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08 जून 2021

आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , राष्ट्र के नाम सम्बोधन में , पहली बार कुछ भी डराने वाला ,,, थाली वाला , नोटबंदी वाला नहीं बोले ,, लेकिन बोले तो , मुफ्त टीकाकरण की घोषणा में भी , वही सियासत का खेल , सियासत की जुमलेबाज़ी के साथ बोले ,

 आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , राष्ट्र के नाम सम्बोधन में , पहली बार कुछ भी डराने वाला ,,, थाली वाला , नोटबंदी वाला  नहीं बोले  ,, लेकिन बोले तो , मुफ्त टीकाकरण की घोषणा में भी , वही सियासत का खेल , सियासत की जुमलेबाज़ी के साथ बोले , मुफ्त टीकाकरण ,पूरा सो फीसदी नहीं , 75 फीसदी मुफ्त टीकाकरण की घोषणा ,, थोड़ी बहुत ,, स्वागत योग्य क़दम है , इसके लिए सुप्रीमकोर्ट , , राजस्थान के मुख्यमंत्री , अशोक गहलोत , प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष , गोविन्द सिंह डोटासरा के नेतृत्व का , मुफ्त यूनिवर्सल , टीकाकरण , कम्पेन , सहित , श्रीमती सोनिया गांधी , राहुल गाँधी का प्रतिपक्ष दबाव ज़बरदस्त काम का रहा , और आदरणीय प्रधान मंत्री महोदय को , अपने गिरेहबान में  झाँकना पढ़ा , उन्होंने , सुप्रीमकोर्ट के सूक्ष्म परीक्षण ,, एक एक , पत्रावली की ऑर्डर शीट के अवलोकन की दिशा बदलने ,, और आम जनता में इस तीहरे वेक्सीन क़ीमत के खिलाफ जनता की बगावत के दबाव में यह सब कुछ किया , लेकिन मन साफ़ नहीं है ,, वही सियासत , वही राजनीति , सुप्रीमकोर्ट और राज्यों की मंशा देश के हर वर्ग को मुफ्त टीकाकरण की मांग रही है , दबाव रहा है ,, वैसे भी राज्य अभी तक , अलग अलग राज्यों में ,सो करोड़ हर राज्य सहित करोड़ों करोड़ टीको के आदेश दे चुके है ,,जिसमे से कुछ तो टीके पहुंच गए है और कुछ टीके इसी सप्ताह राज्यों को मिल जाएंगे , ऐसे में , प्रधानमंत्री महोदय को , उक्त टीकों के मूल्यों का पुनर्भरण करना चाहिए , वर्ना 75 प्रतिशत मुफ्त वेक्सिनेशन में से ,  15 प्रतिशत के लगभग तो राज्यों की खरीद से ही आपूर्ति हो जायेगी ,,  जबकि क़रीब दस प्रतिशत तो पूर्व में ही लगा चुके है , इधर ऍन आर आई जैसे लोग तो , विदेश में ही टीके का मज़ा ले चुके है , ऐसे में , देश में अब 75 से 80 फीसदी आबादी को टीके चाहिए , इसमें से 25 प्रतिशत टीके निजी अस्पताल खरीदेंगे , कितने में खरीदेंगे , अभी खुलासा नहीं ,, जबकि बाबा रामदेव ,,, आसाराम जैसे , लोग तो टीका लगवाएंगे नहीं ,  इस तरह से देश में ,  तीस प्रतिशत टीकों की खरीद और कम होगी , तो फिर जनाब  टीकों की ऑडिट तो गिर कर , 55 से 60 प्रतिशत ही रह गयी , अब केंद्र की मुफ्त टीकाकरण की ज़िम्मेदारी में , निजी अस्पतालों को टीकों की बिक्री का प्रतिशत रखने की क्या ज़रूरत थी , दूसरे राज्यों ने अगर ,, टीकों की पूर्व पोलिसी के तहत , टीकों के आदेश देकर , टीके खरीद कर लिए है , तो फिर उन्हें , उक्त राशि का पुनर्भरण क्यों नहीं ,, फिर अगर टीके मुफ्त लगवाने के लिए , घोषणा करना ही थी , और मेरे जन्म दिन पर 7 जून को ही टीकों की घोषणा करना थी , तो फिर ,, उसे 13 दिन बाद , 21 जून से , क्रियान्विति की शुरुआत की घोषणा के पीछे क्या रहस्य है , शायद , प्रधानमंत्री महोदय , विश्व योग दिवस पर इस व्यवस्था को आंशिक संशोधित कर , यह बताना चाहते हो , के आई एम ऐ , और बाबा रामदेव के विवाद में , वोह , एलोपेथी पद्धति