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03 जुलाई 2020

अल्लाह ने एक बस्ती का उदाहरण दिया है, जो शान्त संतुष्ट थी

111 ﴿ जिस दिन प्रत्येक प्राणी को अपने बचाव की चिन्ता होगी और प्रत्येक प्राणी को उसके कर्मों का पूरा बदला दिया जायेगा और उनपर अत्याचार नहीं किया जायेगा।
112 ﴿ अल्लाह ने एक बस्ती का उदाहरण दिया है, जो शान्त संतुष्ट थी, उसकी जीविका प्रत्येक स्थान से प्राचूर्य के साथ पहुँच रही थी, तो उसने अल्लाह के उपकारों के साथ कुफ़्र किया। तब अल्ल्लाह ने उसे भूख और भय का वस्त्र चखा[1] दिया, उसके बदले जो वह[2] कर रहे थे।
1. अर्थात उन पर भूख और भय की आपदायें छा गईं। 2. अर्थात उस बस्ती के निवासी। और इस बस्ती से अभिप्रेत मक्का है, जिन पर उन के कुफ़्र के कारण अकाल पड़ा।
113 ﴿ और उनके पास एक[1] रसूल उन्हीं में से आया, तो उन्होंने उसे झुठला दिया। अतः उन्हें यातना ने पकड़ लिया और वे अत्याचारी थे।
1. अर्थात मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मक्का के क़ुरैशी वंश से ही थे, फिर भी उन्हों ने आप की बात को नहीं माना।
114 ﴿ अतः उसमें से खाओ, जो अल्लाह ने तुम्हें ह़लाल (वैध) स्वच्छ जीविका प्रदान की है और अल्लाह का उपकार मानो, यदि तुम उसी की इबादत (वंदना) करते हो।
115 ﴿ जो कुछ उसने तुमपर ह़राम (अवैध) किया है, वह मुर्दार, रक्त और सुअर का मांस है और जिसपर अल्लाह के सिवा दूसरे का नाम लिया गया[1] हो, फिर जो भूख से आतुर हो जाये, इस दशा में कि वह नियम न तोड़ रहा[2] हो और न आवश्यक्ता से अधिक खाये, तो वास्तव में, अल्लाह अति क्षमाशील, दयावान् है।
1. अर्थात अल्लाह के सिवा अन्य के नाम से बलि दिया गया पशु। ह़दीस में है कि जो अल्लाह के सिवा दूसरे के नाम से बलि दे उस पर अल्लाह की धिक्कार है। (सह़ीह़ बुख़ारीः1978) 2. (देखियेः सूरह बक़रा, आयतः173, सूरह माइदा, आयतः3, तथा सूरह अन्आम, आयतः145)
116 ﴿ और मत कहो -उस झूठ के कारण, जो तुम्हारी ज़ुबानों पर आ जाये- कि ये ह़लाल (वैध) है और ये ह़राम (अवैध) है, ताकि अल्लाह पर मिथ्यारोप[1] करो। वास्तव में, जो लोग अल्लाह पर मिथ्यारोप करते हैं, वे (कभी) सफल नहीं होते।
1. क्यों कि ह़लाल और ह़राम करने का अधिकार केवल अल्लाह को है।
117 ﴿ (इस मिथ्यारोपन का) लाभ तो थोड़ा है और उन्हीं के लिए (परलोक में) दुःखदायी यातना है।
118 ﴿ और उनपर, जो यहूदी हो गये, हमने उसे ह़राम (अवैध) कर दिया, जिसका वर्णन हमने इस[1] से पहले आपसे कर दिया है और हमने उनपर अत्याचार नहीं किया, परन्तु वे स्वयं अपने ऊपर अत्याचार कर रहे थे।
1. इस से संकेत सूरह अन्आम, आयतः26 की ओर है।
119 ﴿ फिर वास्तव में, आपका पालनहार उन्हें, जो अज्ञानता के कारण बुराई कर बैठे, फिर उसके पश्चात् क्षमा याचना कर ली और अपना सुधार कर लिया, वास्तव में, आपका पालनहार इसके पश्चात् अति क्षमी, दयावान् है।
120 ﴿ वास्तव में, इब्राहीम एक समुदाय[1] था, अल्लाह का आज्ञाकारी एकेश्वरवादी था और मिश्रणवादियों (मुश्रिकों) में से नहीं था।
1. अर्थात वह अकेला सम्पूर्ण समुदाय था। क्यों कि उस के वंश से दो बड़ी उम्मतें बनीं: एक बनी इस्राईल, और दूसरी बनी इस्माईल जो बाद में अरब कहलाये। इस का एक दूसरा अर्थ मुखिया भी होता है।

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