कोटा सहित राजस्थान भर में , आम जनता के हित में नोकरशाही रवय्ये की उपेक्षा , मनमानी ,, आम जनता से संवादहीनता ,, दिन प्रतिदिन जनसुनवाई कार्यक्रमों की उपेक्षा के चलते , जो छवि खराब हो रही है , लोगों की समस्याओं के जो अम्बार लगे है , ऐसे मामलों के त्वरित निस्तारण , और हर ज़िले में जनहितकारी कामकाज से जुड़कर , जनता के हित में सरकार की वफादारी के साथ विधि नियमों के तहत काम करने वाले अधिकारीयों , कर्मचारियों की नियक्ति मामले में , सरकार को त्वरति बढ़ा फेरबदल करना ज़रूरी हो गया है , प्रशासनिक सुधार विभाग की रिपोर्टें इस मामले में , सरकार की पत्रावलियों में हैं , हो सकता है ,सरकार अलग अलग ज़िलों के फीडबैक , और ऐसी रिपोर्टों के बाद , अगले माह को बढ़ा आमूल चूल परिवर्तन का फैसला ले , देखते है , कोटा में ,कौन रहता , है , कौन सुपात्र नहीं होने पर भी , मलाईदार पोस्ट पर टिका रहता है , राजस्थान की सभी मलाईदार , ज़िम्मेदार पोस्टों पर किसे जगह मिलती है ,एक ब्रेक के बाद ,
कोटा सहित राजस्थान भर में कौन हैं , जो सरकार की विचारधारा , घोषणापत्र के खिलाफ , खुलेआम व्यवस्थाओं में जुटे है , कौन हैं जिनकी सिफारिश पर भ्रष्टाचार का खुला खेल करने वाले अधिकारी , कर्मचारी ट्रांसफर होते है , और फिर वोह पकड़े जाते है , कौन हैं जो सोशल मीडिया , पर सार्वजनिक रूप से , नेहरू , महात्मा गांधी , इंद्रा गाँधी , राजीव गाँधी , सोनिया जी सहित सभी वरिष्ठ कोंग्रेसियों को कूटरचना करके , अपमानित करते है ,लेख लिखते है , तोड़ मरोड़ कर , उनके पत्रों को प्रकाशित करते ,है और फिर शिकायतें होने पर भी मुक़दमे की जगह यह अधिकारी सिर्फ परिवाद दर्ज कर टालमटोल करते है , कौन है ऐसे लोग , जो सरकार की पॉलिसी , सरकार के परिपत्रों के खिलाफ घटनाये होने पर , खामोश रहते है , इन्तिज़ार करते है ,, भाजपा के नेताओं को धरने , प्रदर्शन , ज्ञापन के अवसर देते है , और फिर जो पूर्व परिपत्रों में घटनाओं पर तत्काल रिलीफ लिखा है , वोह देकर , भाजपा के नेताओं को हीरो बनाते है , ऐसे लोगों की पहचान होना चाहिए , गिन गिन कर ऐसे लोगों को अराजकता फैलाने की छूट देने के मामले में , चिन्हित कर कार्यवाही करना चाहिए , लेकिन करेगा कौन ,,, , दोस्तों ममता हो , मोदी जी हों , ,योगी जी हों , किसी के भी खिलाफ , मामूली सी भी अगर अपमानकारी कार्यवाही , अगर सोशल मीडिया पर हो , तो तुरंत वोह जेल की सीखचों के पीछे होते है , वहां बैठे अधिकारी ,किसी के परिवाद , शिकायत का इन्तिज़ार नहीं करते , वहां बैठे अधिकारी लोग , शिकायत मिलने पर ,एफ आइ आर की जगह , परिवाद पर टालमटोल नहीं करते , जाँच के नाम पर , ऐसी अपमानकारी कार्यवाही करने वाले की सामग्री , अपमानकारी है ,या नहीं , इसका मतलब ऐसा नहीं , वैसा नहीं , कहकर , लापरवाही नहीं बरतते , यह भी नहीं कहते के , जिनकी अवमानना हुई है , वही एफ आई आर दर्ज करा सकते है ,, वोह सीधे कार्यवाही करते है , ,और होना भी