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01 अप्रैल 2026

अब छोटे शहरों के परिवारों में परंपरा बन रहा नेत्रदान

  अब छोटे शहरों के परिवारों में परंपरा बन रहा नेत्रदान
2. 80 किलोमीटर दूर, कोटा से आयी टीम ने लिया इंद्रगढ़ क्षेत्र का पांचवा नेत्रदान

शोक की घड़ी में, परिजनों द्वारा नेत्रदान का कार्य संपन्न कराने की पहल अब इंदरगढ़ क्षेत्र में भी परंपरा के रूप में दिखने लगी है ।

बूंदी जिले के इंदरगढ़ क्षेत्र में संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन और ईबीएसआर के बीबीजे चैप्टर द्वारा चलाए जा रहे नेत्रदान जागरुकता अभियान से क्षेत्र में आज पांचवा नेत्रदान आज संपन्न हुआ ।

वर्ष 2019 में, इंदरगढ़ निवासी महावीर प्रसाद जैन की पत्नी मंजू, और 2025 में इन्हीं के पोते मनन जैन का आकस्मिक निधन हुआ,जिसके उपरांत  परिजनों ने नेत्रदान का पुनीत कार्य संपन्न करवाया था ।

आज इसी परिवार की बड़े मुखिया महावीर प्रसाद जैन का भी हृदयघात से आकस्मिक निधन हो गया, उनके निधन के ठीक उपरांत बहनोई महावीर जैन ने तुरंत कोटा की संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन को दिवंगत महावीर प्रसाद जैन के नेत्रदान के लिए संपर्क किया ।

सूचना मिलते ही कोटा से डॉ कुलवंत गौड़ तुरंत ही नेत्र संकलन वाहिनी ज्योति रथ लेकर 80 किलोमीटर दूर इंदरगढ़ के लिए रवाना हो गए, दिवंगत के नेत्रदान हो सके,इसके लिए शोकाकुल परिवार के सदस्यों ने अंतिम संस्कार का समय भी थोड़ा देरी से कर दिया ।

तय समय पर डॉ गौड़ ने परिवार के सभी सदस्यों के बीच में नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया, प्रक्रिया के दौरान नेत्रदान से जुड़ी सावधानी और जरूरी बातों को भी विस्तार से बताया ।

डॉ गौड़ ने बताया कि,गर्मियों में प्राप्त होने वाले नेत्रदानों में कॉर्निया की गुणवत्ता ठीक बनी रहे उसके लिए ध्यान रहे की,दान दाता की आंखों को पूरी तरह बंद कर,उन पर गीला रुमाल रख दें ।
आंखों में जितनी नमी बनी रहेगी कॉर्निया की गुणवत्ता उतनी ही अच्छी रहेगी ।

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