तुम मुझे आधे-अधूरे क़ुबूल ही नहीं
तुम मुझे आधे-अधूरे क़ुबूल ही नहीं
तुम मेरे हो,
तो तुम्हारी ख़ुशी, दीवानगी, उदासी, बेज़ारी मेरी
तुम्हारा इश्क़, मुश्क, वस्ल मेरा
हिज्र भी मेरा
तुम्हें क़ुबूला है पूरा मैंने
तुम्हारे पहाड़, दरिया, दरख़्त
तुम्हारा माज़ी, ग़ज़ल
शेर, अधूरी दास्तां मेरी
तुम्हारे शौक़, सपने,
दर्द, हँसी
क़ामयाबी, नाकामी,
ज़िम्मेदारियाँ मेरी
तुम मुझे आधे-अधूरे क़ुबूल ही नहीं
मुमकिन है तुम्हारा दिल दुखाऊँ
जो मैं न समझूँ प्यार से
तो खुल के बताना
हक़ जताना
मेरी नादानियों संग
तुम भी मुझे
पूरा-का-पूरा अपनाना
तन्हाई की दरकार हो
तो बेझिझक़
दायरे में सिमट जाना
जब दिल करे
दायरे से निकल
मुझ में समा जाना
मुझे पूरा कर जाना
तुम भी पूरे हो जाना!
- Pallavi Garg

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