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06 अगस्त 2026

वर्ष 2026 ओर इसके पूर्व के हज यात्रियों का अख़लाक़ी फ़र्ज़ है कि उनको सम्पूर्ण राशि चुकता के बाद भी जो दिक़्क़तें आई हैं वोह दिक़्क़तें वर्ष 2027 ओर भविष्य के हज यात्रियों को ना आये,

 

वर्ष 2026 ओर इसके पूर्व के हज यात्रियों का अख़लाक़ी फ़र्ज़ है कि उनको सम्पूर्ण राशि चुकता के बाद भी जो दिक़्क़तें आई हैं वोह दिक़्क़तें वर्ष 2027 ओर भविष्य के हज यात्रियों को ना आये, केंद्र सरकार और राज्य सरकारें नेता प्रतिपक्ष इन कमियों को दूर करवाये, हज किफायती हो बेहतर हो, हज पॉलिसी लोकसभा में बहुपक्षीय बहस , सुझावों के बाद ईमानदाराना, सुविधायुक्त, किफायती बने, जवाबदारी हो, अनावश्यक थोपे हुए खर्चे रुकें, स्मार्ट वाच, एयर टिकिट वसूली, रिहायशी, ट्रांसपोर्टेशन वगेरा वगेरा सम्पूर्ण वसूली के बाद भी अव्यवस्था, सुविधाओं में कटौती जवाब दार हो, अनावश्यक वसूली गई राशि लौटाई जाए जैसे विषयों पर , ऐडवोकेट अख्तर खान अकेला ने प्रधानमंत्री, अल्पसंख्यक मामलात मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष को महत्वपूर्ण सुझाव भेजे हैं,
ऐडवोकेट अख्तर खान अकेला ने अपने सुझावों में कहा है कि,, हज पॉलिसी 2026 में जिन हज सुविधाओं के सम्पूर्ण रूपये वसूले है , उनमे से कई असुविधाओं में कमी होने के कारण रूपये वापस लौटाने ,, और वर्ष 2027 के हजयात्रियों के लिए बनाई गई हज पॉलिसी में ,,हज यात्रियों को भविष्य में न्यूनतम असुविधाएं हो ,, खर्च कम आये इस मामले में लोकसभा में बहस करवाकर , अन्य बुद्धिजीवियों ,,एक्सपर्ट से विचार विमर्श कर बहतर व्यवस्था करने के निर्देश जारी हो , अख्तर खान अकेला ने सुझावों में कहा है कि , वर्ष 2026 की हज पॉलिसी के चलते पर्याप्त राशि प्राप्त करने के बावजूद भी हज यात्रियों को काफी असुविधाएं हुई है ,,,उनसे स्मार्ट वाच के नाम पर जबरिया लूट हुई ,, जबकि एयर टिकिट की पर्याप्त वसूली ,,मक्के ,,मदीने के ट्रांसपोर्टेशन वसूली , मोअल्लिम कॉन्ट्रेक्ट , मीना , अराफात में नाश्ता , खाना , लोकल बस ट्रांसपोर्टेशन , लगेज लाने ले जाने सहित ठहरने की व्यवस्था के तहत जो राशि वसूली की गई , उसके मुताबिक़ सुविधाएं नहीं मिली है , जबकि स्मार्ट वाच व्यवस्था अवैध चौथवसूली साबित हुई है ,,कथित स्मार्ट घड़ियां कंडम रहीं ,कुर्बानी खर्च स्थानीय खर्च से ज़्यादा साबित है ,हज इंस्पेक्टर और डॉक्टर ,,हज कार्यालय डोनेशन ,, सर्विस चार्ज ,, हज प्रशिक्षण वगेरा के जो खर्च वसूले है , उक्त खर्च में कटौती करते हुए ,, मक्के और मदीने में उक्त संबंधित सुविधाएँ जिनका खर्च हज पॉलिसी 2026 और प्रस्तावित हज पॉलिसी 2027 में दिया गया प्रस्तावित खर्च में कटौती करते हुए ,,उक्त सुविधाओं के लिए ईमादार व्यक्ति को सऊदी सरकार से कॉन्ट्रेक्ट के लिए ईमानदाराना नेगोसियेशन कर टेंडर दिए जाएँ ताकि कम खर्च में बेहतर हज प्रबंधन हो सके ,,,
