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31 मई 2020

,,ईमानदार प्रशासक के रूप में राजेश डागा की प्रादेशिक पहचान बनी है

एक सफल प्रशासनिक अधिकारी गरीबों के हक़ का निवाला , कुशल प्रबंधन व्यवस्था के तहत ,, तत्काल गरीबों के हलक़ तक ,पहुंचवाये ,, और ऐसे गरीबों का हक़ हड़प कर छीनने वालों को चिन्हित कर ,उनके हलक़ से बेईमानी का निवाला निकाल कर सरकारी खज़ाने में लाखों लाख रूपये जमा करवाकर सरकारी खज़ाने को भरे , यही कुशल प्रबंधन ,,ईमानदार प्रशासक के रूप में राजेश डागा की प्रादेशिक पहचान बनी है ,, कोटा कनवास के नवनियुक्त उपखण्ड मजिस्ट्रेट राजेश डागा की प्रशासनिक शैली पेंशन ,गरीबों के हक़ ,उनके लिए मनरेगा मज़दूरी कार्यों सहित सभी राहत कार्यों के सफल क्रियान्वयन के लिए ,अनुकरणीय बन गयी है ,,,, जी हाँ दोस्तों ,कर्तव्यनिष्ठा , ईमानदारी ,ज़िम्मेदारी ,सजगता ,सतर्कता ,अनुशासन यही ईमानदार लोकसेवक की नौकरी के नियम है ,,इसीलिए कनवास उप खंड मजिस्ट्रेट राजेश डागा ,, गरीब ,,निर्धन ,मज़दूरों , ज़रूरतमंदों के दिलों पर राज करते ,है जबकि यही राजेश डागा ,भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती ,अनुशासन की पाबंदी , प्रभावशाली शोषक वर्ग के खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही अमल में लाने वाले प्रशासनिक अधिकारी होने से ऐसे लोगों की आँख की किरकिरी भी है , नौकरी में स्वाभिमान ,,सम्मान सिर्फ ईमानदारी ,कर्तव्यनिष्ठा से ही मिल सकता है ,इसीलिये इस फार्मूले को ,राजेश डागा हर हाल में अपने अनुशासन ,नियमित दिनचर्या ,कार्य व्यवहार में अंगीकार , बोल्ड लेकिन ज़रूरतमंदों के लिए गोल्ड प्रशासनिक अधिकारी की छवि रखते है ,,, 17 अप्रेल 1973 को जोधपुर में जन्मे , राजेश डागा पढ़ाई में शुरू से अव्वल थे ,,अपने सिद्धांतों के साथ इनकी ज़िंदगी जीने की शैली इनके बाल सखा , बाल सखियाँ आज भी उदाहरण के रूप में याद रखते है ,,, पढ़ना ,समाज के प्रति ईमानदाराना दायित्व ,खुद के कर्तव्य निर्धारण के प्रति गंभीर ,रहने वाले राजेश डागा दूसरे लोगों को दोषारोपित कर अपनी ज़िम्मेदारियों से कभी विमुख नहीं हुए ,,भूल हुई तो सुधारी है ,ज़िम्मेदारी संभाली है ,,इसीलिए प्रारम्भिक शिक्षा माथनिया से पूर्ण कर इन्होने जोधपुर से , एम ऐ हिस्ट्री की परीक्षा उत्तीर्ण की , ,गेट परीक्षा क्वालीफाई की और बस ,राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में अव्वलीन नम्बरों के साथ पास हो गए ,, प्रशासनिक कार्यव्यवहार प्रशिक्षण कार्यकाल में ,राजेश डागा का ,, ईमानदारी ,पारदर्शिता ,ज़िम्मेदारी ,कर्तव्यनिष्ठा ,अनुशासन ,सजगता ,सतर्क्ता ,प्रशासनिक ज़िम्मेदारी का जो संकल्प ,,जो वीज़न रहा , ,,वोह सम्पूर्ण तरीके से ,,प्रशिक्षण का चाहे हिस्सा न हो , लेकिन इसी वीज़न की सफलता पर ,प्रशिक्षण काल में भी उनका संकल्प रहा है ,,बस यही वजह रही ,चाहे प्रशिक्षित करने वाले शिक्षकों ने इनके कार्यव्यवहार के बारे में कुछ भी धारणा बनाई हो , लेकिन जब इनके प्रशिक्षु प्रशासनिक कार्यकाल में ,इनकी परफॉर्मेंस सामने आयी ,तो सवर्श्रेष्ठ देखकर ,इनके प्रशिक्षक भी इन्हे शाबाशी देने में पीछे नहीं रहे ,, राजेश डागा , हंसमुख ,मृदुल स्वभावी , ज़िम्मेदार ,कर्तव्यनिष्ठ , ईमानदार स्वभाव के तो है , लेकिन यह बेईमान ,लापारवाह , आपराधिक प्रकृति से जुड़े लोगों के लिए इतने ही सख्त भी है ,,इसलिए इनके चेहरे पर अगर मुस्कुराहट ,है तो ऐसे लोगों के लिए सख्ती भी ,है हर पोस्टिंग मे ज़िम्मेदारी निभाने के लिए ,,इनका ज़रूरतमंद लोगों से सीधा जुड़ाव बना रहा ,, ज़रूरतमन्द से किसी तरह की कोई पर्ची देकर बिठाने की दूरी नहीं ,,ज़रूरतमंदों के लिए सामान्य अनुक्रम में हमेशा इनकी उपस्थिति,, इन्हे ऐसे लोगों में लोकप्रिय बनाने के लिए काफी रही है ,,, राजेश डागा का विवाह अजमेर की सुनीता डागा के साथ हुआ जो अब श्रीमती सुनीता डागा है वोह भी कोटा सहित कई ज़िलों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक ज़िम्मेदार पदों पर रही है ,,फिलहाल राजेश डागा की प्रशासनिक शैली की चर्चा हम कर रहे है ,,राजेश डागा अलग अलग ज़िम्मेदार पदों पर नियुक्त रहे ,कोटा में सहायक कलेक्टर , नगर निगम में उप आयुक्त ,,नगर विकास न्यास में उप सचिव सहित कई पदों पर ज़िम्मेदरी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते ,रहे राजेश डागा भावनीमण्डी में उप खण्ड मजिस्ट्रेट के पद पर नियुक्त हुए ,, मुख्यमंत्री वसुंधरा सिंधिया का क्षेत्र होने से यह पोस्टिंग एक अनुशासित ,ईमानदार ,,दर्दमंदों के हमदर्द , ईमानदार अधिकारी के तोर पर उनके लिए चुनौतीपूर्ण थी ,,लेकिन उन्होंने इस ज़िम्मेदारी को एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी के कर्तृव्यनिर्वहण के तहत निष्पक्षता ,निर्भीकता से निभाया ,,सियासी चोचलेबाज़ों से रोज़ की बहस ,रोज़ का विवाद दिन चर्या थी ,लेकिन इन्होने ,अवैध रेती के कारोबारियों ,,अवैध खनन कर्ता , अतिक्रमणकारियों ,, क़ानून तोड़ने वालों ,,गरीबों के हिस्से का अनाज खाने वाले सफेदपोश लखपतियों के खिलाफ अभियान चलाया ,उन्हें बेनक़ाब किया ,,कुछ अपराधीयों को जेल की सींखचों में पहुंचाया, तो करोड़ो करोड़ रूपये की सरकारी ज़मीने मुक्त करवाई ,,अवैध कारोबारियों पर अंकुश लगा ,,,,मज़दूर , गरीब ,किसान , ज़रूरतमंद ,वृद्ध ,दिव्यांगों को बुला बुलाकर उनका हक़ ,उनकी हिस्सेदारी की पेंशन ,उनका अनाज ,,उनका मुफ्त भामाशाह इलाज, व्यवस्थित तरीके से करने का रिकॉर्ड कायम किया , यही वजह रही के , जब इनकी कर्तव्यनिष्ठा के मुक़ाबिल , भवानीमंडी सियासत की केंद्र बिंदु ,प्रथम नागरिक नगर पालिका चेयरमेन सामने आयीं ,इनसे विवाद करने लगीं ,इन पर आरोप लगाने लगीं तो वोह अकेली सिर्फ अकेली ,थीं ,अधिकतम ज़रूरतमंद ,गरीब तबके से जुड़े ईमानदार लोग ,,राजेश डागा के निष्पक्ष प्रशासनिक कार्यवाही के समर्थन में खुल कर खड़े थे ,,राजेश डागा वर्तमान में कनवास उप खंड मजिस्ट्रेट है , इन्होने कोरोना लोकडाउन के वक़्त मार्च के अंतिम सप्ताह में कनवास का पद संभाला , लोकडाउन से कनवास के लोगों का जीवन अस्त व्यस्त ,था कई ,किसान ,,कई मज़दूर फंस गए थे ,तब इन्होने कार्यभार ग्रहण करते ही ऐसे लोगों को अलग अलग गाँवों में चिन्हित किया ,,इनकी ज़रूरतें जानी ,, इन लोगों को कोरोना एड्वाईज़री के बारे में संक्रमण से बचने के तोर तरीके को लेकर मास्क , सेनेटाइजर व्यवस्था संबधित प्रशिक्षण