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01 जुलाई 2020

,समाजसेवक ,एस फ़ारूक़ी ,कमोबेश यूँ ही ,प्यार ,,मोहब्बत के पुरखुलूस वातावरण की उम्मीद ,में , मोहब्बत , अख़लाक़ की लहलहाती फसल को देखने के ,लिए , मोहब्बत , खुलूस के बीज बिखेरते है


मुट्ठी भर माफी के
बीज बिखेर दो ,
नाराज़ दिलों की ज़मीन पर ,
बारिश का मौसम ,
आ रहा है ,,
शायद अपनापन
फिर से पनप जाए ,,,
इन्हीं अल्फ़ाज़ों ,,इसी सोच के साथ हर बारिश में अपने जन्म दिन के वक़्त पत्रकार ,समाजसेवक ,एस फ़ारूक़ी ,कमोबेश यूँ ही ,प्यार ,,मोहब्बत के पुरखुलूस वातावरण की उम्मीद ,में , मोहब्बत , अख़लाक़ की लहलहाती फसल को देखने के ,लिए , मोहब्बत , खुलूस के बीज बिखेरते है ,,जी हाँ दोस्तों ,, किसी  की आह निकले , उसके हमदर्द बनकर कोई उसी के मुंह से खुशियों की वाह निकलवा दे , यह चमत्कार ही है ,, कोटा के  वरिष्ठ पत्रकार ,,क़लमकार ,समाज सेवक ,,भाई एस फ़ारूक़ी कमोबेश इन खूबियों के बादशाह है ,, हरदिल अज़ीज़ भाई एस फ़ारूक़ी ,,उर्फ़ शाहबुद्दीन फ़ारूक़ी का आज कहने को चाहे 70 साल हों , लेकिन उनकी सोलहवीं  सालगिरह आज उनके चाहने वाले मना रहे है ,,उन्हें पुरखुलूस दुआओं के साथ बधाई ,,मुबारकबाद ,,, एस फ़ारूक़ी ,जब कोटा में पत्रकारिता की क ख ग लिखी जा रही ,थी तब कोटा में छात्र छात्राओं में अध्ययन अध्यापन का माहौल बनाने के लिए स्टूडेंट टाइम्स अख़बार के प्रकाशक थे ,,फिल्म निर्देशक प्रोड्यूसर थे , वोह बिलिट्स  समाचार पत्र सहित कई नामचीन अखबारों के रिपोर्टर ,रहे , सत्य कहानियां ,, मनोहर कहानियां ,,मुक्त ,सरिता ,धर्मयुग जैसी मैगज़ीन में इनके लेख प्रकाशित होते रहे है ,,, दर्जनों समाजसेवी संस्थाओं ,, कई पत्रकार संगठनों से जुड़े ,,भाई एस फ़ारूक़ी ने ,,हाल ही में कोरोना संकट के वक़्त इनके इलाक़े में ,आसपास ,सेवाकार्यों के लिए ,,, इनके निवास को ,,कोरोना ,नियंत्रण प्रबंधन ,कंट्रोल रूम बना कर कमोबेश हर ज़रूरतमंद को ,अलग अलग संस्थाओं से मदद लेकर ,मदद करवाई गयी ,,,,बहुमुखी प्रतिभा के धनी ,आर्टिस्ट  ,,एक्टर ,फिल्म प्रोड्यूसर , निर्देशक ,ग़ज़ल गायक ,,लेखक ,पत्रकार ,समाजसेवी , फोटोग्राफर , कोरियोग्राफर ,वीडियोग्राफर ,सभी कुछ खूबियां तो इस अकेली शख्सियत मेरे बढे भाई में हैं ,,फिल्म मेकर ,पत्रकार एस फ़ारूक़ी ,जब कोटा कोचिंग गुरुओं की पाठशाला नहीं हुआ करती थी ,तब से ही अपने समाचार पत्र ,,स्टूडेंट टाइम्स के नाम से ,छात्र ,छात्राओं  की समस्याओ को उठाते रहे है   इनके प्रकाशन स्टूडेंट टाइम्स ने छात्रों में