(1 ) हज यात्रियों से हर बार हज भवन के नाम पर डोनेशन राशि प्रति हाजी पृथक पृथक ली जा रही है ,, लेकिन हज भवन के निर्माण की कोई खबर नहीं है, , जबकि हज यात्रियों से हज प्रशिक्षण के नाम पर प्रति हज यात्री पृथक से राशि वसूली जाती है , जबकि हर ज़िले में हज प्रशिक्षण शिविर स्थानीय भामाशाहों के खर्च पर ही होता है , जब हज प्रशिक्षण का सम्पूर्ण कार्यक्रम ,खर्च ज़िले के भामाशाहों द्वारा दिया जाता है, तो फिर हज प्रशिक्षण के नाम पर इस वसूली को भी रोका जाए , हज यात्रियों से सर्विस चार्ज वगेरा भी कम लिया जाए ,,
( 2 ) हज यात्रियों से मक्के और मदीने तक आने जाने के लिए हवाई जहाज़ के टिकिट एयर इंडिया फ्लाइट के मापदंडों के अनुरूप अधिकतम लिया जाता है , जबकि हज यात्रियों को फ़्लाईनेस एयर सर्विस की फ्लाइट से पहुंचाया और , लाया जाता है , जिसमे एयर इण्डिया सुविधाओं के मापदंडों से बहुत कम सुविधाएँ होती है ,, फ्लाइट में कंबल ,,वो मिटिंग(उल्टी) बेग ,ईयर फोन , यहां तक के फर्स्ट ऐड बॉक्स तक की सुविधा नहीं होती ,, हज यात्रियों की संख्या के मुक़ाबले में स्टाफ और एयर होस्टेस की संख्या कम होती है ,,लगेज समय पर पहुंचने पर भी ,, लोड नहीं होने से कई बार फ्लाइट की उड़ान में अनावश्यक देरी होती है ,,इतना सब हो तो भी चलेगा ,, लेकिन फ्लाइट में हज यात्रियों को ऐलोटेड सीटों के नंबर के हिसाब से , व्यवस्थित तरीके से बैठाने की व्यवस्था भी नहीं होती है , स्टाफ व्यवस्थित तरीके से पूर्व ऐलोटेड सीट नंबर पर हज यात्रियों को बैठाने की जान बूझकर व्यवस्था नहीं की जाती है , नतीजा यह होता है के हर फ्लाइट में अव्यवस्था , अराजकता , लड़ाई झगड़े का माहौल हो जाता हैं , जंगल के क़ानून की तरह जिसकी जहाँ मर्ज़ी हो , जहाँ उसकी ताक़त के बल पर सीट मिल जाए वहां बैठ जाओ वाली मुर्ख , गैर क़ानूनी व्यवस्था पर्याप्त किराया देने के बाद भी होती है ,, नतीजा मुक़ददस हज पवित्र सफर में हज यात्रियों की आपसी कहा सुनी का कारण भी बनता है इसलिए सुविधा के अनुसार किराया कम तय किया जाए और ऐलोटेड सीट पर ही यात्रियों को बैठाने की सख्त व्यवस्था हो , अन्य पर्याप्त सुविधाएँ और स्टाफ की भी व्यवस्था करवाई जाए ,, कम व्यवस्था तो किराया कम का सिद्धांत लागू कर किराए की दरों में कटौती कर हज यात्री को आर्थिक राहत दी जाए ,,,
