(ऐ रसूल) उन कुफ्फारों पर इस तरह अज़ाब नाजि़ल करेगें जिस तरह हमने उन लोगों पर नाजि़ल किया (89)
जिन्होंने क़ुरान को बाँट कर टुकडे़ टुकड़े कर डाला (90) (बाज़ को माना बाज को नहीं) तो ऐ रसूल तुम्हारे ही परवरदिगार की (अपनी) क़सम (91)
कि हम उनसे जो कुछ ये (दुनिया में) किया करते थे (बहुत सख़्ती से) ज़रुर बाज़ पुर्स (पुछताछ) करेंगे (92)
पस जिसका तुम्हें हुक्म दिया गया है उसे वाजेए करके सुना दो (93)
और मुशरेकीन की तरफ से मुँह फेर लो (94)
जो लोग तुम्हारी हँसी उड़ाते है (95)
और ख़ुदा के साथ दूसरे परवरदिगार को (शरीक) ठहराते हैं हम तुम्हारी तरफ से उनके लिए काफी हैं तो अनक़रीब ही उन्हें मालूम हो जाएगा (96)
कि तुम जो इन (कुफ्फारों मुनाफिक़ीन) की बातों से दिल तंग होते हो उसको हम ज़रुर जानते हैं (97)
तो तुम अपने परवरदिगार की हम्दो सना से उसकी तस्बीह करो और (उसकी बारगाह में) सजदा करने वालों में हो जाओ (98)
और जब तक तुम्हारे पास मौत आए अपने परवरदिगार की इबादत में लगे रहो (99)
जिन्होंने क़ुरान को बाँट कर टुकडे़ टुकड़े कर डाला (90) (बाज़ को माना बाज को नहीं) तो ऐ रसूल तुम्हारे ही परवरदिगार की (अपनी) क़सम (91)
कि हम उनसे जो कुछ ये (दुनिया में) किया करते थे (बहुत सख़्ती से) ज़रुर बाज़ पुर्स (पुछताछ) करेंगे (92)
पस जिसका तुम्हें हुक्म दिया गया है उसे वाजेए करके सुना दो (93)
और मुशरेकीन की तरफ से मुँह फेर लो (94)
जो लोग तुम्हारी हँसी उड़ाते है (95)
और ख़ुदा के साथ दूसरे परवरदिगार को (शरीक) ठहराते हैं हम तुम्हारी तरफ से उनके लिए काफी हैं तो अनक़रीब ही उन्हें मालूम हो जाएगा (96)
कि तुम जो इन (कुफ्फारों मुनाफिक़ीन) की बातों से दिल तंग होते हो उसको हम ज़रुर जानते हैं (97)
तो तुम अपने परवरदिगार की हम्दो सना से उसकी तस्बीह करो और (उसकी बारगाह में) सजदा करने वालों में हो जाओ (98)
और जब तक तुम्हारे पास मौत आए अपने परवरदिगार की इबादत में लगे रहो (99)
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