गॅवार हो (82)
अलग़रज़ मूसा पर उनकी क़ौम की नस्ल के चन्द आदमियों के सिवा फिरआऊन और उसके सरदारों के इस ख़ौफ से कि उन पर कोई मुसीबत डाल दे कोई ईमान न लाया और इसमें शक नहीं कि फिरआऊन रुए ज़मीन में बहुत बढ़ा चढ़ा था और इसमें शक नहीं कि वह यक़ीनन ज़्यादती करने वालों में से था (83)
और मूसा ने कहा ऐ मेरी क़ौम अगर तुम (सच्चे दिल से) ख़ुदा पर इमान ला चुके तो अगर तुम फरमाबरदार हो तो बस उसी पर भरोसा करो (84)
उस पर उन लोगों ने अजऱ् की हमने तो ख़़ुदा ही पर भरोसा कर लिया है और दुआ की कि ऐ हमारे पालने वाले तू हमें ज़ालिम लोगों का (ज़रिया) इम्तिहान न बना (85)
और अपनी रहमत से हमें इन काफि़र लोगों (के नीचे) से नजात दे (86)
और हमने मूसा और उनके भाई (हारुन) के पास ‘वही’ भेजी कि मिस्र में अपनी क़ौम के (रहने सहने के) लिए घर बना डालो और अपने अपने घरों ही को मस्जिदें क़रार दे लो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ों और मोमिनीन को (नजात का) खुशख़बरी दे दो (87)
और मूसा ने अजऱ् की ऐ हमारे पालने वाले तूने फिरआऊन और उसके सरदारों को दुनिया की जि़न्दगी में (बड़ी) आराइश और दौलत दे रखी है (क्या तूने ये सामान इस लिए अता किया है) ताकि ये लोग तेरे रास्तें से लोगों को बहकाए परवरदिगार तू उनके माल (दौलत) को ग़ारत (बरबाद) कर दे और उनके दिलों पर सख़्ती कर (क्योंकि) जब तक ये लोग तकलीफ देह अज़ाब न देख लेगें ईमान न लाएगें (88)
(ख़ुदा ने) फरमाया तुम दोनों की दुआ क़ुबूल की गई तो तुम दोनों साबित कदम रहो और नादानों की राह पर न चलो (89)
और हमने बनी इसराइल को दरिया के उस पार कर दिया फिर फिरआऊन और उसके लश्कर ने सरकशी की और शररारत से उनका पीछा किया-यहाँ तक कि जब वह डूबने लगा तो कहने लगा कि जिस ख़ुदा पर बनी इसराइल इमान लाए हैं मै भी उस पर ईमान लाता हूँ उससे सिवा कोई माबूद नहीं और मैं फरमाबरदार बन्दों से हूँ (90)
24 अक्टूबर 2026
एक और नवाचार से शहर वासियों को नेत्रदान अभियान से जोड़ने की मुहीम
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं)
(और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मषग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौषन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है (61)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे (62)
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़़ुदा से) डरते थे (63)
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की जि़न्दगी में भी और आखि़रत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है (64)
और (ऐ रसूल) उन (कुफ़्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक नहीं कि सारी इज़्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है (65)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फजऱ्) शररीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख़्याली बातें किया करते हैं (66)
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं) (67)
लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यूही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो (68)
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें (69)
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आखि़र हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख़्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें (70)
23 अक्टूबर 2026
छत्तीस क़ौमों के ऐतिहासिक कोटा मेले को दागदार करके , समुदाय ,, भाषा के आधार पर , बदनाम करने की साज़िश करने वालों के मुख पर कालिख पुती है
