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31 अक्टूबर 2026

अलिफ़ लाम रा - ये (क़़ुरान) वह किताब है जिसकी आयते एक वाकिफ़कार हकीम की तरफ से (दलाएल से) खूब मुस्तहकिम (मज़बूत) कर दी गयीं (1) फिर तफ़सीलदार बयान कर दी गयी हैं ये कि ख़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मै तो उसकी तरफ से तुम्हें (अज़ाब से) डराने वाला और (बहिश्त) ख़ुशख़बरी देने वाला (रसूल) हूँ

 सूरए हूद मक्का में नाजि़ल हुआ और इसकी एक सौ तेईस (123) आयते हैं
(मैं) उस ख़ुदा के नाम से (शुरू करता हूँ) जो बड़ा मेहरबान रहम वाला है
अलिफ़ लाम रा - ये (क़़ुरान) वह किताब है जिसकी आयते एक वाकिफ़कार हकीम की तरफ से (दलाएल से) खूब मुस्तहकिम (मज़बूत) कर दी गयीं (1)
फिर तफ़सीलदार बयान कर दी गयी हैं ये कि ख़ुदा के सिवा किसी की परसतिश न करो मै तो उसकी तरफ से तुम्हें (अज़ाब से) डराने वाला और (बहिश्त) ख़ुशख़बरी देने वाला (रसूल) हूँ (2)
और ये भी कि अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ माँगों फिर उसकी बारगाह में (गुनाहों से) तौबा करो वही तुम्हें एक मुकर्रर मुद्दत तक अच्छे नुत्फ के फायदे उठाने देगा और वही हर साहबे बुज़ुर्ग को उसकी बुज़ुर्गी (की दाद) अता फरमाएगा और अगर तुमने (उसके हुक्म से) मुँह मोड़ा तो मुझे तुम्हारे बारे में एक बड़े (ख़ौफनाक) दिन के अज़ाब का डर है (3)
(याद रखो) तुम सब को (आखि़रकार) ख़़ुदा ही की तरफ लौटना है और वह हर चीज़ पर (अच्छी तरह) क़ादिर है (4)
(ऐ रसूल) देखो ये कुफ्फ़ार (तुम्हारी अदावत में) अपने सीनों को (गोया) दोहरा किए डालते हैं ताकि ख़़ुदा से (अपनी बातों को) छिपाए रहें (मगर) देखो जब ये लोग अपने कपड़े ख़ूब लपेटते हैं (तब भी तो) ख़़ुदा (उनकी बातों को) जानता है जो छिपाकर करते हैं और खुल्लम खुल्ला करते हैं इसमें शक नहीं कि वह सीनों के भेद तक को खूब जानता है (5)
और ज़मीन पर चलने वालों में कोई ऐसा नहीं जिसकी रोज़ी ख़ुदा के जि़म्मे न हो और ख़ुदा उनके ठिकाने और (मरने के बाद) उनके सौपे जाने की जगह (क़ब्र) को भी जानता है सब कुछ रौशन किताब (लौहे महफूज़) में मौजूद है (6)
और वह तो वही (क़ादिरे मुतलक़) है जिसने आसमानों और ज़मीन को 6 दिन में पैदा किया और (उस वक़्त) उसका अर्श (फलक नहुम) पानी पर था (उसने आसमान व ज़मीन) इस ग़रज़ से बनाया ताकि तुम लोगों को आज़माए कि तुममे ज़्यादा अच्छी कार गुज़ारी वाला कौन है और (ऐ रसूल) अगर तुम (उनसे) कहोगे कि मरने के बाद तुम सबके सब दोबारा (क़ब्रों से) उठाए जाओगे तो काफि़र लोग ज़रुर कह बैठेगें कि ये तो बस खुला हुआ जादू है (7)
और अगर हम गिनती के चन्द रोज़ो तक उन पर अज़ाब करने में देर भी करें तो ये लोग (अपनी शरारत से) बेताम्मुल ज़रुर कहने लगेगें कि (हाए) अज़ाब को कौन सी चीज़ रोक रही है सुन रखो जिस दिन इन पर अज़ाब आ पडे़ तो (फिर) उनके टाले न टलेगा और जिस (अज़ाब) की ये लोग हँसी उड़ाया करते थे वह उनको हर तरह से घेर लेगा (8)
और अगर हम इन्सान को अपनी रहमत का मज़ा चखायें फिर उसको हम उससे छीन लें तो (उस वक़्त) यक़ीनन बड़ा बेआस और नाशुक्रा हो जाता है (9)
(और हमारी शिकायत करने लगता है) और अगर हम तकलीफ के बाद जो उसे पहुँचती थी राहत व आराम का जाएक़ा चखाए तो ज़रुर कहने लगता है कि अब तो सब सख़्तियाँ मुझसे दफा हो गई इसमें शक नहीं कि वह बड़ा (जल्दी खुश होने शेख़ी बाज़ है (10)

30 अक्टूबर 2026

शाइन इंडिया के पायलेट प्रोजेक्ट मिशन सबल भारत की शुरुआत, विद्यार्थियों की नि:शुल्क जांच शुरू

  शाइन इंडिया के पायलेट प्रोजेक्ट मिशन सबल भारत की शुरुआत, विद्यार्थियों की नि:शुल्क जांच शुरू
2. चिकित्सा शिविर में आँख और दांतों की समस्या से ग्रसित मिले विद्यार्थी

"मुस्कान भी तब ही अच्छी ,जब दाँत हो साफ़ और आँखों में रोशनी अच्छी..."

स्वस्थ,समृद्ध भारत व अंधत्व निवारण के केंद्र सरकार के अभियान में सहयोग देने के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा, कोटा शहर के राजकीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की आंखों की नि:शुल्क जांच एवं नि:शुल्क चश्मा वितरण के साथ-साथ उनका नि:शुल्क दंत परीक्षण किया गया।

संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ में बताया कि, शाइन इंडिया फाउंडेशन के दो माह के पायलट प्रोजेक्ट, मिशन सबल भारत के तहत आगामी दो माह में, संस्था के द्वारा राजकीय विद्यालयों में कक्षा 8 से 12 के छात्र-छात्राओं का नि:शुल्क नेत्र एवं दंत चिकित्सा परीक्षण किया गया,साथ ही दृष्टि दोष युक्त चयनित बच्चों को नि:शुल्क चश्मा का वितरण भी किया गया।

इस प्रोजेक्ट की शुरुआत विज्ञान नगर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में ऑप्टोमेट्रिस्ट जी डी गुप्ता के सहयोग से बच्चों में दृष्टि दोष की जांच की गई,और दंत चिकित्सक डॉ ज्योति चौरसिया ने बच्चों के दांतों की जाँच की, और बच्चों को सही तरह से दांतों की देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।

प्रधानाचार्य अनीता शर्मा ने अंत में संस्था सदस्यों का आभार प्रकट करते हुए कहा कि,सही उम्र में सही इलाज मिलने से, काफी हद तक कम उम्र में होने वाली अंधता को रोका जा सकता है। अच्छे आत्मविश्वास और अच्छी लीडरशिप के लिए, जीवन में आगे बढ़ने के लिए मन और शरीर दोनों का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है।

डॉ ज्योति ने कहा कि,जब चेहरे पर अच्छी मुस्कान रहेगी और आँखों में अच्छी रोशनी रहेगी, तो बच्चे में अपने आप ही एक अच्छा कॉन्फिडेंस दिखेगा। ऐसा बच्चा न सिर्फ स्कूल में अच्छा स्कोर करेगा, बल्कि जीवन में भी बहुत अच्छे कार्य कर सकेगा।

(ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं

 (ऐ रसूल) तुम कहा दो कि ज़रा देखों तो सही कि आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की निशानियाँ क्या) क्या कुछ हैं (मगर सच तो ये है) और जो लोग ईमान नहीं क़़ुबूल करते उनको हमारी निशानियाँ और डरावे कुछ भी मुफीद नहीं (101)
तो ये लोग भी उन्हें सज़ाओं के मुन्तिज़र (इन्तजार में) हैं जो उनसे क़ब्ल (पहले) वालो पर गुज़र चुकी हैं (ऐ रसूल उनसे) कह दो कि अच्छा तुम भी इन्तज़ार करो मैं भी तुम्हारे साथ यक़ीनन इन्तज़ार करता हूँ (102)
फिर (नुज़ूले अज़ाब के वक़्त) हम अपने रसूलों को और जो लोग ईमान लाए उनको (अज़ाब से) तलूउ बचा लेते हैं यूँ ही हम पर लाजि़म है कि हम इमान लाने वालों को भी बचा लें (103)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर तुम लोग मेरे दीन के बारे में शक में पड़े हो तो (मैं भी तुमसे साफ कहें देता हूँ) ख़़ुदा के सिवा तुम भी जिन लेागों की परसतिश करते हो मै तो उनकी परसतिश नहीं करने का मगर (हाँ) मै उस ख़ुदा की इबादत करता हूँ जो तुम्हें (अपनी कुदरत से दुनिया से) उठा लेगा और मुझे तो ये हुक्म दिया गया है कि मोमिन हूँ (104)
और (मुझे) ये भी (हुक्म है) कि (बातिल) से कतरा के अपना रुख़ दीन की तरफ कायम रख और मुशरेकीन से हरगिज़ न होना (105)
और ख़ुदा को छोड़ ऐसी चीज़ को पुकारना जो न तुझे नफा ही पहुँचा सकती हैं न नुक़सान ही पहुँचा सकती है तो अगर तुमने (कहीं ऐसा) किया तो उस वक़्त तुम भी ज़ालिमों में (षुमार) होगें (106)
और (याद रखो कि) अगर ख़ुदा की तरफ से तुम्हें कोई बुराई छू भी गई तो फिर उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं होगा और अगर तुम्हारे साथ भलाई का इरादा करे तो फिर उसके फज़ल व करम का लपेटने वाला भी कोई नहीं वह अपने बन्दों में से जिसको चाहे फायदा पहुँचाएँ और वह बड़ा बख़्षने वाला मेहरबान है (107)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ लोगों तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) आ चुका फिर जो शख़्स सीधी राह पर चलेगा तो वह सिर्फ अपने ही दम के लिए हिदायत एख़्तेयार करेगा और जो गुमराही एख़्तेयार करेगा वह तो भटक कर कुछ अपना ही खोएगा और मैं कुछ तुम्हारा जि़म्मेदार तो हूँ नहीं (108)
और (ऐ रसूल) तुम्हारे पास जो ‘वही’ भेजी जाती है तुम बस उसी की पैरवी करो और सब्र करो यहाँ तक कि ख़ुदा तुम्हारे और काफिरों के दरम्यिान फैसला फरमाए और वह तो तमाम फैसला करने वालों से बेहतर है (109)

29 अक्टूबर 2026

चिकित्सा मंत्री जी जनता की सुनो भीमगंजमंडी CHC की बदहाली! डॉक्टरों की कमी, एक्स-रे मशीन बंद और स्टील के पाइपों के पीछे से मरीजों का इलाज!

