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14 अप्रैल 2026

उन पर सोने की एक रिक़ाबियों और प्यालियों का दौर चलेगा और वहाँ जिस चीज़ को जी चाहे और जिससे आँखें लज़्ज़त उठाएं (सब मौजूद हैं) और तुम उसमें हमेशा रहोगे

 उन पर सोने की एक रिक़ाबियों और प्यालियों का दौर चलेगा और वहाँ जिस चीज़ को जी चाहे और जिससे आँखें लज़्ज़त उठाएं (सब मौजूद हैं) और तुम उसमें हमेशा रहोगे (71)
और ये जन्नत जिसके तुम वारिस (हिस्सेदार) कर दिये गये हो तुम्हारी क़ारगुज़ारियों का सिला है (72)
वहाँ तुम्हारे वास्ते बहुत से मेवे हैं जिनको तुम खाओगे (73)
(गुनाहगार कुफ़्फ़ार) तो यक़ीकन जहन्नुम के अज़ाब में हमेशा रहेगें (74)
जो उनसे कभी नाग़ा न किया जाएगा और वह इसी अज़ाब में नाउम्मीद होकर रहेंगें (75)
और हमने उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया बल्कि वह लोग ख़ुद अपने ऊपर ज़ुल्म कर रहे हैं (76)
और (जहन्नुमी) पुकारेगें कि ऐ मालिक (दरोग़ा ए जहन्नुम कोई तरकीब करो) तुम्हारा परवरदिगार हमें मौत ही दे दे वह जवाब देगा कि तुमको इसी हाल में रहना है (77)
(ऐ कुफ़्फ़ार मक्का) हम तो तुम्हारे पास हक़ लेकर आयें हैं तुम मे से बहुत से हक़ (बात से चिढ़ते) हैं (78)
क्या उन लोगों ने कोई बात ठान ली है हमने भी (कुछ ठान लिया है) (79)
क्या ये लोग कुछ समझते हैं कि हम उनके भेद और उनकी सरग़ोशियों को नहीं सुनते हाँ (ज़रूर सुनते हैं) और हमारे फ़रिश्ते उनके पास हैं और उनकी सब बातें लिखते जाते हैं (80)

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