(ऐ रसूल उन पैग़म्बरों के साथ झगड़ने वाले) गिरोहों में से यहाँ तुम्हारे मुक़ाबले में भी एक लशकर है जो शिकस्त खाएगा (11)
उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और फिरऔन मेंख़ों वाला (12)
और समूद और लूत की क़ौम और जंगल के रहने वाले (क़ौम शुऐब ये सब पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं यही वह गिरोह है (13)
(जो शिकस्त खा चुके) सब ही ने तो पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा अज़ाब ठीक आ नाजि़ल हुआ (14)
और ये (काफिर) लोग बस एक चिंघाड़ (सूर के मुन्तजि़र हैं जो फिर उन्हें) चश्में ज़दन की मोहलत न देगी (15)
और ये लोग (मज़ाक से) कहते हैं कि परवरदिगार हिसाब के दिन (क़यामत के) क़ब्ल ही (जो) हमारी कि़स्मत को लिखा (हो) हमें जल्दी दे दे (16)
(ऐ रसूल) जैसी जैसी बातें ये लोग करते हैं उन पर सब्र करो और हमारे बन्दे दाऊद को याद करो जो बड़े कू़वत वाले थे (17)
बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े रूजू करने वाले थे हमने पहाड़ों को भी ताबेदार बना दिया था कि उनके साथ सुबह और शाम (खु़दा की) तस्बीह करते थे (18)
और परिन्दे भी (यादे खु़दा के वक़्त सिमट) आते और उनके फरमाबरदार थे (19)
और हमने उनकी सल्तनत को मज़बूत कर दिया और हमने उनको हिकमत और बहस के फैसले की कू़वत अता फरमायी थी (20)
उनसे पहले नूह की क़ौम और आद और फिरऔन मेंख़ों वाला (12)
और समूद और लूत की क़ौम और जंगल के रहने वाले (क़ौम शुऐब ये सब पैग़म्बरों को) झुठला चुकी हैं यही वह गिरोह है (13)
(जो शिकस्त खा चुके) सब ही ने तो पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा अज़ाब ठीक आ नाजि़ल हुआ (14)
और ये (काफिर) लोग बस एक चिंघाड़ (सूर के मुन्तजि़र हैं जो फिर उन्हें) चश्में ज़दन की मोहलत न देगी (15)
और ये लोग (मज़ाक से) कहते हैं कि परवरदिगार हिसाब के दिन (क़यामत के) क़ब्ल ही (जो) हमारी कि़स्मत को लिखा (हो) हमें जल्दी दे दे (16)
(ऐ रसूल) जैसी जैसी बातें ये लोग करते हैं उन पर सब्र करो और हमारे बन्दे दाऊद को याद करो जो बड़े कू़वत वाले थे (17)
बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े रूजू करने वाले थे हमने पहाड़ों को भी ताबेदार बना दिया था कि उनके साथ सुबह और शाम (खु़दा की) तस्बीह करते थे (18)
और परिन्दे भी (यादे खु़दा के वक़्त सिमट) आते और उनके फरमाबरदार थे (19)
और हमने उनकी सल्तनत को मज़बूत कर दिया और हमने उनको हिकमत और बहस के फैसले की कू़वत अता फरमायी थी (20)

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