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03 मई 2021

दुखद और दुखद , विश्व के सबसे बढे लोकतंत्र , भारत में , आज देश का सो कोल्ड चौथा स्तम्भ ,, आज़ाद तो है , लेकिन आज़ाद नहीं है,

 दुखद और दुखद , विश्व के सबसे बढे लोकतंत्र , भारत में , आज देश का सो कोल्ड चौथा स्तम्भ ,, आज़ाद तो है , लेकिन आज़ाद नहीं है, आर्थिक तोर पर , प्रलोभन , भविष्य के फायदे , सियासी मदद , विज्ञापनों के लालच , और फिर पेड न्यूज़ के नाम पर ,, आम जन समस्याओं की खबरें , उनके मुद्दों से उन्हें दूर रखा जाता है ,, देश में कुछ एक अपवाद , और प्रिंट मीडिया , खासकर ,, क्षेत्रीय समाचार पत्रों को छोड़ कर देश में यह सब डरावना सिस्टम बना हुआ है ,, आज विश्व पत्रकार स्वतंत्र दिवस है ,, लेकिन कहाँ है हमारी स्वतंत्रता , हमे अगर क़ानूनी स्वतंत्रता है , तो हमने खुद , मालिकों के आगे , सरकारों के आगे , पूंजीपतियों ,बाहुबलियों ,, सियासी नेताओं के आगे , घुटने टेक कर पत्रकारिता के मिशन को , गुलाम बना दिया है , हम वोह नहीं लिखते , हम न्यूज़  चेनल्स में वोह नहीं दिखाते जो हमें दिखाना चाहिए , जो हमे जनता को , सरकार को कहना चाहिए ,और आजकल तो , जो हिन्दू मुस्लिम की नफरत फैलाये , पार्टियों के गुलाम बनकर , प्रवक्ता गिरी कराए , वही , रेस्पेक्टेबल जर्नलिस्ट है , बाक़ी लोगों को तो खुले आम गालियां पढ़ती है , अभी हाल ही में ,एक युवा पत्रकार के निधन पर , उनके खिलाफ नफरत का बाज़ार गर्म हुआ , वोह भी उनकी खबरों में , नफरत के सुबूतों के साथ ,, अदालत ने हालांकि उन्हें फटकार लगाकर , खुले आम माफ़ी मांगने पर मजबूर ,किया  उन्होंने माफ़ी भी मांगी , ,लेकिन देश को आज़ाद कराने वाली गांधी गिरी वाली पत्रकारिता की  ,  आज़ाद देश में यह दूरदर्शा होगी , किसी ने ख्वाबों में भी नहीं सोचा होगा ,, आज विश्व स्तर पर , पत्रकारिता स्वतंत्रता मामले में हमारे देश का 148 वां नंबर है ,, सबसे बढे लोकतंत्र में लोकतंत्र रक्षा  मामले में हमारा 53 वां स्थान है , और इसी वजह से पत्रकारिता के नाम पर सो कोल्ड चौथे स्तम्भ के भटकने की वजह से , भारत देश आज विश्व में दुखी ,देशों की सूचि में ,से 149 देशों के मुक़ाबले पर ,, सबसे ऊँची पायदान , 139 वे स्थान पर है ,, अफ़सोस की बात है , हम पत्रकार अगर बने है , तो रोज़गार , वेतन , विज्ञापन , मान , सम्मान , सहित सभी व्यवस्थाओं के साथ , अपना पत्रकारिता का धर्म भी निभाएं ,, हम पत्रकर नहीं , अब पक्षकार बनते जा रहे है , ज़रा दिल पर हाथ रखकर बताइये तो सही , अगर देश में ,,  ओरिजल  जर्नलिज़्म के तहत , सात सालों में , खासकर , अभी ,, कोरोना के प्रथम संक्रमण से लेकर , दूसरे हमले के वक़्त जब रैलियां , प्रधानमंत्री , मुख्यमंत्री स्तर पर लापरवाहियां हो रही थीं , तब हम अगर ओरिजनल रिपोर्टिंग करते , न्यूज़  चेनल्स पर , देश का सच बताते , देश के ज़िम्मेदार नेताओं की देश और देश की जनता के प्रति घोर लापरवाही , का सच दिखाते तो यक़ीनन , जनता , ऐसे नेताओं को ,, कोरोना संक्रमण रोकने के लिए फैलने से पहले ही , मजबुर कर देती , लेकिन हालात आज बाद से बदतर है , देश के हर शहर , हर गली में लाशों की ढेर है ,तड़पते मरीज़ है  ,, और व्यवस्था के नाम पर सिर्फ आरोप प्रत्यारोप है ,, नेता खरीदे जाते है , चुनी हुई सरकारें , खरीद फरोख्त , इस्तीफों की राजनीति से गिरायी जाती है ,, राज्यों  को  प्रताड़ित किया जाता है ,, लेकिन कोई सवाल करने वाला नहीं , कोई ओरिजल रिपोर्टिंग करने वाला नहीं ,, बस हाँ में ,हाँ , हाँ में हाँ ,,मुख्यमंत्री के लिए सिर्फ अधिकारी , विधायक अहमियत