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05 सितंबर 2020

राजस्थान सरकार में बैठे कुछ अधिकारी ,,ऊलजलूल , अव्यवहारिक आदेशों से ,सरकार की फ़ज़ीहत कराने में जुटे है ,इनमे से ही ,एक प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अलग अलग आदेश लोगों को भड़काने का काम कर रहे है

 राजस्थान सरकार में बैठे कुछ अधिकारी ,,ऊलजलूल , अव्यवहारिक आदेशों से ,सरकार की फ़ज़ीहत कराने में जुटे है ,इनमे से ही ,एक प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के अलग अलग आदेश लोगों को भड़काने का काम कर रहे है ,,निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा के इन आधे अधूरे आदेशों से ,राजस्थान में तृतीय भाषा , उर्दू ,पंजाबी ,सिंधी पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक ,और इस भाषा को भविष्य में जारी रखने के समाजों में गलत फहमी पैदा करने की कोशिश की गयी है ,दो दिन से इस मामले अख़बारों की खबर ,सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की सुर्ख़ियों में है , ताज्जुब इस बात का है के यह अधिकारी ,,सरकार के मंत्री और जन प्रतिनिधि विरोध के बाद ,संशोधित आदेश तो जारी करने के लिए राज़ी हुए , लेकिन संशोधित आदेश में भी ,इन तीनों तृतीय भाषाओं को लेकर भ्रम की  स्थिति बढ़ी है ,गोल मोल भाषा में ,,जो पूर्व में जिला शिक्षा अधिकारीयों ने इस भाषा को स्वीकृति दी है ,उसे ख़ारिज फिर से करते हुए ,इन आदेशों को बीकानेर विशेष प्रकोष्ठ में मंगाए गए है ,, जिन पर तथाकथित ,शिक्षा क्षेत्र में इन तीनों भाषाओं को खत्म कर देने की साज़िश के तहत जारी स्टाफिंग पैटर्न के नियमों की पाबंदी तय की गयी है ,,, सभी जानते है ,,कांग्रेस सरकार ,,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ,प्रदेश अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ,शिक्षा मंत्री छत्तीस क़ौमों के नेता है ,और वोह सभी भाषाओं ,सभी समाजों का सम्मान करते है ,उनके सख्त निर्देश हैं के ,,संस्कृत ,सिंधी ,पंजाबी ,उर्दू सभी ज़ुबानों के साथ जनसंख्या और  इन भाषाओँ को पढ़ने के इच्छुक छात्र छात्रों की संख्या के आधार पर इन्हे अधिकार दिए जाये ,,इन्हे उक्त भाषाओं को प्रारम्भिक स्कूल व्यवस्था में पढ़ने , पढ़ाने से वंचित नहीं किया जा सकता ,, लेकिन , शिक्षामंत्री ,मुख्यमंत्री के इन सख्त निर्देशों के बावजूद भी ,, नौकरशाह इन तृतीय भाषाओं को स्टाफिंग पैटर्न के बुनियादी पैटर्न के नाम पर ,अगर , मगर ,किन्तु ,लेकिन,  परन्तु ,के फेर में फंसा कर ,,नियमों का हवाला देकर ,पूर्व में शिक्षा अधिकारीयों द्वारा स्वीकृत व्यवस्था को ख़ारिज कर रहे है ,और दूसरी तरफ ,सरकार के लोगों को ,,आम जनता को गुमराह करने के लिए दो लाइन अलग से लिख रहे है के ,इन भाषाओँ को स्कूल में पढ़ने के इच्छुक लोगों को वंचित नहीं करे ,यानी ,भाषा तो पढ़ाओ ,लेकिन इन भाषाओं को पढ़ाने के लिए अध्यापक नहीं देंगे ,और जो स्वीकृति जिला शिक्षा अधिकारीयों ने पहले दे दी है ,उसे हम ख़ारिज करते ,है , इसकी जानकारी विशेष प्रकोष्ठ में दो ,फिर होगा जो देखा जाएगा ,, गज़ब है ,अधिकारीयों का लोगों को गुमराह करने ,सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का यह खेल ,,, सरकार के खिलाफ ,कांग्रेस के वोटर्स को भड़काने की अधिकारीयों की यह साज़िश क़तई बर्दाश्त योग्य नहीं है ,,,  राजस्थान  भाजपा की सरकार ने ,,तृतीय भाषा खत्म करने के