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01 जुलाई 2026

तीन पीढ़ियों से कायम है विधि साधना की परंपरा: न्यायिक दृष्टांतों के दम पर मुकदमों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र गुप्ता वरिष्ठ एडवोकेट अख्तर खान अकेला की कलम से

 

तीन पीढ़ियों से कायम है विधि साधना की परंपरा: न्यायिक दृष्टांतों के दम पर मुकदमों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र गुप्ता
वरिष्ठ एडवोकेट अख्तर खान अकेला की कलम से
कोटा।
वकालत केवल डिग्री हासिल कर लेने का नाम नहीं, बल्कि कानून की गहरी समझ, न्यायिक दृष्टांतों का अध्ययन, तार्किक बहस और अपने मुवक्किल के पक्ष को पूरी तैयारी के साथ न्यायालय के समक्ष रखने की कठिन साधना है। यही सिद्धांत कोटा के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र गुप्ता पिछले कई दशकों से निभाते आ रहे हैं।
यह परंपरा उन्हें अपने पिता, दिवंगत वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्ण गोपाल गुप्ता से विरासत में मिली है। कृष्ण गोपाल गुप्ता अपनी सादगी, मृदुभाषिता और विधि के गहन ज्ञान के लिए प्रसिद्ध थे। वे राजस्थान बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्य भी रहे तथा चुनाव याचिकाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण मामलों में उनकी विशेष पहचान थी। कांग्रेस हो या भाजपा, चुनावी दौर में उनकी कानूनी सलाह को विशेष महत्व दिया जाता था।
कृष्ण गोपाल गुप्ता का स्पष्ट सिद्धांत था कि न्यायालय में केवल केस की फाइल ही नहीं, बल्कि उससे संबंधित न्यायिक दृष्टांतों (जजमेंट्स) की पुस्तकें भी साथ जानी चाहिए। उस समय हाथ से लिखी नकलों का दौर था, बाद में फोटोकॉपी का युग आया और अब इंटरनेट व ई-लाइब्रेरी का समय है, लेकिन उनकी यह कार्यशैली कभी नहीं बदली।
आज भी वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र गुप्ता इसी अनुशासन का पालन करते हैं। प्रतिदिन उनके कार्यालय से संबंधित मामलों की फाइलों के साथ न्यायिक दृष्टांतों से भरे कई बस्ते ऑटो के माध्यम से न्यायालय पहुंचाए जाते हैं। बहस के दौरान आवश्यक होने पर संबंधित विधि पुस्तकों और निर्णयों का हवाला देकर अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। यह कार्य उनके सहयोगी मुंशी मांगीलाल की नियमित एवं व्यवस्थित मेहनत से संभव हो पाता है।
विशेष बात यह है कि गुप्ता परिवार की तीसरी पीढ़ी भी अब वकालत के क्षेत्र में सक्रिय है और कानून की पुस्तकों के अध्ययन तथा न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर बहस करने की यह परंपरा आज भी पूरी निष्ठा के साथ जारी है।
ऐसे समय में, जब कई युवा अधिवक्ता केवल डिजिटल संसाधनों या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं, वरिष्ठ अधिवक्ता नरेंद्र गुप्ता की कार्यशैली यह संदेश देती है कि कानून की गहराई, पुस्तकों का अध्ययन और न्यायिक दृष्टांतों की ठोस तैयारी ही प्रभावी एवं सफल वकालत की वास्तविक पहचान है।
कोटा न्यायालय परिसर में गुप्ता परिवार की यह अनुशासित विधि साधना आज भी युवा अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणा और अनुकरण का विषय बनी हुई है।
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