वाले होते है , उनके लिए जनता कीड़े मकोड़ों से ज़्यादा कुछ भी नहीं , तो फिर ,, हमारा धर्म कहाँ है ,, प्रधानमंत्री सेवानिवृत अधिकारीयों को अहमियत देते है , ,आज सात सालों में , विश्व के सबसे बढे लोकतंत्र , भारत के प्रधानमंत्री ने , देश की प्रेस के सामने आकर , खुले रूप से उनके सवालों का जवाब देने के लिए ,, कोई  भी खुली  प्रेस कॉन्फ्रेंस  नहीं बुलाई  है , यह देश की आज़ाद पत्रकारिता के लिए शर्मसार करने वाली बात है , प्रतिपक्ष के नाम पर , तमाशा है , प्रतिपक्ष की ज़िम्मेदारी , लोकसभा में ,  सरेंडर होने वाली हे , क्यों  है ,क्या समझौते होते है , वाक् आउट ,, दल बदल क्यों होते है ,,  क्यों  जनता के मुद्दे , ऐसे प्रतिपक्ष के लोग लोकसभा में नहीं उठाते ,, क्यों पत्रकार ,  ऐसे लोग जो संगठन के ढाँचे में , किसी भी पद पर नहीं होने पर ,भी , संगठन के कामकाज में इंटरफियर करने वालों के खिलाफ खुल कर नहीं लिखते ,,, बस सवाल है  ,, जवाब नहीं , , कोटा में एक पूर्व मंत्री , पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष , रघुवीर सिंह कौशल को , एक कलेक्टर की सागवान तस्करी के मामले में , कोटा के पत्रकारों पर भरोसा नहीं होने से , जयपुर में जाकर प्रेसकॉन्फ्रेंस करना पढ़ी , यहाँ नीलू राणा हत्याकांड मामले ,में , देश ने रिपोर्टिंग के तरीके देखे है , ,भवंरी हत्याकांड में , सी डी , राजस्थान के ज़िम्मेदार ,  पक्ष , विपक्ष के नेताओं के पास कई महीनों तक घूमती ,रही  कई महीनों तक पत्रकारों के पास वोह सी डी दबी रही ,, आखिर में सोशल मीडिया ने उस सी डी का भंडाफोड़ किया , और उस सोशल मिडिया की करामात से , मुक़दमा दर्ज हुआ ,,फिर , अख़बार , न्यूज़ चैनल खबर चलाने के लिए मजबुर हुए ,,  लेकिन अब सोशल मिडिया भी व्यक्तिगत , हो गया है , पेड मज़दूरों वाला सिस्टम हो गया है ,, देश की इस तस्वीर को बस , जो कुछ इने ,  गिने ओरिजनल पत्रकार बचे है , वही बदल सकते है ,,,  और आप हम  भी अगर मिल जाए , तो इसे बदलने के लिए मजबूर कर सकते  हैं ,, लेकिन क्या ऐसा सम्भवं है ,, आत्मचिंतन की बात है ,,,, आज विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस है , जो पत्रकार इस स्वतंत्रता को समझते है , इसके सदुपयोग करते है , दुरुपयोग से बचते है , उन्हें सभी साथियों को बधाई
 ,, तलवार की ढाल पर , अपना सब कुछ जोखिम में डाल कर कोई पत्रकार अगर सच लाता है तो वो खबर हर हाल ने प्रकाशित हो , प्रसारित हो , जो भी चेनल मालिक या अखबार मालिक ऐसी खबर के प्रकाशन पर रोक लगाए उसे भी सज़ा मिले ऐसा प्रावधान हो , खबर लिखो , सच लिखो , निष्पक्ष लिखो , इस सिद्धांत के पत्रकारों को सुरक्षा कवच मिलना ही चाहिए , प्रेस की आज़ादी ओर उछंकल प्रेस से आज़ादी के मामले एक मार्गदर्शिका , पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट होना ही चाहिए , जो सही मायनों में पत्रकार है ,जो सही मायनों में अख़बार है ,,कोई किसी पार्टी विचारधारा ,के प्रवक्ता नहीं है ,प्रचारक नहीं है ,सिर्फ पम्पलेट नहीं है ,निष्पक्ष खबर लिखते ,है , निष्पक्ष खबर प्रकाशित करते है ,,ऐसे रिपोर्टर्स ,ऐसे पत्रकार ,सम्पादक ,प्रकाशक ,जो भी हों उनकी लेखनी को संवैधानिक ,, विधिक मर्यादाओं के तहत ,,सुरक्षा मिलना ही चाहिए ,,ऐसे पत्रकार निश्चित तोर पर देश को ,देश के नागरिकों को सही दिशा देने वाले  मार्गदर्शक ,है ,, सरकार को आम जनता की समस्याओं से अवगत कराने के ज़िम्मेदार है ,,ऐसे पत्रकार ,ऐसे प्रकाशक निश्चित तोर पर देश के लिए चौथा स्तम्भ है ,देश के दबे कुचले लोगों की आवाज़ है ,,यह आवाज़ हर हाल में सुरक्षित