छत्तीस क़ौमों के ऐतिहासिक कोटा मेले को दागदार करके , समुदाय ,, भाषा के आधार पर , बदनाम करने की साज़िश करने वालों के मुख पर कालिख पुती है ,, महापौर कोटा अनुसुइया गोस्वामी ने खुद अपने हाथों में व्यवस्थाएं नियंत्रित की है , जो मेले को दागदार बनाने के साज़िशकर्ता रहे , उन्हें , मेले की व्यवस्थाओं को छूने भी नहीं दिया ,, महापौर कोटा ने बता दिया कि ,,महापोर का पद ही सर्वोपरि है , धन , बल , अनुभवों का रोना रोकर कोई भी महापौर के हक़ , अधिकार , रुतबे को कम करते हुए अतिक्रमित नहीं कर सकता , और यही वजह रही की मेले की शुरआत के पहले दशहरे में विजयादशमी के दिन ,, जो पहले रावण के पुतले को सर्वाधिक ऊँचा बनाने का अनुभवहीन जूनून था , जिसकी वजह से कोटा दशहरे में मुख्यमंत्री भजनलाल जी के सामने कोटा की किरकरी हुई ,, रावण जला नहीं , घटनाओं के साथ दुर्घटनायें होती होती बचीं ,,, और मेले के बाद कार्यक्रमों के कारण भी बदनामी हुई , दुकानों में लूटपाट ,, की शिकायतें आम हुईं , कई लोगों ने कोटा मेले के आमद , खर्च , दूकान आवंटन , कार्यक्रम खर्च वगेरा के मामले में , ऐंटी करप्पशन से भी जांच कराने की भी मांग की , लेकिन इस बार खुद महापौर अनुसईया गोस्वामी के हाथों में अधिकारों का अतिक्रमण करने वालों से अलग हटकर , सम्पूर्ण व्यवस्थाएं है , खुद महापौर अपने अधीनस्थों और तजुर्बेकारों से मशवरा कर व्यवस्थाएं देख रही हैं , ऐसे में उन्होंने कई व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का प्रयास किया है , मेले के कई बिगड़े हालातों में सकारात्मक सुधार किया है , ,कार्यक्रमों की सूचि रेडीमेड बनाकर उनके हाथों में सौंपी गई थी , तो उसमे तो वोह क्या पर पातीं , लेकिन कवि सम्मेलन में उर्दू शायरा ,, मशहूर शायर स्वर्गीय राहत इन्दोरी की पूर्व पत्नी श्रीमती अंजुम रहबर को बुलाने की स्वीकृति ,, कवि सम्मेलन कार्य्रकम में चार चाँद लगा देने जैसा है यह मेला छत्तीस क़ौमों का है यह तो नहीं कहा जा सकता , लेकिन जिन हालातों में उनके हाथों में कार्यक्रमों की सूचि थी , उसमे मेले को छत्तीस क़ौमों की तरह बनांने का प्रयास तो है , अन्य कार्यक्रमों की छीजत को भी उन्होंने जांचा है, निजी तौर पर खंगाला है, खेर ,,कहते हैं , ना लड़की हूँ कर सकती हूँ , वही काम महापौर अनुसुइया गोस्वामी कर रही हैं , उन्हें अबला समझकर कोई अनुभवों के नाम पर , उनके अधिकारों को पूर्व की तरह अतिक्रमित कर खुद को कोई बढ़ा साबित करना चाहे तो यह गलत फहमियां उन्होंने निकाल दी है , उन्होंने साबित कर दिया है के वोह बेहतर प्रबंधन जानती है , बेहतर मेला भरवा सकती हैं , पार्टी ,, पार्टी के नेताओं और विपक्ष में भी सामंजस्य बिठाकर कोटा के संरक्षण , सफाई व्यवस्था , मेले के बेहतर प्रबंधन के लिए अपने ,, अपने निजी सलाहकारों के दम पर पहले के लोगों से बेहतर कर सकती है , उन्हें चमचे , चापलूसों , अधिकारों का अतिक्रमण कर खुद को ही ,, हम ही सब कर रहे ,हैं ऐसे प्रचारको से अलग रखकर वोह बेहतर करने का प्रयास कर रही हैं , और अगर ऐसा ही कठोर नियंत्रित प्रबन्धन चला तो ठेकेदारों की कमीशन खोरी , ठेके दिलाने के नाम पर रुतबागीरी , वगेरा वगेरा जैसे कई लोगों की दुकाने बंद हो जाएंगी , और अनुसुइया गोस्वामी बेहतर प्रबंधक के रूप में बोल्ड महापौर के रूप में अपनी इमेज बनाकर सर्वश्रेष्ठ खुद को साबित करने में सफल हो जाएंगी ,, ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
राजस्थान में अधिस्वीकृत पत्रकारों को राजस्थान रोडवेज में मुफ्त यात्रा की सुविधा, दिल्ली तक मिलेगा लाभ
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे
(और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मषग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौषन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है (61)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे (62)
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़़ुदा से) डरते थे (63)
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की जि़न्दगी में भी और आखि़रत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है (64)
और (ऐ रसूल) उन (कुफ़्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक नहीं कि सारी इज़्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है (65)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फजऱ्) शररीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख़्याली बातें किया करते हैं (66)
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं) (67)
लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यूही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो (68)
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें (69)
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आखि़र हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख़्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें (70)
22 अक्टूबर 2026
अशफाक़-बिस्मिल: आज़ादी की लड़ाई में एकता की मिसाल
अशफाक़-बिस्मिल: आज़ादी की लड़ाई में एकता की मिसाल
कोटा आज विज्ञान नगर स्थित एक निजी शिक्षण संस्थान वाई, जी, एन इंस्टीट्यूट में अमर शहीद अशफाकउल्लाह खान का जन्म दिन मनाया गया। इस अवसर पर बोलते हुए उम्मीद एक सेवा संस्था के अध्यक्ष डॉ. रियाज़ खान ने बताया कि, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल संघर्ष और बलिदान की गाथा नहीं है, बल्कि यह उस भारत की तस्वीर भी पेश करता है जिसमें धर्म और मजहब से ऊपर उठकर देश की आज़ादी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। शहीद अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ और राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती इसी भावना का एक ऐतिहासिक उदाहरण है।
22 अक्टूबर 1900 को शाहजहाँपुर में जन्मे अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ युवावस्था में ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ गए। वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य बने। इसी संगठन के माध्यम से उनकी निकटता राम प्रसाद बिस्मिल से हुई। दोनों की विचारधारा और धार्मिक पृष्ठभूमि अलग थी, लेकिन देश की स्वतंत्रता का लक्ष्य दोनों को एक सूत्र में बांधता था।
इस अवसर पर बोलते हुए ए एम पी कोटा प्रभारी सिराज अहमद अंसारी ने कहा कि, 9 अगस्त 1925 का काकोरी ट्रेन एक्शन भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन की महत्वपूर्ण घटना बना। इस कार्रवाई के बाद अंग्रेजी सरकार ने क्रांतिकारियों पर शिकंजा कस दिया। अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ को गिरफ्तार किया गया और काकोरी षड्यंत्र मामले में उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया।
19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद जेल में अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ को फाँसी दे दी गई। उसी दिन राम प्रसाद बिस्मिल और रोशन सिंह को भी फाँसी दी गई। तीनों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
अशफाक़ और बिस्मिल की मित्रता आज भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि स्वतंत्रता आंदोलन की ताकत केवल हथियार या संगठन नहीं थे, बल्कि साझा राष्ट्रीय उद्देश्य भी था। वाई जी एन इंस्टीट्यूट के निदेशक अरशद अंसारी ने कहा कि, एक मुसलमान क्रांतिकारी अशफाक़ और एक हिंदू क्रांतिकारी बिस्मिल का साथ उस दौर में एक ऐसा संदेश था जिसे अंग्रेजी शासन की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के संदर्भ में भी देखा जाता है।
अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ शायर भी थे। उनकी रचनाओं में वतन से मोहब्बत और बलिदान की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उनका जीवन इस बात की याद दिलाता है कि आज़ादी केवल किसी एक समुदाय की उपलब्धि नहीं थी; इसके लिए भारत के अलग-अलग धर्मों और वर्गों के लोगों ने साथ मिलकर संघर्ष किया था।
कार्यक्रम का संचालन नूर अहमद पठान ने किया। उन्होंने कहा कि, आज जब हम स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को याद करते हैं, तो अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ और राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती केवल अतीत का एक अध्याय नहीं रह जाती। यह उस साझा भारतीय विरासत की याद दिलाती है जिसमें देश पहले था और बाकी पहचानें उसके बाद।
अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ का बलिदान इसलिए अमर है कि उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया कि वतन की मोहब्बत किसी मजहब की मोहताज नहीं होती।
सादर प्रकाशनार्थ
दैनिक....
