आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

24 मार्च 2026

बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के चुनाव के लिये नामांकन प्रक्रिया शुरू, कोटा से हो सकते हैं चार प्रत्याक्षी, चुनाव 22 अप्रेल को,

 

बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के चुनाव के लिये नामांकन प्रक्रिया शुरू, कोटा से हो सकते हैं चार प्रत्याक्षी, चुनाव 22 अप्रेल को,
कोटा 24 मार्च, बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के चुनाव 22 अप्रेल को पूर्व निर्धारित हैं , ऐतिहासिक रूप से बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के यह चुनाव पांच वर्षों की अवधि निर्धारित होने के बावजूद भी यह चुनाव सात वर्षों में हो रहे हैं , ओर वोह भी सुप्रीमकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद , इतना ही नहीं इस बार एडवोकेट एक्ट , बार कौंसिल रूल्स जो विधायिका द्वारा बनाये जाते हैं , उस विधायिका में संशोधन किये बगैर , महिलाओं का तीस प्रतिशत आरक्षण भी इन चुनाव में संबंधित याचिका में स्वेच्छिक स्वीकृति के बाद अदालती आदेश से आरक्षित है , जबकि वकीलों की संख्या के अनुपात में 30 प्रतिशत महिला वकील नहीं है, पहली बार वकील समुदाय में लिंग के आधार पर बंटवारा हुआ है, ताज्जुब तो इस बात पर है ,. के महिला आरक्षण , दिव्यांग आरक्षण तो खेर पूर्व में ही विधायिका द्वारा पारित क़ानून में संशोधन किये बगैर ही तय हो गए हैं , लेकिन वकीलों के संरक्षण , कल्याण के लिए गठित इस कौंसिल से जुड़े लोग , सभी प्रयासों के बावजूद भी खुद वकीलों के विरुद्ध हिंसा होने पर उन्हें प्रोटेक्ट करने के लिए , एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं करवा पाए हैं , जबकि कांग्रेस सरकार में विधि मंत्री शांति कुमार धारीवाल ने इस मामले में अपना कार्य पूरा कर दिया था , ,ऐसा नहीं के संस्था में निर्वाचित लोग कमज़ोर हो , वोह अतिरिक्त महाधिवक्ता स्तर के भी हो जाते हैं ,, बार कौंसिल ऑफ़ इण्डिया से जुड़े सम्मानित साथी तो राज्य सभा में भी पहुंचे हैं और अब ऊपर वाले की कृपा रही तो मंत्री भी बनेंगे , कुछ तो क़ाबलियत के आधार पर माननीय हाईकोर्ट के जज भी नियुक्त कर दिए जाते हैं , उनका अपना प्रभाव , अपना दबाव , अपनी लोकप्रियता भी होती है , लेकिन पांच वर्षों की जगह सात वर्षों में चुनाव और एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को पारित हुए तीन वर्ष होने के बावजूद भी उसे लागू नहीं करवा पाना , समझ से बाहर है , राजस्थान बार कौंसिल सहित पुरे देश की कौंसिलर चुनाव में , नामांकन राशि दस हज़ार रूपये से बढ़ाकर सवा लाख रूपये और ,, नामांकन आवेदन शुल्क पांच हज़ार रूपये तो कर दिए गए हैं , लेकिन बार कौंसिल ऑफ़ राजस्थान के गठन के समय आज के वकीलों की संख्या की दस प्रतिशत से थोड़ी अधिक संख्या होने पर भी , पुरे राजस्थान में 25 सीटें निर्धारित थीं , आज वकीलों की संख्या कई गुना बढ़ोतरी होने , और बार कौंसिल से संबंद्ध बार एसोसियेशनों की संख्या में वृद्धि होने , अदालतों की संख्या में बढ़ोतरी होने , ज़िलों और संभागो में बढ़ोतरी होने के बावजूद भी , वकीलों की इस संस्था में प्रतिनिधित्व के नाम पर पच्चीस प्रतिनिधियों की संख्या में कोई वृद्धि नहीं की गई है ,जो की आज की खासी ज़रूरत भी है , ,खेर यह तो हुई बार कौंसिल स्ट्रक्चर की बात , अब राजस्थान के वकीलों की समस्या ,सदस्यों