चाहिए ,, कोई किसी मुख्यमंत्री को जेब कट कह दे , कोई किसी महिला राष्ट्रिय अध्यक्ष को , प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साहिब को बच्चों की मदद के लिए नवोदय सेवा के लिए पत्र लिख दे , तो उसे हाइलाइट करके , कितने थे , कितने हैं , कहकर , प्रश्नगत कर अपमानित कर दे , कोई गांधी को , कोई नेहरू को ,कोई पूर्व प्रधानमंत्रियों को अपमानित कर दे , तो यहां की पुलिस , यहां का प्रशासन , हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है , ऐसा क्यों हैं , कौन लोग है , जो ऐसे लोगों को , फिल्ड पोस्टिंग दिलवाते ,है जिनके ज़हन में किसी के भी , खासकर , वैचारिक सत्ताधारियों के अपमान पर भी , कान में विधिक कार्यवाही के लिए जूं तक नहीं रेंगती है , राजस्थान भर में ,किसी भी व्यक्ति की हिरासत में मृत्यु होने पर , सरकार के स्टेंडिंग ऑर्डर है , परिपत्र है , के इस क्षेत्र के सम्पूर्ण थाने को लाइन हाज़िर किया जाएगा , सी आई के खिलाफ ज़िम्मेदारी तय होगी , और एस पी का ट्रांसफर ,होगा , राजस्थान में ऐसी घटनाओं पर तत्काल कार्यवाही होने की जगह ,, इतंज़ार करते है ,पहले भाजपा धरना ,दे प्रदर्शन करे ,माहौल में ,उनका प्रचार हो , फिर जनता में संदेश यह जाए के यह सब , भाजपा के नेताओं की वजह से हुआ है , कोई तो है ,जो अंदर रहकर , नींव को हिला रहा है , अभी कोटा में , नयापुरा थाने में हिरासत में मोत हुई , मोत होते ही , कुछ ही देरी में ,ज़िम्मेदारी तय कर , पूर्व में ही परिपत्र में दी गयी प्रक्रिया के तहत , थाने को लाइन हाज़िर करते , ज़िम्मेदारी तय करते , थानाधिकारी एस पी के खिलाफ कार्यवाही करते ,, जो भी आर्थिक मदद , देना होती उसकी घोषणा तुरतं कर देते , तो पूर्व भाजपा विधायक को धरने पर बैठकर , आम जनता को प्रताड़ित करने , उनकी आवाजाही को बाधित करने के लिए रास्ता रोकने पर , रोका जा सकता था , रास्ता रोकने का मुक़दमा दर्ज हुआ चाहिए था , लेकिन वोह सब जो पूर्व में ही , कांग्रेस सरकार ने हिरासत में मोत को लेकर , कार्यवाही तय कर रखी है , चौबीस घंटे बाद हुई ,,, नतीजा , लेट लतीफी का कृतिम माहौल बनाने से , प्रशासनिक अक्षमता के चलते , जनता के बीच में गुमराही वाला संदेश देने के प्रतिपक्ष के प्रयास हुए , ,रास्ता रोकने के मुक़दमे दर्ज किये जाने , तुरंत कार्यवाही करने के कोई बोल्डली फैसले नहीं हुए ,, कोटा सहित राज्य के सभी ज़िलों के थानों में ,विभागों में ,कर्मचारियों , अधिकारीयों की नियुक्तियों , में नेताओं , अधिकारीयों की सिफारिशें होती है , अगर ऐसे अधिकारी , कर्मचारी ,थानाधिकारी , रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े जाते है , तो ऐसे भ्रष्ट आचरण वाले , अधिकारीयों की नियुक्ति , पदस्थापित बाबत , लिखित , मौखिक , सिफारिश करने वाले , ना हो , मंत्री हो ,विधायक हों , या फिर वरिष्ठ अधिकारी हों , सभी ऐसे लोगों से , भ्रष्टाचार निरोधक पुलिस को ,, इन्वेस्टिगेशन करना