सद्भावी
नूर अहमद पठान
मो. 9571310137
फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर इमान लाओगे (आहा) क्या अब (इमान लाए) हालाकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे
फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर इमान लाओगे (आहा) क्या अब (इमान लाए) हालाकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे (51)
फिर (क़यामत के दिन) ज़ालिम लोगों से कहा जाएगा कि (अब हमेशा के अज़ाब के मजे़ चखो (दुनिया में) जैसी तुम्हारी करतूतें तुम्हें (आखि़रत में) वैसा ही बदला दिया जाएगा (52)
(ऐ रसूल) तुम से लोग पूछतें हैं कि क्या (जो कुछ तुम कहते हो) वह सब ठीक है तुम कह दो (हाँ) अपने परवरदिगार की कसम ठीक है और तुम (ख़ुदा को) हरा नहीं सकते (53)
और (दुनिया में) जिस जिसने (हमारी नाफरमानी कर के) ज़ुल्म किया है (क़यामत के दिन) अगर तमाम ख़ज़ाने जो जमीन में हैं उसे मिल जाएँ तो अपने गुनाह के बदले ज़रुर फिदया दे निकले और जब वह लोग अज़ाब को देखेगें तो इज़हारे निदामत करेगें (शर्मिंदा होंगें) और उनमें बाहम इन्साफ़ के साथ हुक्म दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा (बराबर ज़ुल्म न किया जाएगा (54)
आगाह रहो कि जो कुछ आसमानों में और ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है आग़ाह राहे कि ख़ुदा का वायदा यक़ीनी ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं (55)
वही जि़न्दा करता है और वही मारता है और तुम सब के सब उसी की तरफ लौटाए जाओगें (56)
लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से नसीहत (किताबे ख़़ुदा आ चुकी और जो (मरज़ शिर्क वगै़रह) दिल में हैं उनकी दवा और ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत (57)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (ये क़़ुरान) ख़़ुदा के फज़ल व करम और उसकी रहमत से तुमको मिला है (ही) तो उन लोगों को इस पर खुश होना चाहिए (58)
और जो कुछ वह जमा कर रहे हैं उससे कहीं बेहतर है (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम्हारा क्या ख़्याल है कि ख़ुदा ने तुम पर रोज़ी नाजि़ल की तो अब उसमें से बाज़ को हराम बाज़ को हलाल बनाने लगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या ख़ुदा ने तुम्हें इजाज़त दी है या तुम ख़ुदा पर बोहतान बाँधते हो (59)
और जो लोग ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बाधा करते हैं रोजे़ क़यामत का क्या ख़्याल करते हैं उसमें शक नहीं कि ख़़ुदा तो लोगों पर बड़ा फज़ल व (करम) है मगर उनमें से बहुतेरे शुक्र गुज़ार नहीं हैं (60)
21 अक्टूबर 2026
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नेत्रदान के लिए कोटा से बारां पहुंची शाइन इंडिया
नेत्रदान के लिए कोटा से बारां पहुंची शाइन इंडिया
कॉर्निया की अंधता का दुख भोग रहे मरीजों के लिए, नेत्रदान ही एक माध्यम है । सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण के माध्यम से, दृष्टि बाधित व्यक्तियों के जीवन से अंधकार को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है ।