हाड़ोती विश्विद्यालय स्थापना की मांग को लेकर ,बढे आंदोलन का बिगुल फूंक दिया ,,आज हाड़ोती में छात्रों के उस ऐतिहासिक आंदोलन की बदौलत ही ,कोटा में विश्विद्यालय खुले ,यहाँ ,पढ़ो , पढ़ाओ ,,कोचिंग का वातावरण बना ,,,एस फ़ारूक़ी ने  छात्र छात्राओं के डिप्रेशन से लेकर उनके उत्साहवर्धन ,प्रोत्साहन को लेकर कई आक्रामक सुझावात्मक लेख लिखे,, जिनकी वजह से कई साल पहले का तात्कालिक प्रशासन सतर्क होकर ,कई हादसों को बचा सका ,, ,,माशा अल्लाह उनकी उम्र ठहर सी गयी है ,उनके जवान दिल में अभी भी हज़ारो ख्वाहिशे बाक़ी है ,तो उनका हौसला आज भी ,देश ,समाज ,पत्रकारिता को निखारने के लिए संघर्ष कर रहा है ,भाई शाहबुद्दीन फ़ारूक़ी को उनके जन्म दिन के मौके पर  बधाई ,मुबारकबाद ,उनके हौसले को सलाम ,,कम्पोज़ ,,ट्रेंडील छपाई ,उस वक़्त की पत्रकारिता ,,ब्यूरोक्रेट्स ,,सियासत के मुखालिफ मुखर होकर उन्हें आयना दिखाती थी ,,उनकी निर्भीकता ,विश्वसनीयता के आगे सभी नतमस्तक हुआ करते थे ,दोस्तों पत्रकारिता का वोह दौर जब ब्यूरोक्रेट्स चाहे कितने ही ऊँचे ओहदे पर हो ,,मंत्री ,मुख्यमंत्री चाहे कितना ही महत्वपूर्ण पद हो ,पत्रकारों के सम्मान के साथ साथ ,,उनकी लेखनी से खौफ खाते थे ,बहुत कोशिश के बावजूद भी क़लम उनकी चाटुकार नहीं बन पाती थी ,पत्रकार उनके तलवे नहीं चाटा करर्ते थे ,उस वक़्त पत्रकार नेताओ ,ब्यूरोक्रेट्स के रक्षक ,प्रवक्ता नहीं हुआ करते थे ,,हाल यह था पत्रकारों की प्रतीक्षा ब्यूरोक्रेट्स ,,सियासी नेता किया करते थे ,और अदब के दायरे में उनके सवालों का जवाब ,उनका आत्मस्वाभिमान के साथ उनका सम्मान उनकी ज़िम्मेदारी होती थी ,,खेर वोह दौर खत्म हुआ ,पत्रकारिता का जो दौर है उससे सभी दुखी है ,लेकिन कुछ आज भी है जो पत्रकारिता के इस स्वाभिमान को ज़िन्दा किये हुए है ,ऐसे सभी पत्रकारों ,क़लमकारो को मेरा और फ़ारूक़ी भाई का सलाम ,,,,,एस फ़ारूक़ी छात्र जीवन से ही राजनीति में रहे ,,यह कांग्रेस के संयुक्त सचिव रहकर संघर्षशील कार्यो में जुटे रहे ,,फिर छात्रों की समस्याएं जब इन्होने देखी ,,तो कोटा के छात्रों को एक नई दिशा ,,नया संदेश ,,सभी शैक्षणिक जानकारियां एक साथ देने के लिए एस फारुकी ने स्टूडेंट टाइम्स अखबार का प्रकाशन शुरू किया ,,छात्र आंदोलन के दौरान इस अखबार ने छात्रों को दिशा हींन होने से बचाया ,,हिंसक घटनाओं को छात्रों को प्रेरित कर रुकवाया ,,छात्रों के खिलाफ झूंठे मुकदमों से भी इस अखबार स्टूडेंट टाइम्स की निगरानी से छात्र बच सके ,,एस फारुकी पुराने वक़्त में अखबारों