राजस्थान रचनाकार परिचय कोश
127. दीनदयाल शर्मा, हनुमानगढ़
*******************************
30 अप्रैल तक व्हाट्सअप 9413350242 पर रचनाकार अपना परिचय भेजे
**********************************
बाल साहित्यकार के रूप में प्रसिद्ध दीनदयाल शर्मा का जन्म 15 जुलाई, 1956 को माता महादेवी एवं पिता प्रयाग चंद जोशी के परिवार में हनुमानगढ़ जिले की तहसील नोहर के ग्राम जसाना में हुआ। एमकॉम एवं पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा की शिक्षा प्राप्त की। हिन्दी और राजस्थानी भाषा में गद्य-पद्य की विभिन्न विधाओं कविता, व्यंग्य, नाटक, संस्मरण, आलोचना लिखते हैं। बाल साहित्य मूल विधा है। बाल अखबार ‘टाबर टोल़ी’ का वर्ष 2003 से नियमित संपादन। मराठी, पंजाबी, अंग्रेजी में पच्चीस बाल पुस्तकें अनूदित हैं। अनेक रचनाएं देशभर के कई राज्यों के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हैं।
हिंदी और राजस्थानी में 78 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। हिन्दी भाषा में बच्चों की पुस्तकें : चिंटू-पिंटू की सूझ, पापा झूठ नहीं बोलते, बड़ों के बचपन की कहानियाँ, प्रेरणाप्रद बाल पहेलियाँ, फैसला , 25 बाल कहानियाँ, सपने,बालक की अभिलाषा, शुद्ध शब्दावली, एक सौ एक रोचक, बाल पहेलियाँ, 60 पहेलियाँ, 11 बाल कहानियाँ, 60 शिशु गीत,सूरज एक सितारा है, चमत्कारी चूर्ण, कर दो बस्ता हल्का,
इक्यावन बाल पहेलियाँ राजस्थानी बाल साहित्य चूँ-चूँ, नानी तू कैसी है नानी, गिली -गिली गप्पा, अगड़म-बगड़म, चिडिय़ा चहके गीत सुनाए, रसगुल्ला, मित्र की मदद,हम बगिया के फूल,कुदरत की लीला है न्यारी, दीनदयाल शर्मा के चुनिंदा शिशु गीत, दीनदयाल शर्मा की चुनिंदा बाल कहानियाँ, दीनदयाल शर्मा की चुनिंदा बाल कविताएँ, दीनदयाल शर्मा की चुनिंदा पहेलियाँ, अपनी दुनिया सबसे न्यारी, चौरासी बाल पहेलियाँ, बाल साहित्य और बच्चे,पंछियों के बाल गीत, बोलो कौन कहाए?, नन्हे बाल गीत, राजस्थानी भाषा में बच्चों की पुस्तकें : चंदर री चतराई, टाबर टोळी,शंखेसर रा सींग, तूं कांईं बणसी, म्हारा गुरुजी, बात रा दाम, बाळपणै री बाताँ, ताक धिनाधिन, दिवळो कोई जगावां, टाबरां री आड्याँ,नान्है टाबरां रा गीत, हँसी-मजाक री कहाणी,डरावणी कहाणी, रोजिना अेक कहाणी, मोर री जिद, हरखू री चतराई, च्यार लुटेरां री चतराई, अेक टाबर री डायरी, नानी क्यूं उदास है, टाबरां री पोटळी,टाबरां रो कोथळियो , बाळपणै री बगीची प्रकाशित हुई हैं।
अन्य हिंदी पुस्तकें : जंग जारी है (रेडियो नाटक), जहाँ मैं खड़ा हूँ - हिन्दी काव्य संग्रह, मैं उल्लू हूँ - हिन्दी व्यंग्य संग्रह,सारी खुदाई एक तरफ - हिन्दी व्यंग्य संग्रह,एक ही उल्लू काफी है - हिन्दी व्यंग्य संग्रह तथा अन्य राजस्थानी पुस्तकें : रीत अर प्रीत - काव्य संग्रह, डुक पच्चीसी- हास्य काव्य संग्रह, गिदगिदी - हास्य काव्य संग्रह , सुणो के स्याणो- हास्य काव्य संग्रह , स्यांती एवं घर बिगाड़ै गुस्सो - कथा संग्रह, डाँखळा वन्स अगेन एवं डाँखळा रतन - डाँखळा दिनों डाँखळा विधा में नवाचार तथा
चस्को समार्टपणै रो - हास्य-व्यंग्य संग्रह प्रकाशित हुई हैं। राजस्थानी में अनूदित पुस्तकें : राजस्थानी बाल बत्तीसी - राजस्थानी बाल कविताएँ एवं असम रो रणबंको : लाचित बरफूकन संपादित पुस्तकें : घुंघरुओं की आवाज एवं पुरस्कार का दण्ड - दोनों हिन्दी बाल कहानियां, राजस्थानी बाल बत्तीसी - राजस्थानी बाल कविताएँ एवं भटनेरिका स्मारिक संपादित कृतियां हैं।
देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं। प्रमुख उल्लेखनीय पुरस्कारों में राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर से हिन्दी बाल कथा संग्रह ‘चिंटू-पिंटू की सूझ’ पर डॉ. शम्भूदयाल सक्सेना बाल साहित्य पुरस्कार , राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर से राजस्थानी बाल नाटक ‘शंखेसर रा सींग’ पर पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य पुरस्कार , केन्द्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली से राजस्थानी बाल संस्मरण संग्रह ‘बाळपणै री बातां’ पर राजस्थानी बाल साहित्य राष्ट्रीय पुरस्कार , पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी, जयपुर से कृति ‘प्रेरणाप्रद बाल पहेलियां’ पर श्री मोहनलाल ओझा ग्रामीण बाल साहित्य पुरस्कार एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी, जयपुर से बाल साहित्य मनीषी सम्मान शामिल हैं।
संपर्क :
दीनदयाल शर्मा, टाबर टोल़ी,
10/22, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी,
हनुमानगढ़ - 335512, राजस्थान
मो. 9414514666
--------------------
संपादन : डॉ.प्रभात कुमार सिंघल, कोटा
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)