कोटा ओरियंटल पावर केबल के बेरोज़गार हुए मज़दूर बुज़ुर्ग हो गए हैं , अशक्त हो गए हैं , कई तो मृत्यु के कगार पर हैं,, कुछ तो आज़ादी के भी बहुत साल पहले जन्मे लोग हैं, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष साहब के इस कोटा शहर के यह मज़दूर प्रोविडेंट फंड ई पी एफ पेंशन के अदालती आदेश के बावजूद भी , अनावश्यक अपीलों के झमेले में सिसक रहे हैं , हालात यह है के सवा सो से भी अधिक मज़दूरों को कोटा उपभोक्ता न्यायालय , प्रदेश उपभोक्ता फोरम तुरंत ई पी एफ विभाग को पेंशन देने के आदेश दे चुका है , लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार में केंद्र सरकार का यह ई पी एफ विभाग उम्र के आखरी पड़ाव पर, मात्र हज़ार रूपये की पेंशन की बाँट जोह रहे मज़दूरों की उम्मीदों पर इस राशि से कहीं ज़्यादा फीस वकीलों और क़ानून व्यवस्था पर खर्च कर उन्हें लटकाने में लगा है , प्रोविडेंट फंड विभाग जिला फोरम ,, स्टेट फोरम से हारने के बाद , राष्ट्रिय उपभोक्ता फोरम में अपील में गया है , जहां लगभग दो वर्षों से सिर्फ तारीख पे तारीख , तारीख पे तारीख का खेल हो रहा है , और ओरियंटल पावर केबल कोटा के डेढ़ सो के लगभग वृद्ध , अशक्त मज़दूर इस पेंशन की उम्मीद में सिसक रहे हैं , हाँ यही तस्वीर दिख रही है , केंद्र सरकार की मज़दूर विरोधी यह निति कोटा में इन मज़दूरों, इनके परिवारों में आक्रोश का कारण बना हुआ है ,,, 60 वर्ष पूर्व कोटा में रियायती दरों पर , सरकार से कई सहूलियतें लेकर , झालावाड़ रोड पर ओरियंटल पॉवर केबल फैक्ट्री खुली थी जहाँ कई मज़दूरों को नौकरी मिली थी ,, फैक्ट्री घाटे के नाम पर बंद हुई ,, सुविधाओं के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक जी गहलोत के कार्यकाल में फैक्ट्री नए मालिक ने खरीदी , मज़दूरों का हिसाब हुआ , कितनी ज़मीन थी , अब कितनी ज़मीन पर भौतिक रूप से नए मालिकों की क़ब्ज़ेदारी है , विधि नियम , उद्योग व्यवस्थाएं , संचालित आदेश वगेरा सब पत्रावली में है , वोह अलग जांच का विषय हो सकता है ,, लेकिन ओ पी सी के मज़दूरों के हिसाब के बाद , उनकी जो राशि ई पी एफ एकाउंट में जमा थी , देश के क़ानून के तहत उन्हें पारिवारिक पेंशन मिलना थी , लेकिन ओ पी सी के इन मज़दूरों को काफी प्रयास करने , कई बार प्रधानमंत्री , सांसद साहब को पत्र लिखने के बाद भी इनकी विधिक रूप से दी जाने वाली मात्र, एक हज़ार रूपये प्रति माह की पेंशन भी जो इन मज़दूरों की जमा राशि के ब्याज की हिस्सा राशि होती है , वोह भी नहीं दी गई , नतीजन , मज़दूरों ने एडवोकेट रामगोपाल चतुर्वेदी से सम्पर्क किया , जिन्होंने उक्त मज़दूरों की तरफ से पहले नोटिस दिया , फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई तो कोटा जिला उपभोक्ता न्यायालय में मुक़दमा पेश किया जहाँ विस्तृत सुनवाई के बाद , उपभोक्ता न्यायलय ने सो से भी अधिक मज़दूरों के पक्ष में मामला मानते हुए , उन्हें एक हज़ार रूपये प्रति माह की पेंशन देने के आदेश जारी किये , लेकिन आदरणीय नरेंद्र जी मोदी की इस केंद्र सरकार के ई पी एफ विभाग को, कोटा ओ पी सी के मज़दूरों को , उनका हक़ देना मंज़ूर नहीं था , तो उन्होंने इस मामले के खिलाफ , राजस्थान उपभोक्ता न्यायालय में अपील पेश कर दी , जहां भी विस्तृत सुनवाई के बाद , केंद्र सरकार के ई पी एफ विभाग की अपील खारिज करते हुए, मज़दूरों को उनके