रहना चाहिए ,. इस आवाज़ को , इस लेखन को सुरक्षा के साथ साथ ,,पर्याप्त आर्थिक मदद ,विज्ञापन सुविधाओं की भी ज़रूरत है ,,,,ऐसी आवाज़ जो नफरत नहीं फैला रही है ,ऐसी आवाज़ जो देश के ,मज़लूम , मज़दूर ,आम आदमी की आवाज़ है ,ऐसी आवाज़ जो सरकार की योजनाए ,व्यवस्थाएं ,आम आदमी तक क्यों नहीं पहुंच पा रही है ,उसके खुलासे की आवाज़ है ,ऐसी आवाज़ जो भूखों के लिए रोटी की आवाज़ है ,, ऐसी आवाज़ जो बेरोज़गारों के लिए रोज़गार की आवाज़ है ,ऐसी आवाज़ जो आर्थिक सुधारों की आवाज़ ,है, ऐसी आवाज़ जो लोगों में मोहब्बत का पैगाम देने वाले ,नफरत के खिलाफ नफरतबाज़ों की पोलपट्टी खोलने वाली आवाज़ है ,ऐसी आवाज़ जो सीधे व्यवस्थाओं के लिए ,,चुनावी वायदों को निभाने के सवालों के साथ ,देश के प्रधानमंत्री ,मुख्यमंत्री ,केंद्रीय मंत्री ,,सांसदों ,विधायकों के खिलाफ आवाज़ है ,,ऐसे नौकर शाह जो सरकार के इंस्ट्रूमेंट बनकर ,जनता के खिलाफ निष्पक्ष व्यवस्थाएं नहीं दे रहे है उनके खिलाफ आवाज़ है ,निश्चित तोर पर यह आवाज़े बुलंद रहना चाहिए ,इन्हे हर तरह से सुरक्षा मिलना चाहिए ,क़ानूनी सुरक्षा भी ,सामाजिक सुरक्षा भी ,विज्ञापन के तोर पर आर्थिक सुरक्षा भी इन्हे मिलना ही चाहिए ,ऐसे पत्रकारों के लिए सशर्त गाइड लाइन जारी हो ,सशर्त क़ानून  के जो भी पत्रकार ऐसी लेखनी ,ऐसी रिपोर्टिंग प्रकाशन ,प्रसारण ,के वक़्त अगर हिंसा का शिकार होते ,है ,, ऐसी लेखनी से नाराज़  होकर अगर उनके विज्ञापन रोके जाते है ,अगर ऐसे लोगों को कोई भी सरकार ,मंत्री ,विधायक ,सांसद ,माफिया प्रताड़ित करता है ,तो पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट बनाकर ऐसे लोगों के खिलाफ तत्काल गिरफ्तारी ,अजमानतीय अपराध के साथ उम्र क़ैद तक की सजा और आर्थिक जुर्माने का भी प्रावधान होना ही ,चाहिए ,, कहने को भारत का संविधान ,हमे सशर्त स्वतंत्रता अभिव्यक्ति की आज़ादी देता है ,,लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं के हम चोर को चोर कहने की  ज़िम्मेदारी से भाग जाए यह हमारा कर्तव्य होना ही चाहिए ,आज़ादी का  मतलब यह भी नहीं के हम किसी सच्चे इंसान पर कीचड़ उछाल दें ,हम बेवजह नफरत बाज़ों को बढ़ावा दे किसी सरकार ,किसी नेता ,किसी विचारधारा के प्रवक्ता ,प्रचारक बन जाये ,,सजा जो भी संवैधानिक गाइड लाइन है ,उसको पार करने वालों को भी मिलना चाहिए ,पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कोई भी क़ानून सीधा नहीं है , सिर्फ सामान्य धाराओं में पत्रकारों के खिलाफ हमले के मुक़दमे दर्ज होते है ,हो हल्ला  होता है और फिर समझौता या बरी हो जाते है ,,,पत्रकारों को ओरिजनल पत्रकारों को इस माहौल में ,देश के लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए सुबूतों के साथ खबर लिखने ,छापने ,प्रसारित ,करने की छूट मिलना ही चाहिए ,फिर वोह चाहे हायकोर्ट हो ,सुप्रीम कोर्ट ,हो , प्रधानमंत्री हो ,राष्ट्रपति हो ,,सभी के खिलाफ सही खबर छपना ही चाहिए ,,सारे बंधन हटा  कर सिर्फ एक बंधन खबर सही हो सुबूतों के साथ हो ,ज़िम्मेदारी वाली हो ,ऐसी छूट मिलना ही चाहिए और ऐसी खबरों के प्रकाशकों को ओरिजनल पत्रकारिता के हीरो के रूप में ,क़ानूनी प्रोटेक्शन के साथ ,आर्थिक पुरस्कार भी मिलना ही चाहिए ,ऐसी खबरों को दबाने के हमलावरों को उम्र क़ैद की सजा के साथ भारी जुर्माने से सज़ा का प्रावधान ,, समयबद्ध दो माह की सुनवाई का फास्ट ट्रेक अदालतो में होने का प्रावधान होना ही चाहिए ,,,,,,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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