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18 अप्रैल 2020

और दोनों द्वार की ओर दौड़े और उस स्त्री ने उसका कुर्ता पीछे से फाड़ दिया

21 ﴿ और मिस्र के जिस व्यक्ति ने उसे खरीदा, उसने अपनी पत्नी से कहाः इसे आदर-मान से रखो। संभव है ये हमें लाभ पहुँचाये, अथवा हम इसे अपना पुत्र बना लें। इस प्रकार उसे हमने स्थान दिया और ताकि उसे बातों का अर्थ सिखायें और अल्लाह अपना आदेश पूरा करके रहता है। परन्तु अधिक्तर लोग जानते नहीं हैं।
22 ﴿ और जब वह जवानी को पहुँचा, तो हमने उसे निर्णय करने की शक्ति तथा ज्ञान प्रदान किया और इसी प्रकार हम सदाचारियों को प्रतिफल (बदला) देते हैं।
23 ﴿ और वह जिस स्त्री[1] के घर में था, उसने उसके मन को रिझाया और द्वार बन्द कर लिए और बोलीः “आ जाओ”। उसने कहाः अल्लाह की शरण! वह मेरा स्वामी है। उसने मुझे अच्छा स्थान दिया है। वास्तव में, अत्याचारी सफल नहीं होते।
1. अभिप्रेत मिस्र के राजा (अज़ीज़) की पत्नी है।
24 ﴿ और उस स्त्री ने उसकी इच्छा की और वह (यूसुफ़) भी उसकी इच्छा करते, यदि अपने पालनहार का प्रमाण न देथ लेते[1]। इस प्रकार, हमने (उसे सावधान) किया ताकि उससे बुराई तथा निर्लज्जा को दूर कर दें। वास्तव में, वह हमारे शुध्द भक्तों में था।
1. यूसुफ़ अलैहिस्सलाम कोई फ़रिश्ता नहीं एक मनुष्य थे। इस लिये बुराई का इरादा कर सकते थे, किन्तु उसी समय उन के दिल में यह बात आई कि मैं पाप कर के अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकूँगा। इस प्रकार अल्लाह ने उन्हें बुराई से बचा लिया, जो यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) की बहुत बड़ी प्रधानता है।
25 ﴿ और दोनों द्वार की ओर दौड़े और उस स्त्री ने उसका कुर्ता पीछे से फाड़ दिया और दोनों ने उसके पति को द्वार के पास पाया। उस (स्त्री) ने कहाः जिसने तेरी पत्नी के साथ बुराई का निश्चय किया, उसका दण्ड इसके सिवा क्या है कि उसे बंदी बना दिया जाये अथवा उसे दुःखदायी यातना (दी जाये)?
26 ﴿ उसने कहाः इसीने मुझे रिझाना चाहा था और उस स्त्री के घराने से एक साक्षी ने साक्ष्य दिया कि यदि उसका कुर्ता आगे से फाड़ा गया है, तो वह सच्ची है तथा वह झूठा है।
27 ﴿ और यदि उसका कुर्ता पीछे से फाड़ा गया है, तो वह झूठी और वह (यूसुफ़) सच्चा है।
28 ﴿ फिर जब उस (पति) ने देखा कि उसका कुर्ता पाछे से फाड़ा गया है, तो कहाः वास्तव में, ये तुम स्त्रियों की चालें हैं और तुम्हारी चालें बड़ी घोर होती हैं।
29 ﴿ हे यूसुफ़! तुम इस बात को जाने दो और (हे स्त्री!) तू अपने पाप की क्षमा माँग, वास्तव में, तू पापियों में से है।
30 ﴿ नगर की कुछ स्त्रियों ने कहाः अज़ीज़ (प्रमुख अधिकारी) की पत्नी, अपने दास को रिझा रही है! उसे प्रेम ने मुग्ध कर दिया है। हमारे विचार में वह खुली गुमराही में है।

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