एक
सिंह जो किंग है ,,एक सिंह जो विश्व आर्थिक उदारीकरण का हीरो है ,एक सिंह
जो भारत का गौरव ,भारत का अभिमान है ,,एक सिंह जो निर्विवाद है ,एक सिंह जो
पद्मभूषण पुरस्कृत है ,एक सिंह जिसने दुश्मन देश पाकिस्तान के घुटने टिका
दिए ,एक सिंह जिसने मुंबई हमलावरों को सबक़ सिखाया ,फांसी पर लटकाया ,एक
सिंह जिसने डोकलाम में युद्ध जहाज़ हरक्यूलिस से चीन को ललकारा ,जिसने आठ
बार पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करवाई ,,फौज को मज़बूत किया
,कश्मीर के आतंकवादियों को खदेड़ा ,,वहां शांति क़ायम की ,,पाकिस्तान की फौज
जिस सिंह की कूटनीतियों के आगे कांपती थी ,,वोह सिंह जिसे हाथ जोड़कर
पाकिस्तान बुलाने का इज़्ज़त से कई बार न्योता दिया ,,लेकिन उन्होंने उसे
ठुकरा दिया ,,उस सिंह इस किंग को ,उसके पुरे समाज को ,,एक सरदार सवा लाख के
बराबर ,,कहावत को झुठलाने के लिए ,नरेंद्र मोदी ,उनकी टीम ,उनके गुलाम
अनुपम खेर ,,दूसरे साथी मिलकर उस सिंह इस किंग की छवि धूमिल करना चाहते है
,यह लोग ,,ऐक्सिडेंटल प्राइमिनिस्टर के नाम पर काल्पनिक ,तथ्यों को जोड़तोड़
कर घटनाओं को सच से जोड़ कर देश को गुमराह करना चाहते है ,,चोर भी तुम
चौकीदार भी तुम ,सेंसर भी तुम ,सेंसर के दावेदार भी तुम और फिल्म रिलीज़ की
तारीख 11 जनवरी तय भी कर दी ,लेकिन यह फिल्म किसी भी सूरत में देश का
इंसाफ परस्त समाज ,देश को आज़ाद कराने वाली ,,देश के लिए क़ुर्बानियां देने
वाली कांग्रेस रिलीज़ नहीं होने देगी ,,फिल्म में सच्चाई है तो तस्दीक़ के
लिए जे पी सी बनाकर संसद कमेटी के सामने दिखाकर , कांग्रेस के नेताओं को
दिखाकर उसे रिलीज़ करने की इजाज़त ली जाए ,वरना कांग्रेस शासित राज्यों में
इस फिल्म को रिलीज़ नहीं होने दिया जाये और जहाँ भी यह फिल्म रिलीज़ होगी
,लोकतान्त्रिक तरीके से उसे रोका जाएगा ,,
अक़्ल के बुद्धुओं ,झूँठों के ,सरदारों ,लोकसभा चुनाव में जनता द्वारा बुरी तरह से हरा देने के बाद भी उन चहेते चाहितियों को हारने के बाद भी पॉवर का दुरूपयोग कर मंत्री बनाने वालो ,,अपने गिरेहबान में झांको ,पत्नी को साथ लेकर गर्व से घूमने वाला ,शख्स मज़बूत प्रधामंत्री है ,या फिर ,,चुनाव आयोग के क़ानूनी डर से छोड़ी गयी पत्नी का नाम शपथ पत्र में लिखकर इतिश्री करने वाला शख्स मज़बूत है ,,
अक़्ल के अन्धो ,,अपनी स्वार्थ सिद्धि करने के लिए ,आखिर कब तक देश की जनता को बेवक़ूफ़ बनाओगे ,ज़रा बताओ ,जिस किताब लिखने वाले संजय बारू की आप बात कर रहे है ,वोह मनमोहन सिंह के सिर्फ नौकर थे ,,वोह उनके हमराज़ ,उनके दोस्त नहीं थे ,ज़रा सोचो जीवनी जो खुद अपने बारे में लिखता है वोह तो विश्वसनीय होती है ,लेकिन भाजपा के नरेंद्र मोदी अभियान के वक़्त 2014 में इस किताब को लिखा जाता है ,,ज़रा