के विरुद्ध कंटेम्प्ट , प्रोसिडिंग , वकीलों के मान , सम्मान , हितों के संघर्ष की स्थिति खुद आंकलन करें , इस चुनाव में अधिकतम तो पुराने निर्वाचित सदस्य फिर अपना भाग्य आज़मा रहे हैं , महिलाओं के आरक्षण को देखते हुए , महिला प्रत्याक्षियों की संख्या में बेहिसाब बढ़ोतरी हो रही है , पन्द्रह साल और उससे बहुत कम अनुभव वाले वकील साथी भी खुलकर चुनाव मैदान में हैं , निर्वाचन में प्रियोरिटी वोटिंग और वोटो की गिनती की प्रक्रिया समझ से भी बाहर है , लेकिन निर्धारित नियम है तो है ,, ,नए प्रत्याक्षियों में घुंघरू तो कई सदस्य साथियों के बंधे हैं , जो लोग पुरे सात वर्षों में वकीलों के हक़ संघर्ष के साथ नहीं रहे , अगर उनकी मुक़ामी बार एसोसिएशन में कुछ गलत हुआ, तो गलत को गलत और सही को सही , खुलकर उन्होंने कहा ही नहीं , फिर भी स्थानीय बार एसोसिएशन के वोटर्स के बिहाफ पर वोह भी अपना अपना भाग्य आज़मा रहे हैं, प्रत्याक्षियों का चुनाव प्रचार चरम सीमा पर है , हर बार की तरह इस बार भी वोटर्स वकीलों को सब्ज़ बाग़ दिखाए जा रहे हैं , तीस साल की वकालत में पेंशन ,,नए अधिवक्ताओं के लिए स्टाई फंड , वकीलों के मान सम्मान के लिए संघर्ष के वायदे किये जा रहे हैं , कोटा , उदयपुर , बीकानेर सहित हर संभाग में हाईकोर्ट बेंच की डिमांड है , हड़ताल है , विरोधाभासी हड़ताल है ,एक तरफ तो कोटा , उदयपुर नियमित हर माह हायकोर्ट बेंच की मांग को लेकर हड़ताल पर रहती है , तो जोधपुर हाईकोर्ट जयपुर बेंच को ही अलग करने के खिलाफ हड़ताल करती है , तो फिर वकालत में अदालतों का विकेन्द्रीकरण कैसे सम्भव है , मज़ेदार बात यह है कि यूँ तो हर बार कौंसिल चुनाव में मुस्लिम प्रत्याक्षियों के लिए स्थिति बहुत कम्पीटिशन वाली होती है , वादविवाद वाली होती ,है , संख्या वृद्धि के साथ , एक दूसरे की टांग खींचने वाली होती है , क्योंकि वक़्फ़ क़ानून की कमी के चलते , राज्य वक़्फ़ बोर्ड में एक सदस्य बार कौंसिल का निर्वाचित सदस्य भी निर्वाचन प्रक्रिया में शामिल होकर सदस्य बनाया जाता है , इसका पृथक से वक़्फ़ क़ानून है , ऐसे में मुस्लिम बार कौंसिल सदस्य अगर निर्वाचित होता है , तो वोह वक़्फ़ बोर्ड में भी सदस्य बनता है , जो उसके अपने समाज में उसे बढ़ा सम्मानजनक प्रतिनिधित्त्व देता है , पूरे राज्य के हर ज़िले से उसे जोड़ता है ,, वक़्फ़ बोर्ड सदस्य के नाते उसे सर्किट हाउस सहित अन्य सुविधाएं भी मिलने लगती है , तो ऐसे में मुस्लिम प्रत्याक्षियों में मारा मारी रहती है , और इस बार तो वक़्फ़ बोर्ड में जो कमिया , गड़बड़िया , भ्रष्टाचार के मुद्दों पर वाद विवाद हुए , बार कौंसिल सदस्य वक़्फ़ बोर्ड सदस्य का एक्शन रहा उससे तो घोर नाराज़गी हो गई , और यह चुनाव वक़्फ़ से जुड़े लोगों ने भी अपने कंट्रोल में लेने के प्रयासों के तहत गेमचेंजर की तरह शुरुआत की है , खेर आगामी चुनाव में वोटों की संख्या , प्रत्याक्षियों की संख्या के बाद पच्चीस में से पांच महिलाओं के लिए आरक्षित दो महिलाओं के लिए सहवृत के बाद कुल अट्ठारह सीटें पुरुष प्रत्याक्षियों के लिए बचती हैं , उसमे से भी , कम अनुभव वाले प्रत्याक्षियों का आरक्षण पृथक से है , ,हज़ार पंद्रह सो प्रथम वरीयता वोट प्रत्याक्षियों के स्वर्णिम भविष्य को तय करने के लिए काफी है , लेकिन स्लीपर सेल जो कोर्ट से प्रेक्टिसिंग व्यवस्था का कोई वास्ता नहीं रखते है , लेकिन फिर भी वोटर तो हैं , वोह प्रेक्टिसिंग