(3 ) प्रत्येक राज्य में हज यात्रियों की संख्या के अनुसार ,,उनकी किसी भी समस्या के समाधान सहयोग के लिए हज इंस्पेक्टर की व्यवस्था होती है , जिनका खर्च भी हज यात्रियों से वसूला जाता है , कम से कम 400 हज यात्रियों पर एक हज इंस्पेक्टर की व्यवस्था होना चाहिए , लेकिन अनावश्यक संख्या बढ़ाकर हज इंस्पेक्टर का चयन कर अधिक संख्या में इंस्पेक्टर भेजे जाते हैं जिनका अतिरिक्त भार हज यात्रियों पर ही पढ़ता है , इस खर्च को भी हज इंस्पेक्टर की संख्या में कटौती कर कम किया जा सकता है ,, जबकि हज इंस्पेक्टर सऊदी में जाकर लापता से हो जाते हैं ,वोह खुद के हज और दूसरी व्यवस्थाओ में लग जाते है , घूमने , फिरने में लगे रहते हैं , इधर हज यात्रियों को परेशानी होने पर उनके बारे में विशिष्ठ जानकारी नहीं होने पर परेशानियों का सामना उठाना पढ़ता है ,,ऐसे में हज इंस्पेक्टर्स की कार्यप्रणाली की मॉनिटरिंग हो , उसकी एकाउंटीबिलिटी निर्धारित हो , हज इंस्पेक्टर को निर्देश हों के वोह उसकी ज़िम्मेदारी वाले सभी हज् यात्रियों से सम्पर्क में रहें ,, वाट्सएप ग्रुप ,, बोटिम ग्रुप , स्काइप ग्रुप जो भी सुविधाजनक हो सभी को उसमे जोड़कर नियमित सम्पर्क व्यवस्था हो ,,,,
(4 ) वर्ष 2026 में पूर्व मे जारी हज पॉलिसी में कथित स्मार्ट वाच का कोई प्रावधान था ही नहीं , लेकिन अचानक किसी घडी कम्पनी के प्रभाव में आकर उसकी अरबों रूपये की कमाई करवाने के चक्कर में स्मार्ट वाच का झांसा देकर प्रति हज यात्री एक स्मार्ट वाच ज़बरदस्ती थोपी गई जो एक लूट से कम नहीं थी , अप्रत्याशित थी गलत जानकारियों के प्रचार के आधार पर थी, घडी बिलकुल कंडम अनुपयोगी साबित रही ,,,ऐसे में स्मार्ट वाच के नाम पर लूट के दोषी लोगों को दण्डित किया जाए , जबकि प्रत्येक हज यात्री के पास स्मार्ट फोन ,, ऐंड्रोइड फोन होते हैं , उसमे सभी फीचर होते है ,, इसलिए हज यात्रियों को इंटरनेशनल सिम , या सऊदी अरब की सिम वहां जाते ही मुफ्त में जब तक उनकी हज यात्रा सऊदी में है तब तक की रिचार्ज करवाकर दिलवाई जाए ताकि ट्रेकिंग , बातचीत ,,कॉलिंग ,,, गुमशुदगी होने पर उनका खेमा ,, स्थान वगेरा आसानी से गूगल मेप के ज़रिये सर्च कर पहुंचा जा सके ,,,
(5 ) क़ुर्बानी की भारत सरकार की तरफ से 17000 रूपये प्रति क़ुर्बानी की राशि जमा कराई जाती है ,,जबकि स्थानीय स्तर पर कई लोग क़ुरबानी के लिए दस हज़ार से बाराह हज़ार तक लेते हैं और क़ुरबानी का मीट जहाँ हाजी ठहरा हुआ है वहां देकर भी जाते हैं , ऐसे में क़ुरबानी की ठेका राशि बल्क में होने से कम रूपये में ऐसे ठेकेदारों से करवाकर हज यात्रा के सफर का खर्च कम किया जा सकता है, साथ ही हज के दिन जब क़ुरबानी की सुचना के बाद सही यानी बाल उतरवाई और ऐहराम से आज़ादी की रस्म होती है , तब क़ुरबानी हो गई इसकी सुचना ज़रूरी होती है, 2026 में लोगों में उनकी क़ुर्बानी हुई या नहीं जानकारी चाहने की कोशिशें रहीं ,, लेकिन जानकारी नहीं मिलने से सरकारी स्तर के क़ुरबानी करवाने वाले हाजी परेशान होते रहे , बाद में हज कमेटी ऑफ़ इण्डिया ने क़ुरबानी होने और तकनीकी खराबी की वजह से सुचना अपलोड नहीं होने की जानकारी दी ,,ऐसी तकनीकी गड़बड़ी वर्ष 2027 में हरगिज़ नहीं हो , इसके विशेष इंतिज़ाम एडवांस में ही रखे जाएँ ,,
