बढे लोगों की छोटी बातें , अजीब लगती है , लेकिन फिर भी , आखरी वक़्त में , क्या खाक , मुसलमान होंगे , वाली कहावत , अब झूंठी सी लगती है ,, हमारे अपने , लीडर , जो इस शासन में तीन साल तक , ख़ामोशी से बैठे रहे , एक आवाज़ उन्होंने किसी के लिए हमदर्दी की सार्वजनिक रूप से या फिर हाईकमान को पत्र लिखकर , नहीं उठाई , अब , तीन साल बाद , जब उनकी अपनी सारी उम्मीदें धूमिल सी लगने लगी है , तो फिर वोह , हमारी क़ौम के साथ ,क़ौम की डिमांड के साथ , आधे अधूरे , उठ खड़े हुए है , अशोक गहलोत के खिलाफ यक़ीनन कुछ लोगों की साज़िशे हैं , एक तरफ कोरोना की वजह से , दो सालों में सारी व्यवस्थाएं सभी कोशिशों के बावजूद भी डगमगाई , दूसरी तरफ , मानेसर बगावत , के बाद , कुछ अख़बारों की मुख्यमंत्री बदलने की फ़र्ज़ी खबरों से भी , हालात बेकाबू से रहे , रोज़ मीटिंगे रोज़ , कांग्रेस की जगह , व्यक्ति की गुटबाजियों के नाम पर उनके अपने लोगों को सेट करने की डिमांड चार्टर के आगे , यक़ीनन अशोक गहलोत को जो बेहतर से बेहतर सुशासन देना ,था छत्तीस क़ौमों को प्रतिनिधित्व देना था , किसी व्यक्ति विशेष के नहीं , कांग्रेस के समर्पित लोगों को एजस्ट करना ,था उसकी जगह , सरकार बनाये रखना ,, कांग्रेस के स्वाभिमान की रक्षा करना , कांग्रेस में अटूट एकता बनाये रखना उनकी प्राथमिकता बन गयी ,, कई आयोग , कई इदारे , खाली पढ़े है , चुनावी मुद्दे , चुनावी वायदे , कई पुरे हुए , कई पुरे करने के प्रयासों में हैं , कहते है ,कुछ तो मुजबोरियाँ रही होंगी , वरना यूँ ही हर कोई बेवफा नहीं होता ,, कमोबेश , कांग्रेस के महत्वपूर्ण पदों पर रहे , काफी लोग , बेवफाई के रास्ते पर चल निकले है ,जो लोग अपनी क़ौमे के हर अत्याचार पर , खामोश रहे , समर्थक रहे , पक्षपात , मनमानी पर , पहले भी कई सालों तक शासन में रहते , चुप्पी साधे रहे ,तीन सालों तक उन्हें क़ौम कोई भी मुद्दे , कोई भी दर्द नज़र नहीं आया , जो लोग पहले , पूर्व केंद्रीय मंत्रियों के साथ , पुरे राजस्थान के हर ज़िले के कुछ लोगों को बुलाकर , खाना पार्टी की सियासत कर चुके हों , उस वक़्त भी जिन लोगों ने ,क़ौम के हक़ की कोई आवाज़ नहीं उठाई हो , जिन्होंने , मुख्यमंत्री को , क़ौम के मुद्दों पर , कोई पत्र नहीं लिखा हो , मिलकर ,क़ौम के हक़ में बगावती तेवर नहीं दिखाए हों , वोह अचानक सक्रिय हो गए , वोह अचानक , जी 25 की तरह मुद्दे 19 हो गए ,, उन उन्नीस मुद्दों में ,हमारे इबादत घरों की रोकी गयी , इबादत घरों की इज़ाज़तों का मुद्दा नहीं है , हमारे लोगों को उचित प्रतिनिधित्व देने , मंत्री मंडल में , प्रतिनिधत्व देने , , सभी पदों को तुरंत भरने , और अल्पसंख्यक आयोग , मदरसा बोर्ड , वक़्फ़ विकास परिषद ,वक़्फ़ बोर्ड , मेवात बोर्ड , अल्पसंख्यक वित्त विकास निगम के अलावा , दूसरे बोर्डों में , अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने की मांग नहीं उठा पाए हों , जो लोग , भर्ती बोर्ड , सुचना आयोग , लोक सेवा आयोग , मानवाधिकार आयोग , सहित किए पदों की भर्ती के वक़्त , अल्पसंख्यकों की उपेक्षा पर चुप , खामोश रहे हों , वोह आज , जब वार्ड पार्षदों को सहवृत किये जाने की कार्यवाही पूरी हो जाने के बाद ,वार्ड पार्षद