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07 जून 2025

एडवोकेट वरिष्ठ पत्रकार अख्तर खान अकेला का जन्म दिन पर बधाई

 

शुक्रिया भाई के डी अब्बासी साहब, शुक्रिया, डिजिटल भास्कर पत्रिका न्यूज़
एडवोकेट वरिष्ठ पत्रकार अख्तर खान अकेला का जन्म दिन पर बधाई
के डी अब्बासी कोटा जून। शहर के वरिष्ठ एडवोकेट और पत्रकार हंसमुख मिलनसार , भाषा मे मिठास, मददगार ,अच्छे स्वभाव के मालिक, ज्वलन्त मुद्दों को उठाने वाले एडवोकेट अख्तर खान अकेला का जन्म दिन बड़े धूम धाम से मनाया गया। उनके जन्म दिन पर पूरे शहर के पत्रकार साथी, राजस्थान के पत्रकार साथियो, एडवोकेट , कोंग्रेस और भाजपा के मित्रों से उन्हें जन्मदिन पर बधाई दी है। एडवोकेट पत्रकार अख्तर खान अकेला किसी परिचय के मोहताज नही है। उनकी शख्शियत ऐसी है कि शहर में उनका नाम ही काफी है। जो उनसे एक बार मिल ले तो पूरी जिंदगी उनको भूल नही पाता।मदद करने का ऐसा तरीका जिसे कभी भुलाया नही जा सकता। अख्तर खान एकेला ने अपना पत्रकारिता का सफर धरती करे पुकार से शुरू किया । उन्होंने कोटा शहर के विभिन्न समाचार पत्रों में सम्पादक के रूप में काम किया। अख्तर खान एकेला अधिस्वीकृत पत्रकार भी रहे। उन्होंने पत्रकारिता के साथ वकालत शुरू की जिसमे भी उन्होंने खूब नाम कमाया। कभी भी शहर के किसी भी पत्रकार पर कोई परेशानी आई तो उन्होंने उसकी निशुल्क मदद की। उन्होंने कई पत्रकारो की धन से भी मदद की। अख्तर खान दोस्तो के दोस्त है। वकालत के पेशे में भी उन्होंने कभी भी पैसे को अहमियत नही दी। उनके मन मे हमेशा यह रहता है कि पीड़ित को न्याय मिले। बस उनमें एक ही बुराई है सच बोलना और सच लिखना जिससे कई बार उनके अपने भी उनसे नाराज हो जाते है। एडवोकेट पत्रकार और कोंग्रेस के नेता अख्तर खान अकेला बिना किसी लालच के किसी की भी मदद करने को तैयार रहते है भले ही मदद करने के चक्कर मे उनका कितना बड़ा ही नुकसान क्यो नही हो जाय। एडवोकेट अख्तर खान एकेला पिछले 35 वर्षो से लगातार पत्रकारिता और वकालत से जूड कर गरीबो, असहायों,पीड़ितों और मजबूरों की आवाज बनकर उनको न्याय दिलाने का काम कर रहे है। एडवोकेट पत्रकार अख्तर खान एकेला को जन्म दिन परपूर्व ज्वाइंट डायरेक्टर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग वरिष्ठ पत्रकार और लेखक डॉक्टर पी के सिंघल, स्वतन्त्र पत्रकार के डी अब्बासी, भारत की महिमा के प्रधान संपादक डी एन गांधी, संपादक बृजराज सिंह सोलंकी, सहायक संपादक कादर खान, पंजाब केसरी के ब्यूरो चीफ योगेश जोशी,एवन न्यूज़ चैनल के ब्यरो चीफ प्रणय विजय, ओमेंद्र सक्सेना , एस टी एन न्यूज़ चैनल के संपादक व वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार अनिल भारद्वाज, दैनिक कोटा ब्यरो समाचार पत्र के सम्पादक कय्यूम अली, वरिष्ठ पत्रकार ओम कटारा, दैनिक कलम का अधिकार कोटा जयपुर संस्करण के सम्पादक के एल जैन, आईएफडब्ल्यूजे पत्रकार संगठन के जिला अध्यक्ष और दिशाध्वज स्थानीय संपादक के के शर्मा कमल, 18 टीवी के ओम प्रकाश, वरिष्ठ पत्रकार अशोक सैनी,दैनिक राष्ट्रदूत के स्थानीय संपादक श्याम रोहिड़ा, वरिष्ठ और स्वतंत्र पत्रकार सुनील माथुर, वरिष्ठ पत्रकार सुधींद्र गोड,रेलवे पी.आर. ओ. बी एन गुप्ता, चम्बल की गोद के संपादक सुभाष देवड़ा, यंग एचीवर न्यूज़ के पत्रकार यतीश व्यास, दैनिक राजमार्ग के स्थानीय संपादक योगेश सेन,नफा नुकसान के स्थानीय संपादक नीलेश शर्मा, दैनिक समाचार जगत के ब्यरो चीफ चन्द्र प्रकाश चंदू, दैनिक सांध्य ज्योति दर्पण के ब्यरो चीफ योगेंद्र योगी, एवन न्यूज़ चनेल के रामगंज मंडी के रिपोर्ट साबिर खान, न्यूज़ नेशन और आर भारत न्यूज़ चैनल के ब्यूरो चीफ न्याज मोहम्मद, वरिष्ठ पत्रकार दिनेश माहेश्वरी सहित सभी सैकड़ो कलमकारों ने आभार जताया है।

