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29 सितंबर 2020

क्रिकेटर शिवकुमार शर्मा ,, लीडर शिवकुमार शर्मा ,, क़ानून विद शिवकुमार शर्मा ,, जस्टिस शिवकुमार शर्मा ,विधि आयोग के शिवकुमार शर्मा ,,स्कूली फ़ीस निर्धारण समिति के शिवकुमार शर्मा ,, जूनियर्स वकीलों के उस्ताद शिवकुमार शर्मा ,गरीबो ,शोषितों ,उत्पीड़ितों के हमदर्द शिवकुमार शर्मा

 

क्रिकेटर शिवकुमार शर्मा ,, लीडर शिवकुमार शर्मा ,, क़ानून विद शिवकुमार शर्मा ,, जस्टिस शिवकुमार शर्मा ,विधि आयोग के शिवकुमार शर्मा ,,स्कूली फ़ीस निर्धारण समिति के शिवकुमार शर्मा ,, जूनियर्स वकीलों के उस्ताद शिवकुमार शर्मा ,गरीबो ,शोषितों ,उत्पीड़ितों के हमदर्द शिवकुमार शर्मा ,, विधिक सहायता समिति , स्थाई लोक अदालत के राजस्थान के बुनियादी विचार शिवकुमार शर्मा ,, बहुमुखी प्रतिभा के धनी ,शिव कुमार शर्मा ,जब उलट होकर कुमार शिव होते है ,तो ,, संवेदनाओं से जुड़े माहौल के लेखक ,,गीतकार , कवि , गज़लकार हो जाते है ,,एक ही शख्स , और हज़ारो हज़ार खूबियां , असम्भव सा लगता है ,लेकिन यह हाड़ोती की परवरिश है ,चंबल के पानी की ताक़त है ,, कोटा का शैक्षणिक माहौल है ,,जो एक ही शख्स में हज़ारो हज़ार प्रतिभाएं कूट कूट कर भर गयी ,और हाड़ोती का ,कोटा का चंबल का ,, कोटा अभिभाषक परिषद का ,कोटा राजकीय महाविधायलय का ,सीना गर्व से चौड़ा हो गया ,, जी हाँ ,,दोस्तों जस्टिस शिव कुमार ,,एक क़ानून विद ,,एक न्यायधीश ,,लेकिन,, कुमार शिव ,,,नाम उलट होते है ,,एक ख्यातनाम कवि ,,,जज़्बातो को अल्फ़ाज़ों में बाँध कर खूबसूरती से पिरोने वाले एक जादूगर ,,एक खिलाड़ी ,,गरीबों के हमदर्द ,,मुफ्त ,,त्वरित न्याय्व्यस्था के पैरोकार ,,नीला सोना ,,यानी बून्द बून्द पानी बचाने के लिए क्रान्तीकारी क़दम उठाने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी , हमारे कोटा के वकील साथियो के बढे भाईसाहब ,,मार्गदर्शक ,शिवकुमार शर्मा के बारे में कुछ भी लिखना सूरज को दिया दिखाना है ,,लेकिन में दुस्साहसी हूँ ,ऐसा ही हूँ ,,में यह नाकामयाब कोशिश करने निकला हूँ ,,देश भर के मंचो पर ,,दूरदर्शन ,,आकाशवाणी पर ,,मैगज़ीन अखबारों में ,,गागर में सागर भरी कविताओ के लिए मंच लूटने वाले कुमार शिव जब शिवकुमार होते है तो देश के मुख्य क़ानूनविदों से भी बढ़तर इनकी क़ानून की जानकारी होती है ,,,
कोटा के ही नहीं राजस्थान के गौरव जस्टिस शिवकुमार शर्मा बहुमुखी प्रतिभा के धनि रहे है ,,,तेज़ तर्रार ,,,मानवीयता विचारधारा ,,मुखर क़ानून विद ,,,,प्रखर वक्ता ,,कवि ह्रदय शिवकुमार शर्मा का जन्म कोटा में 11 अक्टूबर 1946 में हुआ ,,,शिवकुमार शर्मा कॉलेज टाइम से ही मुखरवक्ता रहे और हिंदी में एम ऐ करने के कारण साहित्य से इनका विशेष लगाव रहा ,,,,,शिव कुमार शर्मा को लोग धीरे धीरे शिव जी के नाम से भी जानने लगे ,,,, अपनी कविताओं ,,ग़ज़लों और रचनात्मक आलेखों के शोक के साथ शिवजी ने 1967 में कोटा में वकालत शुरू की,,,, फिर जयपुर बेंच में फिर सुप्रीमकोर्ट में