बी एल ओ घर घर सम्पर्क रखें तो पारिवारिक माहौल में हो जाता है बेहतरीन काम, क्योंकि काम बोझ नहीं ज़िम्मेदारी है, सेवानिवृत अब्दुल रहीम खान बब्बू भाई,
वर्ष 2002 के बाद पूरे 13 वर्ष बाद होने वाली मतदाता गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में बी एल ओ के कामकाज में काफी फ़र्क़ आया है ,,, फिर भी इस पुनरीक्षण कार्यकम को बी एल ओ राजनितिक हस्तक्षेप के चलते एक बोझ समझ रहे हैं और कोई आत्महत्या कर रहा है , तो कोई मानसिक दबाव में हार्ट अटेक से मर रहा है , लेकिन काम कोई भी हो बोझ नहीं , काम तो करना ही है , यही गुरु मंत्र दे रहे हैं , कोटा ज़िले के सबसे पुराने अनुभवी बी एल ओ रहे अब्दुल रहीम खान बब्बू भाई जो 17 वर्षों तक कोटा में बी एल ओ के सकारात्मक परफेक्ट कार्य से जुड़े रहे और इनके अपने कार्यक्षेत्र में, यह व्यवहार , परफेक्ट वर्कर ,सहित सभी मुद्दों पर अव्वल रहा , कोटा में केशवपुरा स्कूल से हाल ही में सेवानिवृत हुए फिज़िकल इन्सट्रक़टर अब्दुल रहीम खान का कहना है के कोई काम नहीं है मुश्किल जब किया इरादा पक्का , वोह तो अभी भी सरकार अगर चाहे तो उनके अपने अनुभवों के आधार पर सहयोग करने को तत्पर बैठे है , ,अब्दुल रहीम खान को कोटा में 1998 में बी एल ओ बनाया गया , इन्होने इस काम को कभी बोझ नहीं समझा ,, हमेशा ज़िम्मेदारी से इसकी प्रक्रिया समझी , फिर ईमादारी से घर घर सम्पर्क कर नाम काटने , नाम जोड़ने ,, और एस आई आर के वक़्त गहन पुंनर्रीक्षण कार्य भी किया , कई दबाव आये , लेकिन यह झुके नहीं , अपने काम से काम रखते हुए काम करते रहे , नतीजा एक तरफ तो इनके अपने बी एल ओ क्षेत्र में पारिवारिक रिश्ते बने , दोस्ताना व्यवहार , मुस्कुराहट के साथ सभी के नाम , पतों सहित सभी आवश्यक जानकारी लेकर रिकॉर्ड करने का इनका अपना हुनर , इन्हे दूसरे बी एल ओ से जुदा बना देता है , अब्दुल रहीम खान का कहना है , के अगर कोई भी बी एल ओ इस काम को बोझ नहीं समझे ,, और काम की ज़िम्मेदारी मिलते ही , इससे संबंधित दस्तावेजों की समझ के प्रयास करे , प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कंसन्ट्रेट होकर कलेक्टर , अतिरिक्त कलेक्टर सहित प्रशिक्षुओं के भाषणों को सुने , नॉट बनाये , दिल दिमाग में बिठाये तो कोई परेशानी हो ही नहीं सकती , लेकिन अगर प्रशिक्षण के समय गायब रहे , मोबाइल पर लगे रहे , बातें करते रहे , या इधर उधर दिमाग रखा , तो फिर थोड़ी बहुत दिक़्क़तों का सामना तो करना ही पढ़ सकता है , अब्दुल रहीम खान कई सालों से विज्ञाननगर कोटा दक्षिण के बी एल ओ रहे , आज यह विज्ञाननगर छोड़कर अस्सी फिट रोड पर निवासित है , लेकिन विज्ञाननगर क्षेत्र के लोगों से आज भी इनका पारिवारिक व्यवहार है , अब्दुल रहीम कहते हैं , स्कूल में उन्होंने फिज़िकल इंस्ट्रक्टर का भी ज़िम्मेदारी से काम किया आवश्यकता पढ़ने पर हिंदी और संस्कृत , सामान्य ज्ञान की कक्षाएं भी पढ़ाई , लेकिन