अफगानिस्तान में , तालिबान की आक्रामकता , निश्चित तोर पर सीमावर्ती देश होने पर ,भारत के लिए चिंता का विषय है , इस मामले में , भारत को एक जुट होकर , सर्वदलीय बैठकों में , ऐसी समस्या की अंतर्राष्ट्रीय समझ के साथ , समाधान तलाशना ही होगा , तालिबान के जबड़े में ,से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल कर लाना , और वहा फंसे हुए , अन्य भारतियों के प्रयास में , केंद्र सरकार की कार्यवाही निश्चित पर क़ाबिले तारीफ़ है , लेकिन केंद्र सरकार ,को ऐसे मामले में , आपदा में अवसर तलाश ,कर ,, भारत के भीतरी माहौल को खराब करने की कोशिशो में जुटे , लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करना होगा , जबकि तालिबान हुकूमत का खौफ दिखाकर , सूखे मेवों की अचानक , कालाबाज़ारी कर , मूल्य वृद्धि कर , कमाने वालों के खिलाफ भी एक्शन लेना होगा , ज़हरीले मिडिया को भी ओरिजनल राष्ट्रिय धर्म को याद दिलाना होगा , जो लोग इस आपदा को , चुनावों में , चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिशों में जुटे है , उनके खिलाफ कार्यवाही ज़रूरी है , , यह सर्वविदित है के बीस साल बाद अमेरिका की फेल्योर गिरी , और चीन के प्रोत्साहन से , तालिबान फिर से उठा खड़ा हुआ है , और अफगानिस्तान पर क़ब्ज़ा कर बैठा है , भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी , आज से छह साल पहले , अफगानिस्तान जाकर वहां के इंफ़्रा स्ट्रक्चर , भारतीय संबंधों पर , बहुत कुछ कहकर आये थे , उम्मीदें थी , समझौते थे , लेकिन अब वोह सब तालिबानी हुकूमत आने से , तबाह हो गए ,, तालिबान यूँ तो , अध्ययन रत , छात्र को कहा जाता है , ऐसे में , तालिबान के इस नामकरण और उसके क्रूर चेहरे से , इस मायने का कोई तालमेल नहीं निकलता , इस नामकरण का भी विश्व स्तर पर , विरोध दर्ज होना चाहिए ,क्योंकि एक तालिबान , यानि छात्र समूह , और दूसरी तरफ , अत्याचारी , चेहरा , ऐसे में , विश्व स्तर पर , छात्र समुदाय की तस्वीर भी क्रूरता पूर्ण बनने की तरफ गलत फहमी हो सकती है , भारत में तालिबान को लेकर , कुछ लोग तो चिंतित है , लेकिन कुछ लोग योजनाबद्ध तरीके से , इस नाम पर ,भारत ,में हिन्दू मुस्लिम समाज में , नफरत फैलाने की साज़िशों में , शामिल है , खुले रूप से छींटा कशी चल रही है , आसाम सहित कुछ राज्यों में कार्यवाही भी हो रही है ,, कोई भी समुदाय ,, कोई भी राजनितिक दल , कोई भी समाज , कोई भी धर्म का सदस्य हो , अगर वोह देश में , किसी भी तरह से , अराजकता फैलाने के लिए , न्यूसेंस करता है , , गलत फहमियां पैदाकर , माहौल खराब करता है , तो फिर वोह हिन्दू हो , मुस्लिम हो , किसी भी धर्म मज़हब , सियासी पार्टी का हो , उसके खिलाफ क़ानूनी एक्शन होना ही चाहिए , अभी इस नाम को लेकर , कुछ न्यूज़ चेनल्स ,, इसे सियासी मुद्दा बनाने की कोशिश में ,है , भारत की मुख्य समस्याओं को केंद्रित करने से ज़्यादा , इन खबरों को बेहिसाब चला रहे है , भारत के मुद्दों को भी , न्यूज़ चेनल्स और अख़बार में ,प्रकाशित प्रसारण करने का इनका कर्तव्य है ,, उसे भी यह इन खबरों के साथ प्राथमिकता से बरक़रार रखे , अफ़सोस की बात तो यह है,, इधर तालिबान क़ब्ज़े की खबरें , , उधर , गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि , , कोई बात नहीं यह सरकारी सिस्टम है , व्यवस्थाएं है , लेकिन मिडिया मैनेजमेंट , व्यापारिक गंठबंधन , और बस दूर दिन से ही , न्यूज़ चेनल्स , अखबारों में खबरे , सूखा मेवा , काजू , बादाम , किशमिश , अंजीर , वगेरा , एक साथ बहुत महंगे हुए , , देश इतना बेवक़ूफ़ तो नहीं , देश जनता है , देश की सरकार ,देश के अधिकारी , देश के सभी पत्रकार जानते है , के व्यापारी , व्यापरिक व्यवस्था के तहत , हर चीज़ का कमसे कम , एक माह का तो स्टॉक रखता है , इनके गोदाम भरे रहते है , जब देश में सूखे मेवे के गोदाम भरे हुए है , तब , तालिबान का अफगानिस्तान पर क़ब्ज़ा और दो घंटे बाद ही , देश में , सूखे मेवे के दाम 250 प्रति किलो वृद्धि , यह देश की जनता के साथ अत्याचार , अन्याय नहीं है , देश की जनता को गुमराह करने के लिए , ऐसे कालाबाज़ारी व्यापारियों को भारतीय जनता के साथ ग़ैरक़ानूनी मूलयवृद्धि को सपोर्ट करने के लिए , मीडिया , बढ़े बेहूदा ढंग से तर्क देते दिखा , इस कालाबाज़ारी , मूलयवृद्धि , स्टॉक चेकिंग , और सरकार के अधिकारीयों , सरकार के मंत्रियों की इस लूट पर चुप्पी को लेकर , मीडिया की सार्जनिक हित , जनहित की खबर नहीं थी , खबर थी तो उनकी मूलयवृद्धि को सपोर्ट करने की , ऐसे में केंद्र सरकार को ऐसे व्यापरियों , गठबंधन रखने वाले , मीडियाकर्मियों के खिलाफ भी जनता को लूटने , अधिक मूलयवृद्धि मामले में ,कठोर क़ानूनी कार्यवाही करना चाहिए , और ऐसे उत्पादों के वैकल्पिक आयात , भारत में ही उत्पादन के बारे में कार्ययोजनाएं तय्यार करना चाहिए ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
22 अगस्त 2021
अफगानिस्तान में , तालिबान की आक्रामकता , निश्चित तोर पर सीमावर्ती देश होने पर ,भारत के लिए चिंता का विषय है , इस मामले में , भारत को एक जुट होकर , सर्वदलीय बैठकों में , ऐसी समस्या की अंतर्राष्ट्रीय समझ के साथ , समाधान तलाशना ही होगा
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