 

चिकित्सा मंत्री जी जनता की सुनो
भीमगंजमंडी CHC की बदहाली! डॉक्टरों की कमी, एक्स-रे मशीन बंद और स्टील के पाइपों के पीछे से मरीजों का इलाज!
डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़ | के.डी. अब्बासी
कोटा। चिकित्सा मंत्री जी कोटा शहर के भीमगंज मंडी क्षेत्र के लोगों की पुकार सुनो,शहर के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), क़भीमगंजमंडी में चिकित्सा सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता, एक्स-रे सुविधा और मरीजों की जांच के दौरान अपनाई जा रही व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है।
पांच डॉक्टरों के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र में कुल पांच डॉक्टर हैं। इनमें तीनों की विशेषज्ञता के संबंध में उपलब्ध जानकारी स्पष्ट नहीं है,
गायनी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं होने से महिला मरीज परेशान, इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं।
जबकि एक होम्योपैथिक और एक दंत चिकित्सक बताए गए हैं। अस्पताल में 10 बेड की सुविधा है। वहीं, कुल 39 स्थायी पदों में से कई कर्मचारियों के डेपुटेशन पर बाहर होने की जानकारी सामने आई है। इससे अस्पताल की व्यवस्थाओं और उपलब्ध मानव संसाधन पर सवाल उठ रहे हैं।
जनवरी से एक्स-रे सुविधा बंद होने की जानकारी
स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे सुविधा भी प्रभावित बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, एक्स-रे फिल्म उपलब्ध नहीं होने के कारण जनवरी से एक्स-रे नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में मरीजों को एक्स-रे की जरूरत पड़ने पर दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है। इससे मरीजों को परेशानी और अतिरिक्त समय का सामना करना पड़ता है।
डॉक्टरों और मरीजों के बीच स्टील के पाइप
स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों के बैठने की जगह के चारों ओर स्टील के पाइप लगे होने की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। इस व्यवस्था के कारण डॉक्टर मरीजों को दूर से देखते हैं, जबकि बड़े अस्पतालों में मरीजों की जांच के दौरान डॉक्टर उनके पास जाकर परीक्षण करते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भीमगंजमंडी CHC में मरीजों की समुचित जांच के लिए पर्याप्त और सुविधाजनक व्यवस्था उपलब्ध है?
जिम्मेदार अधिकारी ध्यान दें
स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे सुविधा बहाल करने, रिक्त पदों पर कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और डॉक्टरों द्वारा मरीजों की बेहतर जांच के लिए उचित व्यवस्था करने की जरूरत है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इन समस्याओं पर कब ध्यान देता है और मरीजों को राहत कब मिलती है।

सोगरिया-रोटेदा ROB निर्माण में मनमानी - उमा शंकर नागर

 

सोगरिया-रोटेदा ROB निर्माण में मनमानी - उमा शंकर नागर
के डी अब्बासी
कोटा। क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों में कथित घटिया निर्माण और सोगरिया-रोटेदा के बीच निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के सर्विस रोड को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर शहर जिला कॉग्रेस कमेटी के सोगरिया मंडल अध्यक्ष उमा शंकर नागर के नेतृत्व में
जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्यों की जांच कराने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की। शहर जिला कॉग्रेस कमेटी के सोगरिया मंडल अध्यक्ष उमा शंकर नागर
ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों में निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, सोगरिया-रोटेदा के बीच बन रहे ROB के सर्विस रोड के निर्माण के दौरान किसानों को मुआवजा दिए बिना ही काम शुरू कर दिया गया है। इससे प्रभावित किसानों और क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है।
क्षेत्रवासियों ने जिला कलेक्टर को पूरे मामले से अवगत कराते हुए मांग की कि विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने के बाद ही संबंधित कार्य आगे बढ़ाया जाए।
समाधान नहीं हुआ तो सड़कों पर उतरेंगे
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन करना पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए किसानों के हितों की रक्षा करने और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास कार्य जनहित में होने चाहिए, लेकिन इनके कारण किसानों और आम नागरिकों को परेशानी नहीं उठानी पड़े। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

फ़र्ज़ी लोगों की फ़र्ज़ी बातें,

फ़र्ज़ी लोगों की फ़र्ज़ी बातें, कोंग्रेस के राहुल पर ज़ुबानी हमले पर कोटा कोंग्रेसियों का मूकबधिर हो जाना, खेर सच्चाई जानिए, फ़र्ज़ी कथनों के बारे में, क्या चाणक्य ने कहा था कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति देशभक्त नहीं हो सकता?
ऐतिहासिक तथ्यों, प्रमाणों और राजनीतिक बयानों की पड़ताल
निष्कर्ष: इस कथन का चाणक्य द्वारा कहे जाने का कोई प्रमाणित मूल संदर्भ अभी तक सामने नहीं आया है। चाणक्य नीति या कौटिल्य के अर्थशास्त्र में इस कथन का प्रामाणिक श्लोक, अध्याय और मूल संस्कृत पाठ प्रस्तुत किए बिना इसे चाणक्य का प्रमाणित कथन बताना ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं है।
यह कथन वर्ष 2020 और 2023 में राहुल गांधी तथा सोनिया गांधी पर राजनीतिक हमलों के दौरान चर्चा में आया था। आइए, उपलब्ध प्रमाणों की जांच करते हैं।
1. यह कथन किसने और कब दिया था?
(क) प्रज्ञा सिंह ठाकुर का बयान — 28 जून 2020
भोपाल से तत्कालीन भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी की पृष्ठभूमि पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति देशभक्त नहीं हो सकता।
उन्होंने इस विचार को चाणक्य से भी जोड़ा।
इस बयान की रिपोर्टिंग NDTV की समाचार रिपोर्ट⁠ और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट⁠ में हुई थी।
महत्वपूर्ण अंतर: ये समाचार रिपोर्टें इस बात का प्रमाण हैं कि प्रज्ञा ठाकुर ने ऐसा बयान दिया था। ये इस बात का प्रमाण नहीं हैं कि चाणक्य ने वास्तव में ऐसा कहा था।
(ख) संजय जायसवाल का बयान — मार्च 2023
भाजपा नेता संजय जायसवाल ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति देशभक्त नहीं हो सकता और इस विचार को लगभग 2,000 वर्ष पुराना बताते हुए चाणक्य से जोड़ा।
इस बयान की रिपोर्टिंग NDTV India⁠ ने की थी।
इससे यह स्पष्ट होता है कि यह कथन आधुनिक राजनीतिक विमर्श में चाणक्य के नाम से प्रचारित हुआ। लेकिन इसके प्राचीन स्रोत का प्रमाण अलग से आवश्यक है।
2. चाणक्य की पुस्तकों में क्या इसका प्रमाण मिलता है?
चाणक्य से संबंधित प्रमुख ग्रंथों में निम्नलिखित शामिल हैं:
ग्रंथ
विषय
इस कथन के संबंध में स्थिति
कौटिल्य का अर्थशास्त्र
राज्य संचालन, प्रशासन, अर्थव्यवस्था, कूटनीति और सुरक्षा
विदेशी महिला से जन्मे व्यक्ति को देशभक्त न मानने वाले कथन का प्रमाणित मूल संदर्भ प्रस्तुत नहीं किया गया है।
चाणक्य नीति
नीति, आचरण, व्यवहार और जीवन संबंधी शिक्षाएं
इस कथन का प्रमाणित संस्कृत श्लोक और अध्याय उपलब्ध प्रमाणों से स्थापित नहीं होता।
चाणक्य के नाम से प्रचलित सूक्तियां
विभिन्न नैतिक और राजनीतिक शिक्षाएं
किसी कथन का इंटरनेट पर चाणक्य के नाम से प्रसारित होना उसके ऐतिहासिक रूप से प्रामाणिक होने का प्रमाण नहीं है।
कौटिल्य के अर्थशास्त्र की पांडुलिपियों, अनुवादों और ऐतिहासिक अध्ययनों का परीक्षण करते समय मूल पाठ, अध्याय और श्लोक या सूत्र संख्या का मिलान करना आवश्यक है।
किसी कथन को प्रमाणित करने के लिए कम से कम निम्नलिखित साक्ष्य अपेक्षित होंगे:
मूल संस्कृत पाठ।
ग्रंथ का नाम और संबंधित अध्याय या सूत्र संख्या।
किसी मान्य संस्करण में उसका पाठ।
प्रमाणित अनुवाद या विद्वानों का संदर्भ।
अभी इस कथन के समर्थन में ऐसा सत्यापित मूल संदर्भ सामने नहीं है। इसलिए इसे चाणक्य का वास्तविक कथन घोषित करना उचित नहीं होगा।
3. क्या चाणक्य ने वास्तव में विदेशी मूल के लोगों के बारे में ऐसा सिद्धांत दिया था?
इस प्रश्न पर सावधानी से विचार करना आवश्यक है।
कौटिल्य का अर्थशास्त्र राज्य की सुरक्षा, राजा के कर्तव्यों, शत्रु राज्यों, कूटनीति, गुप्तचरी और राजनीतिक हितों पर विस्तार से चर्चा करता है।
लेकिन किसी व्यक्ति की देशभक्ति को केवल उसकी मां के जन्मस्थान या राष्ट्रीय मूल से जोड़ने वाला कोई विशिष्ट सिद्धांत चाणक्य के नाम से तभी स्वीकार किया जा सकता है, जब उसके समर्थन में प्रामाणिक मूल पाठ उपलब्ध हो।
यहां दो अलग-अलग बातें हैं:
राज्य की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि मानना: यह प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन का महत्वपूर्ण विषय है।
विदेशी महिला से जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को देशभक्ति के अयोग्य मानना: यह एक विशिष्ट दावा है, जिसके लिए अलग और प्रत्यक्ष प्रमाण चाहिए।
पहले विचार की उपस्थिति दूसरे कथन की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं करती।
4. क्या किसी व्यक्ति की देशभक्ति उसकी मां के विदेशी होने से तय होती है?
यह ऐतिहासिक प्रश्न के साथ-साथ संवैधानिक और राजनीतिक प्रश्न भी है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में कानून के समक्ष समानता और अनुच्छेद 15 में निर्धारित आधारों पर भेदभाव के विरुद्ध संरक्षण का प्रावधान है। नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 और उससे संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।
इसलिए किसी व्यक्ति की देशभक्ति का आकलन केवल उसकी मां के विदेशी मूल के आधार पर कर देना तथ्यात्मक रूप से भी उचित नहीं है। किसी व्यक्ति के कार्यों, सार्वजनिक आचरण और देश के प्रति उसके वास्तविक योगदान का मूल्यांकन अलग प्रश्न है।
इसी तरह, किसी नेता के किसी बयान की आलोचना करने के लिए उसकी मां के विदेशी मूल को देशद्रोह या देशभक्ति से जोड़ना आवश्यक नहीं है।
5. इस दावे के पक्ष में प्रमाण किसे देना चाहिए?
यदि कोई व्यक्ति दावा करता है कि:
चाणक्य ने कहा था कि विदेशी महिला से जन्म लेने वाला व्यक्ति कभी देशभक्त नहीं हो सकता।
तो उससे निम्नलिखित विवरण मांगे जाने चाहिए:
यह कथन चाणक्य नीति के किस अध्याय में है?
संस्कृत में मूल श्लोक क्या है?
श्लोक संख्या क्या है?
किस मान्य प्रकाशन या पांडुलिपि में यह दर्ज है?
किस विद्वान ने इसका प्रमाणित अनुवाद किया है?
यदि इन प्रश्नों का उत्तर नहीं मिलता, तो कथन को ऐतिहासिक तथ्य के रूप में प्रसारित नहीं करना चाहिए।
ध्यान रहे, किसी कथन का प्रमाण न मिलना और उसके कभी कहे ही न जाने को निर्णायक रूप से सिद्ध कर देना दो अलग बातें हैं। उचित निष्कर्ष यह है कि इस कथन की चाणक्य से संबद्धता प्रमाणित नहीं है।
6. अंतिम निष्कर्ष
उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और कथन के प्रचलित संदर्भों के आधार पर निष्कर्ष इस प्रकार है:
प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने जून 2020 में यह विचार चाणक्य से जोड़कर प्रस्तुत किया था।
संजय जायसवाल ने मार्च 2023 में इसी प्रकार का दावा किया।
इन बयानों की समाचार रिपोर्टिंग उपलब्ध है, लेकिन समाचार रिपोर्टिंग प्राचीन कथन की प्रामाणिकता सिद्ध नहीं करती।
इस कथन का मूल संस्कृत श्लोक, अध्याय संख्या और प्रमाणित ऐतिहासिक संदर्भ स्थापित नहीं है।
इसलिए इसे चाणक्य का प्रमाणित कथन बताना तथ्यात्मक रूप से असमर्थित है।
 