चाहिए ,, पूंछना चाहिए के आखिर ऐसे , भ्रष्ट अधिकारी को पदस्थापित करवाने में उनकी मंशा क्या रही थी , ऐसा होगा , तो फिर भ्रष्ट लोगों की सिफारिशों पर रोक लगेगी , और संबंधित ज़िले के एस पी , आई जी , कलेक्टर , मुख्य सचिव खुद ऐसे भ्रष्ट अधिकारीयों के पकड़े जाने पर , व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार होंगे , क्योंकि भ्रष्टाचार निरोधक विभाग , रंगे हाथों पकड़े ,मेहनत करे , और फिर ऐसे अधिकारी कर्मचारी , बहाल हो जाए , ऐसे अधिकारी कर्मचारी , परिपत्र के खिलाफ ,, विभागाध्यक्ष की पोस्टों सहित , मलाईदार पोस्टों पर नियुक्त कर दिए जाए , इस मामले पर भी गंभीर चिंतन होना ही चाहिए ,,, कोटा में नयापुरा थाना क्षेत्र में हाल ही में , कथित रूप से पुलिस हिरासत में एक शख्स की मोत हुई , तत्काल प्राथमिक रिपोर्ट के बाद , थानाधिकारी सहित , सभी पुलिस कर्मियों को हटाया जाता , पुलिस अधीक्षक की ज़िम्मेदारी तय होती , मजिस्ट्रेट जांच के , मानवाधिकार निर्देशों के तहत , जाँच के आदेश होते , मृतक के परिजनों से , मुआवज़े वगेरा संबंधित बात होती और , तुरंत फैसला होकर , खबर प्रकाशित हो जाती , तो शायद , प्रतिपक्ष को , रास्ता रोकने , माहौल खराब करने , कुप्रचार करने का समय नहीं मिल पाता , प्रतिपक्ष ने , संबंधित आरोपी पुलिसकर्मियों से अपने रिश्ते भी निभाए है , उन्होंने परिपत्र के अनुसार ही काम करवाया है , प्रतिपक्ष के एक भी नेता ने , ऐसी हिरासत मोत के मामले में ,फौजदारी मुक़दमा ,एफ आई आर दर्ज करने की मांग जान बूझकर नहीं उठाई , बस रस्मन कार्यवाही हुई , वही जो हर ज़िले में घोषणएं हो रही है , वही घोषणाएं हुई , और विरोध खत्म , अगर किसी भी तरह से अधिकारियों को मजबूर करके , उद्धापित करके , रास्ता रोकने का अपराध करके , व्यवस्थाओं के खिलाफ कुछ मांगे रखी जाती है , मजबूर करके उन मांगों को मनवाने की कोशिशें होती है ,तो ऐसे लोगों के खिलाफ उद्धापित करने का अपराध भी बनता है , लेकिन सरकार को , मंत्रियों को , नेताओं को , अधिकारियौं को , विचार करना होगा , कोन ऐसे अधिकारी कर्मचारी है , जो सिस्टम में शामिल रहकर भी , प्रतिपक्ष को मदद कर रहे है , उन्हें मौक़ा देकर , हीरो बनाने की कोशिश में है , लेट लतीफी , लापरवाही ,, ना नुकुर करके , सरकार के खिलाफ सवालिया निशान लगा रहे है , भ्रष्ट , लोगों को , मलाईदार पोस्टों , सीधे आम जनता से सम्पर्क वाली पोस्टों पर , पदस्थापित कर रहे है , प्रतिपक्ष या किसी के भी द्वारा , सत्तापक्ष के नेताओं , खासकर ,हाईकमान के शीर्ष नेताओं , वोह भी महिला के खिलाफ अपमान की शिकायतों में भी टालमटोल करने वाले अधिकारियों को नियुक्त किया गया है ,, ऐसे अधिकारीयों को सूचीबद्ध कर , उनसे नॉन फिल्ड पोस्टिंग देकर , वैसा ही काम करवाने के लिए उन्हें पदस्थापित करना चाहिए ,, ,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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