आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

05 जनवरी 2026

कोटा के लगभग 125 पत्रकार असमंजस की स्थिति में, भूखंडों का पैसा वापस ले या नहीं,बार बार झांक रहे है लोकसभा अध्यक्ष की तरफ

 

कोटा के लगभग 125 पत्रकार असमंजस की स्थिति में, भूखंडों का पैसा वापस ले या नहीं,बार बार झांक रहे है लोकसभा अध्यक्ष की तरफ
के डी अब्बासी
कोटा,जनवरी। पूरे दो वर्ष तीन माह गुजर जाने के बाद भी कोटा के लगभग 125 पत्रकार असमंजस की स्थिति में है और वह यह निर्णय नहीं ले पा रहे है कि भूखंडों का पैसा वापस ले या नहीं। कोटा के पत्रकारों और पत्रकार संगठन
बार बार लोकसभा अध्यक्ष की तरफ झांकते नजर आ रहे हैं। दो वर्ष तीन माह गुजर जाने के बाद भी कोटा के पत्रकारों के संगठन, पत्रकार बिरादरी, कोटा के विधायक,मंत्री,लोकसभा अध्यक्ष,राजस्थान सरकार इस मामले का निर्णय भी नहीं करा पा रहे है कि पत्रकार आवासीय योजना चंद्रसेल के भूखंड पत्रकारों को आवंटन होंगे भी या नहीं। कोटा विकास प्राधिकरण के अफसर भी पत्रकार आवासीय योजना चंद्रसेल के भूखंड पत्रकारों को आवंटन के मामले में बोलने में खामोश नजर आ रहे हैं। कोटा विकास प्राधिकरण का एक अफसर दबी जुबान से ऑफ द रिकॉर्ड यह जरूर बोल रहा है कि यह योजना रद्द कर दी गई है। पत्रकार आवासीय योजना चंद्रसेल अक्टूबर 2023 को प्रारंभ हुई जिसकी अंतिम तिथि 3 अक्टूबर 2023 थी जिसमें 80 भूखंड प्राप्त करने के लिए 72 हजार रुपए जमा कराए गए थे। कोटा की लगभग 125 पत्रकारों ने इस योजना में आवेदन कर प्रत्येक पत्रकार ने 72000 जमा कराए थे। यह योजना कांग्रेस सरकार के पूर्व स्वशासन मंत्री शांति धारीवाल ने लॉन्च की थी। बाद में सरकार बदल गई और भाजपा सरकार आने के बाद कांग्रेस सरकार की योजनाओं की जांच के नाम पर रोक लगा दी गई थी। योजनाओं की जांच भी हो गई लेकिन इस योजना पर सब ने चुप्पी साध ली। इस योजना में कई गरीब पत्रकारों ने लोगों से उधार पैसा लेकर इस योजना में भूखंड लेने के लिए आवेदन किया। सबसे बड़ी समस्या उन गरीब पत्रकारों के सामने आ रही है जिन्होंने लोगों से कर्जा लेकर इस योजना में आवेदन किया था। कोटा के पत्रकार कभी पत्रकार संगठनों की तरफ तो कभी कोटा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की तरफ इस उम्मीद से झांक रहे हैं की अब तो पत्रकारों की आवासीय योजना का कोई ना कोई फैसला जरूर होगा लेकिन अभी तक कोई फैसला होता नजर नहीं आ रहा है। कोटा के कई पत्रकार संगठनों की सुई तो कोटा के लोकसभा अध्यक्ष एवं बिरला की तरफ जाकर अटक गई। पत्रकारों के मित्र कहे जाने वाले लोकसभा अध्यक्ष और बिरला के हाथ में इस योजना को क्रियान्वित करने का अधिकार होता तो वह कभी की ही इस योजना का फैसला कर चुके होते लेकिन शायद उनके पास इस समस्या का हल करने का अधिकार नहीं है इसीलिए शायद वह बार-बार पत्रकारों से कहते हैं कि इस मामले में जरूर बात करेंगे। अफसोस इस बात का है कि कोटा में लगभग आधा दर्जन पत्रकारों के विभिन्न संगठन काम कर रहे हैं लेकिन एक भी संगठन इस मामले को गंभीरता से इस मामले कोई भी काम करता नहीं आ रहा है। होना तो यह चाहिए था कोटा के पत्रकार संगठन स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह और मुख्यमंत्री से इस मामले को लेकर बात करते तब भी शायद इस समस्या का समाधान हो जाता। अभी हाल हाल में हुए एक पत्र का संगठन की सम्मेलन और नव वर्ष पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बुलावे पर गए पत्रकारों के समय भी लोगों को यह उम्मीद थी कि शायद पत्रकार आवासीय योजना का कोई ना कोई फैसला जरूर सुनाइए आएगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। पत्रकारों के हित की बात करने वाले पत्र का संगठनों को इस मामले को लेकर आंदोलन के रूपरेखा तैयार करनी चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...