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17 नवंबर 2019

एक अर्जुन , जो देव भी है ,,एक अर्जुन जिस का मछली की आँख का लक्ष्य ,सिर्फ ,सिर्फ मानव सेवा ,समाजसेवा ही है

एक अर्जुन , जो देव भी है ,,एक अर्जुन जिस का मछली की आँख का लक्ष्य ,सिर्फ ,सिर्फ मानव सेवा ,समाजसेवा ही है ,, आर्य समाज विचारधारा ,,इस अर्जुन की सारथी है ,शायद यही वजह है ,के उम्र के सात से भी अधिक दशक के बावजूद भी इनके इरादों में बुलंदी ,,इनकी सेवा में निष्पक्षता , क़लम में मोहब्बत ,विचारों में ईमानदाराना क़ौमी एकता का फलसफा और ,,एक आदर्श भारत ,समस्या मुक्त भारत ,बीमारी मुक्त भारत बनाने के सपने का जूनून है ,, जी हाँ दोस्तों ,,में बात कर रहा हूँ ,,एक नौ जवान से भी ज़्यादा नो जवान का होहशला रखने वाले मेरे भाई ,,अर्जुन देव चड्ढा की , जो साहित्यकारों में साहित्यकार ,पत्रकारों में पत्रकार ,खिदमत गारों में खिदमतगार ,,मज़दूरों में मज़दूर नेता ,बच्चों में चॉकलेट वाले अंकल ,और एड्स जागरूक अभियान में सफेद गुब्बारे वाले बाबा ,,आर्य समाजियों में एक चिंतक ,विचारक की पहचान रखते है ,, समस्या कोई भी हो ,उसके निराकरण के प्रयासों में अर्जुन देव चड्डा अपनी टीम के साथ एक योद्धा के रूप में खड़े नज़र आते है ,, डी सी एम ,आज दूसरी फैक्ट्रियों की प्रतियोगी हालातों के बावजूद भी , अगर बंद होने से बची है अगर ,,इस डी सी एम की चिमनिया उत्पादन उगल रही है ,इस उद्योग में आज कोटा के लिए रोज़गार चल रहा है ,, तो फैक्ट्री प्रबंधन के साथ साथ ,इसका श्रेय भाई ,,अर्जुन देव चड्डा के सकरात्मक मज़दूर नेतृत्व ,को भी जाता है ,फैक्ट्री में उत्पादन मुनाफा का संतुलन देखकर अपने मज़दूर साथियों के हको के लिए संघर्ष करते हुए सिर्फ बातचीत के ज़रिये उन्हें हक़ दिलवाने का अगर कोई विश्वव्यापी उदाहरण है तो वोह सिर्फ और सिर्फ अर्जुन देव चड्डा की नेतृत्व को ही है ,,अर्जुन देव चड्ढा ,,डी सी एम में कार्यकर्त रहकर कई वर्षों तक मज़दूरों के लीडर रहे ,प्रबंधकों से कभी विवाद हुआ ,तो कभी याराना ,लेकिन सिर्फ मज़दूर हित में उद्योग संचालन हित में ,दूसरे उद्योगों से अधिक इनके नेतृत्व में ,वक़्त से पहले बिना किसी विवाद ,आंदोलन के ,इनका श्रमिक नेतृत्व प्रबंधन ही था जो मज़दूरों को वेतन ,बोनस ,सुरक्षा सहित दूसरे हक़ मिलते रहे ,,थोड़ा बहुत विवाद होने पर बिना किसी संघर्ष के टेबल टोक करके विवादों का निस्तारण हुआ ,एक विचार जिस उद्योग में हम है ,अगर वही नहीं रहेगा तो हम कहाँ रहेंगे ,इसीलिए एक मज़दूर ,एक श्रमिक ,एक कर्मचारी की तरह नहीं ,,एक शेयर होल्डर की तरह ,,उद्योग में काम करने की सलाह अपने साथियों को इनके नेतृत्व में रही ,यही वजह है ,के विकट हालातों के बावजूद भी आज यह उद्योग कोटा में बेहतरीन उत्पादन और रोज़गार के साथ चिमिनियों से धुँआ उगल रहा है ,,मज़दूर नेतृत्व तो इनका एक अनुकरणीय करिश्मा ही है , लेकिन जब आम लोगों की खून की कमी से मोत होने लगी ,,थेलिसिमिया खून की कमी से पीड़ित लोग लाचार हो गये ,तब अर्जुन देव चड्ढा ने ,मज़दूर साथियों ,आम लोगों में ,रक्तदान महादान का सन्देश दिया ,इनकी प्रेरणा से अनेक स्थानों पर रक्तदाताओं के समूह बनाये गए ,,नशे के खिलाफ अभियान में नशामुक्ति शिविर ,नशे के खिलाफ ,सामजिक जागृति अभियान ,,आर्यसमाज के माध्यम से वेदों का प्रचार ,, एड्स जैसी महामारी के खिलाफ ,,सेक्सवर्कर महिलाओं के बीच जाकर ,,उन्हें