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15 अगस्त 2020

रोज़ सुबह शाम दोपहर

 रोज़ सुबह शाम दोपहर
डॉक्टर की दवा की तरह ,
तुम मुझे यूँ ही बेइज़्ज़त करते हो ,
खुश हो जाते हो तुम
मेरे साथ यह सब करके
रोज़ तुम्हारी यह ख़ुशी है तो यही सही ,, अख्तर

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