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14 जनवरी 2020

स्वच्छ भूमि अपनी उपज अल्लाह की अनुमति से भरपूर देती है

51 ﴿ (उसका निर्णय है कि) जिन्होंने अपने धर्म को तमाशा और खेल बना लिया था तथा जिन्हें सांसारिक जीवन ने धोखे में डाल रखा था, तो आज हम उन्हें ऐसे ही भुला देंगे, जिस प्रकार उन्होंने आज के दिन के आने को भुला दिया था[1] और इसलिए भी कि वे हमारी आयतों का इन्कार करते रहे।
1. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहाःप्रलय के दिन अल्लाह ऐसे बंदों से कहेगाः क्या मैं ने तुम्हें बीवी-बच्चे नहीं दिये, आदर-मान नहीं दिया? क्या ऊँट-घोड़े तेरे अधीन नहीं किये, क्या तू मुख्या बन कर चुंगी नहीं लेता था? वह कहेगाः हे अल्लाह, सब सह़ीह़ है। अल्लाह प्रश्न करेगाः क्या मुझ से मिलने की आशा रखता था? वह कहेगाः नहीं। अल्लाह कहेगाः जैसे तू मुझे भूला रहा, आज मैं तुझे भूल जाता हूँ। (सह़ीह़ मुस्लिमः2968)
52 ﴿ जबकि हमने उनके लिए एक ऐसी पुस्तक दी, जिसे हमने ज्ञान के आधार पर सविस्तार वर्णित कर दिया है, जो मार्गदर्शन तथा दया है, उन लोगों के लिए, जो ईमान (विश्वास) रखते हैं।
53 ﴿ (फिर) क्या वे इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं कि इसका परिणाम सामने आ जाये? जिस दिन इसका परिणाम आ जायेगा, तो वही, जो इससे पहले इसे भूले हुए थे, कहेंगे कि हमारे पालनहार के रसूल सच लेकर आए थे, (परन्तु हमने नहीं माना) तो क्या हमारे लिए कोई अनुशंसक (सिफ़ारिशी) है, जो हमारी अनुशंसा (सिफ़ारिश) करे? अथवा हम संसार में फेर दिए जायेँ, तो जो कर्म हम करते रहे, उनके विपरीत कर्म करेंगे! उनहोंने स्वयं को छति में डाल दिया तथा उनसे जो मिथ्या बातें बना रहे थे खो गईं।
54 ﴿ तुम्हारा पालनहार वही अल्लाह है, जिसने आकाशों तथा धरती को छः दिनों में बनाया[1], फिर अर्श (सिंहासन) पर स्थित हो गया। वह रात्रि से दिन को ढक देता है, दिन उसके पीछे दौड़ता हुआ आ जाता है, सूर्य तथा चाँद और तारे उसकी आज्ञा के अधीन हैं। सुन लो! वही उत्पत्तिकार है और वही शासक[2] है। वही अल्लाह अति शुभ संसार का पालनहार है।
1. यह छः दिन शनिवार, रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार हैं। पहले दो दिन में धरती को, फिर आकाश को बनाया, फिर आकाश को दो दिन में बराबर किया, फिर धरती को फैलाया और उस में पर्वत, पानी और उपज की व्यवस्था दो दिन में की। इस प्रकार यह कुल छः दिन हुये। (देखियेः सूरह सज्दह, आयतः9-10) 2. अर्थात इस विश्व की व्यवस्था का अधिकार उस के सिवा किसी को नहीं है।
55 ﴿ तुम अपने (उसी) पालनहर को रोते हुए तथा धीरे धीरे पुकारो। निःसंदेह वह सीमा पार करने वालों से प्रेम नहीं करता।
56 ﴿ तथा धरती में उसके सुधार के पश्चात्[1] उपद्रव न करो और उसीसे डरते हुए तथा आशा रखते हुए[2] प्रार्थना करो। वास्तव में, अल्लाह की दया सदाचारियों के समीप है।
1. अर्थात सत्धर्म और रसूलों द्वारा सुधार किये जाने के पश्चात। 2. अर्थात पापाचार से डरते और उस की दया की आशा रखते हुये।
57 ﴿ और वही है, जो अपनी दया (वर्षा) से पहले वायुओं को (वर्षा) की शुभ सूचना देने के लिए भेजता है और जब वे भारी बादलों को लिए उड़ती हैं, तो हम उसे किसी निर्जीव धरती को (जीवित) करने के लिए पहुँचा देते हैं, फिर उससे जल वर्षा कर, उसके द्वारा प्रत्येक प्रकार के फल उपजा देते हैं। इसी प्रकार, हम मुर्दों को जीवित करते हैं, ताकि तुम शिक्षा ग्रहण कर सको।
58 ﴿ और स्वच्छ भूमि अपनी उपज अल्लाह की अनुमति से भरपूर देती है तथा खराब भूमि की उपज थोड़ी ही होती है। इसी प्रकार, हम अपनी[1] आयतें (निशानियाँ) उनके लिए दुहराते हैं, जो शुक्र अदा करते हैं।
1. नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहाः मुझे अल्लाह ने जिस मार्गदर्शन और ज्ञान के साथ भेजा है, वह उस वर्षा के समान है, जो किसी भूमि में हुई। तो उस का कुछ भाग अच्छा था जिस ने पानी लिया और उस से बहुत सी घास और चारा उगाया। और कुछ कड़ा था जिस ने पानी रोक लिया तो लोगों को लाभ हुआ और उस से पिया और सींचा। और कुछ चिकना था, जिस ने न पानी रोका न घास उपजाई। तो यही उस की दशा है जिस ने अल्लाह के धर्म को समझा और उसे सीखा तथा सिखाया। और उस की जिस ने उस पर ध्यान ही नहीं दिया और न अल्लाह के मार्गदर्शन को स्वीकार किया, जिस के साथ मुधे भेजा गया है। (सह़ीह़ बुख़ारीः79)
59 ﴿ हमने नूह़[1] को उसकी जाति की ओर (अपना संदेश पहुँचाने के लिए) भेजा था, तो उसने कहाः हे मेरी जाति के लोगो! (केवल) अल्लाह की इबादत (वंदना) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।
1. बताया जाता है कि नूह़ अलैहिस्सलाम प्रथम मनु आदम (अलैहिस्स्लाम) के दसवें वंश में थे। उन के कुछ पहले तक लोग इस्लाम पर चले आ रहे थे। फिर अपने धर्म से फिर गये अपने पुनीत पूर्वजों की मुर्तियाँ बना कर पूजने लगे। तब अल्लाह ने नूह़ को भेजा। किन्तु कुछ के सिवा किसी ने उन की बात नहीं मानी। अन्ततः सब डुबो दिये गये। फिर नूह़ के तीन पुत्रों से मानव वंश चला। इसी लिये उन को दूसरा आदम भी कहा जाता है। (देखियेः सूरह नूह़, आयतः71)
60 ﴿ उसकी जाति के प्रमुखों ने कहाः हमें लगता है कि तुम खुले कुपथ में पड़ गये हो।

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