उसी में से उस का पानी और उस का चारा निकाला (31)
और पहाड़ों को उस में गाड़ दिया, (32)
(ये सब सामान) तुम्हारे और तुम्हारे चार पायों के फायदे के लिए लिए हैं (33)
तो जब बड़ी सख्त मुसीबत (क़यामत) आ मौजूद होगी, (34)
जिस दिन इंसान अपने कामो को खुद याद करेंगा (35)
और जहन्नुम देखने वालो के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी, (36)
जिस ने (दुनिया में) सर उठाया था (37)
और दुनियावी ज़िन्दगी को तरजीद दी थी (38)
उसका ठिकाना तो यकीनन दोज़ख है (39)
मगर जो शख्स अपने परवर दीगर के सामने से खड़े होने से डरता और जी को नाजाएज़ ख्वाहिशो से रोकता रहा (40)
तो उसका ठिकाना यकीनन बेहिशत है (41)
(ऐ रसूल) लोग तुम से क़यामत के बारे में पूछते है की उसका कही थल बेडा भी है (42)
तो तुम उस के ज़िक्र से फ़िक्र में हो (43)
उस (के इल्म) की इन्तेहा तुम्हारे परवरदिगार ही तक है (44)
तो तुम जो बस उस से डरे उसको डराने वाले हो (45)
जिस दिन वह लोग उस को देखेंगे तो (समझेगे कि दुनिया में) बस एक शाम या सुबह ठहरे थे (46)
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
13 जुलाई 2021
उसी में से उस का पानी और उस का चारा निकाला
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