अब (मरने) के वक़्त ईमान लाता है हालाकि इससे पहले तो नाफ़रमानी कर चुका और तू तो फ़सादियों में से था

 अब (मरने) के वक़्त ईमान लाता है हालाकि इससे पहले तो नाफ़रमानी कर चुका और तू तो फ़सादियों में से था (91)
तो हम आज तेरी रुह को तो नहीं (मगर) तेरे बदन को (तह नशीं होने से) बचाएँगें ताकि तू अपने बाद वालों के लिए इबरत का (बाइस) हो और इसमें तो शक नहीं कि तेरे लोग हमारी निशानियों से यक़ीनन बेख़बर हैं (92)
और हमने बनी इसराइल को (मालिक शयाम में) बहुत अच्छी जगह बसाया और उन्हं अच्छी अच्छी चीज़ें खाने को दी तो उन लोगों के पास जब तक इल्म (न) आ चुका उन लोगों ने एख़्तेलाफ़ नहीं किया इसमें तो शासक ही नहीं जिन बातों में ये (दुनिया में) बाहम झगड़े रहे है क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार इसमें फैसला कर देगा (93)
पस जो कु़रान हमने तुम्हारी तरफ नाजि़ल किया है अगर उसके बारे में तुम को कुछ शक हो तो जो लोग तुम से पहले से किताब (ख़़ुदा) पढ़ा करते हैं उन से पूछ के देखों तुम्हारे पास यक़ीनन तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ किताब आ चुकी तो तू न हरगिज़ शक करने वालों से होना (94)
न उन लोगों से होना जिन्होंने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया (वरना) तुम भी घाटा उठाने वालों से हो जाओगे (95)
(ऐ रसूल) इसमें शक नहीं कि जिन लोगों के बारे में तुम्हारे परवरदिगार को बातें पूरी उतर चुकी हैं (कि ये मुस्तहके़ अज़ाब हैं) (96)
वह लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब देख (न) लेगें इमान न लाएगें अगरचे इनके सामने सारी (ख़ुदाई के) मौजिज़े आ मौजूद हो (97)
कोई बस्ती ऐसी क्यों न हुयी कि इमान क़ुबूल करती तो उसको उसका इमान फायदे मन्द होता हाँ यूनूस की क़ौम जब (अज़ाब देख कर) इमान लाई तो हमने दुनिया की (चन्द रोज़ा) जि़न्दगी में उनसे रुसवाई का अज़ाब दफा कर दिया और हमने उन्हें एक ख़ास वक़्त तक चैन करने दिया (98)
और (ऐ पैग़म्बर) अगर तेरा परवरदिगार चाहता तो जितने लोग रुए ज़मीन पर हैं सबके सब इमान ले आते तो क्या तुम लोगों पर ज़बरदस्ती करना चाहते हो ताकि सबके सब इमानदार हो जाएँ हालाकि किसी शख़्स को ये एख़्तेयार नहीं (99)
कि बगै़र ख़़ुदा की इजाज़त ईमान ले आए और जो लोग (उसूले दीन में) अक़ल से काम नहीं लेते उन्हीं लेागें पर ख़़ुदा (कुफ्ऱ) की गन्दगी डाल देता है (100)

28 अक्टूबर 2026

*शरद पूर्णिमा पर,रोशनी का दान,कोटा से 120 किलोमीटर दूर से लिया नेत्रदान*

 

शाइन इंडिया फाउंडेशन | भवानीमंडी।*

*शरद पूर्णिमा पर,रोशनी का दान,कोटा से 120 किलोमीटर दूर से लिया नेत्रदान*

शरद पूर्णिमा - रोशनी, शीतलता और अमृत वर्षा का पर्व। इसी पावन पर्व पर भवानीमंडी के पोरवाल परिवार ने रोशनी के दान की अनूठी मिसाल पेश की।

*नेत्रदान का निर्णय*

द्वारकादास, राधेश्याम पोरवाल के भ्राता व मुकेश के पिता जगदीशचंद पोरवाल के निधन के उपरांत शोक की इस घड़ी में भी परिवार ने, स्व प्रेरणा से, परोपकार को सर्वोपरि रखते हुए नेत्रदान का पुनीत निर्णय लिया।

*नेत्रदान प्रक्रिया*

भतीजे संजय पोरवाल एवं पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष विनय पोरवाल की सूचना पर भारत विकास परिषद के नेत्रदान प्रभारी एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नगर संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल द्वारा त्वरित कार्यवाही की गई। 

सूचना प्राप्त होते ही ईबीएसआर-बीबीजे चेप्टर कोऑर्डिनेटर डॉ. कुलवंत गौड़ ज्योति-रथ से दोपहर 3 बजे कोटा से 120 किलोमीटर दूर भवानीमंडी पहुंचे तथा परिवारजनों की गरिमामय उपस्थिति में नेत्रदान प्रक्रिया को पूर्ण कर दो दृष्टिहीन व्यक्तियों हेतु कॉर्निया प्राप्त किया।

इस पुनीत कार्य में पोरवाल समाज के संजय, विनय,राकेश,विकास,रितेश,संदीप,अमित पोरवाल आदि का सराहनीय सहयोग रहा। विशेष रूप से नेत्रदान प्रक्रिया के समय परिवार की महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही, जिन्होंने नेत्रदान प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा और इस जागरूकता अभियान को बल प्रदान किया। 

डॉ कुलवंत गौड़ के अनुसार नेत्रदानी जगदीशचंद पोरवाल का कॉर्निया श्रेष्ठ गुणवत्ता का प्राप्त हुआ है,जिसे नेत्र बैंक जयपुर भेज दिया गया है जहां पर वह प्रत्यारोपित होकर दो नेत्रहीनों को नई नेत्र ज्योति प्रदान कर सकेगा।

*श्रद्धांजलि सभा में सम्मान*

सोमवार को आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने नेत्रदानी जगदीशचंद पोरवाल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पोरवाल परिवार के नेत्रदान के मानवीय एवं प्रेरणादायी निर्णय की सराहना की। इस अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के द्वारा परिवार को नेत्रदान के लिए प्रशस्ति-पत्र, एवं नेत्रदान पट्टिका भेंट कर सम्मानित किया गया।

*एक नजर में*

कमलेश गुप्ता दलाल ने जानकारी देते हुए बताया कि शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से भवानीमंडी नगर से यह 167वाँ नेत्रदान है, जबकि इस वर्ष 2026 का यह 18वाँ नेत्रदान है।

*-: निवेदक :-*
*शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा*
*नेत्रदान • अंगदान • देहदान*

और ख़़ुदा सच्ची बात को अपने कलाम की बरकत से साबित कर दिखाता है अगरचे गुनाहगारों को ना गॅवार हो

