9 नेत्रदान,11 जागरूकता कार्यशाला,और लाखों को जागरुक कर संपन्न हुआ नेत्रदान पखवाड़ा
2. प्रदेश में 18530 लोगों की आँखों से हमेशा के लिए अंधियारा दूर हुआ ।
शाइन इंडिया फाउंडेशन का नेत्रदान पखवाड़ा बना सेवा, संकल्प और जन-जागरूकता का अभियान
कोटा। “मृत्यु के बाद भी किसी की दुनिया रोशन हो सकती है”—इस विचार को जन-जन तक पहुँचाने के संकल्प के साथ शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित नेत्रदान पखवाड़ा, सेवा और जागरूकता की नई मिसाल कायम करते हुए संपन्न हुआ। पखवाड़े के दौरान, नेत्रदानी नगरी कोटा में,संस्था के प्रयासों से 9 दिवंगतों का नेत्रदान संपन्न हुआ, वहीं 11 जागरूकता कार्यशालाओं के माध्यम से लाखों लोगों तक नेत्रदान का संदेश पहुँचाया गया।
पखवाड़े के दौरान कोटा संभाग सहित आसपास के क्षेत्रों में संस्था के कार्यकर्ताओं और ज्योति मित्रों ने लगातार जनसंपर्क अभियान चलाया। स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संस्थाओं, विभिन्न संगठनों और आम नागरिकों के बीच आयोजित कार्यशालाओं में लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया, मृत्यु के बाद निर्धारित समय में नेत्रदान के महत्व और इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों के बारे में जानकारी दी गई।
सिर्फ पखवाड़ा नहीं, 15 साल से जारी है रोशनी का महा-अभियान
आई बैंक सोसाइटी ऑफ़ राजस्थान जयपुर से अधिकृत,शाइन इंडिया फाउंडेशन के लिए नेत्रदान कोई मौसमी अभियान नहीं, बल्कि पिछले लगभग 15 वर्षों से निरंतर चल रही सेवा यात्रा है। संस्था ने कोटा और आसपास के लगभग 200 किलोमीटर क्षेत्र में नेत्रदान, अंगदान और देहदान के लिए लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ जरूरत के समय दिवंगत परिवारों तक पहुँचकर नेत्रदान की प्रक्रिया में सहयोग किया है। और कोटा को नेत्रदानी नगरी बनाया है ।
संस्था के प्रयासों से अब तक,वर्ष 2011 से 1650 से अधिक दिवंगतों के नेत्रदान संपन्न करवाए जा चुके हैं तथा 2200 से अधिक लोगों के जीवन में दृष्टि लौटने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसके अलावा संस्था द्वारा 60 से अधिक देहदान भी करवाए जा चुके हैं। प्रदेश स्तर पर आई बैंक सोसायटी द्वारा 28406 कॉर्निया पूरे प्रदेश से प्राप्त हुआ, जिनसे 18530 लोगों की,आँखों का अंधियारा पूरी तरह दूर हुआ है ।
मृत्यु की सूचना से लेकर नेत्रदान तक—हर कदम पर साथ
संस्था की विशेष कार्यप्रणाली यह है कि नेत्रदान को केवल संकल्प पत्र भरने तक सीमित नहीं रखा जाता। किसी परिवार में मृत्यु होने पर संस्था के स्वयंसेवक परिवार से संपर्क कर उन्हें संवेदनशीलता के साथ नेत्रदान की जानकारी देते हैं और संबंधित चिकित्सा टीम तक समन्वय स्थापित करने में सहयोग करते हैं।
यही कारण है कि,शाइन इंडिया फाउंडेशन ने वर्षों में ज्योति मित्रों और स्वयंसेवकों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है, जो समाज में नेत्रदान के संदेश को घर-घर तक ले जाने का कार्य कर रहा है।
डॉ. कुलवंत गौड़ ने कहा,कि “हम चाहते हैं कि नेत्रदान किसी पखवाड़े की गतिविधि न रहकर हर परिवार की सामाजिक जिम्मेदारी बने। जिस व्यक्ति ने जीवनभर दुनिया को देखा, उसकी आँखें मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद की दुनिया देख सकती हैं। इससे बड़ी मानव सेवा शायद ही कोई हो।”
नेत्रदान पखवाड़े के समापन पर शाइन इंडिया फाउंडेशन ने सभी नेत्रदानी परिवारों, ज्योति मित्रों, स्वयंसेवकों, चिकित्सा टीमों, सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और अभियान से जुड़े प्रत्येक सहयोगी का आभार व्यक्त किया।
संस्था ने संकल्प लिया कि,आने वाले समय में नेत्रदान के संदेश को और व्यापक स्तर पर पहुँचाया जाएगा, ताकि कॉर्निया की अंधता के कारण अंधकार में जी रहे लोगों तक रोशनी पहुँचाने के लिए अधिक से अधिक परिवार मृत्यु के बाद नेत्रदान का निर्णय लें।