(6 ) मक्का और मदीना में हज यात्रियों के लिए भारत सरकार की तरफ से मदद के लिए व्यवस्थाएं होती है , मक्का में अज़ीज़िया सहित अन्य स्थानों पर मदद केंद्र बने है , लेकिन वहां कोई भी पीड़ित हज यात्री अपनी फरियाद लेकर जाता है तो शिकायत तो दर्ज कर लेते है ,, लेकिन कहते है के मुख्यालय जाइये ,,अब भारत सरकार का शिकायत निवारण मुख्यालय कई किलोमीटर दूर होता है , जहाँ पचास रियाल यानी सात सो रूपये से भी अधिक का खर्च और घंटो बर्बाद हो जाते है ,,ऐसे में शिकायत निवारण केंद्र का मुख्यालय हाजियों के ठहराने की नज़दीकी पर ही होना ज़रूरी है , या फिर विकेन्द्रीकृत निति के तहत जो अलग अलग क्षेत्रों में शिकायत केंद्र है , उन्हें अंतिम रूप से शिकायत का निस्तारण अधिकार दिया जाए , अन्यथा इस अनावश्यक खर्च को खत्म कर हज इंस्पेक्टर से को ऑर्डिनेट करवाते हुए मुख्यालय शिकायत निवारण केंद्र अज़ीज़िया में ही केम्प कार्यालय के रूप में खोल दिया जाए जहाँ हर शिकायत का अंतिम रूप से निवारण हो सके ,
( 7 ) सऊदी अरब में भारतीय हज यात्रियो के सामान चोरी होने और जेब कटने , रियाल चोरी होने की घटनाओं पर ,, भारत सरकार की तरफ से शिकायत निवारण केंद्र पर कुछ आर्थिक तात्कालिक मदद मिलती है ,, वोह अपर्याप्त होती है उसे बढ़ाया जाए और यह मदद हज यात्री के नज़दीक स्थित शिकायत निवारण केंद्र से ही दिलवाएं , अन्यथा जितनी मदद मिलती है वोह तो हज इंस्पेक्टर के साथ टेक्सी में आने जाने में ही खर्च हो जाती है ,, इसमें सुधार होना चाहिए ,
( 8 ) भारत सरकार हज यात्रियों से रूपये एकत्रित भारत के डॉक्टर , नर्सिंग स्टाफ को भी हज यात्रियों के साथ भेजता है ,, जहाँ आसपास ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उक्त लोग बैठते है , ,लेकिन ज़रा सी भी मेडिकल प्रॉब्लम होने पर यह चिकित्सक , नर्सिंग स्टाफ ,, सऊदी मक्का सरकार के चिकित्सालयों में रेफर कर देते है , जबकी कई छुटपुट बिमारियों का इलाज तो अगर यहां से एक्सपर्ट चिकित्सक की टीम जाए तो प्राथमिक स्तर पर ही किया जा सकता है , इससे मरीज़ जल्दी ठीक होंगे ,, अस्पताल आने जाने का खर्च भी उनका बचेगा और वोह उनका अटेंडेंट इबादत वगेरा भी कर सकेंगे ,,, स्टाफ को भी इलाज के लिए सख्ती से पाबंद किया जाए , क्योंकि वहां भी स्टाफ कई बार उमराह वगेरा करने चले जाने से अनुपलब्ध रहता है ,