इसी क्रम में आज, सत्संग रोड बारां निवासी सुरेश चंद्र जैन के आकस्मिक निधन की सूचना भारत विकास परिषद के सदस्य रमाकांत गुप्ता और कमलेश जैन के माध्यम से कोटा में शाइन इंडिया फाउंडेशन, व बीबीजे चैप्टर के डॉ कुलवंत गौड़ को मिली । रमाकांत ने बताया कि, पारिवार के सदस्यों ने स्व प्रेरणा से स्व०पिताजी के नेत्रदान का निर्णय लिया है ।
चिकित्सकीय जानकारी लेने के उपरांत,कोटा से डॉ गौड़ नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ लेकर, तुरंत कोटा से रवाना हुए और शवयात्रा निकलने से ठीक पूर्व निवास स्थान पर पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया परिवार के सभी सदस्यों के बीच में संपन्न की।
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम जि़म्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ
और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम जि़म्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ (41)
और उनमें से बाज़ ऐसे हैं कि तुम्हारी ज़बानों की तरफ कान लगाए रहते हैं तो (क्या) वह तुम्हारी सुन लेगें हरगिज़ नहीं अगरचे वह कुछ समझ भी न सकते हो (42)
तुम कही बहरों को कुछ सुना सकते हो और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो तुम्हारी तरफ (टकटकी बाँधे) देखते हैं तो (क्या वह इमान लाएँगें हरगिज़ नहीं) अगरचे उन्हें कुछ न सूझता हो तो तुम अन्धे को राहे रास्त दिखा दोगे (43)
ख़ुदा तो हरगिज़ लोगों पर कुछ भी ज़ुल्म नहीं करता मगर लोग खुद अपने ऊपर (अपनी करतूत से) जुल्म किया करते है (44)
और जिस दिन ख़़ुदा इन लोगों को (अपनी बारगाह में) जमा करेगा तो गोया ये लोग (समझेगें कि दुनिया में) बस घड़ी दिन भर ठहरे और आपस में एक दूसरे को पहचानेंगे जिन लोगों ने ख़ुदा की बारगाह में हाजि़र होने को झुठलाया वह ज़रुर घाटे में हैं और हिदायत याफता न थे (45)
ऐ रसूल हम जिस जिस (अज़ाब) का उनसे वायदा कर चुके हैं उनमें से बाज़ ख़्वाहा तुम्हें दिखा दें या तुमको (पहले ही दुनिया से) उठा ले फिर (आखि़र) तो उन सबको हमारी तरफ लौटना ही है फिर जो कुछ ये लोग कर रहे हैं ख़ुदा तो उस पर गवाह ही है (46)
और हर उम्मत का ख़ास (एक) एक रसूल हुआ है फिर जब उनका रसूल (हमारी बारगाह में) आएगा तो उनके दरम्यिान इन्साफ़ के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा बराबर ज़़ुल्म न किया जाएगा (47)
ये लोग कहा करते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आखि़र) ये (अज़ाब का वायदा) कब पूरा होगा (48)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै खुद अपने वास्ते नुकसान पर क़ादिर हूँ न नफा पर मगर जो ख़ुदा चाहे हर उम्मत (के रहने) का (उसके इल्म में) एक वक़्त मुक़र्रर है-जब उन का वक़्त आ जाता है तो न एक घड़ी पीछे हट सकती हैं और न आगे बढ़ सकते हैं (49)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो कि अगर उसका अज़ाब तुम पर रात को या दिन को आ जाए तो (तुम क्या करोगे) फिर गुनाहगार लोग आखि़र काहे की जल्दी मचा रहे हैं (50)