सोचो किताब के लेखक संजय बारू ,जो वर्ष 2004 से 2008 तक मनमोहन सिंह के साथ थे ,फिर उनकी गतिविधियां संदिग्ध होने से ,,उन्हें इस्तीफा लेकर हटा दिया गया था ,ज़रा सोचो मनमोहन सिंह 2004 से तक पुरे दस साल निर्विवाद तरीके से पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद दूसरे पुरे कार्यकाल के प्रधानमंत्री रहे है ,ज़रा सोचो जब लेखक संजय बारू 2008 से उनसे अलग थे सिर्फ 2004 में उनसे जुड़े ,वोह सिंह इज़ किंग के बाक़ी के कारनामे क्या जाने ,संजय बारू कोई दैनिक डायरी नहीं लिखते ,थे ,उन्हें भूलने की बीमारी रही है ,वोह कई बिमारियों से ग्रसित रहे है ,,सिगार स्मोकर रहे है ,,जिन्होंने वर्ष 2012 किसी भी तरह की किताब लिखने को लेकर सार्वजनिक रूप से इंकार किया था ,वोह लेखक जब भाजपा का चुनाव अभियान ,लोकतंत्र में वरिष्ठ भाजपाइयों को दरकिनार कर जुमलों के सहारे ,,अनुपम खेर के आक़ा ,,न्यूज़ चैनल ,,पुस्तक प्रकाशकों के नियंत्रक नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का अभियान के दौरान ,अचानक ,दूसरे व्यक्ति की जीवनी पर किताब लिखने को तैयार होता है ,पुस्तक प्रकाशित करवाता है ,जिसका खंडन प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा ,,मनमोहन सिंह द्वारा ,अधिकारीयों दूसरे सहयोगियों द्वारा उसी वक़्त कर दिया गया ,उस फ़र्ज़ी काल्पनिक क़िस्से को ,दूसरे की जीवनी के नाम पर ,कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं की छवि बिगाड़ने की साज़िश के तहत यह व्यूह रचना रची गयी है ,जो गोपनीयता अधिनियम का तो उलंग्घन है ही सही ,अपमानकारी ,अवमानकारी , भड़काऊ ,,झूंठ फरेब ,देश के साथ बेईमानीपूर्वक ,धोखाधड़ी वाली होने के साथ साथ पुरे सिक्ख समाज का अपमान भी है ,,,,इस किताब के मामले में फिर से पुनर्विचार के लिए मेने तो फिल्म सेंसर बोर्ड ,केंद्र सरकार ,,को लिखा ,है ,,सांसदों की जेपीसी गठित कर इस के कुछ झूंठ फरेब के तहत तथ्य विहीन बनाये गए सीनों का परीक्षण ज़रूरी है ,वरना ,,सिक्ख समाज ,अल्पसंख्यक समुदाय ,देश का नागरिक ,, कांग्रेस कार्यकर्ता इतना कमज़ोर नहीं के झूंठ को फिल्मांकित कर देश की विश्वस्तरीय पद्मविभूषण हस्ती को अपमान करने की इजाज़त दे दे ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
अक़्ल के बुद्धुओं ,झूँठों के ,सरदारों ,लोकसभा चुनाव में जनता द्वारा बुरी तरह से हरा देने के बाद भी उन चहेते चाहितियों को हारने के बाद भी पॉवर का दुरूपयोग कर मंत्री बनाने वालो ,,अपने गिरेहबान में झांको ,पत्नी को साथ लेकर गर्व से घूमने वाला ,शख्स मज़बूत प्रधामंत्री है ,या फिर ,,चुनाव आयोग के क़ानूनी डर से छोड़ी गयी पत्नी का नाम शपथ पत्र में लिखकर इतिश्री करने वाला शख्स मज़बूत है ,,
