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14 मार्च 2019

ख़ुदा के सिवा तुम्हारा न कोई दोस्त है और न मददगार

और तुम लोग ज़मीन में (रह कर) तो ख़ुदा को किसी तरह हरा नहीं सकते और ख़ुदा के सिवा तुम्हारा न कोई दोस्त है और न मददगार (31)
और उसी की (क़़ुदरत) की निशानियों में से समन्दर में (चलने वाले) (बादबानी जहाज़) है जो गोया पहाड़ हैं (32)
अगर ख़ुदा चाहे तो हवा को ठहरा दे तो जहाज़ भी समन्दर की सतह पर (खड़े के खड़े) रह जाएँ बेशक तमाम सब्र और शुक्र करने वालों के वास्ते इन बातों में (ख़ुदा की क़़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं (33)
(या वह चाहे तो) उनको उनके आमाल (बद) के सबब तबाह कर दे (34)
और वह बहुत कुछ माफ़ करता है और जो लोग हमारी निशानियों में (ख़्वाहमाख़्वाह) झगड़ा करते हैं वह अच्छी तरह समझ लें कि उनको किसी तरह (अज़ाब से) छुटकारा नहीं (35)
(लोगों) तुमको जो कुछ (माल) दिया गया है वह दुनिया की जि़न्दगी का (चन्द रोज़) साज़ोसामान है और जो कुछ ख़ुदा के यहाँ है वह कहीं बेहतर और पायदार है (मगर ये) ख़ास उन ही लोगों के लिए है जो ईमान लाए और अपने परवरदिगार पर भरोसा रखते हैं (36)
और जो लोग बड़े बड़े गुनाहों और बेहयाई की बातों से बचे रहते हैं और ग़ुस्सा आ जाता है तो माफ़ कर देते हैं (37)
और जो अपने परवरदिगार का हुक्म मानते हैं और नमाज़ पढ़ते हैं और उनके कुल काम आपस के मशवरे से होते हैं और जो कुछ हमने उन्हें अता किया है उसमें से (राहे ख़ुदा में) ख़र्च करते हैं (38)
और (वह ऐसे हैं) कि जब उन पर किसी किस्म की ज़्यादती की जाती है तो बस वाजिबी बदला ले लेते हैं (39)
और बुराई का बदला तो वैसी ही बुराई है उस पर भी जो शख़्स माफ़ कर दे और (मामले की) इसलाह कर दें तो इसका सवाब ख़ुदा के जि़म्मे है बेशक वह ज़ुल्म करने वालों को पसन्द नहीं करता (40)

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