शुक्रिया , भाई रामेश्वर सुंवालका जी,

 

शुक्रिया , भाई रामेश्वर सुंवालका जी,
एक ऐसा शख्स जिसके व्यक्तित्व के बारे में समझना उतना ही मुश्किल है जितना उनके कार्य को समझना बहुमुखी प्रतिभा से ज्यादा क्या हो सकता है उनमें वह गुण मैंने देखे हैं की बहुमुखी शब्द छोटा लगने लग जाता है इतनी वैचारिक शक्ति यदा-कदा ही कम लोगों में देखने को मिलती है अब इनके कार्यों की गिनती में इतना समय लग जाए कि आम आदमी तो यह सोचने को मजबूर हो जाए अरे बाप रे इतने काम इतने सारे काम एक शिक्षक राजनीतिज्ञ अभिभाषक आर्थिक राजनीतिक शैक्षणिक सामाजिक और लेखन के साथ साथ साहित्य की समझ जिनके अंदर कूट-कूट कर भरी हो। कुशल सलाहकार ,निर्भीक, बेबाक टिप्पणी अपने काम के प्रति पूर्ण निष्ठा वह ईमानदारी बरतने वाले शख्स दुनिया में कम ही आते हैं पर जो अपनी कार्यशैली से अमिट छाप छोड़ते हैं लोग उन्हें याद करते हैं क्योंकि कलम तो ऐसी चलती है अगर किसी के बारे में लिख दिया तो मोतियों के समान माला रूपी शब्दावली से वह खुद व्यक्ति ही नहीं समझ पाता कि ये मेरे बारे में क्या लिखा है क्या। और मैं ऐसा हूं क्या। अच्छा इनके बारे में एक बात यह , डरने का तो सवाल ही नहीं स्पष्ट वादी ता बेबाक राय हंसते हुए सच्चाई बयां करना अपने खूबसूरत अल्फाजों से सभी का दिल जीतने में माहिर शख्स हमेशा उद्वेलित होकर भी मन की आंखों से देख कर प्रभावित करने की हद पार कर जाते हैं मैं चुकीं कोई लेखक कवि या साहित्यकार नहीं हूं जो दिखा वह अपनी लेखनी से पिरोकर उस शख्स के गले में खुशियां खुशबू और वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में भी यह बहुमुखी प्रतिभा के धनी हमारे कोटा की शान बंन कर निकले इसी कामना के साथ आदरणीय परम सम्मानीय अख्तर खान अकेला साहब को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं आपका अनुज। रामेश्वर सुवालका — with Akhtar Khan Akela.

में ,,,मेरे अल्लाह का शुक्रगुज़ार हूँ ,,,के मुझे उसने ,,,,हिन्दुतान की इस माटी पर ,,एक मुस्लिम घराने में,,,7 जून बरोज़ मंगलवार सुबह 5 बजकर 47 मिनट पर झालावाड़ की सर ज़मीन पर ,, जन्म दिया

 

