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27 जून 2020

भारत देश ,,भारत की सीमाएं , भारत की आर्थिक स्थिति ,,वर्तमान हालत खतरे ,है

भारत देश ,,भारत की सीमाएं , भारत की आर्थिक स्थिति ,,वर्तमान हालत खतरे ,है ,इन हालातों में हमे आपसी जंग की नहीं ,दुश्मनों से , हालातों से मिलकर जंग लड़ने की ज़रूरत है ,,,, इस जंग में फौजियों की जो भाजपा ब्रिगेड है ,दूसरी सियासी पार्टियों से जुड़े फौजियों की जो ब्रिगेड ,है उन्हें भी सार्वजनिक चैनल पर बहस बाज़ी से दूर रखने के सख्त नियमों की पालना की ज़रूरत है ,,, देश के हालात सभी जानते है ,, एक तरफ तो ,देश कोरोना से जंग लड़ रहा ,है दूसरी तरफ ,इस जंग में आर्थिक स्थिति के बिगड़े दौर  में हमारे देश में ,शिक्षा ,रोज़गार ,उद्योग उत्पादन के हालात रुक से गए ,है ,रोज़ मर्रा हर ज़िले में औसत दो तीन आत्महत्याए होने लगी है ,,,यह देश के लिए खतरनाक दौर ,,है  सीमाओं पर दो  कोड़ी का पाकिस्तान षड़यत्र रच रहा ,है , तो नेपाल जैसा भारत की बिना शर्त मदद हर बार लेकर डकार जाने वाला जैसा देश भी नमकहरामी पर तुला ,,है , चीन जिसके साथ हमारे देश सद्भाव ,दिखाया झूले में बैठकर साथ झूले ,चीन के सामानों को लाख विरोध के बावजूद भी भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर क़ानून बनाकर ,हमारी सरकार ने प्रतिबंधित नहीं ,किया ,इतना ही नहीं दोस्ती का सामंजस्य बिठाने के उद्देश्य से ,हमारे देश के इंजीनियरों को बेरोज़गारी के सवाल पर चाहे हमने पकोड़े बेचने का संदेश देकर चुप कर दिया ,हो लेकिन ,हमारे लोह पुरुष कहे जाने वाले सैद्धांतिक ,विदेशों से नफरत करने वाले ,सरदार वल्ल्भ भाई पटेल की तीन हज़ार करोड़ की मूर्ति बनाने के लिए हमने चीन को रोज़गार दिया ,, हमारी सरकार ,,हमारी सरकार के भक्त जन ,कोई  भी सवाल उठाते ही उसका जवाब देने की जगह आरोपों पर आते है ,किसी भी सवाल का जवाब सिर्फ इंद्रा ,नेहरू ,राहुल ,,सोनिया ,प्रियंका द्वारा पैदा की गयी परेशानी बताकर ,,न्यूज़ चैनल पर पेड़ वर्कर्स ,पेड़ ,कार्यकर्ता पेड़ फौजी कार्यकर्ताओं से ,बहस छिड़वा कर शतुरमुर्ग की तरह ,, रेत में मुंह छुपा कर खुद को बचाने की कोशिशें करते  है ,,सामान्य सियासत में ,चुनाव के वक़्त यह सब ठीक ,है लेकिन आज देश ,देश के हालात , आपसे हमसे ,सियासत की क़ुर्बानी मांगते ,,है , एकजुटता मांगते ,है ,एक दूसरे के  साथ सियासी भेदभाव मिटाकर ,कोई सर्वसम्मत फेसला मांगते है ,, आज देश के आर्थिक हालात हो ,देश के शैक्षणिक ,हालात हों ,,क़ानून व्यवस्था हो ,, पेट्रोल डीज़ल के मूल्यों की वृद्धि हो ,,सीमाओं पर चीन ,पाकिस्तान ,,नेपाल के आक्रामक हालात हों ,हमारी आपसी फुट , आरोप प्रत्यारोप  , एक दूसरे को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति ,,इन  हालातों को बढ़ावा दे रहे ,है ,जब देश ने तुम्हे प्रधानमंत्री बनाया ,है तो आज के हर हालात की ज़िम्मेदारी आपको स्वीकार करना ही होगा ,,आपकी ज़िम्मेदारी सभी को साथ लेकर ,इन हालातों से उबरने की कोशिशों की ,है जो आपको करना ही ,होगा ,वर्तमान हालातों में ,,आरोप , प्रत्यारोप का वक़्त नहीं ,पारदर्शिता ,आपसी विश्वास ,एक दूसरे को साथ ,लेकर सुझावों पर  अमल कर देश को सुरक्षित ,रखकर फिर से मज़बूत बनाने का है ,, हमारी एकता ,हमारी एक जुटता के आगे ,चीन हो ,नेपाल हो ,पाकिस्तान हो ,यह सब मुंग और मसूर की दाल से ज़्यादा कुछ नहीं है ,,,,,,प्रतिपक्ष को बयानबाज़ी ,आरोप प्रत्यारोप पर चुप्पी साधना ,होगी हाँ ,क्या हुआ ,कैसे हुआ ,क्यों हुआ ,अब क्या करेंगे ,कैसे ,करेंगे इसके जवाब जब मीडिया छुपायेगा ,जब देश की सर्वोच्च ताक़त जवाब नहीं देगी , तो जवाब तो माँगना ही होगा ,कई सवालों के जवाब हो सकता ,है सुरक्षात्मक दृष्टि से दिया जाना संभव नहीं ,हों तो ,यह कहे तो सही के इन सवालों का तो यह जवाब ,है बाक़ी इन सवालों  का  सुरक्षा की दृष्टि से जवाब दिया जाना संभव नहीं है ,,, सोशल मीडिया , लाइव चैनल बहस ऐसे वक़्त में सिर्फ राष्ट्रवाद के मुद्दे पर ही शुरू रहे ,बाक़ी आरोपों ,प्रत्यारोपों को एक  गाइड लाइन बनाकर ,,प्रतिबंधित करना ज़रूरी हो गया है ,, क्योंकि विश्व सच्चाई जानता है ,,एक दूसरे पर आरोप ,प्रत्यारोप से  कोई भी खुद को दूध का धुला साबित  नहीं कर सकता है  ,देश में जो भी प्रधानमंत्री रहा ,देश के हक़ के  लिए लढा है ,, वोह बात अलग ,,है  , देश के लिए शहीद होने का सम्मान सिर्फ इंद्रा गांधी ,राजिव गाँधी को ही प्राप्त हुआ ,, उन्हें श्रद्धांजलि ,लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहे चीन के प्रधानमंत्री के साथ झूले में झूले हों , चाहे उन्होंने भारतियों को नज़र अंदाज़ कर चीन को लोहपुरुष की मूर्ति बनाने का रोज़गार दिया हो ,,  चाहे ,पाकिस्तान अचानक जाकर मेहमान बन गए हो ,,लेकिन उनकी भारतीयता पर ,, देश  की सीमाओं की सुरक्षा के लिए ,कुछ भी कर गुज़रने के जज़्बे पर प्रश्न उठाना बेवकूफी है ,,कार्यशैली अलग हो सकती है ,,, लेकिन इस संकट की घड़ी में भारत को ,भारत वासियों को हमे तुम्हे  सभी को मिलकर एक साथ चलना होगा ,, प्रधामंत्री महोदय चाहे देश से इस बारे में सलाह मशवरा न करे , चाहे विपक्ष से मशवरा न ,करे लेकिन अपनी ही पार्टी के बुज़ुर्ग लालकृष्ण आडवाणी ,, मुरली मनोहर जोशी जैसे अनुभवी लोगों से सलाह ज़रूर लें ,उनके घर उनसे मिलने जाएँ ,इन  हालातों में उबरने के टिप्स मांगे ,, इंशा अल्लाह कोई  नया मशवरा ज़रूर मिलेगा , लेकिन सो टके की एक बात आरोप , प्रत्यारोप छोडो ,प्रधानमंत्री सभी का साथ ,लें सभी लोग ,सभी पार्टियां इस संकट की घडी में ,प्रधानमंत्री  की आवाज़ बने ,,उनके मददगार ,बने ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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