लिए उर्दू विषय को  टारगेट करते हुए , उर्दू विषय खत्म कर दिए गए थे ,, उसी तर्ज़  पर ,यहाँ बाबूराज में ,,नेकर छाप नौकरशाहों ने कांग्रेस सरकार को गुमराह कर ,,स्टाफिंग पैटर्न का संशोधन जारी किया और स्टफिंग पैटर्न के बिंदु संख्या 5 के उप बिंदु 3 में तृतीय भाषा पढ़ने के इच्छुक सर्वाधिक छात्र छात्रों की संख्या के आधार पर ,जिस तृतीय भाषा को ज़्यादा छात्र पढ़ने के इच्छुक होंगे उसे ही ,स्वीकृति दी जायेगी ,बाक़ी भाषा बंद होगी ,इस बिंदु के हिसाब से ,,,उर्दू ,सिंधी ,पंजाबी ,भाषा पढ़ने वालों की संख्या अगर संस्कृत पढ़ने के इच्छुक बच्चों से कम है और फिर  यह भाषाएँ इन स्कूलों में नहीं पढ़ाइ जा सकेंगी ,अजीब मज़ाक़ है ना ,, फिर बिंदु संख्या 9 व 10  में    विषय संबधित स्वीकृत ,,समिति तय करेगी ,, अध्यापकों की स्वीकृति स्वीकृत पद के अनुरूप होगी ,या फिर वित्तीय स्वीकृति के बाद होगी ,, नौकरशाहों को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ,शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा निर्देश जारी कर ,राजस्थान के स्कूलों में , उक्त तृतीय भाषाओं से पक्षपात को रोकने के सख्त आदेश जारी हुए ,, दिनाँक 2 मार्च 2020 को जारी आदेश में निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा ने सभी शिक्षा अधिकारीयों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350 अ के तहत भाषाई अल्पसंख्यक को संरक्षित करने के आवश्यक निर्देश जारी करते हुए ऐसा नहीं करने पर दोषी अधिकारियो के खिलाफ ,  सख्त कार्यवाही किये जाने के आदेश शिक्षा अधिकारीयों को दिए गये ,, उर्दू सहित दूसरी तृतीय भाषा  स्कूलों में छात्रों की संख्या के आधार पर विषय शुरू करने के मामले में ,,कई जिला शिक्षा अधिकारीयों ने वर्ष 2004 के गुजराल समीति के निर्देशों पर जारी ,सरकारी आदेश की पालना में स्कूलों में उर्दू सहित ,सिंधी ,पंजाबी आवश्यकतानुसार खोलने के निर्देश जारी किये ,बस यही बात , राजस्थान सरकर में नौकरशाहों को चुभ गयी और उन्होंने ,,कांग्रेस सरकार को बदनाम करने की साज़िश रचते हुए ,आधे अधूरे ,,अस्पष्ट आदेश निकाल कर ,आम जनता को गुमराह करते हुए माहौल बनाने की कोशिश की के , सरकार उक्त भाषाओँ के खिलाफ है ,अख़बारों की खबर बेवकूफी भरे नौकरशाहों के आदेशों से अख़बारों में ऐसे  प्रकाशित हुई जैसे ,,राजस्थान सरकार इन भाषाओं के खिलाफ है ,, दिनांक 6 अगस्त  2020 झालावाड़ में उर्दू विषय खोलने के खिलाफ अधिकारीयों को धमकाया गया और ,फिर झालावाड़ जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों में उर्दू विषय संचालित करने की जो अनुमति जारी की थी उसे खारिज की गयी ,,आदेश खुद पढ़िए , इसके बाद प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक ने सख्त आदेश दिनांक ,,2 सितंबर 2020 को  स्टफिंग पैटर्न 28 मई 2019 का हवाला देते हुए राजस्थान के सभी जिला शिक्षा अधिकारीयों की ऐसी स्वीकृति को खारिज करते हुए , इसे विधि विरूद्ध बताया और उक्त तृतीय भाषा जो जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर पर स्वीकृत हुए उन्हें सब को निरस्त करते हुए ,,एक ही तृतीय विषय को संचालित करने के निर्देशों के साथ स्वीकृति ख़ारिज की गयी और प्रकोष्ठ में जानकारी देने को कहा ,बस इस आदेश के बाद ,,अख़बारों की खबर सुर्खियां बनी ,ऐसा दिखाने का प्रयास हुआ जैसे ,सरकार , उर्दू ,पंजाबी ,सिंधी विषय को बंद कर रही है ,,इस