एक सिद्धार्थ , यानी जो काम हाथ में आ जाए , उसे पूरा करके ही दम लेने वाले , जी हाँ दोस्तों ,आज उन्ही भाईजान , वरिष्ठ पत्रकार , सिद्धार्थ भट्ट का जन्म दिन है , उन्हें उनके जन्म दिन पर ,, सह्तयाबी , उम्रदराज़ी , कामयाबी , खुशहाली ,,की पुर खुलूस दिली मुबारकबाद , सिद्धार्थ भट्ट कोटा के लिए ही नहीं ,राजस्थान के लिए ही नहीं , मध्य्प्रदेश , महाराष्ट्र सहित पूरे देश की पत्रकारिता के लिए जाना माना नाम है , सिद्धार्थ भट्ट , कोटा राजस्थान पत्रिका में स्थानीय सम्पादक रहे है , वोह आज भी कोटा की धरती , कोटा के कार्यक्रमों , कोटा के पत्रकारों कोटा की योजनाओं , कोटा की धड़कनों से जुड़े है , वोह कोटा को लेकर चिंतित भी रहते है , सिद्धार्थ भट्ट , दैनिक राजस्थान पत्रिका में कोटा के सफल सम्पादन के बाद ,जयपुर के सम्पादक रहे , सिद्धार्थ भट्ट , जबलपुर ,,ग्वालियर , भी सम्पादक रहे , अब वर्तमान में , सिद्धार्थ भट्ट मुंबई राजस्थान पत्रिका के स्थानीय सम्पादक है ,,, पत्रकारिता से जुड़कर , लोगों को जनसमस्याओं से कैसे छुटकारा दिलवाया जाए ,, पत्रकारिता के ज़रिये , निर्भीक होकर , आम जनसमस्याओं की आवाज़ ,मंत्रियों , प्रशासन तक कैसे पहुंचा कर ,उन्हें सार्वजनिक हित की समस्याओं के समाधान के प्रयास किये जाए , सिध्दार्थ भट्ट , खूब अच्छी तरह से जानते है , कोटा सहित यह जहाँ भी सम्पादन व्यवस्था में रहे , इनकी पत्रकारिता की टीम , निष्पक्ष , निर्भीक रही , वोह अलग बात है , अख़बार , अखबार के मालिकों की पॉलिसी में बंध कर , यह बहुत कुछ चाहकर भी बयान नहीं कर पाते हों ,, लेकिन इनकी हर कोशिश , पत्रकारिता के स्वभाव को निष्पक्ष , निर्भीक ,, मुखर रखने की रही , क़लम की पेनी धार से , सिद्धार्थ भट्ट पत्रकारिता के स्वाभिमान , सम्मान के संरक्षण के प्रयासों में जुटे रहे है ,, वर्तमान में , पत्रकारिता वैकल्पिक भी है , एक पत्रकारिता नौकरी की है ,जो बाधाओं में ,जो मालिकों , या फिर प्रबंधकों के निर्देशों पर , बंधनों के साथ होती है , और एक पत्रकारिता यही शख्स , अपने दिल में राष्ट्रहित , समाजहित , सार्वजनिक हित में उठ रहे उदगारों को वैकल्पिक , सोशल मिडिया मंच से , सधे हुए अल्फ़ाज़ों में , निर्भीक ,, निष्पक्ष ,, अनुभव के आधारों पर सुझावों के साथ प्रकाशित करते है , सिद्धार्थ भट्ट उन्ही कलमकारों में से है ,, जो एक तरफ तो अपने सम्पादक होने , अपने बंधनों में बंधे पत्रकार होने , का फ़र्ज़ निभाते हैं , तो दूसरी तरफ , खुलकर ,अपने विचार , अपने अल्फ़ाज़ , अपने सुझाव , तीखी लेखनी के साथ , सोशल मीडिया मंच पर , सांझा करते है , कोरोना काल की खामियां हों , सियासी हलचलें होने , राजनितिक गिरावट हो , साधु , संत ,, मौलवियों की धर्मान्धता हो ,, बाबा रामदेव जैसे , लोगों द्वारा , निजी स्वार्थ के लिए , आयुर्वेद बनाम , एलोपेथी के नाम पर , गंदगी फैलाने के प्रयास हों , यह