दिया ,,,इनका आवागमन रोका ,राजेश डागा ने ऐसे में इनके लिए दो वक़्त की रोटी का इंतिज़ाम भी ज़िम्मेदारी से करवाया ,, गेंहूं बेक की स्थापना की और देखते ही देखते भामाशाहों ने इस गेंहूं बैंक को मालामाल कर दिया ,जो गरीब ,ज़रूरतमंद ,मज़दूरों के लिए दो वक़्त की रोटी का सहारा बना ,चिकित्सा व्यवस्था ,जांच व्यवस्था के प्रति गंभीर क़दम उठाये ,,लगातार सुबह शाम मॉनीटरिंग ,,किसानों की फसल की ,सुरक्षा फसल की कटाई के लिए व्यवस्थित प्रबंधन तैयार किया और हर बार की तरह, राजेश डागा का कनवास उपखण्ड मजिस्ट्रेट प्रबंधन सफल रहा राजेश डागा ने जहाँ एक तरफ किसी भी गरीब के हक़ का निवाला छीनने नहीं दिया , गैर ज़रूरी तरीके से अगर किसी ने गरीब के हक़ का निवाला छीनने की कोशिश भी की ,तो राजेश डागा ,के सजग सतर्क प्रबंधन के चलते ,इन्होने वोह निवाला हर अमीर के हलक़ से निकाला है ,,राजेश डागा ने सरकार द्वारा गरीबों , ज़रूरतममंदों को दी जाना वाली राशन के गेहूं ,,शक़्कर तेल वगेरा लेने वालों की सूचि का निरीक्षण किया ,भौतिक सत्यापन किया , सैकड़ों ऐसे ,ज़िम्मेदार जिनके बढे बढे ,बंगले , कारें , ट्रेक्टर , पक्के ,मकान सरकारी नौकरियां ,है फिर भी उन्होंने सरकार को धोखा देकर अपना नाम इस गरीबों की सूचि में जुड़वाकर सरकार को चूना लगाने का काम किया ,ऐसे लोगों के नाम ,राजेश डागा ने चिन्हित किये ,उन्हें सार्वजनिक किये ,,अब तक उन्होंने सरकार को धोखा देकर कितना सामान उठाया ,,उस लाखों लाख रूपये की राशि को ,फिर से राजेश डागा के इस सूक्ष्म परीक्षण प्रबंधन के तहत , सरकारी ख़ज़ाने में जमा करवाया गया ,,राजेश डागा की सोच है कोई ज़रूरत मंद , बिना किसी सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न ,रहे लेकिन जिन गैर ज़रूरी लोगों ने अपने ,प्रभाव सियासी व्यवस्थाओं का दुरूपयोग कर ऐसी सूचि में अपने नाम लिखवा लिए है ,उन्हें किसी भी सूरत में बख्शना नहीं चाहिए ,, राजेश डागा , कनवास में कोरोना कंट्रोल प्रबंधन के हीरो ,, कोरोना योद्धा भी साबित हुए है ,उनकी प्रशासनिक निर्भीकता ,निष्क्षता ने ,लोकडाउन के संकट की सख्ती ,पाबंदी ,और सीमित मदद के दौर में भी,, इन्हे कनवास के लोगों में निर्विवाद हीरो बना दिया है ,,लोकप्रिय बना दिया है ,,कहते है नियत अच्छी तो छवि अच्छी , इसीलिए राजेश डागा का प्रबंधन कोटा के कस्बे कनवास में ज़िंदाबाद साबित हुआ है राजेश डागा स्व अनुशासित ,सामाजिक ,पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ भी ,, प्रशासनिक कार्यों की व्यवस्तताओं के साथ , साथ पूरी तरह निबाहते है ,, परिवार के साथ ज़िंदगी एन्जॉय करते ,है परिवार के बुज़ुर्गों का सम्मान करते ,है तो अपने छोटों के साथ चुहलबाज़ी ,हंसी मज़ाक़ करते है ,, लेकिन प्रशानिक कार्यों में फिर से यह , ऑन ड्यूटी ,ज़िम्मेदार अधिकारी हो जाते है ,जबकि पारिवारिक वातावरण में यह एक ऑन ड्यूटी एक आदर्श पति ,आदर्श पिता ,आदर्श भाई ,,आदर्श पुत्र ,आदर्श मित्र भी बनकर खुद को साबित करते है , राजेश ,डागा साहब को सफल प्रबंधन प्रशासन के लिए ,बधाई ,मुबारकबाद ,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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