20 अक्टूबर 2026
नारा हूँ ना , महिला हूँ ना, कर सकती हूँ , लड़ सकती हूँ , इस नारे को बुलंद करते हुए , देश भर में अपराध घटनाओ की सिटी कहे जाने वाले ,,कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गौतम , उनकी टीम ने ,, मुंबई में टाइगर श्रॉफ के हमलावरों को चुटकियों में पकड़ लिया ,, इस बहादुरी , समझदारी , बेस्ट पुलिसिंग के लिए निश्चित तोर पर वोह ,, उनकी टीम मुबारकबाद की हक़दार है , बधाई की पात्र है
नारा हूँ ना , महिला हूँ ना, कर सकती हूँ , लड़ सकती हूँ , इस नारे को बुलंद करते हुए , देश भर में अपराध घटनाओ की सिटी कहे जाने वाले ,,कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गौतम , उनकी टीम ने ,, मुंबई में टाइगर श्रॉफ के हमलावरों को चुटकियों में पकड़ लिया ,, इस बहादुरी , समझदारी , बेस्ट पुलिसिंग के लिए निश्चित तोर पर वोह ,, उनकी टीम मुबारकबाद की हक़दार है , बधाई की पात्र है ,, तेजस्वी गौतम पुलिस अधीक्षक के साथ साथ , ब्रेवो वूमेन ,,बहुमुखी प्रतिभा की धनी भी हैं , लेकिन कोटा की सियासत ने उन्हें कोटा में उलझा कर रख दिया , और वोह चाहकर भी बहुत कुछ प्रयासों के बावजूद भी क़ानून व्यवस्थाओं , ,ब्लाइंड मर्डर , सहित डकैती , लूट , अन्य गंभीर घटनाओं की परतें खोलने में उलझकर रह गयीं , चुनावों में भी उनकी स्थिति दबाव में रही , ,खेर फिर भी तेजस्वी गौतम ने बंधे हुए हाथों के बावजूद भी , कोटा के लिए बहुत कुछ करने का प्रयास किया ,, लेकिन यह टाइगर के हमलावरों की गिरफ्तारी निश्चित तोर पर , बढ़ी कार्यवाही है , क्योंकि यह गेंग जब ट्रेन में आई, तो बीच में कई स्टेशन पढ़ते है , चाहते तो उन्हें रास्ते में ही रोका जा सकता था , जो दूसरे लोग , रेलवे पुलिस नहीं कर सकी ,, खेर इस कामयाबी के लिए कोटा की पुलिसिंग का नाम रोशन हुआ है ,, तेजस्वी गौतम आई पी एस एक जाना माना नाम , स्मैक तस्करों के खिलाफ , नशीले पदार्थों के आदतन अपराधियों के खिलाफ ,, इनकी पुलिसिंग के क़िस्से सभी जानते है , लेकिन कोटा में ज़मीन जायदाद , रुपयों के लेनदेन , ठगी , साइबर ठगी , चाकूबाजी , गोलीबारी , फिर चुनाव जैसे मामलों के अलावा सियासी दबाव में ही वोह उलझ गईं , तेजस्वी गौतम डरी भी नहीं, दबी भी नहीं , लेकिन नौकरी तो नौकरी है , कोशिशों के बावजूद भी , नशामुक्ति और नशे के व्यापरियों के खिलाफ बढ़ा वृहद अभियान नहीं चला पाईं ,, महिला सुरक्षा , आत्म स्वावलम्बी , की कार्य योजनाएं भी नहीं चली , नशे के खिलाफ मोटिवेशनल नाटक ,, प्रहसन के ज़रीये कार्य्रकम नहीं हो सके , लेकिन फिर भी जो कुछ भी किया बेहतर किया ,, अब तो वोह , पदोन्नत होकड, डी आई जी हो गई है , केडर आते ही उनकी ससम्मान विदाई भी हो जायेगी , लेकिन कोटा में , कोटा के लोगों को अपराधों से बचाने के लिए नोजवानों को जानलेवा नशे से