2. प्रदेश में 18530 लोगों की आँखों से हमेशा के लिए अंधियारा दूर हुआ ।
शाइन इंडिया फाउंडेशन का नेत्रदान पखवाड़ा बना सेवा, संकल्प और जन-जागरूकता का अभियान
कोटा। “मृत्यु के बाद भी किसी की दुनिया रोशन हो सकती है”—इस विचार को जन-जन तक पहुँचाने के संकल्प के साथ शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा आयोजित नेत्रदान पखवाड़ा, सेवा और जागरूकता की नई मिसाल कायम करते हुए संपन्न हुआ। पखवाड़े के दौरान, नेत्रदानी नगरी कोटा में,संस्था के प्रयासों से 9 दिवंगतों का नेत्रदान संपन्न हुआ, वहीं 11 जागरूकता कार्यशालाओं के माध्यम से लाखों लोगों तक नेत्रदान का संदेश पहुँचाया गया।
पखवाड़े के दौरान कोटा संभाग सहित आसपास के क्षेत्रों में संस्था के कार्यकर्ताओं और ज्योति मित्रों ने लगातार जनसंपर्क अभियान चलाया। स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संस्थाओं, विभिन्न संगठनों और आम नागरिकों के बीच आयोजित कार्यशालाओं में लोगों को नेत्रदान की प्रक्रिया, मृत्यु के बाद निर्धारित समय में नेत्रदान के महत्व और इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों के बारे में जानकारी दी गई।
सिर्फ पखवाड़ा नहीं, 15 साल से जारी है रोशनी का महा-अभियान
आई बैंक सोसाइटी ऑफ़ राजस्थान जयपुर से अधिकृत,शाइन इंडिया फाउंडेशन के लिए नेत्रदान कोई मौसमी अभियान नहीं, बल्कि पिछले लगभग 15 वर्षों से निरंतर चल रही सेवा यात्रा है। संस्था ने कोटा और आसपास के लगभग 200 किलोमीटर क्षेत्र में नेत्रदान, अंगदान और देहदान के लिए लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ जरूरत के समय दिवंगत परिवारों तक पहुँचकर नेत्रदान की प्रक्रिया में सहयोग किया है। और कोटा को नेत्रदानी नगरी बनाया है ।
संस्था के प्रयासों से अब तक,वर्ष 2011 से 1650 से अधिक दिवंगतों के नेत्रदान संपन्न करवाए जा चुके हैं तथा 2200 से अधिक लोगों के जीवन में दृष्टि लौटने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इसके अलावा संस्था द्वारा 60 से अधिक देहदान भी करवाए जा चुके हैं। प्रदेश स्तर पर आई बैंक सोसायटी द्वारा 28406 कॉर्निया पूरे प्रदेश से प्राप्त हुआ, जिनसे 18530 लोगों की,आँखों का अंधियारा पूरी तरह दूर हुआ है ।
मृत्यु की सूचना से लेकर नेत्रदान तक—हर कदम पर साथ
संस्था की विशेष कार्यप्रणाली यह है कि नेत्रदान को केवल संकल्प पत्र भरने तक सीमित नहीं रखा जाता। किसी परिवार में मृत्यु होने पर संस्था के स्वयंसेवक परिवार से संपर्क कर उन्हें संवेदनशीलता के साथ नेत्रदान की जानकारी देते हैं और संबंधित चिकित्सा टीम तक समन्वय स्थापित करने में सहयोग करते हैं।
यही कारण है कि,शाइन इंडिया फाउंडेशन ने वर्षों में ज्योति मित्रों और स्वयंसेवकों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया है, जो समाज में नेत्रदान के संदेश को घर-घर तक ले जाने का कार्य कर रहा है।
डॉ. कुलवंत गौड़ ने कहा,कि “हम चाहते हैं कि नेत्रदान किसी पखवाड़े की गतिविधि न रहकर हर परिवार की सामाजिक जिम्मेदारी बने। जिस व्यक्ति ने जीवनभर दुनिया को देखा, उसकी आँखें मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद की दुनिया देख सकती हैं। इससे बड़ी मानव सेवा शायद ही कोई हो।”
नेत्रदान पखवाड़े के समापन पर शाइन इंडिया फाउंडेशन ने सभी नेत्रदानी परिवारों, ज्योति मित्रों, स्वयंसेवकों, चिकित्सा टीमों, सामाजिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और अभियान से जुड़े प्रत्येक सहयोगी का आभार व्यक्त किया।
संस्था ने संकल्प लिया कि,आने वाले समय में नेत्रदान के संदेश को और व्यापक स्तर पर पहुँचाया जाएगा, ताकि कॉर्निया की अंधता के कारण अंधकार में जी रहे लोगों तक रोशनी पहुँचाने के लिए अधिक से अधिक परिवार मृत्यु के बाद नेत्रदान का निर्णय लें।

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