नौकरशाही अस्पतष्ट आदेश जो भ्रांतिया पैदा हुई इसे ,खुद राजस्थान सरकार के शिक्षा मंत्री ,गोविन्द सिंह डोटासरा , मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गंभीरता से लिया ,हलचल मची ,विद्रोह शुरू हुआ ,और विधायक वाजिब अली ,विधायक ज़ाहिदा खान ,दानिश अबरार , रफीक अहमद , अमीन कागज़ी , अल्पसंख्यक कर्मचारी अधिकारी महासंघ के हारुन खान ,,अल्पसंख्यक विभाग के आबिद कागज़ी ,,प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य अख्तर खान अकेला सहित कई संगठनों में इसका खुल कर विरोध किया , मुख्यमंत्री महोदय ,शिक्षा मंत्री को पत्र लिखे ,, नौकरशाही की हद देखिए ,, इतना होने पर भी ,सरकार की बदनामी करने के प्रयासों में यह नौकरशाह ,अगर , मगर ,किन्तु , लेकिन परन्तु को लेकर ,साज़िशों में लगे है ,, आज दिनांक 5 सितंबर 2020 को फिर नया संशोधित आदेश  निकाला ,गया उस आदेश में भी वही भड़काऊ साज़िश , आदेश में स्टाफिंग पैटर्न की धारा 10 का हवाला दिया गया ,, सभी जिला शिक्षा अधिकारीयों के स्तर पर स्वीकृत संचालित तृतीय भाषा के आदेशों को ख़ारिज करते हुए ,प्रकोष्ठ में भेजने को कहा ,यानी ,जो पूर्व में तृतीय भाषा ,उर्दू ,पंजाबी ,सिंधी भाषा , जिला शिक्षा अधिकारी के स्तर पर ,आदेशित कर ,स्कूलों में संचालित की गयी वोह पूरी तरह से ख़ारिज हो गयी , और दूसरी तरफ ग़ालिब दिल बहलाने को ख्याल अच्छा है की तर्ज़ पर ,एक लाइन लिखते हुए निर्देशित किया के किसी भी छात्र ,छात्र को स्कूलों में तृतीय भाषा पढ़ने से रोका नहीं जाए ,, कोनसी तृतीय भाषा ,और कैसे पढ़ेगा , कोई छात्र जब स्कूल  तो है ,छात्र पढ़ने वाले है ,लेकिन अध्यापक  नहीं है तो फिर कैसे पढ़ाई होगी ,इस तृतीय भाषा के छात्र छात्रों की ,सोचने की बात है ,,,  आज कोटा शहर क़ाज़ी अनवार अहमद की अध्यक्षता में ,तहरीक ऐ उर्दू राजस्थान के पदाधिकारियों की बैठक में स्टाफिंग पैटर्न नियमों  सहित ,उक्त अलग अलग आदेशों का पोस्टमार्टम किया गया ,और नतीजा साफ़ है  , के नौकरशाहों के इन आदेशों में स्वीकृत संचालन तृतीय भाषा के जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश निरस्त , प्रत्यारहित किये गये है ,अगर आज जारी आदेश में ,शिक्षा निदेशालय  की मंशा साफ़ होती तो ,  वोह उक्त पूर्व आदेशों को प्रत्याहरहित ,यानि ख़ारिज करने की जगह ,,अनुमोदन शब्द इस्तेमाल कर ,,बीकानेर में उक्त आदेशों को अनुमोदन के लिए मंगा कर अनुमोदित करते ,तब तक उक्त आदेश की पालना में ,  स्थिति यथावत रहती ,,  लेकिन नौकरशाहों का तो बस ,इस सरकार को बदनाम करने  की साज़िशें रचना है ,,  आधे अधूरे   ,  अस्पष्ट आदेश जारी कर , लोगों को , मीडिया को सरकार के खिलाफ भड़काने की  साज़िशे रचना है ,,  इस मामले में ,,कांग्रेस के पदाधिकारियों द्वारा ,तृतीय भाषा विषय के मामले में गुमराह करने वाले आदेशों से , राजस्थान में जो तृतीय भाषा ,उर्दू ,संस्कृत ,सिंधी भाषा खत्म करने की गलत खबरों का प्रचार प्रसार हुआ है ,, ,ऐसे गुमराही ,अस्पष्ट आदेश जारी करने वाले अधिकारीयों के खिलाफ कार्यवाही की मांग  की जायेगी ,साथ ही स्पष्ट संशोधित आदेश जिसमे ,,  स्पष्ट हो के जहाँ उक्त भाषाएँ खोल  दी गयी है ,वहां स्थिति यथावत रहेगी और ,अनुमोदन की  कार्यवाही के साथ ,स्कूलों में उक्त विषय  नियमित निर्बाध तरीके से संचालित रहेंगे ,,,,  अख्तर  खान अकेला कोटा राजस्थान

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