बचाने के लिए , स्मैक के आदतन लोगों द्वारा परिवार के परिवार तबाह करने , और मोहल्लों , गलियों में छूट पुट चोरी अपराध बचाने के लिए ,,,,,जो लोग हार्डकोर क्रिमिनल है , जो गवाहों को होस्टाइल करवाकर , ज़मानत ले लेते हैं , या फिर बरी हो जाते है , उन्हें सज़ा दिलवाने के लिए , अपंने नियंत्रण में विधिक पैरोकारों के साथ मिलकर उन्हें अंतिम समय तक हर हाल में सज़ा दिलवाने की जो उनकी कार्ययोजना थी , उसे वोह चाहकर भी पूरा नहीं कर पा रही हैं , क्योंकि सियासी दबाव तो है ही , होता भी है , लेकिन वोह इसे मैनेज कर लेती है , ,बस , कभी वी वी आई पी ड्यूटी , कभी मीटिंगे , कभी मेले , कभी ठेले , कभी बढ़ी दुर्घटनाएं , कभी बढ़ी घटनाएं ,, चुनाव वगेरा इन्हीं की क़ानून व्यवस्था ड्यूटियों में वोह , उनकी पुलिस टीम उलझ कर रह गई , और कोटा को नशा मुक्त करने, , आत्महत्या मुक्त करने ,, अपराध मुक्त करने , स्मैकचियों की आपराधिक घटनाओं से कोटा को मुक्त करने का उनका सपना , पूरी कोशिशों के बावजूद भी आधा अधूरा रहा , हालात यह हुए के पुलिस जवान नशे की तस्करी में पकड़े गए, शराब के नशे में महिला डॉक्टर से अभद्रता करते पकड़े गए, लेकिन हार्डकोर अपराधियों , आर्थिक अपराधियों , गवाह मांडोली ,, गवाह खरीद फरोख्त , के ज़रिये , मजिस्ट्रेट के समक्ष बयानों के बाद भी गवाह मुकर कर , होस्टाइल होकर, घटना से इंकार कर अपराधियों को बरी करवा रहे हैं , ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान देकर मुकरने वालों के खिलाफ भी वोह क़ानूनी कार्यवाही कर होस्टाइल होने वाले गवाहों में खौफ पैदा करना चाहती थी ,, होस्टाइल गवाह के बावजूद भी बेहतर अनुसंधान ,, बेहतर अनुसंधान के बाद , कोर्ट में बेहतर तरीके से पैरवी ,,बेहतर न्यायिक दृष्टांतों के साथ बहस करवाकर वोह हार्डकोर अपराधियों को सज़ा दिलवाना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होंने कोशिशें भी कीं, लेकिन उनके ओहदे में बुलंदी , प्रमोशन तो हुआ , हार्डकोर अपराधियों को हर हाल में सज़ा दिलवाकर उन्हें सबक़ दिलाने , नशामुक्त कोटा , अपराध मुक्त कोटा का सपना, वोह पूरा करने की हर सम्भव कोशिशों के बावजूद भी सियासी दखल अंदाज़ी कहो , या अन्य कार्यों में व्यस्तता कहो , लेकिन बहुत कुछ करने के बावजूद भी बहुत कुछ नहीं कर पायीं ,, कोटा की जनता अभी भी उनसे अपेक्षा करती है , उनकी पदोन्नति के लिए दुआएं करती है , लेकिन कहते हैं ना लड़की हूँ, कर सकती हूँ , तो वोह डी आई जी पद पर जाने के पहले ,, एक बार फिर लेडी सिंघम बनकर अगर अपने सपनों को साकार करने की क्रियान्विति के प्रयासों के तहत , नशामुक्त कोटा ,, अपराध मुक्त कोटा, सियासी दखलंदाज़ी मुक्त ,कोटा ,, हार्डकोर अपराधियों को हर हाल में अदालत तक बेहतर पैरवी करवाकर सज़ा दिलवाने का जो उनका अभियान है, करें तो सही , कोटा की जनता उनके इन कार्यों में मददगार बनने के लिए पलक पावणे बिछा कर खडी है ,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339