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04 जनवरी 2020

आखिर वही हुआ ,,,निजी चिकित्सालयों की मार्केटिंग ,उनकी आमदनी को बढ़ाने की जो कार्ययोजना थी वोह कामयाब हुई

आखिर वही हुआ ,,,निजी चिकित्सालयों की मार्केटिंग ,उनकी आमदनी को बढ़ाने की जो कार्ययोजना थी वोह कामयाब हुई ,और अब सभी निजी चिकित्सालय ,बच्चों के मरीज़ों से भरे पढ़े है ,वहां विश्वास है ,भरोसा है ,लेकिन आखरी लम्हे में ,जब लाइलाज हो जाये तो फिर ,रेफर सरकारी अस्पताल में ,और वहां के हालत ,तस्वीर कशी ,उपकरणों ,,मशीनों ,स्टाफ की लापरवही के पिछले पांच साल और लगातार प्रयासों के बाद भी वर्तमान हालात संतोषप्रद नहीं है ,,बढ़ी समस्या है ,,देश का आने वाला कल ,वक़्त से पहले इलाज के अभाव में ,कुप्रबन्धों के चलते मर रहा है ,लकिन देश के इन आने वाले कल के बच्चों को बचाने के लिए कोई , केंद्र ,राज्य सरकारों की समन्व विशेषज्ञ समिति बनाकर तत्काल राहत नहीं दे सका है ,,,सिर्फ गुस्सा ,सिर्फ सियासत ,सिर्फ आरोप ,प्रत्यारोप ,डांट ,डपट सियासत ,और एक रिपोर्टिंग में समलोचना नहीं ,सुझाव नहीं ,निर्भीकता ,निष्पक्षता नहीं ,बच्चे कोन है ,किसके है ,,,,किस बीमारी से कहा से किस चिकित्स्क ने रेफर कर भेजे ,कोई खास हवाला नहीं ,,विशेषज्ञ सुझाव नहीं, लेकिन हर बार सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओ में अभाव ,,कुपबंध का ढिंढोरा पिटता है ,और जब ,,अशोक गहलोत की सरकार ,भारत देश की पहली ऐसी सरकार जहां ,बाहर के आउट डोर मरीज़ों को भी उनके इलाज के लिए ,पात्रता के हिसाब से ,मुफ्त चिकित्सा ,दवा मिल रही है ,,तो फिर अशोक गहलोत की सरकार को टारगेट पारा लेने के लिए इसे मुद्दा बनाना ,,भयानक कार्ययोजना है , बच्चों की मोत हो ,मरीज़ की मोत हो सब आहत है , लेकिन जब अब जब बात इतनी गंभीर है ,के देश के ग्रह मंत्री ,,कोटा लोकसभा अध्यक्ष के कार्यक्षेत्र में इस तरह की लापरवाही को मुद्दा बना रहे है ,,,तो फिर उन्हें ,पुरे छह सालों की कोटा जे के लोन अव्यवस्थाओं ,,सुझावों ,मांगे गए बजट ,बजट नहीं देने के कारण ,उपकरण सुधार ,सप्लाई ,,ऑक्सीजन योजना ,दवाये ,विशेषग्यता ,सहित सभी मुद्दों की सी बी आई जांच कराना ही चाहिए और जो भी पूर्व मंत्री ,,अधिकारी ,चिकित्स्क ,वर्तमान चिकित्स्क वगेरा इस मामले में लापरवाही ,भ्रष्टाचार ,कृत्रिम रूप से सरकारी उपकरणों को खराब कर ,, मररम्मत नहीं कराने वाले निजी अस्पतालों में मरीज़ो को भेजने की मार्केटिंग करने वाले चिकित्स्कों ,अधिकारीयों को गिरफ्तार किया जाए ,,जो इस अव्यवस्था के लिए पिछले छह सालों से प्रथम कुव्यवस्था ज़िम्मेदार है ,वोह चाहिए मुख्यमंत्री हो ,मंत्री हो ,मुख्यसचिव हो जो भी हो उनके खिलाफ देश को सबक़ सिखाने वाली कार्यवाही होना चाहिए ,लेकिन ऐसा होगा नहीं ,,ऐसी अखबारी खबरे नहीं बनेंगी ,सोशल मीडिया पर मेरे इन सुझावों का अनर्गल विरोध होगा ,,इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इस मामले में कोई लाइव चर्चा ,,कोई टार्गेटिव रिपोर्टिंग कार्यक्रम नहीं चलाएगा ,, क्योंकि