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04 अप्रैल 2026

अंगदान के जागरूकता प्रयासों से बचाए जा सकते हैं कई अनमोल जीवन - डॉ गौड़

 अंगदान के जागरूकता प्रयासों से बचाए जा सकते हैं कई अनमोल जीवन - डॉ गौड़
2. शाइन इंडिया के नेत्रदान अंगदान के नवाचारों को मिली राष्ट्रीय पहचान

आईआईएम इंस्टीट्यूट अहमदाबाद में आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अंगदान महादान विषय पर विशेष आयोजित कॉन्फ्रेंस (एम्प्लीफाइंग वॉयसेस) का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ।

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों से आए ट्रांसप्लांट सर्जन, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए तथा भविष्य की रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

कॉन्फ्रेंस में राजस्थान का प्रतिनिधित्व शाइन इंडिया फाउंडेशन,कोटा के संस्थापक डॉ कुलवंत गौड़ ने किया। उन्होंने नेत्रदान,अंगदान एवं देहदान के क्षेत्र में अपनाए गए नवाचारों को  प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर,सभी प्रतिभागियों का ध्यान इस और आकर्षित किया कि,दान दाता परिवार के सदस्यों को राज्य या केंद्र सरकार व निजी संस्थानो के सम्मिलित प्रयासों से कुछ विशेषाधिकार या चिकित्सा,शिक्षा, रोजगार में प्राथमिकता मिले तो,यह दानदाता के प्रति यह सबसे बड़ा सम्मान व उसके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।  

संस्था की ओर से नेत्रदान,देहदान के बाद घरों पर लगाए जाने वाली गौरव पट्टीका, बच्चों को खेल-खेल में नेत्रदान,अंगदान देहदान सिखाए जाने वाला सांप सीढ़ी का खेल, वैवाहिक समारोह में दूल्हे दुल्हन का अंगदान संकल्प, अंगदानी परिवारों का प्रशासन के द्वारा रजत पत्र देकर सम्मान,निजी बसों में अंगदानी परिवारों के लिए नि:शुल्क यात्रा जैसे सराहनीय, प्रेरणादायी प्रयासों ने पूरे भारत में एक अलग पहचान बनाई है ।

उनकी प्रस्तुति को उपस्थित विशेषज्ञों ने विशेष सराहना दी और इसे “जन-सेवा से जुड़ा हुआ एक सशक्त एवं व्यवहारिक मॉडल” बताया। उल्लेखनीय है कि,राजस्थान सरकार द्वारा संस्था को दो बार राज्य-स्तरीय सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है, जो इसकी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

सम्मेलन के समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों ने सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने, प्रतीक्षा-सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा जागरूकता अभियानों को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया।

इस अवसर पर डॉ. गौड़ ने अपने प्रेरक विचार रखते हुए कहा— “अब समय केवल प्रेरणा तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि उसे व्यवस्थित प्रोटोकॉल में बदलने का है, ताकि हर शपथ एक नए जीवन का आधार बन सके। यह सम्मेलन अंगदान के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग, नवाचार और जन-जागरूकता को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।

दो दिवसीय इस कांफ्रेंस में, दुबई श्रीलंका बांग्लादेश मलेशिया नेपाल और लंदन से काफी प्रतिभागियों ने भाग लिया था ।

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