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02 सितंबर 2017

एक मज़हब जिसका खुदा एक ,,पैगम्बर एक ,,,एक मज़हब जिसका ,,अमन ,,सुकून ,,खुशहाली ,,दयानतदारी ,,

एक मज़हब जिसका खुदा एक ,,पैगम्बर एक ,,,एक मज़हब जिसका ,,अमन ,,सुकून ,,खुशहाली ,,दयानतदारी ,,पडोसी से प्रेम ,,उसकी खुशहाली ,, भूख प्यास ,,उसकी सुरक्षा ,,का ध्यान रखने का हुक्म जिस मज़हब में है ,,वोह मज़हब आज कुछ लोगो की गलतबयानी ,,दुष्प्रचार के चलते ,गिनती के लोगो की निगाह में सिर्फ और सिर्फ विलेन बना दिया गया है ,,विज्ञानं ,,,,भूगोल ,,विधि ,,न्यायिक फैसले ,,समाजवाद ,,अमीरो से लेकर गरीबो को देने का सिद्धांत ,,युद्ध विद्या ,,दुश्मनो से कैसे निपटे ,दुश्मनो को दोस्त कैसे बनाया जाए ,,का ंसदेश देने वाले इस मज़हब को कुछ मुनाफिक़ीन लोगो ने विलेन बनाने का प्रयास शुरू किया है ,,चंद फायदे ,चंद टुकड़ो में बिकने वाले यह लोग मज़हब में रहकर ,अपने फ़र्ज़ी मज़हबी दुश्मनो के आकाओ के इशारे पर कत्थक करते है ,,मज़हब के खिलाफ गलत बयानी करते है ,,कुछ है जो मुनाफिक़ीन है ,,कुछ गद्दार है ,,कुछ आस्तीन के सांप है ,लेकिन जो है वोह भी तो इस मज़हब के मूल सिद्धांतो से भटक गए है ,,,,, इबादत ,,चरित्र के तरीके बदल गए ,,आपसी नफरत ,,गुटबाज़ी ,,सियासत हावी हो गयी है ,,खेर इससे भी कोई फ़र्क़ नहीं पढ़ता ,लेकिन एक बढ़ी बात जो सब देखते है ,,मज़ाक़ उड़ाते है ,,हमारी ऐसी लापरवाहियां ,,हमे दूसरी बुराइयों की तरफ क़दम बढ़ाने का दुस्साहस भी देते है ,,साल में दो बार ईद की नमाज़ का ऐलान होता है ,,वक़्त की पाबंदी इस्लाम की पहचान और पहला हुक्म ,है ,क्योंकि वक़्त कभी ठरता नहीं ,,रुकता नहीं ,,वक़्त लोट कर भी वापस नहीं आता ,,,,ईद की नमाज़ ,,ईद की नमाज़ के वक़्त का ऐलान होता है ,,अखबारों में वक़्त का प्रचार होता है ,लेकिन ईदगाह पर क़ाज़ी ऐ शहर ,,वक़्त की पाबंदी के इस इस्लाम मज़हब के लोगो का इन्तिज़ार करते है ,,जो पहले पहुंचे है ,जो वक़्त के पाबंद है वोह लोग ,,वक़्त अपनी घडी में देखते है ,लेट लतीफ ,,लापरवाह लोगो के लिए बदगुमानी ,,गलत खयालात लाते है ,,ईदगाह वक़्त जो दिया जाता है उस वक़्त पूरी नहीं भर पाती है ,,क़ाज़ी ऐ शहर वीटो करते है और फैसला होता है ,नमाज़ का ऐलान किया गया वक़्त बढ़ा दिया जाए ,बस वक़्त बढ़ता है ,,और हर साल ,,यह लोग सुधरते नहीं ,,हर साल यह लोग बिना किसी युक्तियुक्त कारण के देरी से ईदगाह पहुंचते है ,,,वक़्त की नाफ़रमानी की एक क़ाज़ी के ऐलान के बाद मुक़र्रर वक़्त की नाफ़रमानी ,,,एक मुस्लिम भाई में वक़्त की पाबंदी से उसे भटकाता है ,दूसरे लोग जो हर बार वक़्त पहुंचते है वोह फिर खफा होते है ,गुस्सा होते है और दूसरी बार वोह भी देर से आने