मेरे जनगीत संग्रह -"हम सब नीग्रो हैं " से एक गीत :
बगावत तो होगी
बगावत तो होगी !
बगावत तो होगी !!
लगातार छीना गया गर हकों को
हमेशा ही तोड़ा गया वायदों को
जबरदस्ती लादा गया कायदों को
हमारे भी दिल कोई पत्थर नहीं हैं
दिलों में थोड़ी तिलमिलाहट तो होगी
बगावत तो होगी
बगावत तो होगी
ये दौलत के बन्दे जमीनों के मालिक
समझते हैं खुद को जो दुनिया का हाकिम
बनाते हैं कानून बर्बर होआदिम
उन्हें ये खुली चिट्ठियां हैं हमारी
रुलाया गया गर यूंही हर ख़ुशी को
सताया गया बेवज़ह आदमी को
अमानत में उनकी ख़यानत तो होगी
बगावत तो होगी
बगावत तो होगी
ये अंधे उसूलों रिवाजों की दुनिया
ये ऐटम ,मिसाइल , मिराजों की दुनिया
सुने खोल कर अपने कानों को सुन ले
डुबोया गया गर यूं ही कश्तियों को
जलाया गया बेवज़ह बस्तियों को
तो बारूद की जगमगाहट तो होगी
बगावत तो होगी
बगावत तो होगी !
# महेंद्र नेह

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