 फिर जब वह लोग (रस्सियों को साँप बनाकर) डाल चुके तू मूसा ने कहा जो कुछ तुम (बनाकर) लाए हो (वह तो सब) जादू है-इसमें तो ्यक ही नहीं कि ख़़ुदा उसे फौरन मिटियामेट कर देगा (क्योंकर) ख़ुदा तो हरगिज़ मफ़सिदों (फसाद करने वालों) का काम दुरुस्त नहीं होने देता (81)
और ख़़ुदा सच्ची बात को अपने कलाम की बरकत से साबित कर दिखाता है अगरचे गुनाहगारों को ना गॅवार हो (82)
अलग़रज़ मूसा पर उनकी क़ौम की नस्ल के चन्द आदमियों के सिवा फिरआऊन और उसके सरदारों के इस ख़ौफ से कि उन पर कोई मुसीबत डाल दे कोई ईमान न लाया और इसमें शक नहीं कि फिरआऊन रुए ज़मीन में बहुत बढ़ा चढ़ा था और इसमें शक नहीं कि वह यक़ीनन ज़्यादती करने वालों में से था (83)
और मूसा ने कहा ऐ मेरी क़ौम अगर तुम (सच्चे दिल से) ख़ुदा पर इमान ला चुके तो अगर तुम फरमाबरदार हो तो बस उसी पर भरोसा करो (84)
उस पर उन लोगों ने अजऱ् की हमने तो ख़़ुदा ही पर भरोसा कर लिया है और दुआ की कि ऐ हमारे पालने वाले तू हमें ज़ालिम लोगों का (ज़रिया) इम्तिहान न बना (85)
और अपनी रहमत से हमें इन काफि़र लोगों (के नीचे) से नजात दे (86)
और हमने मूसा और उनके भाई (हारुन) के पास ‘वही’ भेजी कि मिस्र में अपनी क़ौम के (रहने सहने के) लिए घर बना डालो और अपने अपने घरों ही को मस्जिदें क़रार दे लो और पाबन्दी से नमाज़ पढ़ों और मोमिनीन को (नजात का) खुशख़बरी दे दो (87)
और मूसा ने अजऱ् की ऐ हमारे पालने वाले तूने फिरआऊन और उसके सरदारों को दुनिया की जि़न्दगी में (बड़ी) आराइश और दौलत दे रखी है (क्या तूने ये सामान इस लिए अता किया है) ताकि ये लोग तेरे रास्तें से लोगों को बहकाए परवरदिगार तू उनके माल (दौलत) को ग़ारत (बरबाद) कर दे और उनके दिलों पर सख़्ती कर (क्योंकि) जब तक ये लोग तकलीफ देह अज़ाब न देख लेगें ईमान न लाएगें (88)
(ख़ुदा ने) फरमाया तुम दोनों की दुआ क़ुबूल की गई तो तुम दोनों साबित कदम रहो और नादानों की राह पर न चलो (89)
और हमने बनी इसराइल को दरिया के उस पार कर दिया फिर फिरआऊन और उसके लश्कर ने सरकशी की और शररारत से उनका पीछा किया-यहाँ तक कि जब वह डूबने लगा तो कहने लगा कि जिस ख़ुदा पर बनी इसराइल इमान लाए हैं मै भी उस पर ईमान लाता हूँ उससे सिवा कोई माबूद नहीं और मैं फरमाबरदार बन्दों से हूँ (90)

24 अक्टूबर 2026

एक और नवाचार से शहर वासियों को नेत्रदान अभियान से जोड़ने की मुहीम

 

एक और नवाचार से शहर वासियों को नेत्रदान अभियान से जोड़ने की मुहीम
2. रोशनी के पर्व से पहले दो आँखों से अंधेरा दूर करने का नवाचार 
3. संकल्प पत्र भर,इमोजी की कॉर्नियल अंधता को दूर कर, महसूस करें, रौशनी मिलने की खुशी 


*कोटा।* शाइन इंडिया फाउंडेशन को हमेशा नेत्रदान अंगदान और देहदान के नवाचारों के लिये, ना सिर्फ प्रदेश में बल्कि पूरे भारतवर्ष में जाना जाता है । संस्था के कई ऐसे नवाचार हैं, जिन्होंने हर उम्र और वर्ग के लोगों को अभियान में जोड़ने का प्रयास किया है ।

नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है,और रोशनी का महापर्व दीपावली आने को है। अंधकार पर प्रकाश की विजय के इस पर्व से पहले *शाइन इंडिया फाउंडेशन* ने एक बार फिर अनूठा संकल्प लिया है - जिसमें उन्होंने नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ पर,ऐसे इमोजी लगाए है, जिनकी काली आँखों को कॉर्निया की अंधता के कारण सफेद दिखाया गया है । यह सफेद रंग कॉर्निया ब्लाइंडनेस से जूझ रहे उन हजारों दृष्टिहीनों का प्रतीक है।

भोग जैसी आस्था का अनूठा नवाचार*

संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ ने कहा कि, इस अभियान को एक आध्यात्मिक भाव से जोड़ा है। जिस तरह हम थाली में भोग सजाकर भगवान के सामने रखते हैं,और मन में गहरी आस्था रखते हैं कि,भगवान ने भोग ग्रहण कर लिया, ठीक उसी प्रतीकात्मक भावना पर यह नवाचार बना है। व्यक्ति नेत्रदान का संकल्प-पत्र भरता है और फिर अपने हाथों से स्माइली की आँखों पर लगा सफेद रंग साफ करता है, तो उसके मन में वही आत्मिक संतुष्टि आती है कि,आज उसके लिए नेत्रदान संकल्प से कल दो लोगों की आँखों में रोशनी पहुंचेगी।

शहरवासियों के विचार : 

नेत्रदानी परिवार से सुनीता गोयल जॉली ने कहा कि, "यह तरीका बहुत ही सरल और दिल को छूने वाला है। बच्चे और युवा इस खेल-खेल वाले तरीके से जरूर जुड़ेंगे। यह हमें भी मोटिवेट करता है।"

विज्ञान नगर निवासी जिवेश ने कहा की,हमेशा से वह नेत्रदान संकल्प लेने में थोड़ा सा झिझके,परंतु आज जब इस नवाचार की प्रक्रिया को देखा और किया तो लगा कि, कितना सा छोटा सा कार्य,किसी के चेहरे पर खुशी ला सकता है,यह महसूस हुआ,और उन्होंने संकल्प पत्र भरा । 

अभियान से जुड़ी *निधि जैन* ने कहा, _"जब मैंने अपने हाथ से स्माइली की आँख साफ की तो मन में अजीब सी खुशी आई, लगा जैसे सच में किसी की आँखों में रोशनी भर दी हो। यह सिर्फ फॉर्म भरना नहीं, एक एहसास है।"_

युवाओ को भा रहा है - नेत्रदान संकल्प का नवाचार

एक कोचिंग में कार्यरत अंजलि नामदेव ने, जब गाड़ी पर लगे स्माइली की आंखों को सफेद देखा तो उन्होंने रुक कर पूरी बात को समझा और फिर जब उन्हें इसका अर्थ समझ आया तो उन्होंने, अपना नेत्रदान संकल्प पत्र भरकर तुरंत दो लोगों की आँखों में रोशनी पहचाने का सुंदर,मार्मिक अनुभव प्राप्त किया ।

ज्ञात हो कि इस नवाचार से अभी तक 130 से अधिक युवाओं ने स्व प्रेरणा से प्रेरित होकर अपना नेत्रदान संकल्प पत्र भरा है ।

*संस्था संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ का संदेश*

इस अवसर पर *संस्था संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़* ने कहा, _"अंधकार को मिटाकर रोशनी का पर्व आने वाला है, तो क्यों ना इस पावन पर्व को मनाने से पहले हम दो दृष्टिहीनों की आँखों से अंधेरा दूर करने का एक संकल्प करें। सार्थक दिवाली, जब ही संभव है,जब दुनिया से जाने के बाद,आपकी आँखों से दो व्यक्तियों के अंधेरे जीवन में रोशनी पहुंचे ।


*-: निवेदक :-*
*शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा*
*नेत्रदान • अंगदान • देहदान*

वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं)

 (और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मषग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौषन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है (61)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे (62)
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़़ुदा से) डरते थे (63)
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की जि़न्दगी में भी और आखि़रत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है (64)
और (ऐ रसूल) उन (कुफ़्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक नहीं कि सारी इज़्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है (65)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फजऱ्) शररीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख़्याली बातें किया करते हैं (66)
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं) (67)
लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यूही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो (68)
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें (69)
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आखि़र हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख़्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें (70)

23 अक्टूबर 2026

छत्तीस क़ौमों के ऐतिहासिक कोटा मेले को दागदार करके , समुदाय ,, भाषा के आधार पर , बदनाम करने की साज़िश करने वालों के मुख पर कालिख पुती है

 छत्तीस क़ौमों के ऐतिहासिक कोटा मेले को दागदार करके , समुदाय ,, भाषा के आधार पर , बदनाम करने की साज़िश करने वालों के मुख पर कालिख पुती है ,, महापौर कोटा अनुसुइया गोस्वामी ने खुद अपने हाथों में व्यवस्थाएं नियंत्रित की है , जो मेले को दागदार बनाने के साज़िशकर्ता रहे , उन्हें , मेले की व्यवस्थाओं को छूने भी नहीं दिया ,, महापौर कोटा ने बता दिया कि ,,महापोर का पद ही सर्वोपरि है , धन , बल , अनुभवों का रोना रोकर कोई भी महापौर के हक़ , अधिकार , रुतबे को कम करते हुए अतिक्रमित नहीं कर सकता , और यही वजह रही की मेले की शुरआत के पहले दशहरे में विजयादशमी के दिन ,, जो पहले रावण के पुतले को सर्वाधिक ऊँचा बनाने का अनुभवहीन जूनून था , जिसकी वजह से कोटा दशहरे में मुख्यमंत्री भजनलाल जी के सामने कोटा की किरकरी हुई ,, रावण जला नहीं , घटनाओं के साथ दुर्घटनायें होती होती बचीं ,,, और मेले के बाद कार्यक्रमों के कारण भी बदनामी हुई , दुकानों में लूटपाट ,, की शिकायतें आम हुईं , कई लोगों ने कोटा मेले के आमद , खर्च , दूकान आवंटन , कार्यक्रम खर्च वगेरा के मामले में , ऐंटी करप्पशन से भी जांच कराने की भी मांग की , लेकिन इस बार खुद महापौर अनुसईया गोस्वामी के हाथों में अधिकारों का अतिक्रमण करने वालों से अलग हटकर , सम्पूर्ण व्यवस्थाएं है , खुद महापौर अपने अधीनस्थों और तजुर्बेकारों से मशवरा कर व्यवस्थाएं देख रही हैं , ऐसे में उन्होंने कई व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का प्रयास किया है , मेले के कई बिगड़े हालातों में सकारात्मक सुधार किया है , ,कार्यक्रमों की सूचि रेडीमेड बनाकर उनके हाथों में सौंपी गई थी , तो उसमे तो वोह क्या पर पातीं , लेकिन कवि सम्मेलन में उर्दू शायरा ,, मशहूर शायर स्वर्गीय राहत इन्दोरी की पूर्व पत्नी श्रीमती अंजुम रहबर को बुलाने की स्वीकृति ,, कवि सम्मेलन कार्य्रकम में चार चाँद लगा देने जैसा है यह मेला छत्तीस क़ौमों का है यह तो नहीं कहा जा सकता , लेकिन जिन हालातों में उनके हाथों में कार्यक्रमों की सूचि थी , उसमे मेले को छत्तीस क़ौमों की तरह बनांने का प्रयास तो है , अन्य कार्यक्रमों की छीजत को भी उन्होंने जांचा है, निजी तौर पर खंगाला है, खेर ,,कहते हैं , ना लड़की हूँ कर सकती हूँ , वही काम महापौर अनुसुइया गोस्वामी कर रही हैं , उन्हें अबला समझकर कोई अनुभवों के नाम पर , उनके अधिकारों को पूर्व की तरह अतिक्रमित कर खुद को कोई बढ़ा साबित करना चाहे तो यह गलत फहमियां उन्होंने निकाल दी है , उन्होंने साबित कर दिया है के वोह बेहतर प्रबंधन जानती है , बेहतर मेला भरवा सकती हैं , पार्टी ,, पार्टी के नेताओं और विपक्ष में भी सामंजस्य बिठाकर कोटा के संरक्षण , सफाई व्यवस्था , मेले के बेहतर प्रबंधन के लिए अपने ,, अपने निजी सलाहकारों के दम पर पहले के लोगों से बेहतर कर सकती है , उन्हें चमचे , चापलूसों , अधिकारों का अतिक्रमण कर खुद को ही ,, हम ही सब कर रहे ,हैं ऐसे प्रचारको से अलग रखकर वोह बेहतर करने का प्रयास कर रही हैं , और अगर ऐसा ही कठोर नियंत्रित प्रबन्धन चला तो ठेकेदारों की कमीशन खोरी , ठेके दिलाने के नाम पर रुतबागीरी , वगेरा वगेरा जैसे कई लोगों की दुकाने बंद हो जाएंगी , और अनुसुइया गोस्वामी बेहतर प्रबंधक के रूप में बोल्ड महापौर के रूप में अपनी इमेज बनाकर सर्वश्रेष्ठ खुद को साबित करने में सफल हो जाएंगी ,, ,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