(9 ) हज सफर के बाद भारत लौटते वक़्त हाजियों को पांच लीटर आबे ज़म ज़म दिया जाता है , जिसका शुल्क क़रीब छह सो रूपये से ज़्यादा प्रति हाजी वसूला जाता है , यह शुल्क वसूलो लेकिन आबे ज़म ज़म की पांच लीटर की जगह दस लीटर आबे ज़म ज़म प्रति हाजी को भारतीय एयरपोर्ट पर मिले ऐसी व्यवस्था करवाई जाए ,, क्योंकि भारतीय आस्थावान लोगो तक उक्त पांच लीटर की बोतल बतौर तबर्रुक वितरित किया जाना सम्भव नहीं है , यह बहुत कम है, इसलिए जो सेवा शुल्क वसूला जा रहा है , उसी में पांच की जगह दस लीटर आबे ज़म ज़म जो सऊदी अरब से मुफ्त मिलता है वोह , इंडियन एयरपोर्ट के बाहर दिलवाने की व्यवस्था की जाए ,,
(10 ) हज यात्रियों को मक्के और मदीने में खाना बनाने की सुविधा नहीं है ,, इस कारण हज यात्रियों को सुबह ,चाय ,, नाश्ता फिर खाने की काफी दिक़्क़तें आती है , वर्ष 2026 में तो हालत ही बिगड़ गई थी , मक्के की होटलों पर लाइन लग कर निर्धारित क़ीमत से अधिक रूपये देकर बढ़ी दिक़्क़तों से खाना मिला वोह भी जैसे तैसे सिर्फ पेट भरने की स्थिति थी ,खाने, नाश्ते की भागम भाग में हज यात्रियों को नमाज़ , उमराह , तवाह , इबादतों में काफी दिक़्क़तों का सामना करना पढ़ता है , ऐसे में अब नए हज यात्रियों के लिए अगर उनकी होटल जहाँ उन्हें ठहराया जाए , वहीँ , उनके लिए चाय ,नाश्ता ,,,दोनो वक़्त के खाने की पेड व्यवस्था जिसमे हज यात्रियों से एडवांस राशि लेकर उन्हें सरकार की व्यवस्था से ही, अन्य देशों की तरह, ठेके पर खाने की व्यवस्था करवाई जाए ताकि हज यात्रियों को बढ़ी राहत मिल सके और उन्हें इबादत में आसानी हो सके ,,
(11 ) मक्के और मदीने में हज यात्रियों को अलग अलग यानी लेडीज़ अलग जेंट्स अलग रखने की व्यवस्था बनाई है , यूँ तो भारतीय लोग आपस में एक दूसरे से बातचीत करके अघोषित रूप से ,,अपने हिसाब से परिवार के साथ लेडीज़ ,जेंट्स एक साथ ही रहने लग जाते है , तो ऐसे में एक कवर नंबर वाले सहित लेडीज़ जेंट्स स्वेच्छिक रूप से एक साथ रहने की व्यवस्था भी अगर करवाई जाए तो काफी दिक़्क़तों से छूट मिल सकेगी ,,
(12 ) हज यात्रियों को जहां ठहराया जाता है वहां होटल में कंप्लेंट बॉक्स पुस्तिका तो होती है ,लेकिन हज यात्रियों को उसकी जानकारी नहीं होने से ,, साफ , सफाई ,, गंदगी ,चादर ,बेडशीट , तकिये , एयरकंडीशन वगेरा सहित अन्य अव्यवस्थाओं के बारे में वोह शिकायत दर्ज नहीं करा पाते ,, जबकि होटल के कमरों में एयरकंडीशन तो होते है , लेकिन अतिरिक्त पंखे नहीं होने से कई बार ठंडक ज़्यादा होने से ,, सिर्फ अगर कोई पंखा चलाना चाहे तो उसे दिक़्क़त होती है ,,नतीजा कई लोग ज़ुकाम , खांसी के शिकार हो जाते है , बीमार हो जाते है ,तो होटलों में पंखों की भी अतिरिक्त व्यवस्था करवाई जाए