एडवोकेट सदस्यों से कहीं ज़्यादा , कहीं कम है , लेकिन बहुत बढ़ी संख्या में है , जो , प्रत्यक्षियों की परफॉर्मेंस को तो जानते भी नहीं , उन्हें कोई लेना देना भी नहीं , बस थोड़ा प्यार , थोड़ा सम्मान , और थोड़ा , मतलब बस हो गया वोट, ,, फिर वांटेड और अनवांटेड निर्वाचन में भगदड़ का माहौल होता है , खेर चुनाव में तो जो जीता वोह सिकंदर , लेकिन हाड़ोती में यानी कोटा संभाग में इस बार एक भी प्रत्याक्षी निर्वाचित होकर नहीं जाने से निराशा का माहौल रहा ,वैसे तो कोटा संभाग से खासकर कोटा से , बाहरी उम्मीदवारों को थोक में वोट जाते हैं , इस बार भी शायद ऐसा ही हो , लेकिन कोटा से भी , रघु गौतम , महेश शर्मा , श्याम बिहारी बैरागी ,, रमेश कुशवाह , ,बूंदी से चंद्र प्रकाश शर्मा फिलहाल उम्मीदवारी जता चुके है , हो सकता है कोई और झालावाड़ वगेराह से भी उम्मीदवार हो जाएँ , महिला उम्मीदवार भी हो जाए , अगर ऐसा होता है तो स्थानीय व्यक्ति को प्रथम वोट का अभियान चलाया जा सकता है , और कोटा से भी अगर पूर्व व्यवस्थित निति के तहत चुनाव प्रक्रिया में वोटिंग प्रबंधन हो तो शायद दो प्रत्याक्षी यहां से निर्वाचित हो सकते हैं , लेकिन कोटा को शिकायत है के प्रत्याक्षी तो हैं लेकिन के वकीलों के हक़ संघर्ष में , उनके मुद्दों पर मुखर होकर सही को सही और गलत को गलत कहने के वक़्त खामोशी निर्वाचन मामले में उन्हें फिसड्डी बना देती है , अपने मुंह मिया मिट्ठू बनना और निर्वाचन व्यवस्था में जुड़ना अलग बात है , लेकिन जो उम्मीदवार अगर डेढ़ सो वोट भी बाहर अलग ज़िलों से लेकर आया , तो वोह जीत की उम्मीद के रास्ते पर पहुंच सकता है , खेर परिणाम क्या होता है , यह तो वक़्त बताएगा , वायदे बढे बढे ,, चुनाव जीतने के बाद वायदों की वफ़ा की तरफ क्या क़दम बढ़ाये जाते हैं , वायदे पूरे भी होते हैं , या फिर हर बार की तरह मज़ाक़ बनते हैं , एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट, वकील कोटे के संवैधानिक अधिकार के बावजूद ऐ डी जे की आरक्षित सीटों पर वकीलों क आरक्षित कोटे पर खुले रूप से नौकरी में न्यायिक अधिकारीयों का आरक्षण , वगेरा वगेरा ,, वकीलों की लाइब्रेरी , वकीलों के अध्ययन , उनके मान सम्मान का संरक्षण , उनके अदालत परिसरों में बैठने की व्यवस्थाएं , ,पुलिस द्वारा प्रताड़ना , न्यायिक अधिकारीयों से टकराव के वक़्त कंटेप्ट का डर , अदालत परिसरों में वकीलों के लिए आवश्यक सुरक्षा , संरक्षण और कल्याणकारी व्यवस्थाओं के साथ , उन्हें प्रोटेक्ट करने के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट के लिए क्या कुछ होता है , सस्ते सुलभ न्याय व्यवस्था के चलते , हाईकोर्ट बेंच का विकेन्द्रीकरण होकर क्या कोटा वगेरा में ऐसी बेंचे खुलती है , या नहीं , कोटा तो वैसे भी रामगंजमंडी , सांगोद की ऐ डी जे कोर्ट के बाद आधा अधूरा सा होने लगा है , किराये की किलोमीटर दो किलोमीटर कोर्ट्स में कोटा के वकील चकर घिन्नी होते है, मोटर यान दुर्घटना कोर्ट में सीढ़ियां चढ़ने में बीमार हो जाते है, मिनी सचिवालय के नाम पर सरकार का ठेंगा है, जबकि किसान भवन के पास कोटा की नई अदालत की भ्रांतियां एक दशक से चल रही है, कोटा वर्तमान न्यायालय में करोड़ों की लागत से चल रहे लिफ्ट के निर्माण से नए कोर्ट परिसर के निर्माण में सन्देह पैदा भी पैदा होता है, खेर परिणाम देखते हैं एक ब्रेक के बाद ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...