राजस्थान में अधिस्वीकृत पत्रकारों को राजस्थान रोडवेज में मुफ्त यात्रा की सुविधा, दिल्ली तक मिलेगा लाभ

 

बड़ी खबर: राजस्थान में अधिस्वीकृत पत्रकारों को राजस्थान रोडवेज में मुफ्त यात्रा की सुविधा, दिल्ली तक मिलेगा लाभ
डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़
के डी अब्बासी
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने सभी आगारों के मुख्य प्रबंधकों को जारी किए निर्देश, पुराने आदेश की पालना सुनिश्चित करने को कहा
डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़ | के. डी. अब्बासी
जयपुर। राजस्थान के अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए राहत भरी खबर है। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम ने अधिस्वीकृत पत्रकारों को निगम की बसों में राजस्थान राज्य क्षेत्र के साथ दिल्ली तक निःशुल्क यात्रा की सुविधा देने के संबंध में सभी आगारों के मुख्य प्रबंधकों को पुनः निर्देश जारी किए हैं। निगम ने संबंधित अधिकारियों को पूर्व में जारी आदेश की पालना सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है।
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के मुख्यालय जयपुर से 22 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में महाप्रबंधक (यातायात) मनोज कुमार बंसल ने स्पष्ट किया है कि अधिस्वीकृत पत्रकारों की यात्रा सुविधा के संबंध में निगम पहले ही आदेश जारी कर चुका है।
2016 के आदेश के तहत मिलेगी सुविधा
आदेश के अनुसार, निगम के पत्र क्रमांक एफ-4/मु./यातायात/लेखा/91(ए)/2016/261, दिनांक 17 जून 2016 के तहत अधिस्वीकृत पत्रकारों को निगम की बसों में राजस्थान राज्य क्षेत्र और दिल्ली तक निःशुल्क यात्रा का प्रावधान है। यह सुविधा वातानुकूलित (एसी) एवं वॉल्वो बसों में भी लागू होने का उल्लेख आदेश में किया गया है।
निगम ने सभी संबंधित अधिकारियों को पुराने आदेश के प्रावधानों की पालना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान पत्रकार संस्थान के अध्यक्ष को भी भेजी प्रतिलिपि
इस आदेश की प्रतिलिपि राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के कार्यकारी प्रबंधक (जनसंपर्क), जयपुर तथा राजस्थान पत्रकार संस्थान के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार लोढ़ा को भी भेजी गई है। इसके अतिरिक्त आदेश को रिकॉर्ड में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए यह आदेश महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे राजस्थान रोडवेज की बसों में राजस्थान और दिल्ली तक निःशुल्क यात्रा की सुविधा को लेकर संबंधित अधिकारियों को पूर्व प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश मिले हैं।
नोट: यह सुविधा आदेश में उल्लिखित अधिस्वीकृत पत्रकारों के लिए है। यात्रा के दौरान लागू पात्रता, पहचान-पत्र तथा अन्य शर्तों की पुष्टि संबंधित विभाग या रोडवेज आगार से कर लेना उचित होगा।

आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे

 (और ऐ रसूल) तुम (चाहे) किसी हाल में हो और क़़ुरान की कोई सी भी आयत तिलावत करते हो और (लोगों) तुम कोई सा भी अमल कर रहे हो हम (हम सर वक़त) जब तुम उस काम में मषग़ूल होते हो तुम को देखते रहते हैं और तुम्हारे परवरदिगार से ज़र्रा भी कोई चीज़ ग़ायब नहीं रह सकती न ज़मीन में और न आसमान में और न कोई चीज़ ज़र्रे से छोटी है और न उससे बढ़ी चीज़ मगर वह रौषन किताब लौहे महफूज़ में ज़रुर है (61)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि दोस्ताने ख़ुदा पर (क़यामत में) न तो कोई ख़ौफ होगा और न वह आजु़र्दा (ग़मग़ीन) ख़ातिर होगे (62)
ये वह लोग हैं जो ईमान लाए और (ख़़ुदा से) डरते थे (63)
उन्हीं लोगों के वास्ते दीन की जि़न्दगी में भी और आखि़रत में (भी) ख़ुशख़बरी है ख़़ुदा की बातों में अदल बदल नहीं हुआ करता यही तो बड़ी कामयाबी है (64)
और (ऐ रसूल) उन (कुफ़्फ़ार) की बातों का तुम रंज न किया करो इसमें तो शक नहीं कि सारी इज़्ज़त तो सिर्फ ख़ुदा ही के लिए है वही सबकी सुनता जानता है (65)
आगाह रहो इसमें शक नहीं कि जो लोग आसमानों में हैं और जो लोग ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही के लिए है और जो लोग ख़ुदा को छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो (ख़ुदा के फजऱ्) शररीकों की राह पर भी नहीं चलते बल्कि वह तो सिर्फ अपनी अटकल पर चलते हैं और वह सिर्फ वहमी और ख़्याली बातें किया करते हैं (66)
वह वही (खुदाए क़ादिर तवाना) है जिसने तुम्हारे नफा के वास्ते रात को बनाया ताकि तुम इसमें चैन करो और दिन को (बनाया) कि उसकी रौषनी में देखो भालो उसमें शक नहीं जो लोग सुन लेते हैं उनके लिए इसमें (कुदरत की बहुतेरी निशानियाँ हैं) (67)
लोगों ने तो कह दिया कि ख़ुदा ने बेटा बना लिया-ये महज़ लगों वह तमाम नकायस से पाक व पाकीज़ा वह (हर तरह) से बेपरवाह हैं व जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) उसी का है (जो कुछ) तुम कहते हो( उसकी कोई दलील तो तुम्हारे पास है नहीं क्या तुम ख़ुदा पर) (यूही) बे जाने बूझे झूठ बोला करते हो (68)
ऐ रसूल तुम कह दो कि बेशक जो लोग झूठ मूठ ख़़ुदा पर बोहतान बाधते हैं वह कभी कामयाब न होगें (69)
(ये) दुनिया के (चन्द रोज़ा) फायदे हैं फिर तो आखि़र हमारी ही तरफ लौट कर आना है तब उनके कुफ्र की सज़ा में हम उनको सख़्त अज़ाब के मज़े चखाएँगें (70)

22 अक्टूबर 2026

अशफाक़-बिस्मिल: आज़ादी की लड़ाई में एकता की मिसाल

 अशफाक़-बिस्मिल: आज़ादी की लड़ाई में एकता की मिसाल
कोटा आज विज्ञान नगर स्थित एक निजी शिक्षण संस्थान वाई, जी, एन इंस्टीट्यूट में अमर शहीद अशफाकउल्लाह खान का जन्म दिन मनाया गया। इस अवसर पर बोलते हुए उम्मीद एक सेवा संस्था के अध्यक्ष डॉ. रियाज़ खान ने बताया कि, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल संघर्ष और बलिदान की गाथा नहीं है, बल्कि यह उस भारत की तस्वीर भी पेश करता है जिसमें धर्म और मजहब से ऊपर उठकर देश की आज़ादी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। शहीद अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ और राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती इसी भावना का एक ऐतिहासिक उदाहरण है।
22 अक्टूबर 1900 को शाहजहाँपुर में जन्मे अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ युवावस्था में ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ गए। वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य बने। इसी संगठन के माध्यम से उनकी निकटता राम प्रसाद बिस्मिल से हुई। दोनों की विचारधारा और धार्मिक पृष्ठभूमि अलग थी, लेकिन देश की स्वतंत्रता का लक्ष्य दोनों को एक सूत्र में बांधता था।
इस अवसर पर बोलते हुए ए एम पी कोटा प्रभारी सिराज अहमद अंसारी ने कहा कि, 9 अगस्त 1925 का काकोरी ट्रेन एक्शन भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन की महत्वपूर्ण घटना बना। इस कार्रवाई के बाद अंग्रेजी सरकार ने क्रांतिकारियों पर शिकंजा कस दिया। अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ को गिरफ्तार किया गया और काकोरी षड्यंत्र मामले में उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया।
19 दिसंबर 1927 को फैजाबाद जेल में अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ को फाँसी दे दी गई। उसी दिन राम प्रसाद बिस्मिल और रोशन सिंह को भी फाँसी दी गई। तीनों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
अशफाक़ और बिस्मिल की मित्रता आज भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताती है कि स्वतंत्रता आंदोलन की ताकत केवल हथियार या संगठन नहीं थे, बल्कि साझा राष्ट्रीय उद्देश्य भी था। वाई जी एन इंस्टीट्यूट के निदेशक अरशद अंसारी ने कहा कि, एक मुसलमान क्रांतिकारी अशफाक़ और एक हिंदू क्रांतिकारी बिस्मिल का साथ उस दौर में एक ऐसा संदेश था जिसे अंग्रेजी शासन की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति के संदर्भ में भी देखा जाता है।
अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ शायर भी थे। उनकी रचनाओं में वतन से मोहब्बत और बलिदान की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। उनका जीवन इस बात की याद दिलाता है कि आज़ादी केवल किसी एक समुदाय की उपलब्धि नहीं थी; इसके लिए भारत के अलग-अलग धर्मों और वर्गों के लोगों ने साथ मिलकर संघर्ष किया था।
कार्यक्रम का संचालन नूर अहमद पठान ने किया। उन्होंने कहा कि, आज जब हम स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को याद करते हैं, तो अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ और राम प्रसाद बिस्मिल की दोस्ती केवल अतीत का एक अध्याय नहीं रह जाती। यह उस साझा भारतीय विरासत की याद दिलाती है जिसमें देश पहले था और बाकी पहचानें उसके बाद।
अशफाक़ उल्लाह ख़ाँ का बलिदान इसलिए अमर है कि उन्होंने अपने जीवन से यह साबित किया कि वतन की मोहब्बत किसी मजहब की मोहताज नहीं होती।
सादर प्रकाशनार्थ
दैनिक....
सद्भावी
नूर अहमद पठान
मो. 9571310137

फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर इमान लाओगे (आहा) क्या अब (इमान लाए) हालाकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे

 फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर इमान लाओगे (आहा) क्या अब (इमान लाए) हालाकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे (51)
फिर (क़यामत के दिन) ज़ालिम लोगों से कहा जाएगा कि (अब हमेशा के अज़ाब के मजे़ चखो (दुनिया में) जैसी तुम्हारी करतूतें तुम्हें (आखि़रत में) वैसा ही बदला दिया जाएगा (52)
(ऐ रसूल) तुम से लोग पूछतें हैं कि क्या (जो कुछ तुम कहते हो) वह सब ठीक है तुम कह दो (हाँ) अपने परवरदिगार की कसम ठीक है और तुम (ख़ुदा को) हरा नहीं सकते (53)
और (दुनिया में) जिस जिसने (हमारी नाफरमानी कर के) ज़ुल्म किया है (क़यामत के दिन) अगर तमाम ख़ज़ाने जो जमीन में हैं उसे मिल जाएँ तो अपने गुनाह के बदले ज़रुर फिदया दे निकले और जब वह लोग अज़ाब को देखेगें तो इज़हारे निदामत करेगें (शर्मिंदा होंगें) और उनमें बाहम इन्साफ़ के साथ हुक्म दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा (बराबर ज़ुल्म न किया जाएगा (54)
आगाह रहो कि जो कुछ आसमानों में और ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है आग़ाह राहे कि ख़ुदा का वायदा यक़ीनी ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं (55)
वही जि़न्दा करता है और वही मारता है और तुम सब के सब उसी की तरफ लौटाए जाओगें (56)
लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से नसीहत (किताबे ख़़ुदा आ चुकी और जो (मरज़ शिर्क वगै़रह) दिल में हैं उनकी दवा और ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत (57)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (ये क़़ुरान) ख़़ुदा के फज़ल व करम और उसकी रहमत से तुमको मिला है (ही) तो उन लोगों को इस पर खुश होना चाहिए (58)
और जो कुछ वह जमा कर रहे हैं उससे कहीं बेहतर है (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम्हारा क्या ख़्याल है कि ख़ुदा ने तुम पर रोज़ी नाजि़ल की तो अब उसमें से बाज़ को हराम बाज़ को हलाल बनाने लगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या ख़ुदा ने तुम्हें इजाज़त दी है या तुम ख़ुदा पर बोहतान बाँधते हो (59)
और जो लोग ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बाधा करते हैं रोजे़ क़यामत का क्या ख़्याल करते हैं उसमें शक नहीं कि ख़़ुदा तो लोगों पर बड़ा फज़ल व (करम) है मगर उनमें से बहुतेरे शुक्र गुज़ार नहीं हैं (60)

21 अक्टूबर 2026

दिल्ली में पुलिसकर्मी द्वारा हमला एवं मारपीट, दिल्ली पुलिस द्वारा FIR दर्ज नहीं करने पर जयपुर में Zero FIR दर्ज कराने का विधिक अधिकार

 