हक़ की पेंशन देने के आदेश यथावत रखे गए , ,मज़दूरों की तरफ से आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र जी मोदी जो पत्र लिखकर इस मांमले में , आदेशित पेशन तुरतं दिलवाने के निर्देश देने की गुहार लगाई , लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई , और इनका प्रार्थना पत्र बिना किसी कार्यवाही के रद्दी की टोकरी में गया ,, इधर केंद्र सरकार का ई पी एफ ऑफिस तो अशक्त , लाचार , वयोवृद्ध ,प्रताड़ित मज़दूरों को उनके हक़ की पेंशन नहीं देने पर अड़ा बैठा है , तो विभाग ने इस मामले में दिल्ली राष्ट्रिय उपभोक्ता फोरम के समक्ष सुप्रीम अपील दायर कर दी, जहाँ पेंशन पर स्थगन के बाद ,, कई बार बहस तो हुई , लेकिन आदेश और सुनवाई के नाम पर तारीख पे तारीख वोह भी तीन ,, ,चार , पांच,, छह छह महीने की तारीखे बिना किसी सुनवाई के हो रही हैं , जबकि उक्त राशि मज़दूरों का हक़ है , उनकी खुद की राशि में ब्याज के बदले की हिस्सा राशि क़ानून में कहा गया है , कोटा के यह मज़दूर सिसक रहे हैं , रो रहे हैं , ज़रूरतों के लिए तड़प रहे हैं , बीमार हैं , अशक्त है , वयोवृद्ध होने के बाद , कब किस मोड़ पर अंतिम सांस हो जाए, किसी को पता नहीं, लेकिन , ,देश भर में कल्याणकारी सरकार का नारा देने वाली केंद्र सरकार , देश भर की पंचायत लोकसभा अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र के गरीब मज़दूरों को , उनके हक़ की पेंशन को क़ानूनी दांव पेंच , अपील , ,तारीख पे तारीख के खेल में उलझाए बैठी है , यूँ भी , ,गरीब वयोवृद्ध लोग तो सरकारी योजनाओं के तहत , कल्याणकारी कार्यों के नाम पर ज़रूरी खर्च के नाम पर, इतनी सी गिनती की पेंशन हज़ार रूपये प्रतिमाह तो प्राप्त करने के अधिकारी है भी , लेकिन एक हज़ार रूपये प्रतिमाह , एक मज़दूर के हलक़ से निवाला छीनने के लिए , केंद्र सरकार के ई पी एफ़ विभाग ने कमर कस रखी है , और ,, अपील पर अपील करके अधीनस्थ न्यायालय के आदेशों को रुका हुआ फैसला बनाकर रोककर बैठे है , मज़दूरों का कहना है के , ईश्वर ,भगवान इन्हे सद्बुद्धि दे , हमारे जीवनकाल में ही हमे हमारा हक़ , हमारी पेंशन मिल जाए तो हम हमारे कुछ अधूरे , टूटे फूटे ख़्वाब है , उन्हें जितना मुमकिन हो , पूरा कर लें ,, मज़दूरों के वकील एडवोकेट रामगोपाल चतुर्वेदी भी इस सवाल पर भाव विहल हो उठते है ,वोह कहते , है के मुझे भी अफ़सोस है , के दो अदालतों से विजेता मज़दूर ,, अपील , स्थगन और तारीख , सुनवाई स्थगन के कारणों से अपना हक़ नहीं ले पा रहे हैं , जबकि एडवोकेट रामगोपाल चतुर्वेदी को तो यूँ ,भी भाजपा और खासकर नरेंद्र मोदी जी के अंधभक्तों में गिनती गिनकर कोटा के कई लोग उन्हें ब्लाइंड फेथर कहकर समझाते भी हैं , चिढ़ाते भी हैं , के देख लो तुम्हारी कल्याणकारी सरकार कोटा के , वोह भी लोकसभा अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र के ओ पी सी के मज़दूरों के साथ क्या सलूक कर रही है , इन जनाब को देखिए आप फूलचंद जी जन्म 1939 , आयु 86 वर्ष, , आप कंचन कंवर जन्म 1 जनवरी 1944, अभी 81 वर्ष की हैं,,लेकिन फिर भी , रामगोपाल चतुर्वेदी मुस्कुराते हैं , कहते हैं , एडवोकेसी एक तरफ , इन्साफ के लिए संघर्ष एक तरफ ,,, मोदी भक्ति एक तरफ , आएंगे तो मोदी ही ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

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