दादी माँ के नैत्रदान,के लिये 150 km दूर कोटा से आयी टीम
2. एक फ़ोन की सूचना पर,150 km दूर जाकर लिया नैत्रदान
3. कोटा से आयी टीम ने ,बकानी का पहला नेत्रदान सम्पन्न करवाया
आज
दोपहर 12 बज़े,जुलानिया मौहल्ला, बकानी, झालावाड़ निवासी राम किशन बाई जी का
दोपहर 12:00 बजे आकस्मिक निधन हो गया । परिवार की सबसे बड़ी मुखिया के
अचानक चले जाने से परिवार के सदस्यों पर दुखों का पहाड़ टूट गया । जुलानिया
परिवार प्रारंभ से ही धार्मिक,सामाजिक एवं राजनीतिक दलों में सदा अग्रणी
रहा है । अंत समय में रामकिशन जी के पोते संजय ने दुख की घड़ी में भी
धार्मिक कार्य को संपन्न कराने के उद्देश्य से दादी मां के नेत्रदान करवाने
की बात अपने चाचा कैलाश चंद और रमेश चंद के सामने रखी।
नेत्रदान
के लिए परिवार के सभी सदस्यों की सहमति मिलने के बाद संजय ने तुरंत ही
अपने भारत विकास परिषद के सदस्य झालावाड़ निवासी मनोज शर्मा को संपर्क किया
मनोज जी ने तुरंत ही नेत्रदान के कार्य के लिए हाड़ौती संभाग में कार्य कर
रही संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन को ज्योति मित्र डॉ मानोज शर्मा व
भवानीमंडी के श्री कमलेश दलाल जी के माध्यम से संपर्क किया ।
150
किलोमीटर की दूरी थी और डॉ कुलवंत गौड़ की तबीयत थी से 3 दिनों से खराब चल
रही थी,आज भी उनको 102 डिग्री बुखार था, परंतु जैसे ही उन्हें पता चला कि
बकानी का परिवार नेत्रदान करवाना चाहता है वह बिना अपनी परवाह किए तुरंत ही
बकानी के लिए रवाना हो गये ।
2
घंटे में कोटा से बकानी स्थित निवास पर पहुंचकर परिवार के सभी क़रीबी
सदस्यों के बीच में डॉ कुलवंत गौड़ ने नैत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया
। नेत्रदान की प्रक्रिया के उपरांत उपस्थित सभी
मेहमानों,महिलाओं,पुरुषों,बच्चों को नैत्रदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी । मौके पर ही लोगों की भ्रांतियों को भी दूर किया गया।
उपस्थित
जनसमूह ने जुलानिया परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए नेत्रदान की कार्य की
काफी प्रशंसा की सभी ने यह आश्वासन दिया कि मृत्यु के बाद तो यह पुण्य
कार्य होना जरूरी है । नेत्रदान के पश्चात शाइन इंडिया फाउंडेशन और बीबीजे
चैप्टर की ओर से नेत्रदानी परिवार को एक प्रशस्ति पत्र भी उपस्थित जनसमूह
में भेंट किया ।
*जरूरी बातें*
नेत्रदान
एक रक्त विहीन साधारण सी प्रक्रिया है,इसमें किसी तरह का कोई चेहरा विकृत
नहीं होता है, ना इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता है । 10 मिनट में होने
वाली इस प्रक्रिया में किसी तरह का कोई रक्त भी नहीं आता, यह प्रक्रिया
घर,अस्पताल में या मुक्तिधाम में भी संभव है ।
ध्यान
रखें कि नेत्रदान के लिए टीम के पहुंचने से पहले मृतक की आंखें पूरी तरह
बंद कर दे,उन पर गिला रुमाल रख, पंखा पूरी तरह बंद कर दें ।
नेत्रदान
2 वर्ष की उम्र से लेकर 80 वर्ष तक की उम्र तक संभव है, नेत्रदान हर वह
व्यक्ति कर सकता है जिसके चश्मा लगा हुआ उसका मोतियाबिंद का ऑपरेशन हो चुका
है या किसी भी तरह की ब्लड प्रेशर,डायबिटीज,हार्ट,थायरॉइड की दवाइयां चल
रही हो ।
* नेत्रदान के लिए टीम 24 घंटे तत्पर*
नेत्रदान
लेने आने के लिए हाड़ौती संभाग में शाइन इंडिया फाउंडेशन पूरे 24 घंटे
तैयार रहती है आप सिर्फ एक कॉल 8386900102 इस नंबर पर करके संस्था के
सदस्यों को नेत्रदान लेने के लिए बुला सकते हैं ।

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