आपका-अख्तर खान

हमें चाहने वाले मित्र

30 सितंबर 2019

जो ये कहते हैं कि हमारे पालनहार! हमें संसार में भलाई दे

201 ﴿ तथा उनमें से कुछ ऐसे हैं, जो ये कहते हैं कि हमारे पालनहार! हमें संसार में भलाई दे तथा परलोक में भी भलाई दे और हमें नरक की यातना से सुरक्षित रख।
202 ﴿ इन्हीं को इनकी कमाई के कारण भाग मिलेगा और अल्लाह शीघ्र ह़िसाब चुकाने बाला है।
203 ﴿ तथा इन गिनती[1] के कुछ दिनों में अल्लाह को स्मरण (याद) करो, फिर जो व्यक्ति शीघ्रता से दो ही दिन में (मिना से) चल[2] दे, उसपर कोई दोष नहीं और जो विलम्ब[3] करे, उसपर भी कोई दोष नहीं, उस व्यक्ति के लिए जो अल्लाह से डरा तथा तुम अल्लाह से डरते रहो और ये समझ लो कि तुम उसी के पास प्रलय के दिन एकत्र किए जाओगो।
1. गिनती के कुछ दिनों से अभिप्रेत ज़ुलह़िज्जा मास की 11, 12, और 13 तारीख़ें हैं। जिन को “अय्यामे तश्रीक़” कहा जाता है। 2. अर्थात 12 ज़ुलह़िज्जा को ही सूर्यास्त के पहले कंकरी मारने के पश्चात् चल दे। 3. बिलम्ब करे, अर्थात मिना में रात बिताये। और तेरह ज़ुलह़िज्जह को कंकरी मारे, फिर मिना से निकल जाये।
204 ﴿ (हे नबी!) लोगों[1] में ऐसा व्यक्ति भी है, जिसकी बात आपको सांसारिक विषय में भाती है तथा जो कुछ उसके दिल में है, वह उसपर अल्लाह को साक्षी बनाता है, जबकि बह बड़ा झगड़ालू है।
1. अर्थात मुनाफ़िक़ों (दुविधवादियों) में।
205 ﴿ तथा जब वह आपके पास से जाता है, तो धरती में उपद्रव मचाने का प्रयास करता है और खेती तथा पशुओं का विनाश करता है और अल्लाह उपद्रव से प्रेम नहीं करता।
206 ﴿ तथा जब उससे कहा जाता है कि अल्लाह से डर, तो अभिमान उसे पाप पर उभार देता है। अतः उसके (दण्ड) के लिए नरक काफ़ी है और वह बहुत बुरा बिछौना है।
207 ﴿ तथा लोगों में ऐसा व्यक्ति भी है, जो अल्लाह की प्रसन्नता की खोज में अपना प्राण बेच[1] देता है और अल्लाह अपने भक्तों के लिए अति करुणामय है।
1. अर्थात उस की राह में और उस की आज्ञा के अनुपालन द्वारा।
208 ﴿ हे ईमान वालो! तुम सर्वथा इस्लाम में प्रवेश[1] कर जाओ और शैतान की राहों पर मत चलो, निश्चय वह तुम्हारा खुला शत्रु है।
1. अर्थात इस्लाम के पूरे संविधान का अनुपालन करो।
209 ﴿ फिर यदि तुम खुले तर्कों (दलीलों)[1] के आने के पश्चात विचलित हो गये, तो जान लो कि अल्लाह प्रभुत्वशाली तथा तत्वज्ञ[2] है।
1. खुले तर्कों से अभिप्राय क़ुर्आन और सुन्नत है। 2. अर्थात तथ्य को जानता और प्रत्येक वस्तु को उस के उचित स्थान पर रखता है।
210 ﴿ क्या (इन खुले तर्कों के आ जाने के पश्चात्) वे इसकी प्रतीक्षा कर रहे हैं कि उनके समक्ष अल्लाह तथा फ़रिश्ते बादलों के छत्र में आ जायें और निर्णय ही कर दिया जाये? और सभी विषय अल्लाह ही की ओर फेरे[1] जायेंगे।
1. अर्थात सब निर्णय प्रलोक में वही करेगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

दोस्तों, कुछ गिले-शिकवे और कुछ सुझाव भी देते जाओ. जनाब! मेरा यह ब्लॉग आप सभी भाईयों का अपना ब्लॉग है. इसमें आपका स्वागत है. इसकी गलतियों (दोषों व कमियों) को सुधारने के लिए मेहरबानी करके मुझे सुझाव दें. मैं आपका आभारी रहूँगा. अख्तर खान "अकेला" कोटा(राजस्थान)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...