सभी के निर्भीक होकर , कान उमेठते है , डाँट पिलाते है , विनम्रता से , बेहतर से बेहतर करने के सुझाव देते है , इनकी पत्रकारिता में सकारात्मक हिस्सेदारी है , तो जनसमस्या समाधान , राष्ट्रिय निर्माण में , इनके हर अल्फ़ाज़ की सांझेदारी है ,,, भाई सिद्धार्थ भट्ट , इनके व्यवहार , इनके संस्कार , एक बढे दैनिक अख़बार के स्थानीय कोटा सम्पादक होने की बंदिशों में बंधकर , कोटा के लिए बहुत कुछ लिख कर गए है , बहुत कुछ सकारात्मक करके गये है , कोटा के लोगों से आज भी उनका निजी जुड़ाव है , वोह आज भी कोटा निवासियों को , कोटा को , प्यार करते है , और कोटा वासी आज भी उन्हें ,, उनके इसी स्वभाव , इसी विनम्रता , इसी प्यार , मोहब्बत भरी जज़्बे के चलते , सम्मान की दृष्टि से , सिद्धार्थ भाईजान , बॉस ,, के नाम से पुकारते है , रोज़ नहीं तो , हफ्ते , महीनों में टेलीफोन पर , सोशल मीडिया पर हाय हेलो कर , मार्गदर्शन लेते है ,, सिद्धार्थ भट्ट साहब को एक बार फिर उनकी सालगिरह पर , ढेरों शुभकामनाओं के साथ , पुरखुलूस मुबारकबाद ,बधाई में निजी तोर पर , आदरणीय सिद्धार्थ भट्ट साहब का इसलिए भी शुक्रगुज़ार हूँ , के पिछले दिनों , कुछ अंधभक्तों की लगातार बकवास , झूंठ , फरेब , फेकं फांक , राष्ट्रविरोधी हरकतों के बावजूद भी छद्म , राष्ट्रवाद की मेरी पोस्टों पर ,, उनकी वेतनभोगी टिप्पणियों से जब में विचलित हुआ , और विचलित होकर , मेने भी , पत्रकारिता , लेखन , में ,मर्यादित भाषा त्याग कर , वकालत की भाषा में उन्हें जवाब दिया , तो , मेरे भाई , मेरे मार्गदर्शक , सिद्धार्थ भट्ट ने , तुरंत मेरे कान उमेठे , मुझे , निष्पक्ष क़लम की मर्यादाओं का पाठ याद दिलाया , मेरी वोह , अपनी लेखनी में ,वकालत की भाषा के इस्तेमाल की पहली और आखरी गलती थी , और मेने , फिर अपनी लेखनी में हमेशा , हर हाल में , हर उकसाने की कार्यवाही , हर तरह की उकसाऊ टिप्पणियों , वेतनभोगी लोगों के गंदे अल्फ़ाज़ों के , नियमित हमलों के बाद भी , ,मर्यादाओं का ध्यान रखा ,, और इसी मर्यादा के पाठ के लिए , वोह मेरे मर्यादित गुरूजी भी है , में उनका निजी तोर पर इस पाठ के लिए ऋणी भी हूँ ,, , अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान ,
तुम अपने किरदार को इतना बुलंद करो कि दूसरे मज़हब के लोग देख कर कहें कि अगर उम्मत ऐसी होती है,तो नबी कैसे होंगे? गगन बेच देंगे,पवन बेच देंगे,चमन बेच देंगे,सुमन बेच देंगे.कलम के सच्चे सिपाही अगर सो गए तो वतन के मसीहा वतन बेच देंगे.
06 जुलाई 2021
एक सिद्धार्थ , यानी जो काम हाथ में आ जाए , उसे पूरा करके ही दम लेने वाले , जी हाँ दोस्तों ,आज उन्ही भाईजान , वरिष्ठ पत्रकार , सिद्धार्थ भट्ट का जन्म दिन है , उन्हें उनके जन्म दिन पर ,, सह्तयाबी , उम्रदराज़ी , कामयाबी , खुशहाली ,,की पुर खुलूस दिली मुबारकबाद
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