दोस्तों अलवर में चार बेरोज़गारो द्वारा सामूहिक आत्महत्या का प्रकरण कोई
मामूली नहीं है ,एक बच गया ,लेकिन बेरोज़गारी के जिन से तंग आकर तीन युवाओं
की तो यूँ बेवजह ,सरकार की नीतियों के कारण जान चली ,,गयी ,,युवाओ
बेरोज़गारों के लिए हताशा का माहौल बनाने में बेतुकी बयानबाज़ियों का भी हाथ
रहा है ,यूँ तो किसान ,बेरोज़गार ,सरकार की फेल्यूओर नीतियों के चलते
रोज़मर्रा आत्म हत्या करते रहे है ,लेकिन बेरोज़गारों को रोज़गार देने के
चुनावीं झांसे के बाद बने राजस्थान और केंद्र सरकार की नाकामयाबियों के
कारण ,उनकी बेहूदा बयानबाज़ी चाय पकोड़े बिकवाने को लेकर बेरोज़गारों में
हताशा ,निराशा का माहौल रहा है ,अलवर में चार बेरोज़गार एकत्रित होते है
,,रोज़गार की चिंता में मनोवैज्ञानिक रूप से आहत होते है ,और सोच समझ कर ,एक
कार्ययोजना के साथ ,,बेरोज़गारी ,कृषि बेरोज़गारी से तंग आकर सामूहिक
आत्महत्या करने के लिए निकल पढ़ते है फिर चार में से तीन अपने फैसले पर अटल
रहकर ,ट्रेन से कटकर इस बेरोज़गारी नामक महामारी से तंग कार आत्महत्या कर
लेते है ,कोई मामूली घटना नहीं है ,सरकार ने चाहे वोह मोदी की सरकार हो
चाहे वसुंधरा की सरकार हो ,,बेरोज़गारो को नौकरी देने के बेहिसाब वायदे किए
,लेकिन मिला उन्हें बाबा जी का ठुल्लू ,खेर कोई बात नहीं चलता है ,लेकिन
उस पर बेरोज़गारो के ज़ख्मों पर मलहम लगाने की जगह नमक मिर्च छिड़कते हुए जब
,उनसे पकोड़े की दुकान ,चाय की दूकान लगाने की कहकर उनका उपहास उड़ाया जाए तो
निश्चित तोर पर तकलीफ होती ,है ,इसीलिए बेरोज़गारो में एक हताशा का माहौल
बढ़ा है और यह इस तरह की अमित शाह ,उनके समर्थकों ,की बेहूदा बायाँबाजी की
निराशा से उपजी मानसिकता है जो बेरोज़गारो को सामूहिक आत्महत्या पर मजबूर कर
रहे है ,,में पक्ष प्रतिपक्ष की बात नहीं कर रहा ,,में सियासी बात नहीं
कर रहा ,मेरी इल्तिजा सिर्फ इतनी है ,बेरोज़गारी से जूझ रहे लोगो की
समस्याओं का सरकार में बैठकर मज़ाक़ मत बनाओ ,प्रतिपक्ष में रहकर उन्हें वोट
मांगने का आधार मत बनाओ ,उनका ब्रेन वाश ,कराओ ,उन्हें उम्मीदें जगाओ
,,,उन्हें रोज़गारोन्मुखी योजनाओं से जोड़ो ,उन्हें हौसला दो ,बेरोज़गारी
भत्ता दो ,उनके लिए रोज़गार के अवसर बढ़ाओ ,उनका मनोविज्ञान ब्रेनवाश करो ,यह
सरकार में बैठे लोग ,प्रतिपक्ष में बैठे लोग मिलजुल कर एक साथ कोई
कार्ययोजना तैयार कर लागू ,करे ,,वरना ऐसी दिल हिला देने वाली खौफनाक
घटनाये हमे रोज़ बेचेंन , करती रहेंगी ,सो प्लीज़ ऐसी भयावह बेरोज़गारी समस्या
के खिलाफ पक्ष ,विपक्ष सब एक जुट हो जाओ ,बेरोज़गारो में उत्साह पैदा ,करो
उनके लिए रोज़गार के अवसर पैदा कर उनमे आयी हुई निराशा को खत्म कर
आत्मविश्वास पैदा करो ,,कोई अख़बार इस पर सम्पादकीय टिप्पणी शायद नहीं करे
,,कोई टीवी चैनल इस घटना पर शायद लाइव बहस नहीं करे ,क्योंकि जेबें भरी है
,चुनावी कमिटमेंट है ,लेकिन सच यही है ,यह सब होना चाहिए ,होना चाहिए
,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान
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