सुरक्षात्मक सेक्स के लिए ,निरोध देने का अभियान एक चेलेंज था ,लेकिन अर्जुन देव चड्डा अपनी टीम के साथ उनके पास भी गए ,खरो खोटी सुनी ,खुश खरी खोटी सुनाई ,,एड्स की बीमारी की गंभीरता को समझाया और बस निरोध बांटने से यह गुब्बारे वाले बाबा के नाम से भी मशहूर हुए ,,बच्चों में बच्चे ,जवानों में जवान ,बूढ़ों में बूढ़े ,,इनके लचीलेपन विचार का हुनर है ,,,अर्जुन देव चड्डा मुस्कुराते चेहरे के साथ अपने मोहल्ले ,के आसपास के बच्चों के चेहरे पर मुस्कुराहट बिखेरने के लिए ,,उन्हें चॉकलेट देना ,,उपहार स्वरूप खिलोने देना ,,रंगीन गुब्बारे देकर उन्हें बहलाना इनका शोक रहा ,और अर्जुन देव चड्डा ,बच्चो के चेहरे की मस्कुराहट के सुपर हीरो होने से इनकी अपनी बस्ती सहित आसपास की बस्तियों के हीरो भी बन गए ,बीमारों के इलाज के लिए चिकित्सा शिविर लगवाना , नेत्र चिक्तिसा शिविर ,मुफ्त आँखों के ऑपरेशन ,,मुफ्त दवा वितरण ,,गरीबों में कपड़े वितरण ,प्राकृतिक आपदा बाढ़ वगेरा आपत्ति के समय घर घर जाकर ज़रूरी सामान ,बिस्तर ,बर्तन ,खाने पीने की सामग्री , पहनने के कपड़ों सहित राहत कार्य करना इनका शोक रहा है , वर्तमान हालातों में ऐ डी चड्डा ,सिंगल यूज़ प्लास्टिक को ना के नारे को बुलंद कर ,घर घर ,बस्तियों बस्तियों ,गाँव गाँव जाकर कपड़ों के थेले का वितरण कर ,,प्लास्टिक की जगह ,कपड़े के थेले के इस्तेमाल के लिए प्रेरणा दे रहे है ,,इसके लिए अर्जुन देव चड्डा कभी हाट बाज़ारों में , कभी शहर के बाज़ारों में अभियान चला रहे है ,, अर्जुन देव चड्डा आर्य समाज की वैदिक श्रखला साक्षरता अभियान में भी शामिल है , वोह दक्षिणी अफ्रीका के डरबन ,,होलेंड की यात्राओं के दौरान एड्स जागरूकता कार्यक्रमों सहित कई समाजसेवी कार्यक्रमों के हीरो रह चुके ,है ,अर्जुन देव चड्डा इनके उतर्कष्ठ कार्यों के लिए कई बार जिला प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं से ज़िले ,राज्य ,राष्ट्रिय ,अंतरराष्ठ्रीय स्तर पर सम्मानित हो चुके है ,इसकी फहरिस्त इतनी लम्बी है के गिनाना मुश्किल है ,, मुस्कुराना , आल इस वेल , का नारा बुलंद करना ,,निराश्रितों को आश्रय दिलवाने के प्रयास ,बच्चों को खेल खेल में पढ़ाई की प्रेरणा ,बीमारों की मुफ्त इलाज ,नशेबाजों को नशे से इंकार ,पीड़ित मरीज़ ,रक्त के लिए ज़रूरतमंद को तुरंत रक्त सेवा उपलब्ध कराना ,विकट परिस्थतियों में भी इनकी ज़िम्मेदारी है भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम ,पत्रकारों ,लेखकों में नैतिकता का संदेश ,वृक्षारोपण ,जल संरक्षण ,पर्यावरण संरक्षण ,आर्यसमाज के च्वजवाहक होना गंभीर महामारी ,बिमारियों की रोकथाम के लिए काढ़ा पिलाना इनके अनुकरणीय कार्य है ,,यह पंजाबी समाज के ,समाज रत्न है ,तो आर्यसमाज के सर्वोच्च विचारक प्रचारक है ,,,,अर्जुन देव चड्डा गंभीर बीमारियों से भी पीड़ित रहे ,अनेकों ऑपरेशन हुए ,लेकिन हर बार लाखों लोगों की दुआए ,पूजा ,अर्चना ,नमाज़ ,वाहेगुरु खालसा का आशीर्वाद ,जीसस के गिफ्ट ने इन्हे हर बीमारी से लढ़ने और उस बीमारी को जड़ से हराने की ताक़त दी है ,, अर्जुन देव चड्डा ने इनके अपने परिवार से रक्तदान ,महादान का नारा शुरू किया ,तो परिजनों के दिवंगत होने पर नेत्रदान ,महादान करवाकर नेत्रदान ,महादान की प्रेरणा लोगों तक पहुंचाई ,,,अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

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