में ,,,मेरे अल्लाह का शुक्रगुज़ार हूँ ,,,के मुझे उसने ,,,,हिन्दुतान की इस माटी पर ,,एक मुस्लिम घराने में,,,7 जून बरोज़ मंगलवार सुबह 5 बजकर 47 मिनट पर झालावाड़ की सर ज़मीन पर ,, जन्म दिया ,,,में इसी हिन्दुतान की,,, मिटटी में ,,खेला ,,पला ,बढ़ा ,,तो कभी खेल खेल में , इसी मिट्टी में लोट पोट होकर लिपट गया, ,,, तो कभी ज़ख्मी होने पर इसी मिटटी को ज़ख्मों पर लगाकर दर्द कम कर लिया ,,,,यह वही पाक सर ज़मीन है जिस पर मेने घुटने टेके ,,अपना माथा टेका और इबादत कर ली ,,,मेने इसी सरज़मीं पर बैठकर ,,,,अपने खुदा की इबादत की है ,,,,यह वही मिटटी है,,,,,जिसकी सोंधी सोंधी खुशबु ने ,,मुझे ,,,खुशहाल कर दिया ,,इसी मिटटी की पैदावार को खाकर में ,,,बढ़ा हुआ ,,और एक दिन में भी इसी मिटटी में ,,,में मिल जाऊंगा ,,,,इसी मिटटी का में हो जाऊंगा ,,मेने इसी मिटटी में पल कर शिक्षा हांसिल की ,,रोज़गार हांसिल किया ,,,,मेने अपने इस अधेड़ हुए जीवन में आपातकाल में पत्रकारिता का दौर भी देखा है , जहां हमे खबरों की प्रूफ पट्टियाँ निकाल कर कलेक्टर की सहमति के हस्ताक्षर के लिए रोज़ लेजाना होता था और खबरें छापने का हक़ तभी मिलता था ,,,सेंसर न्यूज़ का वोह दौर भी मेने देखा है और ईमानदार पत्रकारिता के वुजूद में ,,में पला बढ़ा हूँ ,,मेने आज बिकाऊ पत्रकारिता ,,विज्ञापन संस्कृति की पत्रकारिता ,,पेड़ न्यूजों का माहोल भी देखा है ,,सोशल मीडिया, यू ट्यूबर्स , नफरती मीडिया,,,भी अब देखे हैं, , कई ,दंगे फसादात ,,राहत कार्य ,,कर्फ्यू ,,और एक हिन्दू भाई को मुस्लिम के लिए जान की बाज़ी लगते हुए, तो एक मुसलमान को हिन्दू भाई पर अपना सब कुछ न्योछावर कर देने का माहोल भी देखा है ,,नफरत भी देखी है प्यार भी देखा है ,,,,,,,,मेरी उम्र में अब अधेड़ वक़्त है ,,बल्कि अधेड़ता अब मेने पार कर ली है ,, सठियाने की उम्र से ज़्यादा बढ़ गया हूँ, ,जो ज़िंदगी है वोह बोनस है ,,,,,देश के लिए मर मिटने वाले आखरी बादशाह ज़फ़र को भी पढा है, ,,मेरी सोच भी है, इबारत भी है, ,,,,में ना किसी की आँख का नूर हूँ ,,में ना किसी के दिल का क़रार हूँ , मे बेकार हूँ ,,बेनाम हूँ ,,, मेरे कई दोस्त है
मुझे कई दिल जान से प्यार करने वाले है ,
मेरी इबारत ,,मेरे अलफ़ाज़ मेरे देश के लिए है ,मेरे अल्फ़ाज़ों से मेरी कोशिश है ,
मेरे अल्फ़ाज़ों से मेरी दुआ है , मेरे खुदा से मेरी इल्तिजा है , मेरे सपनों का भारत आधुनिक हो महान हो , यहां मुस्लिम गाये भजन हिन्दू दे अज़ान ऐसा माहोल हो
मस्जिद की करे हिफाज़त हिंदू ,
मंदिर की करे हिफाज़त मुसलमान , ऐसा मेरा भारत महान हो , सब के सीने में दिल हो दिल में हो इंसानियत ,सभी के दिलों में गीता हो क़ुरआन हो ,,,
दोस्तों यूँ तो में किसी भी लायक नहीं लेकिन मेरे अब तक के कई अल्फ़ाज़ों से आप में से कुछ भाइयों को ठेस पहुंची हो तो मुझे माफ़ कर , मुझे मेरे जन्म दिन का तोहफा देकर अनुग्रहित करे ,,जो लोग मुझ से नाराज़ है ,,जो लोग मुझ से नफरत करते है ,,,उनसे भी गुज़ारिश है प्लीज़ सब कुछ भुलाकर मुझे माफ़ करें ,,,जो लोग मुझे हिन्दू ,,मुझे मुसलमान ,,मुझे कोंग्रेसी ,,मुझे भाजपाई ,,आपिया ,,,हिंदी भाषी ,, उर्दू भाषी ,,राजस्थानी भाषी ,,,सुन्नी ,,शिया ,वहाबी ,,,,जमाती ,,समझकर मेरे लिए पूर्व में ही कोई दो कोल्ड सोच बना चुके है उनसे भी मेरी गुज़ारिश है ,,मुझे इस अधेड़ता पार करने वाले जन्म दिन पर चाहे मुबारकबाद न दे लेकिन तोहफे के रूप में वोह टिप्स ,,वोह सीख तो ज़रूर दे ,,जिससे में उनके दिलों के नज़दीक आ सकु ,,में मेरे भारत महान का एक खुसूसी हिस्सा बन सकूँ ,,में किसी एक का नहीं ,,सभी का अपना, हर दिल अज़ीज़ बन सकूँ ,,,,में हिन्दुस्तान बन सकूँ ,,,,,,आपको रोज़ रोज़ ,,उल्टा सुल्टा लेखन लिख कर परेशान और दुखी करने वाला आपका सिर्फ आपका ,, अफ़सोस यह भी है के वोह जो थी वोह बेवफा ओर बेवफा वोह भी डंके की चोट पर हो गई, , वोह मतलब मेरे मुल्क की सुख शांति, सुकून, मेरे देश की हिन्दू मुस्लिम एकता, समझ तो आप गए ही होंगे, अख्तर खान अकेला ,, कोटा राजस्थान 9829086339

फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर इमान लाओगे (आहा) क्या अब (इमान लाए) हालाकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे

 फिर क्या जब (तुम पर) आ चुकेगा तब उस पर इमान लाओगे (आहा) क्या अब (इमान लाए) हालाकि तुम तो इसकी जल्दी मचाया करते थे (51)
फिर (क़यामत के दिन) ज़ालिम लोगों से कहा जाएगा कि (अब हमेशा के अज़ाब के मजे़ चखो (दुनिया में) जैसी तुम्हारी करतूतें तुम्हें (आखि़रत में) वैसा ही बदला दिया जाएगा (52)
(ऐ रसूल) तुम से लोग पूछतें हैं कि क्या (जो कुछ तुम कहते हो) वह सब ठीक है तुम कह दो (हाँ) अपने परवरदिगार की कसम ठीक है और तुम (ख़ुदा को) हरा नहीं सकते (53)
और (दुनिया में) जिस जिसने (हमारी नाफरमानी कर के) ज़ुल्म किया है (क़यामत के दिन) अगर तमाम ख़ज़ाने जो जमीन में हैं उसे मिल जाएँ तो अपने गुनाह के बदले ज़रुर फिदया दे निकले और जब वह लोग अज़ाब को देखेगें तो इज़हारे निदामत करेगें (शर्मिंदा होंगें) और उनमें बाहम इन्साफ़ के साथ हुक्म दिया जाएगा और उन पर ज़र्रा (बराबर ज़ुल्म न किया जाएगा (54)
आगाह रहो कि जो कुछ आसमानों में और ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है आग़ाह राहे कि ख़ुदा का वायदा यक़ीनी ठीक है मगर उनमें के अक्सर नहीं जानते हैं (55)
वही जि़न्दा करता है और वही मारता है और तुम सब के सब उसी की तरफ लौटाए जाओगें (56)
लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से नसीहत (किताबे ख़़ुदा आ चुकी और जो (मरज़ शिर्क वगै़रह) दिल में हैं उनकी दवा और ईमान वालों के लिए हिदायत और रहमत (57)
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (ये क़़ुरान) ख़़ुदा के फज़ल व करम और उसकी रहमत से तुमको मिला है (ही) तो उन लोगों को इस पर खुश होना चाहिए (58)
और जो कुछ वह जमा कर रहे हैं उससे कहीं बेहतर है (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम्हारा क्या ख़्याल है कि ख़ुदा ने तुम पर रोज़ी नाजि़ल की तो अब उसमें से बाज़ को हराम बाज़ को हलाल बनाने लगे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या ख़ुदा ने तुम्हें इजाज़त दी है या तुम ख़ुदा पर बोहतान बाँधते हो (59)
और जो लोग ख़ुदा पर झूठ मूठ बोहतान बाधा करते हैं रोजे़ क़यामत का क्या ख़्याल करते हैं उसमें शक नहीं कि ख़़ुदा तो लोगों पर बड़ा फज़ल व (करम) है मगर उनमें से बहुतेरे शुक्र गुज़ार नहीं हैं (60)

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