स्ट्रेस ज़रा भी नहीं लिया , हँसते , मुस्कुराते अपना काम समय के पूर्व ही कर लिया , और इसीलिए लगातार 17 वर्षों तक इस कार्य में वोह पारंगत हो गए , उन्होंने बताया थोड़े से भी बहुत थोड़ा दबाव किसी का नाम जोड़ने का कभी कभार आता है , लेकिन सुनो सबकी , नियमों का हवाला दो , हाथ जोड़ लो , मुस्कुरा कर विदा ले लो , तो कोई ज़्यादा दबाव भी नहीं बनाता है , एक बार तो एक ज़िम्मेदार ने उन्हें बुलाकर बी एल ओ ड्यूटी से हटाने का प्रार्थना पत्र लिखकर देने तक का कह दिया , लेकिन अब्दुल रहीम खान ने कहा मुझे तो बी एल ओ का काम सरकार ने दिया है , इसलिए कर रहा हूँ और सरकार ने मुझे कोई ज़िम्मेदारी दी है तो में क्यों इस ज़िम्मेदारी से भागूं ,, लेकिन यह विश्वास दिलाता हूँ के कोई भी पक्षपात या गैर ज़िम्मेदाराना कार्य नहीं होगा , मतदाता की जो जानकारी है वोह शत प्रतिशत सही होगी और इसमें कोई गड़बड़ या दबाव में किया गया काम नज़र आ जाए तो मुझे हटवा देना , निलंबित करवा देना ,,, अब्दुल रहीम खान आज भी प्रशासनिक व्यवस्था में बी एल ओ कार्यों के लिए ज़िम्मेदार , मददगार बनने को तय्यार है , उन्हें सेवानिवृत हुए एक माह से अधिक वक़्त हो गया , लेकिन पूर्ववत वोह नियमित अपने स्कूल जाते है , जिन क्लासों में अध्यापक नहीं लगाए गए , उन क्लासों में जाकर पूर्ववत थोड़ी बहुत देर घंटे दो घंटे पढ़ाकर आते हैं , एक तरफ तो बी एल ओ के कामकाज से अधिकतम लोग डरे हुए है , दुखी है , ड्यूटी केंसिल कराने की कोशिशों में जुटे हैं , ऐसे में , अब्दुल रहीम खान का बी एल ओ कार्य के टिप्स हँसते हँसते , मुस्कुराते चेहरे के साथ सभी वोटर्स के घर घर जाओ भौतिक सत्यापन कर मतदाता सूचि का पुनरीक्षण करें , अगर दस्तावेजों में कोई अड़चन , दिक़्क़त है भी , तो उसे मतदाता के मददगार बनकर कोशिश कर उनकी बाधाएं दूर करें ,वोह कहते हैं , ना, कर भला तो हो भला , यही कहावत इनके लिए चरितार्थ है , यह सभी का भला करते हैं , इसलिए अल्लाह भी इन पर महरबान है , हमेशा मुस्कुराता चेहरा , खुशमिजाज़ी ,तो है ही साथ ही पारिवारिक सुकून भी है ,,इनकी एक बिटिया जिसने बोर्ड परीक्षा में टॉप किया, जो अब भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में वैज्ञानिक इंजीनियर है , जो हाल ही में आरपेशन सिन्दूर के दौरान , पाकिस्तानी हवाई जहाज़ों की उड़ानों की राडार पर नज़र रखने के लिए ज़िम्मेदार रहीं और बखूबी उन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी निभाई , जबकि एक बिटिया लेक्चरर रही है और बेटा भी मल्टी नेशनल कम्पनी में इंजीनियर है , अब्दुल रहीम बब्बू भाई को सेवानिवृत्त होने और बेस्ट बी एल ओ कार्य के लिए बधाई , मुबारकबाद , अगर कोई भी बी एल ओ इनकी मदद चाहे तो इनके मोबाइल नम्बर , 98 29 340501 पर सम्पर्क कर सकते हैं, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

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