का सरताज कहे जाने वाले समाचार पत्र ,,ब्लिट्ज़ के कोटा से प्रमुख रिपोर्टर थे ,,दैनिक ट्रब्यून ,,नवज्योति सहित कई अखबारों में इन्होने पत्रकारिता के जोहर दिखाए ,,एस फारुकी को सच्ची घटनाएं लिखने का शोक रहा ,इसीलिए इन्होने फिर अपना रुख सच्ची कहानिया ,,मनोहर कहानिया की तरफ किया ,,एस फारुकी की कई खोजपूर्ण रिपोर्टे ,,आक्रामक तेवर में प्रकाशित हुई ,,यह पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद फिल्म कलाकारों के सम्पर्क में आने के बाद ,,फिल्मी लाइन की तरफ गए ,,जहां कोटा की सबसे पहली टेली फिल्म ,,त्याग ही त्याग ,,का निर्माण हुआ ,,इस फिल्म के कथाकर खुद एस फारुकी थे ,,निर्देशक ,,,निर्माता भी एस फारुकी थे ,,एक छात्र छात्रा की प्यार भरी कहानी इस फिल्म में इन्होने बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत की ,,इस फिल्म की पूरी शूटिंग इन्होने कोटा में ही की ,,इसमें कोटा के ही कलाकारों को स्थान देकर उनकी प्रतिभाओं को उजागर करने का प्रयास किया गया ,,एस फारुकी ने स्थानीय  कलाकारों को मुंबई के फिल्मी कलाकारों  से सम्पर्क स्थापित करवाकर ,,कोटा की प्रतिभाओं को फिल्मों में स्थान दिलवाने का रास्ता साफ किया ,,आज भी इनसे जुड़े कई कलाकार मुंबई की बढ़ी फिल्मों में काम कर रहे है ,,,स्वभाव से धीर गम्भीर ,,लेकिन बच्चों में बच्चे ,,छोटों में छोटे ,,बुज़ुर्गों में बुज़ुर्ग का स्वभाव रखने वाले इस मृदुल स्वभावी शख्सियत के अंदर एक पत्रकार ,,एक कलाकर ,,एक फिल्म निर्माता ,,आज भी हिलोरे ले रहा है ,,आज की पत्रकारिता में गरीबो ,,थड़ी होल्ड्र्स सहित रोज़ कमाने वालो की खबरें जब नहीं देखते है तो वह निराश हो जाते है,,एस फारुकी यारों के यार है इसीलिए आज भी इन्होने अपने पुराने साथियो को धरोहर बनाकर सजो कर रखा है ,,में शुक्रगुज़ार हूं एस फारुकी का ,,जब डिजिटल आधुनिक फिल्म शूटिंग तकनीक नहीं थी ,,कैमरे से सीधे शूटिंग हुआ करती थी ,,तब एस फारुकी ने अपने खुद के निर्देशन में मेरी शादी के खुशनुमा पलो को ,,एक सुपर हिट फिल्म के रूप में क़ैद किया था ,,मेरी शादी की इस पूरी फिल्म को एस फारुकी ने निर्देशित सम्पादित कर ऐसे खूबसूरत गीतों से भर दिया ,,ऐसे खूबसूरत लम्हों ,,ऐसे सभी रस्मो रिवाजो को इसमें क़ैद किया ,,और शायद पुरानी तकनीक की मेरी शादी की पहली फिल्म थी जिसे इन्होने अपने फ़िल्मी मेकिंग अंदाज़ में तय्यार किया था , जो आज भी यादगार है ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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