अक़्ल के अन्धो ,,अपनी स्वार्थ सिद्धि करने के लिए ,आखिर कब तक देश की जनता को बेवक़ूफ़ बनाओगे ,ज़रा बताओ ,जिस किताब लिखने वाले संजय बारू की आप बात कर रहे है ,वोह मनमोहन सिंह के सिर्फ नौकर थे ,,वोह उनके हमराज़ ,उनके दोस्त नहीं थे ,ज़रा सोचो जीवनी जो खुद अपने बारे में लिखता है वोह तो विश्वसनीय होती है ,लेकिन भाजपा के नरेंद्र मोदी अभियान के वक़्त 2014 में इस किताब को लिखा जाता है ,,ज़रा सोचो किताब के लेखक संजय बारू ,जो वर्ष 2004 से 2008 तक मनमोहन सिंह के साथ थे ,फिर उनकी गतिविधियां संदिग्ध होने से ,,उन्हें इस्तीफा लेकर हटा दिया गया था ,ज़रा सोचो मनमोहन सिंह 2004 से तक पुरे दस साल निर्विवाद तरीके से पंडित जवाहर लाल नेहरू के बाद दूसरे पुरे कार्यकाल के प्रधानमंत्री रहे है ,ज़रा सोचो जब लेखक संजय बारू 2008 से उनसे अलग थे सिर्फ 2004 में उनसे जुड़े ,वोह सिंह इज़ किंग के बाक़ी के कारनामे क्या जाने ,संजय बारू कोई दैनिक डायरी नहीं लिखते ,थे ,उन्हें भूलने की बीमारी रही है ,वोह कई बिमारियों से ग्रसित रहे है ,,सिगार स्मोकर रहे है ,,जिन्होंने वर्ष 2012 किसी भी तरह की किताब लिखने को लेकर सार्वजनिक रूप से इंकार किया था ,वोह लेखक जब भाजपा का चुनाव अभियान ,लोकतंत्र में वरिष्ठ भाजपाइयों को दरकिनार कर जुमलों के सहारे ,,अनुपम खेर के आक़ा ,,न्यूज़ चैनल ,,पुस्तक प्रकाशकों के नियंत्रक नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने का अभियान के दौरान ,अचानक ,दूसरे व्यक्ति की जीवनी पर किताब लिखने को तैयार होता है ,पुस्तक प्रकाशित करवाता है ,जिसका खंडन प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा ,,मनमोहन सिंह द्वारा ,अधिकारीयों दूसरे सहयोगियों द्वारा उसी वक़्त कर दिया गया ,उस फ़र्ज़ी काल्पनिक क़िस्से को ,दूसरे की जीवनी के नाम पर ,कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं की छवि बिगाड़ने की साज़िश के तहत यह व्यूह रचना रची गयी है ,जो गोपनीयता अधिनियम का तो उलंग्घन है ही सही ,अपमानकारी ,अवमानकारी , भड़काऊ ,,झूंठ फरेब ,देश के साथ बेईमानीपूर्वक ,धोखाधड़ी वाली होने के साथ साथ पुरे सिक्ख समाज का अपमान भी है ,,,,इस किताब के मामले में फिर से पुनर्विचार के लिए मेने तो फिल्म सेंसर बोर्ड ,केंद्र सरकार ,,को लिखा ,है ,,सांसदों की जेपीसी गठित कर इस के कुछ झूंठ फरेब के तहत तथ्य विहीन बनाये गए सीनों का परीक्षण ज़रूरी है ,वरना ,,सिक्ख समाज ,अल्पसंख्यक समुदाय ,देश का नागरिक ,, कांग्रेस कार्यकर्ता इतना कमज़ोर नहीं के झूंठ को फिल्मांकित कर देश की विश्वस्तरीय पद्मविभूषण हस्ती को अपमान करने की इजाज़त दे दे ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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