के टीकों को भी , संशोधित रूप में , विश्व योग दिवस पर , लॉन्च कर रहे है , खेर इससे देश को , देश की जनता को क्या फ़र्क़ पढ़ता है , लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय , देश की जनता से सियासत बंद करे , देश की जनता की वेक्सीन , 25 भी निजी अस्पतालों के हाथों में क्यों दी जा रही है , ऐसे में विवाद खड़े होंगे , लूटपाट की शिकायतें आम होंगी , फिर टीका लगवाने के 150 रूपये ,, अजीब बात है , अगर सरकारी नर्सिंग कर्मियों ने भी , प्रत्यके टीके के लगाने के नाम पर  150 रुपया टीका भत्ता देने की मांग उठा डाली तो , अनावश्यक वाद विवाद का माहौल बनेगा , ऐसे में देश भर में एक टीका , मुफ्त टीके की व्यवस्था ही ठीक है , फिर सरकार को पहले सप्लाई मिलेगी , या फिर , निजी अस्पतालों को पहले सप्लाई मिलेगी , किस आधार पर टीकों की सप्लाई होगी , यह सब विवाद का विषय बन जाएंगे , इसलिए , आदरणीय प्रधानमंत्री महोदय जी अपने मन की बात को एक  बार फिर , अपने मन से टटोल कर , पूंछे ,पुनर्विचार करें , आप कहते है , पहले , टीका लगाने में दस साल लग जाते थे , तो जनाब पहले एक किलोमीटर के सफर में भी , एक मिनट नहीं ,, एक घंटा लग जाता था , पहले , हमारे पास ऐसे वैज्ञानिक ,ऐसी लेबोरेट्री , बढ़ी बढ़ी फैक्ट्रियां , आवागमन के संसाधन और आर्थिक स्तर पर , ज़बरदस्त टेक्स के साथ , गब्बर सिंह टेक्स के साथ , पेट्रोल टेक्स के साथ , प्रधानमंत्री कोरोना रिलीफ फंड के , अरबों अरब रूपये के फंड के साथ ,, कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं थी , और दस साल कभी ऐसे टीककरणों में नहीं लगे , हर बार , मुफ्त टीकाकरण में , लगातार समयबद्ध कार्य्रकम के तहत हुए है , कुछ प्रधानमंत्री साहिब के कार्यालय  में पुरानी  पत्रावलियां रखी है , खुद देख लें , ऐसे दस्तावेज सार्वजनिक नहीं भी करे , तो उनके प्रबंधन से कुछ खुद सीखे के  कैसे , पुरे देश को , बिना निजी चिकित्सालयों को टीका बिक्री का ज़रिये बनाये बगैर ,, देश भर में मुफ्त टीकाकरण , अभियान चलाकर , सरकार के खर्चे पर ही किया गया था ,, फिर भी , अगर मगर , किन्तु , लेकिन परन्तु ही सही , देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद , आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साहिब का यह  उदबोधन बहुत ज़्यादा डराने वाला नहीं रहा ,, बहुत कुछ  नहीं भी दिया हो , लच्छेदार , जुमले , सियासत भी हो , तो भी ,  कुछ तो देकर पहली बार के , राष्ट्र के नाम के सम्बोधन , में देकर जाने वाला ,  सम्बोधन रहा है  , यह अशोक गहलोत  मुख्यमंत्री राजस्थान की डिमांड की मार्गदर्शक जादूगरी , गांधीगिरी ,  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा का , मुफ्त यूनिवर्सल टीकाकरण अभियान , और सुप्रीमकोर्ट की तल्खी का भी नतीजा है , खेर मस्त रहे , व्यस्त रहे , कोरोना गाइड लाइन की शत प्रतिशत पालना करें ,, मास्क लगाए , टीकाकरण में , मदद करें ,, टीके की एक बून्द भी ,,  बेकार न जाये , टीकाकरण व्यवस्थाओं में ,भीड़भाड़ , अव्यवस्थाएं , ना हो , और अब राज्य ,  जो धन उनके पास  ,है ,,  उनसे ,  बुज़ुर्ग वर्ग का सर्वेक्षण करवाकर , बी एल ओ के माध्यम से , 70 वर्ष से अधिक लोगों के तो घरों पर ही टीकाकरण की मुफ्त व्यवस्था करवाए ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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