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28 सितंबर 2026

कोटा नगर निगम के अच्छे दिन शुरू, विनम्र महापौर अनुसुइया मेडम की विनम्रता, कार्यकुशलता, बोल्डनेस रहेगी सब पर भारी, मिलेगी समझदारों, वफादारों को ज़िम्मेदारी

 

कोटा नगर निगम के अच्छे दिन शुरू, विनम्र महापौर अनुसुइया मेडम की विनम्रता, कार्यकुशलता, बोल्डनेस रहेगी सब पर भारी, मिलेगी समझदारों, वफादारों को ज़िम्मेदारी
कोटा 27 सितंबर कोटा नगर निगम की नवनिर्वाचित महापौर अनुसईया गोस्वामी ,, अपनी बोल्डनेस ,,फेयरनेस वर्किंग के लिए पहचान रखती है , उनके महापौर के इस निर्वाचन से , उनसे ईर्ष्या रखने वाले ऐसे लोग , जिनकी वजह से बाड़ेबंदी का पार्षदों को दर्द सहना पढ़ा , वोह ईर्ष्यालु लोग , चाहे उन्हें असफल करने के कितने ही प्रयास करें , लेकिन अनुसईया की जो प्रतिभा है , जो कार्यशैली है , वोह उन्हें दूसरे महापौरों से बेहतर, अलग ,, लोकप्रिय बना सकते है , महापौर अनुसईया के विज़न में अपने बढे , वृद्ध भाजपाइयों , सहित आम लोगों के प्रति श्रद्धा है , और वोह चाहती है , के कोटा नगर निगम की कार्यशैली , आम जनता के प्रति जवाबदारी , साफ़ सफाई व्यवस्था , आम नागरिकों के लिए सुविधाएं , सौदंर्यकरण , विकास कार्य , गार्डनों की खूबसूरती में निखार , चंबल क्रूज संचालन ,,चंबल शुद्धिकरण , हर गली हर मोहल्ले की व्यवस्थित सफाई व्यवस्था , अतिक्रमण मुक्त कोटा , आवारा जानवरों , आवारा हिंसक स्ट्रीट डॉग्स से मुक्त कोटा , नालियों के ढकान , टूटी सड़कों की मरम्मत , ट्रेफिक पॉइंट्स पर जाम से लोगों की मुक्ति के लिए के डी ऐ से समन्वय स्थापित कर कोटा में विकास , सोंदर्यकरण , सुख सुविधाओं की व्यवस्था , अतिक्रमण मुक्त फुटपाथ उनके कार्यकाल में ऐतिहासिक रूप से विकसित कर रिकॉर्ड कीर्तिमान बनाये ज़ाहिर है , जब कोई अच्छा करना चाहता है , खासकर वोह जिसे कुछ लोग, हरगिज़ पसंद नहीं करते तो अड़ंगेबाज , अड़ंगे लगाते है , अधिकारीयों के अड़ंगे होते है , लेकिन महापौर अनुसुईया की जो जीवन शैली , कार्यशैली है उससे स्पष्ट है के पहले वोह विनम्रता से समझाइश करेंगी , हाथ जोड़ेंगी , और फिर भी कोटा के विकास , सोंदर्यकरण ,कार्यों में कोई बाधा बना, तो फिर चाहे वोह जो भी हो , उससे वोह उनके गर्म मिजाज़ से निपटना भी जानती है और निपट भी लेंगी , इसलिए सावधान ,, महापौर के विकास सोंदर्यकरण विज़न में जो अड़ंगा लगाकर उन्हें असफल करने , खुद को उनसे बहतर साबित करने के प्रयास करने का विचार बना रहे हों, तो वोह पहले ही सावधान हो जाएँ , इधर नगर निगम में कांग्रेस के क्रॉस वोटर्स को क्या पुरस्कार मिलता है , राजस्व समिति , निर्माण समिति , अतिक्रमण समिति , नए कियोस्क वगेरा आवंटन समिति , पट्टा समिति , मेला समिति , गार्डन समिति , वगेरा वगेरा देखते हैं एक ब्रेक के बाद ,