की आदत बनाते है ,वक़्त की पांबदी के हुक्म वाले इस मज़हब में ईद की नमाज़ भी जब वक़्त पर नहीं पढ़ाई जा सके तो फिर यह कॉम इत्तेहाद ,,जिहाद ,,लोगो की खिदमत ,,मज़हबी अच्छाइयों का प्रचार ,,प्रसार क्या कर पाएंगे ,,,एक वायदा ,,एक वक़्त का ऐलान ,,अल्लाह से वायदा होता है ,,इस वक़्त पर यह नमाज़ होगी ,,उस वायदे को न बंदा ,,न इमाम तोड़ सकते है ,लेकिन ऐसा होना अफसोसनाक है ,,,हुज़ूर स अ व ने एक जंग का ऐलान करते हुए कहा के फजर की नमाज़ के बाद सभी को जंग के लिए इकट्ठे होना है ,,,लेकिन तीन साहिबा अबू लबाबा उमर मीन जुमु ,,एक और तीनो फजर के बाद इकट्ठे नहीं हुए घरो में ही रहे ,,,सभी साहिबा जब जंग जीत कर वापस आये तो हुज़ूर स अ व ने इन तीनों के बारे पूंछा ,,सभी साहिबा ने उनकी मौजूदगी का इंकार किया ,पता चला वोह लोग वक़्त की पाबंदी के बाद भी नहीं पहुंचे उस वक़्त , खुदा का हुकम ,,आयत बनकर उतरा ,,जिसमे कहा गया जिसने हुज़ूर स अ व ,,के हुक्म की नाफ़रमानी की उसने अल्लाह की नाफ़रमानी की ,,इन तीनो साहिबा से हुज़ूर अलग हो गए ,उन्होंने उनकी तरफ नज़र उठाकर भी नहीं देखा ,,तीन दिन बाद वोह साहिबा रोये ,,सुबह हुज़ूर स अ व के बाहर सुतून के पेड़ से तीनो ने बांध कर खुद को तकलीफ दी ,,लेकिन हुज़ूर ने नज़र उठाकर भी नहीं देखा ,,तीन दिन बाद जब हुज़ूर को उनको इस हाल में देखकर तकलीफ हुई उन्होने अल्लाह से इस मामले में हिदायत चाही तब एक आयत के ज़रिये अल्लाह ने फ़रमाया ,,,गुनाहगार खुद को तकलीफ दे ,गलती माने तो माफ़ कर दो ,,बस अबू लबाबा और साथियो को माफ़ कर दिया गया ,,आज भी मदीने शरीफ में रियाजुल जन्नत ,,हुज़ूर की जन्नत की क्यारी में ,,सुतून ऐ अबु लबाब के नाम से यह दरख्त लोगो की ज़ियारत का हिस्सा है ,,,ऐसे में एक इमाम खुद नायब ऐ रसूल है ,,उसका ऐलान ,,हर मुसलमान को वक़्त की पाबंदी के साथ मानना है जबकि ,,खुद नायब ऐ रसूल के लिए भी ज़रूरी है के वोह वायदे का पक्का रहे क्योंकि नमाज़ के वक़्त का ऐलान ,,अल्लाह से वक़्त का वायदा हो चूका है ऐसे में वक़्त का ध्यान नहीं रखकर हम गुनाह कर रहे है ,,,,इधर मस्जिदों में खूब नमाज़ हो रही है ,, हालत यह है के मस्जिदों के बाहर सड़क पर होने वाले नमाज़ों की सफे ,इमाम के मेंबर से कई मीटर आगे निकलती जाती है ,,नमाज़ियों के सामने देर से आने वाले लोग ,बिना किसी तहज़ीब ,इस्लामी क़ानून के बीच बीच में शेतानी हरकत करते हुए चादर बिछाते है ,,आगे आते है और नमाज़ क़ायम करने का दिखावा करते है ,विज्ञाननगर में तो एक पुलिस का वीडियोग्राफर तक नमाज़ियों के सामने टहल टहल कर विडिओ बनाता देखा गया ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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