(13 ) मदीने , मक्के में एयरपोर्ट से होटल तक , होटल से मक्के तक , मक्के से एयरपोर्ट तक ,, सामान लाने ले जाने की व्यवस्था संतोषप्रद नहीं होती , वहां अव्यवस्थित तरीके से , पूर्व घोषित वक़्त से काफी अलग समय पर ठेकेदारों की टीम आती है ,सामान उठापटक करती है ,, तोल वगेरा भी करती है ,, लगेज लाने ले जाने की ज़िम्मेमदार टीम के स्टाफ के लोग अतिरिक्त राशि की डिमांड बख्शीश के नाम पर करते है , कई बार किसी के पास रियाल अगर खुल्ले नहीं होते तो उसके सामान को अनसेफ तरीके से उठा पटक करते ,, आगे का सामान पीछे , ऊपर का सामान नीचे ऊपर करते देखे जाते है ,, ऐसे में लगेज के ठेकेदारों को जब हज यात्रियों से प्राप्त राशि में से भारत सरकार निर्धारित भुगतान कर देती है तो फिर उन्हें सख्ती से इस लम्पट गिरी , अवैध चौथ वसूली नहीं करने के लिए पाबंद करना चाहिए ,,,
(12 ) हज यात्रियों के अज़ीज़िया मक्के से हरम शरीफ आने और जाने के लिए अलग अलग स्टेण्ड से बसे लगी होती हैं ,लेकिन हज यात्री के लिए जब असुविधाजनक हो जाता है, जब हज यात्री पहले एक बस में बैठेगा , फिर दूसरे स्टॉप पर यह बस उतारेगी , और यहां से दूसरी बस में उसे फिर बैठ कर जाना होगा , यही व्यवस्था हरम शरीफ से वापसी के वक़्त होती है , जो सिर्फ दो तीन किलोमीटर की दूरी पर ही, अलग अलग बसों को बदलने की वजह से परेशानी होती है ,,ऐसे में एक बस ही हज यात्रियों को सीधे हरम शरीफ तक लाने ले जाने की व्यवस्था करे , जुमे के दिन अतिरिक्त बसे बढाकर लगवाई जाएं, ऐसा बस कॉन्ट्रेक्टर से सख्ती से एग्रीमेंट हो ,, ताकि हज यात्रियों को परेशानी ना हो ,,इतना ही नहीं , हज यात्रियों को मीना में जाने , मीना से अराफात , अराफात से मुज़दलफा तक ले जाने के वक़्त और होटल से एयरपोर्ट ले जाने , मदीने से मक्का या रेलवे स्टेशन तक ले जाने के लिए जो पूर्व निर्धारित समय दिया जाता है , उस निर्धारित समय से दस दस घंटे देरी तक बसें नहीं आती हैं , ऐसे में जब हज यात्री की तरफ से भारत सरकार ने बस एग्रीमेंट के तहत पहले ही भुगतान कर दिया तो फिर बसों की यह लेटलतीफी ,, अव्यवस्था हज यात्रियों में परेशानी और भगदड़ का माहौल कर देती है , नमाज़ वगेरा के वक़्त में काफी दिक़्क़तों का सामना करना पढ़ता है , रातों की नींद खराब होती है, मक्का पहुंचते ही बसों में मोअल्लिम पहले ही पासपोर्ट वगेरा ले लेते है , फिर जब वोह वापसी के वक़्त पासपोर्ट लौटाने बस में आते है, तो काफी देरी होती है और पासपोर्ट ड्राइवर , असिस्टेंट को देकर चले जाते है , वोह भी अतिरिक्त राशि , बख्शीश की मांग करते है , जबकि सम्पूर्ण भुगतान पूर्व में हो चुका होता है , ऐसे में ठेकेदार से ठेके के वक़्त यह सब बातें तय होना चाहिए ,,,