नगर निगम कोटा के चुनाव पूरे हुए , श्रीमती अनुसूईया गोस्वामी महापौर , विवेक राजवंशी उप महापौर निर्वाचित हुए है ,, कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों की खरीद फरोख्त के साथ नगर निगम का यह खेल अभी और कहाँ तक किस तरह से चलेगा पता नहीं ,, लेकिन वरिष्ठ पार्षद भाई नाचते गाते ,, पूर्व मंत्री शांति कुमार धारीवाल के जुमले कोटा नरक निगम हो गया है , उसे दोहराते हुए कहते के शांति कुमार धारीवाल कोटा नगर निगम को नरक निगम कहते है , लेकिन अब महापौर , उप महापौर की जोड़ी , कोटा को स्वर्ग निगम बनाएंगे , काश ऐसा हो जाए , काश , कोटा नगर निगम पर अव्यवस्थाओ , भ्रष्टाचार , भाई भतीजावाद , रिमोट से संचालित होने का दाग मिट जाए , काश ऐसा हो जाए ,, कोटा नगर निगम के चुनाव किस तरह से हुए , पार्टियों ने किस तरह से चुनाव लड़ा , कोटा का बच्चा बच्चा जानता है , एक तरफ कोटा भाजपा के सभी टिकिट एकल नेतृत्व के पास थे , भाजपा चुनाव रणनीति में अनुशासन था , व्यवस्थाएं थीं , सरकारी अधिकारीयों की खुली मदद थी , जबकि कांग्रेस टुकड़े टुकड़े थी , कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याक्षी को अलग थलग कर दिया गया था , इलाक़े कोटा उत्तर , कोटा दक्षिण ,, लाडपुरा में बांटकर बटवारा हो गया था , जिन्हे टिकिट दिया गया , उन्हें टिकिट देकर लावारिस की तरह छोड़ दिया गया था , वोह खुद अपने स्तर पर चुनाव लड़ रहे थे , कोटा कांग्रेस जिला अध्यक्ष , जिला अध्यक्ष होने के नाते कई वार्डों में गईं ,, शांति धारीवाल भी कुछ वार्डों में गए , प्रह्लाद गुजंल ऑन डिमांड होने से इलाक़े के ठेकेदार बने टिकिट देने वालों की सहमति से गए ,, कई जगह पर कांग्रेस की रसमलाई खाने वाले कुछ लोग , पंजे की जगह कमल पर वोट देने के समर्थन में भी जा रहे थे , ऐसी अफवाहे भी चलीं ,, इन सब गुटबाजियों के बावजूद भी कांग्रेस , भाजपा के खिलाफ आम जनता की नाराज़गी ,, भाजपा की नीतियों के खिलाफ आम जनता के गुस्से की वजह से भाजपा धन ,बल , तोड़फोड़ के बावजूद भी सिर्फ 100 में से 59 पर सिमट कर रह गयी , और सभी अव्यवस्थाओं , सरकारी दबाव , मनमर्ज़ी , गुटबाज़ी , भीतरघातियों , गुटबाज़ी के बावजूद भी कांग्रेस 39 सीटों पर जीत गई , यह आंकड़ा आश्चर्यचकित करने वाला था , कांग्रेस को ऑक्सीजन देने वाला था , दो निर्दलीय कोंग्रेस समर्थक थे ,, तो भाजपा ने दो निर्दलीयों को भाजपा के साथ महापौर चुनाव पूर्व ही मिलाकर अपनी जीत का आंकड़ा 51 के मुक़ाबले 59 होने पर भी , 61 कर लिया , ,, भाजपा में दो शीर्ष पदों की अंदरूनी लड़ाई थी , महापौर उम्मीदवार का नाम चुनाव पूर्व ही घोषित सा था , लेकिन अचानक , महापौर और एक अन्य जिन्हे महापौर नहीं बनाया उनके वार्ड में ,, भाजपा के कुछ चाणक्य लोगों ने , अपने कांटे को हटाने की कोशिशों में शुरुआत की , बात लीक हुई , तो प्रत्याक्षी सजग और सतर्क हो गए , महापौर क्षेत्र के चुनाव में युवा साथियों , निजी वफादार मित्रो , रिश्तेदारों के हाथो में रहा , जो लोग महापौर को पार्षद में ही हराने की कोशिश करना चाहते थे , वोह प्रत्याक्षी की कवच के रूप में बनाई गई रणनीति के आगे विफल रहे , लेकिन बहुत चेहरे , बेनक़ाब हो गए , आखिर में जिसे अल्लाह