आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

18 सितंबर 2026

ऐडवोकेट हाजी अख्तर खान अकेला द्वारा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी शिकायत सुझावों को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लेते हुए

ऐडवोकेट हाजी अख्तर खान अकेला द्वारा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी शिकायत सुझावों को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लेते हुए , हर सुझावों को स्वीकारोक्ति दी है, जबकि शिकायतों के निवारण के प्रयास के तहत आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए है, इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके कार्यालय ने अख्तर खान अकेला द्वारा हज सुधार में सकारात्मक सुझाव देने , ओर भ्रष्टाचार की तथ्यात्मक शिकायत पर अख्तर खान अकेला को धन्यवाद देते हुए उनका आभार भी जताया है, सभी सुझाव शत प्रतिशत लागू करने के लिये हज ऑफिसर को आवश्यक निर्देश के साथ भेजे गए हैं, डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़
हज पॉलिसी 2027 पर अख्तर खान अकेला के तीखे सवाल
पूरी रकम वसूली, फिर भी हाजी परेशान! हज पॉलिसी पर अख्तर खान अकेला ने उठाए तीखे सवाल
“स्मार्ट वॉच से लेकर हवाई किराए तक हिसाब दो, सुविधा नहीं मिली तो पैसा लौटाओ” — प्रधानमंत्री, अल्पसंख्यक मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को भेजे 16 सुझाव
के डी अब्बासी
कोटा, 17 सितम्बर। “हज यात्रियों से पूरी राशि वसूलने के बाद भी अगर सुविधाएं अधूरी मिलें तो जवाबदेही किसकी?” इसी सवाल के साथ एडवोकेट अख्तर खान अकेला ने हज पॉलिसी 2027 को लेकर केंद्र सरकार के सामने 16 सूत्रीय सुझाव रखे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को सुझाव भेजकर हज व्यवस्था में आमूलचूल सुधार और वर्ष 2026 में अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिलने पर राशि की समीक्षा कर अनावश्यक वसूली वापस करने की मांग की है।
अख्तर खान अकेला ने कहा कि हज कोई सामान्य पर्यटन यात्रा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा पवित्र सफर है। इसलिए “पैसा पूरा तो सुविधा भी पूरी” के सिद्धांत पर हज व्यवस्था चलनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि वर्ष 2027 की हज पॉलिसी संसद में बहुपक्षीय चर्चा, विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों के सुझावों के बाद तैयार की जाए तथा हर खर्च और हर सुविधा की जिम्मेदारी तय हो।
स्मार्ट वॉच पर सबसे बड़ा सवाल
अख्तर खान अकेला ने वर्ष 2026 में स्मार्ट वॉच के नाम पर ली गई राशि पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व घोषित हज पॉलिसी में यदि इसका स्पष्ट प्रावधान नहीं था तो बाद में इसे यात्रियों पर क्यों थोपा गया? उनका दावा है कि कई यात्रियों के अनुभव में यह घड़ी अपेक्षित उपयोगी साबित नहीं हुई।
उन्होंने मांग की कि स्मार्ट वॉच के नाम पर ली गई राशि और पूरी व्यवस्था की जांच हो तथा यदि वसूली अनुचित पाई जाए तो पैसा लौटाया जाए।
उनका सुझाव है कि हर हाजी के पास स्मार्टफोन होने के कारण सरकार सऊदी अरब में आवश्यक अवधि के लिए सिम और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करे। इससे संपर्क, लोकेशन और आपात स्थिति में यात्री को खोजने में मदद मिल सकती है।
हवाई किराया पूरा, सुविधा अधूरी तो किराया भी हो कम
अख्तर खान अकेला ने हवाई किराए को लेकर भी तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि यात्रियों से एक निर्धारित स्तर की एयरलाइन सुविधा के अनुरूप राशि ली जाती है तो उन्हें उसी स्तर की सेवा मिलनी चाहिए।
उन्होंने उड़ानों में सीट व्यवस्था, स्टाफ, लगेज, प्राथमिक चिकित्सा सामग्री और अन्य सुविधाओं को लेकर शिकायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सुविधा कम है तो किराया भी उसी अनुपात में कम होना चाहिए।
उन्होंने प्रत्येक यात्री को पूर्व निर्धारित सीट पर ही बैठाने की सख्त व्यवस्था करने की मांग की।
हज इंस्पेक्टर—जिम्मेदारी भी तय हो, हिसाब भी
उन्होंने हज इंस्पेक्टरों की संख्या, चयन और कार्यप्रणाली की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि यात्रियों से संबंधित खर्च का भार उन्हीं पर पड़ता है, इसलिए इंस्पेक्टरों की जवाबदेही तय होना जरूरी है।
हर इंस्पेक्टर अपने जिम्मे के यात्रियों के साथ लगातार संपर्क में रहे, डिजिटल ग्रुप बनाए जाएं और शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था हो।
