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17 अप्रैल 2021

कल मेरे इस आर्टिकल के बाद , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की संवेदनशीलता शैली के तहत , उनकी एक बढ़ी पोस्ट , फेसबुक लाइव आया

 

यक़ीनन हमारे देश की सियासत , मतलबपरस्त है , ज़ालिम है , और हमारे देश के कुछ अपवादों को छोड़ कर सभी लीडर ,, जल्लाद , सिर्फ जल्लाद है , कल मेरे इस आर्टिकल के बाद , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की संवेदनशीलता शैली के तहत , उनकी एक बढ़ी पोस्ट , फेसबुक लाइव आया जिसमे उन्होंने , चुनाव , उपचुनाव , निकाय चुनाव के नाम पर , एजेंसियों , अदालतों , आयोग को भी ज़िम्मेदार ठहराया , , , भाजपा , उसकी जेबी एजेंसियों , और खुद आज़ाद एजेंसियों द्वारा , देश को कोरोना के खतरनाक संक्रमण में झोंक देने के बाद ,, भाजपा नेता ,, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस बयान पर तिलमिला रहे है , लेकिन ज़रा खुद खुद से पूंछ कर बताओ , ज़रा खुद अपने सीने पर हाथ रखो ,, राजस्थान सरकार ने ,, राजस्थान के निकाय चुनाव बार बार टाले , लेकिन केंद्र नियंत्रित चुनाव आयोग ने बार बार , राजस्थान में निकाय चुनाव करवाने का दबाव बनाया ,, अशोक गहलोत सरकार ने याचिका के ज़रिये हाईकोर्ट से मोहलत ली , लेकिन समयावधि की मोहलत मिली , फिर चुनाव आयोग का निकाय चुनाव का ज़बरदस्त दबाव ,, फिर अशोक गहलोत सरकार ने कोविड के हालातों को खुलासा करते हुए ,भविष्य के कोरोना ब्लास्ट की संभावना जताते हुए , जिला स्तरीय सी एम एच ओ , कलेक्टर रिपोर्ट पेश कर , जनहित में ,जनता के स्वास्थ्य संरक्षण को लेकर ,, निकाय चुनाव स्थगित करने की हाईकोर्ट से याचिका लगाकर मांग की , लेकिन , चुनाव आयोग ने प्रतिकार किया , हायकोर्ट ने , इस मामले में ,सभी बिंदुओं को ख़ारिज कर , चुनाव करवाने की डेड लाइन जारी कर दी , अशोक गहलोत सरकार की दूर अंदेशी , संवेदनशीलता देखिये , के उन्होंने , सुप्रीमकोर्ट में राजस्थान को कोरोना संक्रमण ब्लास्ट से बचाने के लिए ,, याचिका लगाई , अपना पक्ष रखा , हालातों को आंकड़ों के साथ पेश किया , लेकिन सुप्रीमकोर्ट में भी चुनाव के आदेश हुए ,,,, हालात सामने हैं , देश भर में अलग अलग राज्यों में ,, अगर चुनाव आयोग , संवेदनशील होकर ,, हालात देखकर , चुनाव कुछ समय के लिए स्थगित कर , छह माह की मोहलत भी दे देते , टुकड़ों में चुनाव करवाने की अक़्लमंदी दिखाते , प्र्धानमंत्री , मुख्यमंत्रियों को , देश के , राज्यों के हालातों को संभालने के लिए पाबंद करते , खुद हाईकोर्ट , सुप्रीमकोर्ट , अखबारी , ,टी वी, न्यूज़ रिपोर्टिंग की खबरों में , कोरोना एडवाइज़री की धज्जियां उड़ते देख , चुनाव आयोग की खामोशी देख , सो मोटो संज्ञान लेकर , एडवाइज़री , पाबंदी जारी करते ,, चुनाव आयोग , राजस्थान के उप चुनाव भी टाल सकता था , ,जब राजस्थान में चार विधानसभा सीटें खाली थीं , तो फिर तीन सीटों पर ही उप चुनाव कराने के पीछे क्या तकनीकी वजह थी , उसका भी खुलासा नहीं ,, अगर यह चार उपचुनाव नहीं भी होते , तो कोई पहाड़ नहीं टूट जाता ,, लेकिन चुनाव आयुक्त जी को तो अपने रिटायरमेंट के पहले सब कुछ करवाना था ना ,, ज़रा सोचिये , अधिकारी कमरो में बंद ,, अदालतों में सफेद पारदर्शी पर्दे ,लगाकर ,, ,वर्चुअल विडिओ कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई , को लेकर , दिशा निर्देश रहे है ,, सुरक्षात्मक उपाय ज़बरदस्त लागू रहे , वर्चुअल सुनवाई के चलते ही ,, दल बदल याचिकाएं ,, सदस्य्ता निर्योग्य याचिकाएं ,, खूब सुनी गयीं ,, राजस्थान के महामहिम गवर्नर साहब ने , विधानसभा में सरकार गिराने को लेकर खूब मोहलत दी , विधानसभा के सत्र बुलाने के मामले में जो फ़ज़ीहत हुई है , देश ने देखा है ,, एक तरफ अशोक गहलोत , कोरोना के खिलाफ , अपने अधिकारयों ,, विधायकों के साथ , गंभीर होकर , चिकित्स्कीय व्यवस्था के साथ मुक़ाबला कर रहे है , दूसरी तरफ , राजस्थान को वेक्सीन सप्लाई में कमी ,, बजट में कमी , कोरोना दवा सप्लाई में कमी , यहां तक के , वेंटिलेटर सप्लाई , कोरोना किट सप्लाई में , निम्न स्तरीय सप्लाई , , धोखाधड़ी , यह राजस्थान और देश की जनता के साथ कुठाराघात है , ,ज़रा खुद खुद से पूँछिये , अगर इन सब मामलों पर , गंभीर विचार होते ,, अगर , हाईकोर्ट , सुप्रीमकोर्ट ,के आदेश से , राजस्थान में , निकाय चुनाव स्थगित करने की पहल हो जाती तो , देश भर में चुनाव स्थगन को लेकर रास्ता साफ़ होता ,, राजस्थान में ,जो अफरा तफरीह , लापरवाही का माहौल बना , उस पर रोक लगाई जा सकती थी , राजस्थान को इस कोरोना संक्रंमण में झोंकने से बचाया जा सकता था ,, इसलिए , राजस्थान के गांधीवादी , जनता के प्रति संवेदनशील , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस निर्भीक , निष्पक्ष बयान को देश को स्वीकार करना होगा ,, भाजपा को आलोचना करने की जगह इस पर चिंतन , मंथन करना होगा ,, ताकि भविष्य में , ऐसी महामारी की रोकथाम के लिए ईमानदारी से सख्त क़दम उठाये जाये , अगर ऐसा होगा ,तो वर्तमान हालात जब अदालत बंद , परीक्षाएं , स्थगित ,, लोगों की बेमौत , अकाल मौतें , धार्मिक स्थलों पर पाबंदी , व्यापार का सत्यानास , सरकार के महंगे ,चिकित्स्कीय खर्च सहित कई परेशानियों से , राजस्थान , और देश को बचाया जा सकता था ,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान ,

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