रखे उसे कौन चखे वाली कहावत चरितार्थ हुई , और महापौर अपने वार्ड में उनकी कुशल इलेक्शन नीति से निर्वाचित हुई , बस पूर्व घोषित प्रत्याक्षी के नाम पर अड़ंगे लगे , तो ज़ाहिर है , क्रॉस वोटिंग का खौफ था , भाजपा ने कोई भी रिस्क नहीं ली , एक कुशल रणनीति के तहत , अपने पार्षदों को तो बाड़े बंदी में रखा, लेकिन कांग्रेस के पार्षद जो खुले छोड़ दिए गये थे , ओवर कॉन्फीडेंट अलग अलग गुट नेतृत्व में थे , उन पर डोरें डाली जाने लगी , धमकाया जाने लगा , बहुत कुछ हुआ , कॉग्रेस ओवर कॉन्फिडेंट रही , और नतीजा , स्पष्ट बहुमत के बाद भी , भाजपा ने कॉग्रेस के पांच पार्षद चोरी कर , कांग्रेस के इलेक्शन प्रबंधन के मुख पर कालिख पोत दी ,, एक सुचना के मुताबिक़ भाजपा के भी सभी पार्षदों में भाजपा के निर्देश पर वोट दिए हो गारंटी नहीं , इसलिए कांग्रेस के कितने पार्षद टूटे स्पष्ट नहीं है , इधर कोटा दक्षिण की महापोर , तो कोटा उत्तर का उप महापौर होना चाहिए , , वेचारिक सैद्धांतिक विवाद छिड़ गया , भाजपा को इस मुद्दे पर सावधानी बरतना थी , भाजपा का उत्तर दक्षिण विधानसभा नेतृत्व संतुलन वोटिंग में था , लेकिन विवेक राजवंशी के अनुभव के आगे भाजपा ने घुटने टेके , उत्तर दक्षिण संतुलन फार्मूले को धता बताई , क्योंकि अब भाजपा के सामने कोई उम्मीदवार ही नहीं था , जबकि उप महापौर के एक दिन पहले की रात भाजपा के लिए संकट की रात होती जा रही थी , अंदर खूब बगावत , रूसा रासी थी , दावेदार तो बाड़ेबंदी से आउट ही हो गए , और खुला मैदान होने से भाजपा ने विवेक राजवंशी का आवेदन करवा दिया , निर्विरोध निर्वाचन हो गया , कोटा ने देखा है , के कोटा महापोर पद पर श्रीमती अनुसुइया के निर्वाचन पर इतनी खुशियां नहीं बनाई गईं ,,, जितनी खुशिया , विवेक राजवंशी के निर्विरोध निर्वाचन पर पार्षदों ने बनाई , इधर अनुसईया महापौर की सादगी ,, ईश्वरीय आस्था के चलते जो उन्होंने कार्य किया , उसे दुष्प्रचारित कर विवादित करने का प्रयास किया ,, खेर कांग्रेस जीती हुई बाज़ी हारी , भाजपा हारी हुई बाज़ी जीती ओर वोह भी , बहुमत के आंकड़े से बहुत अधिक होने पर भी कांग्रेस के वोटों की ऐतिहासिक बढ़ोतरी के साथ , ऐतिहासिक बढ़ोतरी इसलिए के कांग्रेस के इतनी ही संख्या के पार्षदों ने कमोबेश दूसरी बार भाजपा के प्रत्याक्षी के पक्ष में नगर निगम में वोटिंग की है , इसके पहले , जब प्रह्लाद गुंजल ने उप महापौर पद पर , ब्रजेश शर्मा नीटू का फार्म भरवाकर , उप महापौर चुनाव भाजपा वर्सेज़ भाजपा कर दिया था , तब , प्रह्लाद गुंजल चाहते थे , के कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद भाजपा के पक्ष में वोटिंग नहीं कर , निर्दलीय के पक्ष में वोटिंग करें , लेकिन कांग्रेस के निर्वाचितों ने ना जाने किस मन से ,, भाजपा के प्रत्याक्षी को वोट दिया , खेर जो होना था हुआ , पहले भी जिला परिषद के चुनाव में नईमुद्दीन गुड्डू के टाइम पर कांग्रेस के निर्वाचित जिला परिषद सदस्यों ने क्रॉस वोटिंग कर भाजपा के पक्ष में मतदान कर कांग्रेस