किसानों की एक बार फिर हुई घोर उपेक्षा पर किसानों मे भारी रोष...
संसद के मानसून सत्र मे किसानों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होना घोर निंदनीय : मनोज दुबे
के डी अब्बासी
कोटा 13 अगस्त। भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज दुबे ने संसद के मानसून सत्र मे किसानों की एक बार फिर से हुई घोर उपेक्षा पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा की संसद के मानसून सत्र मे किसानों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होना घोर निंदनीय एवं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
मनोज दुबे ने कहा की संसद का मानसून सत्र 19 दिन चला। मानसून सत्र मे भाजपा सरकार के बिना चर्चा के ही 12 विधेयक पास हो गए,लेकिन इस बार भी मानसून सत्र मे किसानों की पूरी तरह से अनदेखी की गई। किसानों को एमएसपी की क़ानूनी गारंटी देने, किसानों की सम्पूर्ण कर्ज माफ़ी करने,खाद की भारी किल्लत, नकली खाद,बीज,ओर पेस्टिसाइड पर पूर्ण रूप से रोक लगाने ओर किसानों के खिलाफ भारत-अमेरिका ट्रेड डील सहित किसानों की किसी भी समस्या पर चर्चा नहीं हुई।देश का किसान निराश, हताश ओर परेशान है,लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार मूकदर्शक बनी बैठी किसानों की बर्बादी का तमाशा देख रही है।
मनोज दुबे ने कहा की लोकतंत्र में संसद संवाद, चर्चा और जवाबदेही का सर्वोच्च मंच है।जब संसद का सत्र शुरू होता है, तो देश के करोड़ों किसानो ,छात्रों, बेरोजगार युवाओं ओर आम जनता को बहुत उम्मीदें होती हैं कि सदन मे किसानों, बेरोजगारों, छात्रों, युवाओं एवं आमजन के महत्वपूर्ण मुद्दों को सदन में उठाया जाएगा, लेकिन पूरा मानसून सत्र भाजपा सरकार के अहंकार ओर हंगामे की भेंट चढ़ गया,टैक्स पेयर्स के करोड़ों रुपये फूंक दिए गए।
मनोज दुबे ने कहा की केंद्र मे भाजपा की किसान विरोधी सरकार ने मानसून सत्र मे भी किसानों से घोर छलावा किया है।ये मानसून सत्र संसदीय इतिहास का सबसे काला सत्र होगा,जिसमे किसानों, बेरोजगारों, छात्रों, युवाओं एवं आमजन की समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ।
मनोज दुबे ने कहा की किसानों ओर आम जनता के हितों की अनदेखी, छात्रों,युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय और करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े सवालों पर सरकार की चुप्पी स्वीकार्य नहीं हो सकती है। लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। सदन के भीतर किसानों एवं आम जनता की समस्याओं का कोई भी समाधान नहीं हुआ, लेकिन सदन के बाहर किसानों एवं आमजन के जनहित के मुद्दे को मजबूती से उठाते हुए केंद्र की भाजपा सरकार का पुरजोर विरोध करेंगे।

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