बुरा हरगिज़ मत मानना , गुस्से भी मत होना, बस नगर निगम कोटा उप चुनाव में मारपीट, मोबाइल छीना झपटी के शिकार पत्रकार, एफ आई आर कराने वाले पीड़ित पत्रकार, उनके समर्थन में धरना देने वाले मेरे भाई पत्रकार जन, ओर कोटा के एक दर्जन पत्रकार संगठनों के पदाधिकारीगण ज़रा अपने धड़कते दिल से पूंछना , इतनी बढ़ी घटना , पत्रकार की पिटाई , एफ आई आर, विधायक का आश्वासन ओर फ़ाइल ठंडे बस्ते में , पीड़ित पत्रकारों, उनके समर्थकों, पत्रकार संगठनों की चुप्पी , वोह भी तब, जब मुख्यमंत्री राजस्थान भजन लाल खुद कोटा चल कर आये, पत्रकारों से रूबरू हुए, लेकिन किसी बहादुर जर्नलिस्ट ने पत्रकार पिटाई, ठंडे बस्ते में फ़ाइल के बारे में सवाल तक नहीं किया, ज्ञापन तो दूर की बात है, ओर पत्रकारों की समस्याएँ, प्लॉट, आवासीय योजना , आर जी एच एस डाउन लोड होने में परेशानी, पत्रकार पेंशन बढोत्तरी , पेबशन सरलीकरण, छोटे मंझोले समाचार पत्रों की वियापन गारंटी, पत्रकार भृमण योजना, वगेरा किसी मामले में सवाल तक नहीं किया, रखो अपने धड़कते दिल पर हाथ और बताओ, लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ क्या इतना कमजोर है, अरे तुम 1500 हो 2000 हो , 5000 हो 15000 हो या अकेले हो, संघर्ष तो करो, आवाज़ तो उठाओ, फिर कोंन भरोसा करेगा, जो खुद की पिटाई, प्रताड़ना पर चुप है, वोह आम लोगों के इंसाफ के लिए क्या निष्पक्ष करेंगे, फिर क्या फायदा लेटर पेड़ का , 4 , 4 पेज के ज्ञापन टाइपिंग का किसी के 2, 3, घण्टे खराब कर सलाह मशवरे का, अख़्तर

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