की जीती हुई बाज़ी शर्मनाक हार में बदल दी थी , यह तो सिस्सट की बात हुई ,, लेकिन महापौर अनुसुइया गोसवामी समझदार है , कुशल नेतृत्व है , बोल्ड है , ,, नाकारा और गुमराह करने वाले अधिकारीयों की चालबाजियां समझकर उन्हें सुधारने की क्षमतावान है , कोटा की नब्ज़ से वाक़िफ़ है , कोटा में अतिक्रमण , साफ़ सफाई , नाली , पटान , टूटफूट , पट्टे मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया से खूब वक़्फ़ियत होने से , बेहतर काम करने का मास्टर प्लान बना चुकी है , और वोह अपने अनुभव के आधार पर , अब तक के महापौरों में से खुद को सबसे बहतर , कुशल प्रबंधक , हर वर्ग , हर समाज , हर वार्ड की समस्याओं के समाधान करते हुए ,, अपनी अलग पहचान बनाने की कार्ययोजना को सम्पादित करने की व्यवस्था जुटा रही है , लेकिन कुछ लोग है , जो होते है , वोह हो सकता है , अड़ंगेबाजी लगाएंगे , आंतरिक चालबाजियां चलेंगे , पॉवरबाज़ी की जंग में मामलों को उलझाने की कोशिश कर सकते है , तो सभी जानते है के अनुसुइया जितनी विनम्र है , उनके सकारात्मक कार्य , कोटा शहर को सुंदर , साफ सुथरा बनाने की कार्ययोजना में अड़ंगा अगर कोई लगाएगा तो फिर ऐसे अड़ंगेबाज़ों को , विनम्र सी दिखने वाली , विनम्रता से हाथ जोड़ने वाली बहन अनुसुइया कोटा के विकास कार्यों के हक़ समर्थन में , गर्म भी हो जाएँगी , और ऐसे लोगों को सबक़ भी सिखाएंगी , खेर कांग्रेस में फिर से एक जंग प्रतिपक्ष के नेता की छिड़ गई है , और जब जंग छिड़ती है , तो कांग्रेस के लोग जब क्रॉसवोटिंग कर सकते है , अभी तक उन पर , निर्दलीयों पर ,कांग्रेस प्रत्याक्षियों को डंके की चोट पर चुनाव हराने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं कर पाती है तो फिर नेता प्रतिपक्ष तो यह कांग्रेस तुरंत किये हुए इस निर्णय को , हफ्तों , महीनों , सालों तक अटका कर भाजपा नगर निगम बोर्ड को , नेता प्रतिपक्ष के बगैर वाकओवर भी काफी टाइम तक दे ही सकती है , खेर अनुसुइया तो कमसे कम उनके वार्ड के वोटर्स , उनके उन्हें इस मुक़ाम तक पहुंचाने वाले लीडर्स की कसौटी पर तो खरी उतरेंगी , लेकिन अनुभव अनुभव के नाम पर वरिष्ठ कहो , या अनुभवी कहो , उनके जुमलों से उनके कान उन्हें ज़रूर क्रोधित करने पर मजबूर कर सकते हैं , ,, कोटा में कांग्रेस के टिकिट पर जीतकर भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले कोंग्रेसी पार्षद , और अपने अपने वार्डों में निर्वाचित पार्षद के वोटर्स के लिए यह अल्फ़ाज़ कभी तो सही साबित होंगे ,, और वोटर्स हों , चाहे क्रॉस वोटर्स पार्षद हों , कभी तो सच इन्ही अल्फ़ाज़ों में समझेंगे ,, ,निगम से पीड़ित हम वोटर्स की तकलीफ भी देखा करो ,,साहिब ऐ कोटा कभी फुटपाथ , अतिक्रमण भी देखा करो , वोट लेकर खानदानी आदमी धोखा नहीं देता कभी , वोटरों , वोट देते वक़्त , तुम जिसे वोट दे रहे हो उसकी औक़ात भी देखा करो , ,, ,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

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