(13 ) मीना के पांच दिन के लिए मोअल्लिम को ठेका दिया जाता है , खेमों की व्यवस्थाओं में और सुधार की ज़रुरत है ,,वहां गद्दों की चौड़ाई थोड़ी बढ़ी होना चाहिए ,, खाना ,, नाश्ता कोलिटी सुधार वाला टेस्टी होना चाहिए ,, जबकि वहां लेट्रिन , बाथरूम की व्यवस्था में सुधार करते हुए ,, लेट्रीन , बाथरूम की संख्या में बढ़ोतरी करना चाहिए , साफ़ , सफाई की पाबंदी होना चाहिए ,, वहां लम्बी लम्बी लाइनें लगती है , अगर लेट्रिन , बाथरूम , और वुज़ू करने के नालों की संख्या में हर खेमे में पचास की संख्या में भी वृद्धि करवाई गई , तो हज यात्रियों को लेट्रीन , बाथरूम ,, वुज़ू के वक़्त , बहुत बढ़ी परेशानी से छुटकारा नहीं मिले तो इस समस्या में कमी ज़रूर हो जायेगी , और हज यात्रियों को राहत मिल सकेगी ,,,,
(14 ) हज यात्रियों से अलग अलग सुविधाओं के लिए जितना शुल्क वसूला जाता है , उस शुल्क की क़ीमत के एवज़ में सुविधाओं का अभाव होता है , ऐसे में दिखावटी हज इंस्पेक्टर्स की जो , मीटिंग ,, वर्चुअल मीटिंग की रस्म अदायगी जो होती है ,उसकी जगह एक कंट्रोल रूम नंबर , एक ई मेल ,जहाँ हज यात्री अपनी शिकायतें दर्ज करा सके ,, जिन पर भारत सरकार के प्रतिनिधि संज्ञान लेकर तत्काल एक्शन लेकर राहत दिलाएं ऐसी व्यवस्था भी की जाना चाहिए ,
(15) हज प्रशिक्षण व्यवस्था को भी मज़बूत करने की ज़रूरत है , जिसमे सरकार की व्यवस्थाओं का खुलासा पहले से ही हो जाए तो हज यात्रियों को उनकी प्रस्तावित रहने , ठहरने और व्यवस्थाओं के बारे में पूर्व जानकारी होने से उन्हें काफी लाभ मिलेगा ,,
(16 ) हज यात्रियों को दानदाताओं , भामाशाहों से लाभ मिल सके , उनका हज सफर किफायती हो सके , इसके लिए सरकार , हज कमेटियां , भामाशाह , दानदाताओं को सूचीबद्ध करे , निमंत्रित करे , स्वेच्छिक दान ,,डोनेशन देने वालों का फंड बनाये और उनकी तरफ से हज यात्रियों के लिए जो भी सहयोग ,,डोनेशन मिले , उसका उपयोग प्रस्तावित हज यात्रियों के खर्च में समायोजित कर हज यात्रियों के सफर को अनुदानित मदद करते हुए इस महंगे खर्च को थोड़ा बहुत कम करने की शुरुआत हो सकती है , जिसका लाभ हज यात्रियों को मिलने से उत्साहवर्धन व्यवस्था होगी ,,,
अतः श्रीमान की सेवा में पूर्व हज यात्रा के अनुभवों के आधार पर ,, आमद , खर्च ,रियायत ,,व्यवस्था , प्रबंध , कुप्रबंध को लेकर कुछ सुझाव पेश है , जिनपर विचार करते हुए व्यवस्थाओं में सुधार के आवश्यक निर्देश जारी कर पिछले वर्ष हज यात्रियों से स्मार्ट वाच और हवाई सफर के किराए में अतिरिक्त राशि जो ली गई है वोह और अन्य अव्यवस्थाओं की राशि लौटाई जाए,, व्यवस्थाओं में पर्याप्त सुधार हो , हज यात्रियों का सफर कम खर्चीला , सुविधायुक्त , आसान हो , व्यवस्थित हो , सुरक्षित हो , इसकी व्यवस्था के निर्देश जारी कर अनुग्रहित करें ,,
भवदीय
एडवोकेट अख्तर खान अकेला
रशीदा मंज़िल , 2 थ 15 मैन रोड , बृजवासी के पास
विज्ञाननगर कोटा राजस्थान 324005 मोबाइल 9829086339
sadafakhtar02@gmail.com
akhtar khan akela

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