पहले उद्योग नगरी, फिर शिक्षा नगरी की तबाही के बाद कोटा पर्यटन उद्योग नगरी की तरफ बढ़ तो रही है, लेकिन अव्यवस्थित, कुप्रबंध के चलते गरीब वर्ग, छोटे व्यापारी, थड़ी, खोमचे वालों, ऑटो वालों के लिये बेरोज़गारी का संदेश भी है, कोटा हाड़ौती टूर ट्रेवल्स ऑपरेटर्स की यह कोटा मीट ,,, राजस्थान सरकार के भाजपा शासन के स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह जी खर्रा की कोटा की विकास योजनाओं को लेकर जो उनकी पूर्व में की गई बेहूदा टिप्पणियां है , उन्हें रिजेक्ट करने के लिए काफी हैं , जबकि कोटा के ही विकास पुरुष कहे जाने वाले शान्ति धारीवाल के विकास और सोंदर्यकरण कार्यों के लिए एक शाबाशी भी है ,, जी हाँ कोटा हाड़ौती से प्यार करने वालों , ,कोटा को , कोटा की विकास सोंदर्यकरण योजनाओं के प्रति कोटा के आकर्षण को नीचा दिखाने के लिए , भाजपा सरकार के स्वायत शासन मंत्री कभी सफेद हाथी , कभी भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर अपमानित करते रहे हैं , यह टूर ऑपरेटर्स की मीट ,, उन्हें झूंठा साबित करने के लिए काफी है ,, इधर कोटा और कोटा के पर्यटन स्थलों को , टूरिस्ट पैकेज टूर ऑपरेटर्स के ज़रिये देश भर में आकर्षित करने के लिए टूर ऑपरेटर मीट से , कोटा के छोटे व्यापारी , खोमचे वाले , ठेले वाले , चाट पकोड़ी वाले , छोटी सराये , होटलों, धर्मशाला वाले , ऑटो ,, ई रिक्शा सहित कई छोटे मंझले व्यापारियों , होटलों , भोजनालयों के लिए नुकसानदायक है , इन लोगों के रोज़गार को इसलिए भी खतरा है के होटल व्यवसाई खुद के व्यवसाय को बढ़ाने की दृष्टि से यह महंगी होटलें,, महंगे पास , महंगे व्यंजनों , व्यवस्थाओं के साथ कार्यक्रम करवा रहे हैं , ज़ाहिर है , टूर ऑपरेटर्स के टूर मेप में , यही लोग होंगे और पर्यटक आएंगे तो सही , लेकिन बढ़े होटल व्यवसाई ,, बढ़े रेस्टोरेंट , महंगी टेक्सी स्कीम ,, लक्ज़री बसों के लिए तो रोज़गारोनुमुखी है , यह पर्यटन स्थलों , सरकार के लिए कमाई का साधन हो सकता है , लेकिन कोटा शहर में छोटे मंझोले ,, गरीब रोज़मर्रा की कमाई करने वाले खोमचे वाले , ऑटो वाले , ई रिक्शा वाले , चाट , पकोड़ी वालों के लिए तो यह सब बेकार , बेमानी है , क्यूंकि टूर ऑपरेटर्स के रोज़गार मेप में यह लोग हैं ही नहीं ,, ऐसे में कांग्रेस की विकास योजनाओं का लाभ , जिसके बलबूते पर कोटा को टूरिस्ट मेप में लेकर , सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ाने की कोशिशें जहां एक तरफ स्वागत योग्य क़दम रहा, वहीँ दूसरी तरफ यह सब भाजपा जो दो साल में कोटा में एक ईंट तक नहीं लगा पाई है , अदालत परिसर निर्माण , मिनी सचिवालय को लेकर कोरी बयानबाज़ी चल रही है , तो एयरपोर्ट का शिलान्यास अभी तक नहीं हुआ है , कांग्रेस के सोंदर्यकरण , विकास कार्यों को भाजपा के लोग इस्तेमाल तो कर रहे हैं , लेकिन टूट फूट भी ठीक नहीं करा पाए हैं , इसीलिए तो कोचिंग उद्योग के लड़खड़ाने के बाद , होटल व्यवसाय को लगे आर्थिक धक्के के बाद व्यापारियों ने यह अपने स्तर पर ही यह प्रयास व्यवसायियों ने