शहर के बाद,ग्रामीण क्षेत्रों में भी परंपरा बन रहा है,नेत्रदान
2. शोक होते ही,नेत्रदान के लिए परिजनों संपर्क किया
वार्ड
नम्बर 4,सदर बाजार, नैनवां निवासी स्व० कमल कुमार मारवाडा की धर्मपत्नी
एवं विनोद, सुनील, संजय,व मुकेश मारवाड़ा की माताजी राजकुमारी मारवाड़ा का
इलाज के लिए नैनवा से जयपुर ले जाते समय, बीच रास्ते चाकसू में निधन हो गया
।
बेटे विनोद को जैसे ही माता जी के निधन की सूचना मिली, उन्होंने
तुरंत ही सबसे पहला कॉल शाइन इंडिया फाउंडेशन व ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर के
कोऑर्डिनेटर डॉ कुलवंत गौड़ को किया ।
डॉ गौड़ उस समय बारां से,
नेत्रदानी की शोकसभा में नेत्रदान अंगदान के विषय में संबोधित करके वापस
लौट ही रहे थे, उसी समय नैनवा से यह दुख भरी खबर प्राप्त हुई ।
नैनवां
का यह मारवाड़ा परिवार, काफी समय से शाइन इंडिया फाउंडेशन के साथ जुड़ा हुआ
है,4 वर्ष पूर्व राजकुमारी के पति कमल कुमार मारवाडा का और 2 वर्ष पूर्व
स्व० राजकुमारी की, भतीजा बहू स्व० हेमलता जैन का नेत्रदान भी संस्था के
सहयोग से संपन्न हुआ था।
धर्म-कर्म में आस्था एवं साधु संतों की
सेवा में हमेशा अग्रणी रहने वाली राजकुमारी के अचानक चले जाने से एक तरफ
परिवार में असीम दुख पहुँचा, पर यह सुकून भी रहा कि,नेत्रदान से माताजी
किसी दृष्टिहीन की आँखों में हमेशा रोशनी बनाकर जीवित रहेंगे ।
संस्था
के ज्योति मित्र महावीर जैन मोदीका,ने बताया कि, पिछले 6 वर्ष में
नेत्रदान की प्रति बढ़ती जागरूकता से अभी तक 15 दिवंगतों के नेत्रदान
नैनवां से प्राप्त हुए ।
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
19 जून 2026
शहर के बाद,ग्रामीण क्षेत्रों में भी परंपरा बन रहा है,नेत्रदान
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