सहवृत करने की मांग उठाये , जब विधानसभा में , नो सितंबर के बाद , कुछ घोषणाएं होना हों , तो उन संभावित घोषणा के मुद्दे उठाये , वोह भी मुख्यमंत्री से नहीं , हाईकमान ,प्रभारी के सामने ज़रिये लेटर मुद्दे उठाये , मिलकर , इन बातों पर , मुख्यमंत्री , या फिर , हाईकमान , या फिर प्रभारी महोदय से ,,, कोई चर्चा नहीं करे , कोई दबाव नहीं बनाये , सिर्फ एक कागज़ , एक पत्र लिखा जाए , तो फिर तीन साल के बाद इस अंगड़ाई का स्वागत करें , या फिर तिरस्कार समझ नहीं आ रहा है , लेकिन फिर भी , अगर इन मुद्दों पर , ऐसे लोग जो ऊँचे से भी ऊँचे पदों पर रह चुके हों ,जो निति निर्धारक हों , जो वक़्फ़ , मदरसा ,चिकित्सा , शिक्षा सहित सभी मुद्दों पर , इंचार्ज रहे हों , अगर वोह सिर्फ पत्र लिखते है , और वोह भी तीन साल बाद पत्र लिखते है , वोह भी मुख्यमंत्री के स्थान पर , हाईकमान को पत्र लिखते हों , तो फिर हम उनके ऐसे दिखावटी , लेटलतीफी विरोध का तिरस्कार करते है , क्यौंकि वोह इन वर्तमान सियासी हालातों में ,, किसी के हथियार बनने की तरह है , और अगर वोह सच्चे है , अगर वोह सच्चे हमदर्द हैं , तो ऐलान करें , विधानसभा के सामने , जायज़ तरीके से , प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलवाये , राजस्थान के इनके अपने वर्ग की जिलेवार समस्याओं , प्रदेश की सभी इदारों की समस्याओं का कच्चा चिटठा तय्यार, करें और हाईकमान के समक्ष खुल कर टारगेट फिफ्टीन , हिस्सेदारी फिफ्टीन , पंद्रह सूत्रीय कार्यक्रमों की शत प्रतिशत क्रियान्विति , सभी इबादत घरों की , वाजिब मामलों की तत्काल इजाज़त , , टिकती में हिस्सेदारी , सत्ता में सांझेदारी , सभी इदारों में , नौकरशाहों की जगह कार्यर्कताओं की नियुक्तियां , उर्दू , मदरसे , वक़्फ़ सम्पत्तियों की अधिसूचना , वक़्फ़ के पुराने बक़ाये रुपयों की देनदारी , भर्ती बोर्डों में , सच्चर , रंगनाथ मिश्र के सुझावों की शत प्रतिशत पूर्ति के लिए संघर्ष करें , धरना दें , तो हम सब उनके नेतृत्व का समर्थन करेंगे , उनके साथ खड़े मौजूद मिलेंगे , ,लेकिन अचानक , तीन साल बाद ,वोह भी जब आप राजस्थान के हर ज़िले के कुछ लोगों को बुलाकर , डिप्लोमेसी लंच पार्टी कर चुके हो , तब आपने यह बातें नहीं उठाई , तो फिर दर्द होता है , लेकिन ख़ुशी इस बात की होती है , के चाहे सियासत ही सही , चाहे गुस्सा ही सही , चाहे , इस्तेमाल होकर ही सही , चाहे पूरी हमारी ज़रूरतों का डिमांड चार्टर नहीं , लेकिन कुछ तो आपने , लिखा ,कुछ तो आपने , वाइरल किया ,, आगे बढ़ो , खुद को साबित करों , हम सब आपके इन मुद्दों पर ,अगर इस तरह से , मुक़ाबिल आते हो , तो पिछली सभी खामोशियाँ के सुबूतों को भुलाकर हम आपके नेतृत्व में , आपके साथ खड़े मिलेंगे ,लेकिन अगर किसी के कहने पर , किसी के खिलाफ साज़िश में है , तो फिर अल्लाह रहम करे ,, ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
22 अगस्त 2021
बढे लोगों की छोटी बातें , अजीब लगती है , लेकिन फिर भी , आखरी वक़्त में , क्या खाक , मुसलमान होंगे , वाली कहावत , अब झूंठी सी लगती है ,, हमारे अपने , लीडर , जो इस शासन में तीन साल तक , ख़ामोशी से बैठे रहे
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