अपने पक्षकारों को पेचीदा मामलों में भी इन्होने,,, न्याय दिलवाकर क़ानून की जानकारी और इंटरप्रिटेशन का अपना हुनर जग ज़ाहिर किया ,,,निजी ज़िंदगी में हंसना ,,मुस्कुराना ,,,दोस्तों से दोस्ती निभाना,,, इनके अखलाक़ रहे ,, हमेशा मुस्कुराना ,, पढ़ना और पढ़ाना ,,, इनकी रूचि थी ,, कोई भी जूनियर इनसे जब भी किसी क़ानूनी पेचीदगी का सवाल करता तो एक मिनट में उसका समाधान इनके पास होता है ,,,,खुद भी क़ानून को पढ़ते और फिर अदालतों में फाइलों के फैक्ट के साथ इनके प्रस्तुतिकरण का अंदाज़ कुछ ऐसा रहता के पक्षकार के पक्ष में बल्ले बल्ले होती ,,,,कोटा कॉलेज में काफी दिनों तक शिव जी ने क़ानून की पढ़ाई भी लोगों को पढ़ाई ,,सियासत से जुड़े ,,कांग्रेस में पदाधिकारी रहे ,, तेज़ तर्रार तरीके से नेतृत्व किया,, फिर कोटा से विधायक का चुनाव भी लड़े ,,,,,,,,,अपने दोस्तों के साथ उठना बैठना ,,उनकी समस्याएं सुनना,, समझना और वक़्त ब वक़्त उनके काम आना ,,इनका स्वभाव रहा है ,,साहित्यिक विधा में कई पुस्तको का प्रकाशन ,,कई अख़बार मेग्ज़ीनों में इनका काव्य प्रकाशन ,,आकाशवाणी ,,दूरदर्शन पर सैकड़ों रचनाये पढ़ने के बाद,,, आप राष्ट्रीय कवि ,,चिंतक ,,कानूनविद के रूप में पहचान बना चुके थे ,,,,अदालत में अपने पक्षकार के हित में क़ानून के बारीक से बारीक मुद्दो को इस पुरज़ोर अंदाज़ में प्रस्तुतिकरण ,,,क़ानून की अपने पक्षकार के पक्ष में ऐसी सकारात्मक व्याख्या के न्याय का पडला,, इनके पक्ष में ही जाने लगा ,,इनकी इसी विधा ,, क़ानून के प्रति समर्पण ,,,क़ानूनी पंडित की शोहरत देखकर ,, एडवोकेट शिवकुमार शर्मा ,,कवि शिवकुमार शर्मा ,,,भाईसाहब शिवकुमार शर्मा ,,,,लेखक चिंतक लीडर शिवकुमार शर्मा को 6 अप्रेल 1996 माँननीय सुप्रीमकोर्ट ने क़ानून की व्याख्या और न्याय के लिए न्याय के मंदिर का देवता बनाकर,, शिवकुमार से जस्टिस शिवकुमार बना दिया ,,,,,,,,,अपना स्वभाव जस्टिस बनने के बाद भी यथावत रखते हुए,, किरायेदारी मामला ,,,,,,क्रिमनल ,,सिविल ,,,,रिट मामलों में ,,, लैंडमार्क जजमेट दिए ,,सस्ता सुलभ त्वरित न्याय के लिए,, एक नई विचारधारा स्थापित की ,,स्थाई लोक अदालत के कार्यकारी अध्यक्ष की हैसियत से पुरे राजस्थान के शहर ,,गाँव ढांढी में न्याय की अलख जगाई ,,किसी भी शख्स को बिना सुनवाई के सज़ा नहीं मिले,,, इसके लिए गिरफ्तारी के तुरंत बाद से ही,, थाना स्तर पर ही वकीलों का पेनल तैयार करवाया गया ,,पुरे राजस्थान में ,, जो आज स्थाई लोग अदालत का मॉडल है,, वोह लगभग जस्टिस शिवकुमार की महनत और लगन का ही नतीजा है ,,,,,घर घर लोकअदालत की भावना की अलख जगाना,, इनका मक़सद रहा ,,,ना किसी की जीत,,, ना किसी की हार,, इनका नारा रहा ,,,,,,,,,,,जस्टिस शिवकुमार का त्वरित सुनवाई और प्रकरण निस्तारण का इतीहास रहा है,,, सैकड़ों केस एक दिन में त्वरित निस्तारित,, जिनमे न्याय की गुणवत्ता भी शामिल रही ,,,ऐसे व्यस्त माहोल में भी जस्टिस शिवकुमार ने अपनी लेखन विधा को ज़िंदा रखा और वक़्त ब वक़्त साहित्यिक