राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देश पर बच्चों के कल्याण , संरक्षण, निरीक्षण के लिए बनी कमेटी में संभागीय आयुक्त चेयरमेन , ऐ सी बी जज को चेयरमेन , प्रिंसिपल मेफिकल कॉलेज, हरप्रीत कौर सहित अन्य सदस्य नियुक्त सभी को बधाई, मुबारकबाद,
कोटा 5 नवम्बर ,, कोटा संभाग में संचालित चाइल्ड केयर सेंटर और उसके बाद बच्चों के संरक्षण निगरानी सहित अन्य संरक्षित मामलों के लिए माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के दिशा निर्देश पर कोटा संभाग के संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक संभागीय बाल आयोग कमेटी का गठन किया गया है ,, जिसमे बल विशेषज्ञ के रूप में बाल कल्याण समिति सदस्य श्रीमती हरप्रीत कोर , बाबूलाल महरा को भी सदस्य बनाया गया है , राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार , उच्चन्यायलय के अधीनस्थ नियंत्रण में गठित इस कमेटी के चेयरमेन संभागीय आयुक्त , को चेयरमेन कोटा जिला भ्रष्टाचार निरोधक मामलात जज अश्वनी शर्मा को चेयरमेन ,,सचिव जिला विधिक न्यायिक प्राधिकरण संयोजक बनाये गए है , जबकि समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक ,प्रिंसिपल गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज कोटा , डॉक्टर मिथिलेश खींची प्रोफेसर साइक्रेटरी डिपार्टमें , बाबूलाल मेहरा ,,हरप्रीत कोर , सदस्य बाल कल्याण समिति सदस्य बनाये गए है , ,बाल कल्याण समिति सदस्य हर हर प्रीत कोर इसके पूर्व कोटा जिला बाल न्यायालय में न्यायिक सदस्य भी रही हैं वर्तमानं में वोह बाल कल्याण समिति सदस्य है उन्हें बालक , बालिकाओं की समस्याओं , उनके मनोविज्ञान , समाधान के बारे में विशेष अनुभव है , उनकी इस पद पर नियुक्ति पर बधाई , मुबारकबाद , माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ द्वारा दिनांक 03.09.2026 को एस.बी. आपराधिक विविध याचिका संख्या 6874/2024, दीपक
कुमार बनाम राजस्थान राज्य में पारित आदेश के अनुपालन में,
और राजस्थान
राज्य विधि सेवा प्राधिकरण, जयपुर से दिनांक 28.10.2026 के पत्र और जिला विधि सेवा प्राधिकरण, कोटा से दिनांक 30.10.2026 के पत्र के माध्यम से संभागीय स्तर किशोर न्याय आयोग (डीयूजेसी) के गठन और प्रभावी कार्यप्रणाली के संबंध में प्राप्त संचार के अनुसरण ,
और संबंधित अधिकारियों से नामांकन प्राप्त होने पर,
कोटा संभाग के लिए संभागीय स्तर किशोर न्याय आयोग का गठन किया गया जिसमें, उक्त चेयरमेन सदस्य नियुक्त हुए,
आयोग का मुख्य कार्य बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई) में रहने वाले किशोरों और 18 वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके तथा पारिवारिक सहायता से वंचित किशोरों की व्यक्तिगत शिकायतों और समस्याओं का समाधान करना। सरकारी विद्यालयों/कॉलेजों/आईटीआई में तत्काल आश्रय उपलब्ध कराना और कौशल विकास को बढ़ावा देना। . सभी बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआई), सुरक्षित स्थानों और देखभाल गृहों का मासिक निरीक्षण करना और राज्य किशोर न्याय परिषद को रिपोर्ट प्रस्तुत करना। . पुनर्वास के लिए बच्चे, उसके परिवार और राज्य के बीच सेतु का काम करना। यह सुनिश्चित करना कि किसी भी देखभाल से मुक्त हुए बच्चे को उचित योजना के बिना संस्था से छुट्टी न दी जाए, जैसा कि आदर्श नियम 2016 के नियम 25 के तहत अनिवार्य है। आयोग के सभी सदस्य माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार उपरोक्त कार्यों का प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित करेंगे और आयोग के प्रभावी कामकाज के लिए पूर्ण सहयोग और समन्वय प्रदान करेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)