*वर्ष 2026: कोटा देहात में औद्योगिक विकास की नई इबारत,
सीएफसीएल गढ़ेपान प्लांट विस्तार अंतिम चरण में**
कोटा (देहात)।
वर्ष 2026 कोटा देहात क्षेत्र के लिए औद्योगिक विकास की दृष्टि से सकारात्मक संकेत लेकर आ रहा है। चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (सीएफसीएल) गढ़ेपान, कोटा में अमोनिया एवं अमोनियम नाइट्रेट प्लांट विस्तार की तैयारियां अब अंतिम चरणों में पहुंच चुकी हैं। प्लांट विस्तार हेतु आवश्यक भूमि क्रय की जा चुकी है तथा भूमि का नामांतरण फैक्ट्री के नाम पर पूर्ण हो गया है। जिला प्रशासन स्तर पर औद्योगिक कन्वर्जन की प्रक्रिया भी विधिवत पूरी कर ली गई है।
उल्लेखनीय है कि कृषि भूमि के औद्योगिक उपयोग में परिवर्तन से पूर्व पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण, अग्निशमन, राजस्व, जल संसाधन सहित विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होता है। साथ ही ग्राम सभाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर सहमति, रोजगार सृजन के आश्वासन तथा केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों से अनुमति के बाद ही किसी औद्योगिक परियोजना को स्वीकृति मिलती है। सीएफसीएल गढ़ेपान परियोजना के विस्तार में भी इन सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
गढ़ेपान खाद कारखाने के समीप स्थित सोरसन गोडावण अभ्यारण्य को लेकर समय-समय पर पर्यावरणीय चिंताएं सामने आती रही हैं। हालांकि, पूर्व में अमोनिया गैस रिसाव को लेकर उठे सवालों के मामले में संबंधित जांच के बाद इस प्लांट को स्पष्ट रूप से क्लीन चिट मिल चुकी है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अनुसार, वर्तमान में प्लांट से किसी प्रकार का जल, वायु अथवा भूमि प्रदूषण नहीं हो रहा है और सभी गतिविधियां निर्धारित मानकों के अनुरूप नियंत्रित हैं।
प्लांट विस्तार के साथ कोटा एवं बारां जिलों में रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार, किसानों को रियायती दरों पर खाद उपलब्ध कराने जैसे बिंदुओं पर भी सकारात्मक सहमति बनने की उम्मीद है। जिला प्रशासन स्तर पर कोटा और बारां के कलेक्टरों के संयुक्त समन्वय से प्रभावी प्रबंधन की व्यवस्था की जा सकती है।
सीएफसीएल द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत गढ़ेपान क्षेत्र में कब्रिस्तान, श्मशान, स्कूल भवन, सड़क निर्माण, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था, उद्यान एवं सामुदायिक सुविधाओं के विकास जैसे कार्य पूर्व में भी किए जाते रहे हैं, जिनके विस्तार की संभावनाएं आगे भी बनी रहेंगी।
औद्योगिक कन्वर्जन की प्रक्रिया राजस्थान हाईकोर्ट के अब्दुल रहमान बनाम राज्य सरकार प्रकरण में जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप की गई है। जल निकासी, चरागाह भूमि, नालों एवं जलभराव क्षेत्रों को लेकर आवश्यक जांच-पड़ताल के बाद ही तहसील एवं जिला स्तर पर अनुमोदन प्रदान किया गया है। ग्राम पांचड़ा, पटवार हल्का सीमलिया, तहसील दीगोद, जिला कोटा की खसरा संख्या 168, 170 एवं 191 की कुल 3.8900 हेक्टेयर भूमि का वर्गीकरण गैर-मुमकिन औद्योगिक में विधिवत परिवर्तन किया गया है।
इस पूरे प्रकरण में उल्लेखनीय यह भी है कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल, जनप्रतिनिधि, पर्यावरणविद्, वन्यजीव प्रेमी, सामाजिक संगठन या पत्रकार संगठन द्वारा कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है। इससे स्पष्ट है कि परियोजना को विधिक, पर्यावरणीय एवं प्रशासनिक स्तर पर स्वीकृति प्राप्त है।
ऐसे में वर्ष 2026 कोटा देहात के औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। सीएफसीएल गढ़ेपान प्लांट का विस्तार न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देगा, बल्कि रोजगार, कृषि सहयोग और अधोसंरचना विकास के नए अवसर भी प्रदान करेगा।
— अख्तर खान ‘अकेला

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