शुरू किये है , लेकिन कोचिंग सिटी में बच्चों को कोटा में ही केंद्रीकृत करने के मामले में कोई गंभीर नहीं हुआ है , यही वजह है के कोचिंग मालिकों ने तो विकेन्द्रीकरण निति के तहत अपने अपने सेंटर दूसरे राज्यों में फैलाकर , अपने कारोबार , कमाई को कई गुना बढ़ा लिया है , लेकिन इन कोचिंग , कोचिंग में आने वाले बच्चों के भरोसे कोटा को जो रोज़गार मिला था , उस हॉस्टल व्यवसाय , मेस व्यवसाय , स्टेशनरी सहित अन्य व्यवसाय को भी धक्का लगा है , करोड़ो रूपये की ऋण योजनाओं के तहत , हॉस्टल निर्माण हुए और अब उनके समक्ष रोज़गार छिन जाने या न्यूनतम स्तर पर सिमट जाने से , वोह सब निराशावाद में हैं , ,कोटा में व्यापार महासंघ तो है , लेकिन उसका रूहझान हॉस्टल और मेस व्यवसाय को भी पुनर्जीवित योजनाओं की तरफ होना ही चाहिए , सिर्फ पदाधिकारियों के व्यवसाय से जुडी होटल योजनाओं के रोज़गारोन्मुखी व्यवस्था से कोटा का कोई खास भला नहीं होगा , कोटा को एक साथ , मिल ,जुलकर कांग्रेस , भाजपा को भुलाकर ,, आपसी मतभेद भुलाकर , संयुक्त रूप से हर क्षेत्र में ,केंद्र और राज्य सरकार की जो कोटा के विकास और सोंदर्यकरण के प्रति जो लेट लतीफी उपेक्षित व्यवस्थाएं है , उनके खिलाफ कोटा के भाजपा के नेताओं पर विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से दबाव बनाना ही होगा , नहीं तो कोटा जो उद्योग नगरी से टूट गया , फिर शिक्षा नगरी से बिखर गया , वोह अब कांग्रेस के शांति कुमार धारीवाल की योजनाओं से पर्यटन उद्योग के नक़्शे पर जो मुनाफे का दौर आया है , उसे भी धक्का लगने की संभावना हो सकती है ,,,,,,यहां कोटा बृज राज भवन जो अंग्रेज़ी शासन में पोलिटिकल एजेंट का बंगला था 1857 कि आज़ादी की जंग में , तात्कालिक दरबार के निकटतम पोलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन के ज़ुल्म के खिलाफ आज़ादी की जंग , फिर लाला जय दयाल, मेहराब खान की बग़ावत, कोटा की अंग्रेज़ी शासन से आज़ादी, बृज राजभवन में मेजर बर्टन उसके पुत्रों का क़त्ल, फिर मेजर बर्टन के खोफ को खत्म करने के लिये उसके सर को धड़ से अलग कर, बल्लम पर सर को लटकाकर शहर में घुमाकर अंग्रेज़ी आतताई शासन पर विजय की कहानी, फिर गद्दारों की मुखबिरी, अंग्रेजों का हमला, फिर कोटा की गुलामी ओर कोटा की आज़ादी के जांबाज़ हीरो, लाला जय दयाल, मेहराब खान को बृज राज भवन के बाहर नीम के पेड़ पर फांसी , ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देने की कई घटनाएं कोटा में दबी पढ़ी हैं, यहां के इतिहासकार जो चाटुकारों से अलग है , पर्यटन लेखक , खासकर डॉक्टर प्रभात कुमार सिंघल, फिरोज़ अहमद, हनीफ जेदी , ब्लॉगर्स, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट से मशवरा कर अगर यह पर्यटन बढ़ावे के ईमानदार प्रयास होंगे तो यक़ीनन कोटा फिर से अव्वल होगा, नहीं तो कोटा को भाजपा सरकार की उपेक्षा अजगर बनकर निगल रही है, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339
akhtar khan akela

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