दिल्ली में पुलिसकर्मी द्वारा हमला एवं मारपीट, दिल्ली पुलिस द्वारा FIR दर्ज नहीं करने पर जयपुर में Zero FIR दर्ज कराने का विधिक अधिकार
क्यों है, दिल्ली में पुलिसकर्मी द्वारा फरियादिया के साथ मारपीट किए जाने तथा दिल्ली के क्षेत्राधिकार वाले थाने में शिकायत देने के बावजूद FIR दर्ज नहीं किए जाने पर, जयपुर के किसी पुलिस थाने में Zero FIR दर्ज कराने का विधिक आधार उपलब्ध है, यदि शिकायत से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो केवल इस आधार पर FIR दर्ज करने से इनकार नहीं किया जा सकता कि घटना दिल्ली में हुई है और जयपुर पुलिस का क्षेत्राधिकार नहीं है, इसका प्रमुख आधार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 173(1) है, इसके अतिरिक्त, उच्चतम न्यायालय के बाध्यकारी निर्णय भी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर FIR दर्ज करने के दायित्व को स्पष्ट करते हैं, संबंधित विधिक प्रावधान, न्यायिक दृष्टान्त और उपलब्ध उपचार का विवरण दिया जा रहा है, Zero FIR का वैधानिक प्रावधान देखे तो— BNSS की धारा 173(1)
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 173(1) में संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करने का प्रावधान है, जो इसका महत्त्वपूर्ण अंश है:“Every information relating to the commission of a cognizable offence, irrespective of the area where the offence is committed…”
अर्थात, संज्ञेय अपराध किए जाने से संबंधित सूचना पुलिस थाने के क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना दी जा सकती है,
आधिकारिक कानून: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधान का वर्तमान मामले में उपयोग अगर घटना दिल्ली में भी हुई, ओर कथित आरोपी दिल्ली पुलिस के कर्मचारी है,
फरियादिया ने दिल्ली के संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दी, पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की, फरियादिया जयपुर आ गई या जयपुर में मौजूद है,
ऐसी स्थिति में फरियादिया जयपुर के पुलिस थाने में घटना की सूचना देकर Zero FIR दर्ज करने का अनुरोध कर सकती है,
यदि सूचना से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो जयपुर पुलिस केवल दिल्ली का क्षेत्राधिकार होने का आधार लेकर FIR दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती, Zero FIR का उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर क्षेत्राधिकार की बाधा के कारण आपराधिक शिकायत दर्ज होने में होने वाली देरी को रोकना है, सामान्यतः FIR दर्ज होने के बाद उसे आगे की जांच के लिए संबंधित क्षेत्राधिकार वाले पुलिस थाने को भेजा जा सकता है, दिल्ली पुलिसकर्मी द्वारा मारपीट के मामले में कौन-से अपराध बन सकते हैं?
आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की संबंधित धाराएँ लागू हो सकती हैं, कथित कृत्य दिल्ली पुलिस मारपिटाई हमला मामले में,
संभावित विधिक प्रावधान
जानबूझकर मारपीट करके चोट पहुँचाना, धारा 115(2), तथ्यों के अनुसार, गंभीर चोट पहुँचाना
धारा 117, यदि गंभीर चोट की वैधानिक शर्तें पूरी हों, आपराधिक बल का प्रयोग
धारा 131, परिस्थितियों के अनुसार, गलत तरीके से रोकना
धारा 126, यदि उसके आवश्यक तत्व मौजूद हों
धमकी देना
धारा 351, यदि आपराधिक धमकी के तत्व मौजूद हों
लोक सेवक द्वारा कानून के विपरीत कार्य
संबंधित अपराध के आवश्यक तत्व सिद्ध होने पर लागू प्रावधान
महत्त्वपूर्ण सावधानी: पुलिसकर्मी द्वारा की गई प्रत्येक मारपीट अपने आप किसी एक निश्चित धारा में नहीं आती, चोट की प्रकृति, घटना की परिस्थितियों, पुलिसकर्मी के कृत्य, प्रयुक्त बल तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सही धाराएँ निर्धारित होंगी,
यदि पुलिसकर्मी ने अपनी आधिकारिक हैसियत का दुरुपयोग किया हो, तो उसके विरुद्ध लागू आपराधिक प्रावधानों के साथ-साथ विभागीय कार्रवाई की माँग भी की जा सकती है।
उच्चतम न्यायालय के महत्त्वपूर्ण न्यायिक दृष्टान्त(A) Lalita Kumari v. Government of Uttar Pradesh
न्यायालय: उच्चतम न्यायालय
निर्णय: संविधान पीठ, 2013
प्रकाशित संदर्भ: (2014) 2 SCC 1यह FIR दर्ज करने के संबंध में सबसे महत्त्वपूर्ण निर्णयों में से एक है, निर्णय का सिद्धान्त,उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस को दी गई सूचना से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो FIR दर्ज करना सामान्यतः अनिवार्य है, पुलिस को ऐसे मामले में FIR दर्ज करने से बचने के लिए मनमाने ढंग से प्रारंभिक जाँच का सहारा लेने की अनुमति नहीं है, निर्णय में सीमित श्रेणियों में प्रारंभिक जाँच के संबंध में भी दिशा-निर्देश दिए गए थे,
वर्तमान मामले में उपयोग
यदि फरियादिया की शिकायत से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो दिल्ली पुलिस द्वारा केवल शिकायत लेकर FIR दर्ज नहीं करना न्यायिक चुनौती का विषय हो सकता है, इसी प्रकार, जयपुर पुलिस भी केवल क्षेत्राधिकार दिल्ली में होने के आधार पर Zero FIR दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती, हालाँकि, इस निर्णय को यह मानकर लागू नहीं किया जाना चाहिए कि हर प्रकार की शिकायत में बिना किसी अपवाद के FIR दर्ज करना ही होगा, वर्तमान में BNSS की धारा 173 के प्रावधान भी लागू होंगे (B) Satvinder Kaur v. State (Government of NCT of Delhi)
न्यायालय: उच्चतम न्यायालय
निर्णय: 1999 संदर्भ: (1999) 8 SCC 728 यह निर्णय क्षेत्राधिकार और आपराधिक जाँच से संबंधित महत्त्वपूर्ण दृष्टान्त है, निर्णय का सिद्धान्त
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार से संबंधित प्रश्न मात्र के आधार पर जाँच के प्रारंभिक चरण में आपराधिक कार्यवाही को बाधित नहीं किया जाना चाहिए,
क्षेत्राधिकार के प्रश्न की जाँच उचित प्रक्रिया के अनुसार की जा सकती है, वर्तमान मामले में उपयोग, दिल्ली में हुई घटना की सूचना जयपुर पुलिस को दिए जाने पर क्षेत्राधिकार का प्रश्न अपने आप में Zero FIR दर्ज करने से इनकार करने का पर्याप्त आधार नहीं है।
इस सिद्धान्त को वर्तमान BNSS की धारा 173(1) के साथ पढ़ना चाहिए, (C) State of Haryana v. Bhajan Lal
न्यायालय: उच्चतम न्यायालय
निर्णय: 1992 संदर्भ: 1992 Supp (1) SCC 335
यह आपराधिक कार्यवाही और FIR से संबंधित प्रमुख निर्णय है,
निर्णय का महत्त्व
इस निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने उन परिस्थितियों पर विचार किया जिनमें आपराधिक कार्यवाही में न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है, यह निर्णय FIR दर्ज करने के दायित्व से संबंधित विधिक सिद्धान्तों के व्यापक संदर्भ में उपयोगी है, लेकिन इसे Zero FIR पर सीधे और अकेले निर्णायक निर्णय के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा,
वर्तमान मामले में प्राथमिक आधार BNSS की धारा 173(1), तथा FIR दर्ज करने के दायित्व के संबंध में Lalita Kumari का निर्णय होगा, Zero FIR दर्ज नहीं करने पर क्या उपचार उपलब्ध हैं?
यदि जयपुर पुलिस भी Zero FIR दर्ज करने से इनकार करती है, तो फरियादिया निम्नलिखित उपाय अपना सकती है, (1) BNSS की धारा 173(4) — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को शिकायत, यदि थाना प्रभारी संज्ञेय अपराध की सूचना दर्ज करने से इनकार करता है, तो फरियादिया शिकायत का सार लिखित रूप में संबंधित पुलिस अधीक्षक को डाक से भेज सकती है, इस मामले में शिकायत की प्रतियाँ निम्न अधिकारियों को भेजना व्यावहारिक हो सकता है:
पुलिस अधीक्षक, संबंधित जिला जयपुर, पुलिस आयुक्त, जयपुर, यदि घटना और संबंधित थाना आयुक्तालय के अधीन हों, पुलिस आयुक्त, दिल्ली, संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, दिल्ली पुलिस।
BNSS की धारा 173(4) के अनुसार, शिकायत से संज्ञेय अपराध का खुलासा होने पर संबंधित पुलिस अधीक्षक स्वयं जाँच कर सकता है अथवा अधीनस्थ पुलिस अधिकारी से जाँच कराने का निर्देश दे सकता है, आधिकारिक प्रावधान: BNSS, धारा 173 — India Code⁠, व्यावहारिक सलाह: शिकायत रजिस्टर्ड डाक या स्पीड पोस्ट से भेजें और डाक रसीद, शिकायत की प्रति तथा प्राप्ति संबंधी साक्ष्य सुरक्षित रखें, BNSS की धारा 175(3) — मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन
यदि पुलिस के समक्ष शिकायत करने के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं होती, तो फरियादिया सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष जाँच का आदेश देने के लिए आवेदन कर सकती है,
BNSS की धारा 175(3) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट द्वारा जाँच का आदेश देने की प्रक्रिया लागू होती है। इसके लिए धारा 173(4) के अंतर्गत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को आवेदन करने सहित धारा में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है, घटना दिल्ली में हुई होने के कारण यह देखना होगा कि संबंधित मजिस्ट्रेट के पास मामले के संबंध में आवश्यक क्षेत्रीय और वैधानिक अधिकारिता है या नहीं, जयपुर में केवल शिकायतकर्ता की उपस्थिति के आधार पर जयपुर के मजिस्ट्रेट को दिल्ली में हुए प्रत्येक अपराध की जाँच का आदेश देने का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं हो जाता, पुलिसकर्मी के विरुद्ध शिकायत में कौन-से साक्ष्य सुरक्षित रखने चाहिए?
इस प्रकार के मामले में निम्नलिखित साक्ष्य महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं:
घटना की तारीख, समय और दिल्ली में घटनास्थल का पूरा पता, संबंधित पुलिसकर्मी का नाम, पद, बैज नंबर अथवा पहचान संबंधी विवरण, यदि उपलब्ध हो, चोटों की तस्वीरें और सरकारी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट, CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो या ऑडियो रिकॉर्डिंग, यदि उपलब्ध हो।
प्रत्यक्षदर्शियों के नाम और संपर्क विवरण, दिल्ली के थाने में दी गई शिकायत की प्रति,
शिकायत प्राप्त होने की रसीद, डायरी नंबर, ऑनलाइन शिकायत संख्या या डाक का प्रमाण, FIR दर्ज नहीं किए जाने संबंधी उपलब्ध पत्राचार,
घटना के बाद हुए उपचार और खर्च के दस्तावेज, CCTV फुटेज मिटने की आशंका होने पर उसे सुरक्षित रखने के लिए संबंधित अधिकारी को तत्काल लिखित अनुरोध करना उपयोगी होगा, क्या दिल्ली में FIR दर्ज नहीं होने पर जयपुर पुलिस के विरुद्ध भी कार्रवाई हो सकती है? इस प्रश्न में दो अलग-अलग परिस्थितियों का अंतर समझना आवश्यक है, पहली स्थिति: दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में हुई घटना की शिकायत लेकर FIR दर्ज नहीं की, इस स्थिति में दिल्ली पुलिस के विरुद्ध सक्षम वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत, विभागीय कार्रवाई की माँग तथा परिस्थितियों के अनुसार अन्य कानूनी उपचार अपनाए जा सकते हैं, दूसरी स्थिति: फरियादिया जयपुर के पुलिस थाने में Zero FIR दर्ज कराने जाती है और जयपुर पुलिस भी केवल क्षेत्राधिकार का आधार लेकर इनकार करती है, यदि सूचना से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो ऐसा इनकार BNSS की धारा 173(1) के विपरीत हो सकता है। ऐसी स्थिति में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को शिकायत दी जा सकती है और लागू कानून के अनुसार आगे का उपचार अपनाया जा सकता है,
हालाँकि, किसी पुलिसकर्मी की व्यक्तिगत आपराधिक या विभागीय जिम्मेदारी का निर्धारण उसके वास्तविक आचरण, लागू कानून और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा, ऐसे में विधिक स्थिति निम्न प्रकार से समझी जा सकती है: दिल्ली में पुलिसकर्मी द्वारा कथित मारपीट की शिकायत दिल्ली के संबंधित थाने में दिए जाने के बावजूद FIR दर्ज नहीं होना कानूनी चुनौती का विषय हो सकता है।
BNSS की धारा 173(1) के अनुसार संज्ञेय अपराध की सूचना क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना दी जा सकती है,
यदि फरियादिया जयपुर में Zero FIR दर्ज कराने जाती है, तो जयपुर पुलिस केवल इस आधार पर इनकार नहीं कर सकती कि घटना दिल्ली में हुई है, FIR दर्ज होने के बाद मामले को आगे की जाँच के लिए संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने को भेजा जा सकता है, FIR दर्ज करने से इनकार होने पर BNSS की धारा 173(4) के अंतर्गत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है, इसके बाद धारा 175(3) के अंतर्गत सक्षम मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन का विकल्प भी उपलब्ध हो सकता है।
FIR दर्ज करने के दायित्व के संबंध में Lalita Kumari v. Government of Uttar Pradesh प्रमुख न्यायिक दृष्टान्त है, आधिकारिक विधिक स्रोत: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 — India Code⁠, आपके मामले के लिए अगला महत्त्वपूर्ण कदम
यदि आप इस प्रकरण में फरियादिया की ओर से कानूनी कार्रवाई करना चाहते हैं, तो तीन तथ्य स्पष्ट कर दें:
दिल्ली में घटना किस तारीख को और किस स्थान पर हुई थी? क्या मारपीट करने वाला पुलिसकर्मी वर्दी में था और क्या उसकी पहचान ज्ञात है?
दिल्ली के थाने में दी गई शिकायत लिखित थी? क्या उसकी प्राप्ति रसीद या शिकायत नंबर उपलब्ध है?
इन तथ्यों के आधार पर मजिस्ट्रेट या हाईकोर्ट में कार्यवाही के साथ कर्तव्य निर्वहन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कर्तव्यविहीनता का मुकदमा दर्ज हो सकता है, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

नेत्रदान के लिए कोटा से बारां पहुंची शाइन इंडिया

 नेत्रदान के लिए कोटा से बारां पहुंची शाइन इंडिया

कॉर्निया की अंधता का दुख भोग रहे मरीजों के लिए, नेत्रदान ही एक माध्यम है । सफल कॉर्निया प्रत्यारोपण के माध्यम से, दृष्टि बाधित व्यक्तियों के जीवन से अंधकार को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है ।

इसी क्रम में आज, सत्संग रोड बारां निवासी सुरेश चंद्र जैन के आकस्मिक निधन की सूचना भारत विकास परिषद के सदस्य रमाकांत गुप्ता और कमलेश जैन के माध्यम से कोटा में शाइन इंडिया फाउंडेशन, व बीबीजे चैप्टर के डॉ कुलवंत गौड़ को मिली । रमाकांत ने बताया कि, पारिवार के सदस्यों ने स्व प्रेरणा से स्व०पिताजी के नेत्रदान का निर्णय लिया है ।

चिकित्सकीय जानकारी लेने के उपरांत,कोटा से डॉ गौड़ नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ लेकर, तुरंत कोटा से रवाना हुए और शवयात्रा निकलने से ठीक पूर्व निवास स्थान पर पहुंचकर नेत्रदान की प्रक्रिया परिवार के सभी सदस्यों के बीच में संपन्न की। 

और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम जि़म्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ

 और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार फसादियों को खूब जानता है और अगर वह तुम्हे झुठलाए तो तुम कह दो कि हमारे लिए हमारी कार गुजारी है और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारस्तानी जो कुछ मै करता हूँ उसके तुम जि़म्मेदार नहीं और जो कुछ तुम करते हो उससे मै बरी हूँ (41)
और उनमें से बाज़ ऐसे हैं कि तुम्हारी ज़बानों की तरफ कान लगाए रहते हैं तो (क्या) वह तुम्हारी सुन लेगें हरगिज़ नहीं अगरचे वह कुछ समझ भी न सकते हो (42)
तुम कही बहरों को कुछ सुना सकते हो और बाज़ उनमें से ऐसे हैं जो तुम्हारी तरफ (टकटकी बाँधे) देखते हैं तो (क्या वह इमान लाएँगें हरगिज़ नहीं) अगरचे उन्हें कुछ न सूझता हो तो तुम अन्धे को राहे रास्त दिखा दोगे (43)
ख़ुदा तो हरगिज़ लोगों पर कुछ भी ज़ुल्म नहीं करता मगर लोग खुद अपने ऊपर (अपनी करतूत से) जुल्म किया करते है (44)
और जिस दिन ख़़ुदा इन लोगों को (अपनी बारगाह में) जमा करेगा तो गोया ये लोग (समझेगें कि दुनिया में) बस घड़ी दिन भर ठहरे और आपस में एक दूसरे को पहचानेंगे जिन लोगों ने ख़ुदा की बारगाह में हाजि़र होने को झुठलाया वह ज़रुर घाटे में हैं और हिदायत याफता न थे (45)
ऐ रसूल हम जिस जिस (अज़ाब) का उनसे वायदा कर चुके हैं उनमें से बाज़ ख़्वाहा तुम्हें दिखा दें या तुमको (पहले ही दुनिया से) उठा ले फिर (आखि़र) तो उन सबको हमारी तरफ लौटना ही है फिर जो कुछ ये लोग कर रहे हैं ख़ुदा तो उस पर गवाह ही है (46)
और हर उम्मत का ख़ास (एक) एक रसूल हुआ है फिर जब उनका रसूल (हमारी बारगाह में) आएगा तो उनके दरम्यिान इन्साफ़ के साथ फैसला कर दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा बराबर ज़़ुल्म न किया जाएगा (47)
ये लोग कहा करते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आखि़र) ये (अज़ाब का वायदा) कब पूरा होगा (48)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै खुद अपने वास्ते नुकसान पर क़ादिर हूँ न नफा पर मगर जो ख़ुदा चाहे हर उम्मत (के रहने) का (उसके इल्म में) एक वक़्त मुक़र्रर है-जब उन का वक़्त आ जाता है तो न एक घड़ी पीछे हट सकती हैं और न आगे बढ़ सकते हैं (49)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या तुम समझते हो कि अगर उसका अज़ाब तुम पर रात को या दिन को आ जाए तो (तुम क्या करोगे) फिर गुनाहगार लोग आखि़र काहे की जल्दी मचा रहे हैं (50)

20 अक्टूबर 2026

नारा हूँ ना , महिला हूँ ना, कर सकती हूँ , लड़ सकती हूँ , इस नारे को बुलंद करते हुए , देश भर में अपराध घटनाओ की सिटी कहे जाने वाले ,,कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गौतम , उनकी टीम ने ,, मुंबई में टाइगर श्रॉफ के हमलावरों को चुटकियों में पकड़ लिया ,, इस बहादुरी , समझदारी , बेस्ट पुलिसिंग के लिए निश्चित तोर पर वोह ,, उनकी टीम मुबारकबाद की हक़दार है , बधाई की पात्र है

नारा हूँ ना , महिला हूँ ना, कर सकती हूँ , लड़ सकती हूँ , इस नारे को बुलंद करते हुए , देश भर में अपराध घटनाओ की सिटी कहे जाने वाले ,,कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वी गौतम , उनकी टीम ने ,, मुंबई में टाइगर श्रॉफ के हमलावरों को चुटकियों में पकड़ लिया ,, इस बहादुरी , समझदारी , बेस्ट पुलिसिंग के लिए निश्चित तोर पर वोह ,, उनकी टीम मुबारकबाद की हक़दार है , बधाई की पात्र है ,, तेजस्वी गौतम पुलिस अधीक्षक के साथ साथ , ब्रेवो वूमेन ,,बहुमुखी प्रतिभा की धनी भी हैं , लेकिन कोटा की सियासत ने उन्हें कोटा में उलझा कर रख दिया , और वोह चाहकर भी बहुत कुछ प्रयासों के बावजूद भी क़ानून व्यवस्थाओं , ,ब्लाइंड मर्डर , सहित डकैती , लूट , अन्य गंभीर घटनाओं की परतें खोलने में उलझकर रह गयीं , चुनावों में भी उनकी स्थिति दबाव में रही , ,खेर फिर भी तेजस्वी गौतम ने बंधे हुए हाथों के बावजूद भी , कोटा के लिए बहुत कुछ करने का प्रयास किया ,, लेकिन यह टाइगर के हमलावरों की गिरफ्तारी निश्चित तोर पर , बढ़ी कार्यवाही है , क्योंकि यह गेंग जब ट्रेन में आई, तो बीच में कई स्टेशन पढ़ते है , चाहते तो उन्हें रास्ते में ही रोका जा सकता था , जो दूसरे लोग , रेलवे पुलिस नहीं कर सकी ,, खेर इस कामयाबी के लिए कोटा की पुलिसिंग का नाम रोशन हुआ है ,, तेजस्वी गौतम आई पी एस एक जाना माना नाम , स्मैक तस्करों के खिलाफ , नशीले पदार्थों के आदतन अपराधियों के खिलाफ ,, इनकी पुलिसिंग के क़िस्से सभी जानते है , लेकिन कोटा में ज़मीन जायदाद , रुपयों के लेनदेन , ठगी , साइबर ठगी , चाकूबाजी , गोलीबारी , फिर चुनाव जैसे मामलों के अलावा सियासी दबाव में ही वोह उलझ गईं , तेजस्वी गौतम डरी भी नहीं, दबी भी नहीं , लेकिन नौकरी तो नौकरी है , कोशिशों के बावजूद भी , नशामुक्ति और नशे के व्यापरियों के खिलाफ बढ़ा वृहद अभियान नहीं चला पाईं ,, महिला सुरक्षा , आत्म स्वावलम्बी , की कार्य योजनाएं भी नहीं चली , नशे के खिलाफ मोटिवेशनल नाटक ,, प्रहसन के ज़रीये कार्य्रकम नहीं हो सके , लेकिन फिर भी जो कुछ भी किया बेहतर किया ,, अब तो वोह , पदोन्नत होकड, डी आई जी हो गई है , केडर आते ही उनकी ससम्मान विदाई भी हो जायेगी , लेकिन कोटा में , कोटा के लोगों को अपराधों से बचाने के लिए नोजवानों को जानलेवा नशे से बचाने के लिए , स्मैक के आदतन लोगों द्वारा परिवार के परिवार तबाह करने , और मोहल्लों , गलियों में छूट पुट चोरी अपराध बचाने के लिए ,,,,,जो लोग हार्डकोर क्रिमिनल है , जो गवाहों को होस्टाइल करवाकर , ज़मानत ले लेते हैं , या फिर बरी हो जाते है , उन्हें सज़ा दिलवाने के लिए , अपंने नियंत्रण में विधिक पैरोकारों के साथ मिलकर उन्हें अंतिम समय तक हर हाल में सज़ा दिलवाने की जो उनकी कार्ययोजना थी , उसे वोह चाहकर भी पूरा नहीं कर पा रही हैं , क्योंकि सियासी दबाव तो है ही , होता भी है , लेकिन वोह इसे मैनेज कर लेती है , ,बस , कभी वी वी आई पी ड्यूटी , कभी मीटिंगे , कभी मेले , कभी ठेले , कभी बढ़ी दुर्घटनाएं , कभी बढ़ी घटनाएं ,, चुनाव वगेरा इन्हीं की क़ानून व्यवस्था ड्यूटियों में वोह , उनकी पुलिस टीम उलझ कर रह गई , और कोटा को नशा मुक्त करने, , आत्महत्या मुक्त करने ,, अपराध मुक्त करने , स्मैकचियों की आपराधिक घटनाओं से कोटा को मुक्त करने का उनका सपना , पूरी कोशिशों के बावजूद भी आधा अधूरा रहा , हालात यह हुए के पुलिस जवान नशे की तस्करी में पकड़े गए, शराब के नशे में महिला डॉक्टर से अभद्रता करते पकड़े गए, लेकिन हार्डकोर अपराधियों , आर्थिक अपराधियों , गवाह मांडोली ,, गवाह खरीद फरोख्त , के ज़रिये , मजिस्ट्रेट के समक्ष बयानों के बाद भी गवाह मुकर कर , होस्टाइल होकर, घटना से इंकार कर अपराधियों को बरी करवा रहे हैं , ऐसे मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान देकर मुकरने वालों के खिलाफ भी वोह क़ानूनी कार्यवाही कर होस्टाइल होने वाले गवाहों में खौफ पैदा करना चाहती थी ,, होस्टाइल गवाह के बावजूद भी बेहतर अनुसंधान ,, बेहतर अनुसंधान के बाद , कोर्ट में बेहतर तरीके से पैरवी ,,बेहतर न्यायिक दृष्टांतों के साथ बहस करवाकर वोह हार्डकोर अपराधियों को सज़ा दिलवाना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होंने कोशिशें भी कीं, लेकिन उनके ओहदे में बुलंदी , प्रमोशन तो हुआ , हार्डकोर अपराधियों को हर हाल में सज़ा दिलवाकर उन्हें सबक़ दिलाने , नशामुक्त कोटा , अपराध मुक्त कोटा का सपना, वोह पूरा करने की हर सम्भव कोशिशों के बावजूद भी सियासी दखल अंदाज़ी कहो , या अन्य कार्यों में व्यस्तता कहो , लेकिन बहुत कुछ करने के बावजूद भी बहुत कुछ नहीं कर पायीं ,, कोटा की जनता अभी भी उनसे अपेक्षा करती है , उनकी पदोन्नति के लिए दुआएं करती है , लेकिन कहते हैं ना लड़की हूँ, कर सकती हूँ , तो वोह डी आई जी पद पर जाने के पहले ,, एक बार फिर लेडी सिंघम बनकर अगर अपने सपनों को साकार करने की क्रियान्विति के प्रयासों के तहत , नशामुक्त कोटा ,, अपराध मुक्त कोटा, सियासी दखलंदाज़ी मुक्त ,कोटा ,, हार्डकोर अपराधियों को हर हाल में अदालत तक बेहतर पैरवी करवाकर सज़ा दिलवाने का जो उनका अभियान है, करें तो सही , कोटा की जनता उनके इन कार्यों में मददगार बनने के लिए पलक पावणे बिछा कर खडी है ,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339 

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