कुर्बानी के ₹17 हजार पर भी समीक्षा की मांग
अख्तर खान अकेला ने कुर्बानी की निर्धारित राशि की भी समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर इससे कम राशि में कुर्बानी की व्यवस्था उपलब्ध है तो सरकार बल्क कॉन्ट्रेक्ट के जरिए लागत कम करने की संभावनाएं तलाशे।
साथ ही कुर्बानी पूरी होने के बाद प्रत्येक हाजी को तत्काल डिजिटल सूचना मिले, ताकि तकनीकी समस्या के कारण यात्रियों को असमंजस का सामना न करना पड़े।
“शिकायत लेकर जाओ तो मुख्यालय क्यों भेजते हो?”
उन्होंने मक्का-मदीना में शिकायत निवारण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई हाजी स्थानीय शिकायत केंद्र पहुंचता है तो उसे दूर मुख्यालय भेजने की बजाय उसी केंद्र को शिकायत का अंतिम निस्तारण करने का अधिकार दिया जाए।
उन्होंने अजीजिया सहित प्रमुख क्षेत्रों में प्रभावी कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा फोन, ई-मेल और डिजिटल शिकायत प्रणाली शुरू करने का सुझाव दिया।
बसों की लेटलतीफी और बख्शीश पर सख्ती
अख्तर खान अकेला ने परिवहन व्यवस्था में कथित अव्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब परिवहन का भुगतान पहले ही किया जा चुका है तो हज यात्रियों से अतिरिक्त बख्शीश मांगने की शिकायतें गंभीरता से ली जानी चाहिए।
उन्होंने बसों के निर्धारित समय पर नहीं पहुंचने और यात्रियों को बार-बार बस बदलने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए सीधे गंतव्य तक परिवहन और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित करने की मांग की।
मीना में शौचालय से लेकर भोजन तक—व्यवस्था सुधरे
उन्होंने मीना के खेमों में गद्दों की चौड़ाई बढ़ाने, भोजन की गुणवत्ता सुधारने तथा शौचालय, स्नानघर और वुजू की पर्याप्त व्यवस्था करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि लंबी कतारों और अपर्याप्त सुविधाओं से हज यात्रियों को अनावश्यक परेशानी होती है।
हज भवन के नाम पर वसूली, भवन कहां है?
अख्तर खान अकेला ने हज भवन के नाम पर यात्रियों से ली जाने वाली राशि की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि यदि हर बार हज यात्रियों से हज भवन के नाम पर राशि ली जा रही है तो उसके उपयोग और निर्माण की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
इसी तरह हज प्रशिक्षण के नाम पर ली जाने वाली राशि की भी समीक्षा की मांग की गई है।
खाने की समस्या खत्म हो—होटल में ही भोजन मिले
उन्होंने मक्का-मदीना में हज यात्रियों के होटल में ही चाय, नाश्ता और दोनों समय भोजन की व्यवस्था कराने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि भोजन की तलाश में यात्रियों को लाइन में लगना पड़ता है और अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ती है, जिससे इबादत का समय भी प्रभावित होता है।
जमजम, लगेज, मेडिकल सुविधा—हर मद का हो हिसाब
अख्तर खान अकेला ने आबे-जमजम की मात्रा बढ़ाने, लगेज व्यवस्था में सुधार, चोरी या जेब कटने की स्थिति में तत्काल सहायता बढ़ाने और भारतीय मेडिकल स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं का प्राथमिक स्तर पर ही इलाज उपलब्ध कराया जाए, ताकि हज यात्रियों को अनावश्यक रूप से अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें।
हज पॉलिसी पर संसद में हो खुली बहस
अख्तर खान अकेला ने कहा कि हज पॉलिसी सिर्फ कागजों पर तैयार करने के बजाय लोकसभा में बहुपक्षीय चर्चा होनी चाहिए। हज यात्री, विशेषज्ञ, बुद्धिजीवी, हज कमेटियां और संबंधित क्षेत्र के अनुभवी लोग अपने सुझाव दें और उसके बाद ऐसी नीति बने जिसमें—
कम खर्च, पूरी सुविधा, पारदर्शी वसूली और तय जवाबदेही सुनिश्चित हो।
उन्होंने मांग की कि वर्ष 2026 में जिन मदों में राशि ली गई लेकिन उसके अनुरूप सुविधा नहीं मिली, उनकी मदवार जांच और ऑडिट कराया जाए। जहां अतिरिक्त अथवा अनावश्यक राशि वसूली गई हो, वहां नियमानुसार राशि वापस की जाए।
अख्तर खान अकेला ने कहा कि “हाजी से पैसा लेना आसान नहीं, उस पैसे का पूरा हिसाब और उसके बदले पूरी सुविधा देना भी सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।” उन्होंने वर्ष 2027 के हज यात्रियों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की, जिसमें हज यात्रा किफायती, सुरक्षित, सुविधायुक्त और सम्मानजनक हो।
See less

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...