कोटा के निजी अस्पतालों का जो ,इस कुव्यवस्था मार्केटिंग से जो फायदा होना था वोह तो कम से कम छह महिने के लिए करोडो करोड़ की कमाई पक्की हो गयी ,,यह तो बात हमारे ,आपके ,रिपोर्टिंग के पूर्व सरकारों के वर्तमान सरकार के एक साला अधिकारीयों चिकित्स्कों की लापरवाही की हुई , लेकिन अब हमे ,वर्तमान हालातों ,उनमे सुधार के बारे में चर्चा नहीं काम भी करना चाहिए ,,ज़रा सोचिये तो सही ,एक गर्भवती माँ ,ठिठुरती ठंड में ,गाँव ,, कस्बे ,या किसी दूरदराज़ इलाक़े से ,,प्रसव पीड़ा लेकर स्वीकृत रुप से ,37 डिग्री सेल्सियस गर्भधारक बच्चे के तापमान में लेकर आती है और प्रसव के बाद बच्चा सिर्फ दो डिग्री ,तीन डिग्री सेल्सियस तापमान में रह जाता है ,उपकरण खराब ,,इलाज की नयी तकनिक विशेषज्ञ व्यवस्था नहीं ,,मेडिकल प्रबंधन नहीं ,खिड़कियां दरवाज़े टूटे हुए ,ठंडी हवाएं बह रही है ,कंबल नहीं बिस्तर नहीं ,,दवाये नहीं ,जांच मशीने नहीं ,स्टाफ ठेके का ,डॉक्टरों में आपस में तकरार ,मनमुटाव ,कोई समन्वय नहीं ,ऐसे में इन हादसों को कैसे रोका जा ,सकेगा इस पर भविष्य का जवाब देही एक्शन प्लान बनना चाहिए ,कितना बजट होगा ,,बजट कहाँ से आएगा ,यह व्यवस्थाएं होना चाहिए ,,सभी उपकरण ठीक हो ,मल्टीस्पेश्यलिटी सुविधाएं बढे ,विशेषज्ञ स्टाफ ,चिकित्सक लगाए जाए ,,कलेक्टर खासकर कोटा कलेक्टर ओम कसेरा जो ,चेंबर से बाहर निकल कर , हालातों का जायज़ा लेकर सुधारने में माहिर है ,उनके प्रंबधन में विशेषज्ञ निगरानी कमेटी बनाई जाए जो जवाबदार भी हो ,ज़िम्मेदार भी हो ,संवेदनशील भी हो ,तत्काल जिसे अतिरिक्त बजट स्वीकृत करवाकर ,,आवश्यक कार्यवाही करने की छूट भी हो ,मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ,की निरोगी काया ,,बाहरी रोगियों को भी मुफ्त दवा वितरण ,,इलाज व्यवस्था से वोह देश में ही नहीं पुरे विश्व में वाह वाही लूटते रहे है , बस इनकी क़मीज़ मेरी क़मीज़ से सफेद कैसे ?? ,इसी गुस्से में यह गुमराही वाले एक्शन प्लान शुरू हुए ,जो होना था जो हो गया अब व्यवस्थाएं होना चाहिए ,सुखद होना चाहिए , अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार गांधीवादी सरकार तो है ,लेकिन जब बात भ्रष्टाचार ,कुप्रंबध की आती है तो यही सरकार ,,भगत सिंह , चंद्रशेखर आज़ाद भी बनकर उन्हें सबक़ सिखाती ,है इसलिए ,,,इलाज में ,मुफ्त इलाज में व्यवस्थाओं को समर्पण में गांधीगिरी ,,और व्यस्थाओं को बिगाड़ने ,वाली भ्रष्ट चिकित्सक प्रबंधकों के खिलाफ ,,दादागिरी ,के साथ भगत सिंह ,चंद्रशेखर आज़ाद बनना ही होगा ,,,उन्हें सबक़ सिखाना ही होगा ,एक चेलेंज जो अधिकतम ,दो माह के अंतराल का हो ,,और यही मीडिया ,यही लोग ,इस कोटा जे के लोन अस्पताल की ,,मल्टीस्पेशलिटी सेवा के प्रशंसक बन जाए ,,,फिर इन वव्यस्थाओं को और बेहतर से बेहतर बनाने के लिए निगरानी हो ,सफल प्रबंधन हों ,,,यही इन छह सालों की लापरवाही ,गुस्ताखियों का प्रायश्चित होगा ,,,,, अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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