गतिविधियों में भी शामिल होते रहे ,,,,,,,राजस्थान हाईकोर्ट से वरिष्ठ जज का दर्जा प्राप्त कर सेवानिवृत्त हुए फिर आप को इनकी क़ानूनी विद्धता को देखते हुए ,,, भारत सरकार ने भारतीय विधि परिषद में सदस्य के रूप में नियुक्त किया जहां इन्होने कई क़ानूनी बदलाव के सुझाव दिए,, जिनमे त्वरित और सस्ता न्याय कैसा मिले,, इस मामले में प्रमुख सुझाव थे ,,जस्टिस शिव कुमार ने दहेज़ मामले में पति पत्नी के बीच,,,,विवादों को ज़मानतीय अपराध और राजीनामा योग्य बनाने का प्रारूप तय्यार किया,, जो अपरिहार्य कारणों से स्वीकृत नहीं हो सका ,,,विधि परिषद से निवृत्त होने पर शिवकुमार शर्मा की प्रतीभा को ध्यान में रखते हुए,, राजस्थान सरकार ने इन्हे राजस्थान में प्राइवेट स्कूलों की फीस वसूली की लूट खसोट देखकर इन्हे निजी स्कूलों की फीस निर्धारण समिति का चेयरमेन बनाया ,,,जहां इन्होने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर अंकुश लगा कर,,, अभिभावकों को राहत दिलवाई और निजी स्कूलों को भी पर्याप्त फीस वसूली का उचित निर्धारण कर उन्हें सम्मान दिया ,,वर्तमान में शिवकुमार शर्मा के परिवार के सदस्य इनके विधिक ज्ञान से प्रेरित होकर न्यायिक सेवा में कार्यरत है ,,,जबकि इनका पुत्र और पुत्रवधु फिल्म एक्टिंग से लेकर छोटे परदे के एक्टिंग के बादशाह कहलाने लगे है ,,,आप राजस्थान साहित्य एकेडमी के नामित सदस्य भी रहे है ,,साथ ही हिंदी विधिक सतर्कता समिति के सदस्य भी रहे है ,,,जबकि खेल के मैदान में राजस्थान ओलम्पिक एसोसिएशन के सदस्य भी रहे है ,,,शिवकुमार शर्मा ने शिव के नाम से जब वकालत की तो बेहिसाब मुकदमो को क़ानूनी रास्ता बताकर अपने पक्षकार के हक़ में फैसले करवाये ,,जब जस्टिस बने तो समाज को इनके फेसलो से इंसाफ मिला तो वकीलो और क़ानून से जुड़े लोगो को एक नयी दिशा एक नयी सीख मिली ,,शिव कुमार जब भी शिव कुमार से कुमार शिव हुए तो इन्हें तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इनकी हर साहित्यिक पंक्तियों पर इन्हें सुनने वालो का प्यार मिला ,,आज शिवकुमार कुमार शिव होकर जब सोशल मिडिया फेसबुक पर अपने धुरन्धर अंदाज़ में हमारे साथ जुड़कर अपने अल्फ़ाज़ों में एक नई सोच ,,एक नया फलसफा लेकर आते है ,,तो कुमार शिव कोटा के है ,,हमारे बीच रहने वाले हमारे अपने बढे भ्राता है सोचकर हमारा सीना गर्व से चोढा हो जाता है ,,और शिवकुमार शर्मा के सम्मान में खुद ब खुद सेल्यूट के लिए हाथ उठ जाता है ,,,,कई दर्जन पुस्तक प्रकाशन का संग्रह इनकी धरोहर है ,वोह लिखते है ,,ठोकर खाकर गिरा चाँद
ऐसे फैली है थवल चाँदनी
जैसे पिसे हुए गेंहूँ की
कई बोरियाँ बिखर गई हों---
(गीत का मुखड़ा ----गीत संग्रह"एक गिलास दुपहरी"से)
,,,,दोस्तों यह है हमारी कोटा की कुशल ,,साहित्यिक ,,,क़ानून विद ,,,,समाजेवी ,,,नेतृत्व क्षमता वाले मुखरवक्ता की बहुमुखी प्रतिभा जिसे सलाम सेल्यूट ,,,,,,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान ,

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